श्री कृष्ण और श्री राम जी में क्या अंतर है ? Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
डॉक्टर अमित राय जैन जी जी राधे राधे राधे महाराज जी महाराज जी मैं एक लेखक हूं मैंने अभी फिलहाल ही भगवान राम जी की जन्मभूमि अयोध्या पर एक पुस्तक लिखी आगे मुझे भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि पर किताब लिखनी है आप श्री राम जी एवं श्री कृष्ण का दार्शनिक अंतर स्पष्ट कर सकते हैं कोई अंतर नहीं है फिल्म तो आप देखते हैं एक अभिनय करता विविध फिल्मों में विविध स्वांग करता है अभिनय करता है पहचानने वाला कभी संशय नहीं रखता है रखता है क्या देखो व एक बहुत बड़े जो नेगेटिव रोल करते हैं उनको क्या कहते विलन अब वो हर फिल्म में नकारात्मक रोल करते हैं और कई में सकारात्मक किया तो वो सकारात्मक करे या नकारात्मक करे पहचानने वाला क्या कहता है लेके ला हां प्रभु कभी रुद्र रूप में कभी सौम्य रूप में कभी श्रृंगार मूर्ति में कभी भयानक रूप में वही वाला वही नरसिंग वही मत्स्य वही कुर्म वही राम वही कृष्ण अभिनय है य प्रभु का अवतार लेकर अपने भक्तों के लिए सुख देने के तत्व वही है तत्व में किंचन मात्र भी अंतर नहीं जो अत्यंत गंभीर
गुणों के समुद्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम है वही तरंग मान प्रेम समुद्र लीला परायण ललित त्रिभंगी मुरली मनोहर जिनकी कटाक्ष बड़े-बड़े मुनियों को भी मोहित कर ले वही श्री कृष्ण किन चिन मात्र कोई अंतर नहीं है अभिनय में है वो मर्यादा पुरुषोत्तम मर्यादा का वहां अभिनय कर रहे और यहां प्रेम मर्यादा है जो समस्त मर्यादाओं के बांध को तोड़ कर के उलिक होती है उसे प्रेम कहते हैं समस्त नियमों की जहां पूर्णता होती है उसे प्रेम कहते हैं जब भगवान श्री राम दंड काण में विचरण कर रहे थे तो वहां के ऋषियों ने जेही अजान बाहु भगवान को देखा तो मुग्ध हो गए अस्थि मात्र हुए रहे शरीरा ऐसे ऋषि हृदय में प्रबल लालसा हुई कि कब ऐसा होगा कि इनकी बाहे हमारे गले में होंगी और मैं इनके छाती से होंगा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने उनकी कामनाएं पूर्ण करी और वो ऋषि बने गोपी और जब भगवान श्री कृष्ण बने तो रास उन्हीं के साथ किया श्रुति की रचाए दंडकारण्य के ऋषि मिथिला की वो प्रेमी सखियां ये सब गोपी बने आके भगवान राम मर्यादा
पुरुषोत्तम उनकी लीला में कहीं भी किसी भी तरह से मर्यादा का खंडन नहीं मिलेगा सब शास्त्री मर्यादा के अंतर्गत और भगवान श्री कृष्ण प्रेम मर्यादा अगर प्रेम का ज्ञान नहीं तो तुम मर्यादा से नहीं मिला सकते हो प्रेम अगर प्रभु कभी मुस्कुराए हैं तो सियाज से केवल मुस्कुराए रामावतार में और यहां तो मुस्कुरा के लाखों के प्राण हरण कर लिए चाहे वो श्री सुखदेव जी हो ला परमहंस शिरोमणि चाहे सुखदेव जी हो और चाहे वो मधुसूदन सरस्वती हो चाहे प्रभु उधान जी महाराज हो चाहे कोई बहुत बड़ा ऋषि हो चाहे मुनि हो चाहे किसी को मंद मुस्कुरा के लाल की रूप माधुरी नैनन निरख नेक सखी मन सिज मन हरण हास सावरो सुकुमार रास नक सिक अंग अंगन उम सौ भग सिव नखी औरों की तो बात जाने दो जटा जूट धारी भगवान शंकर भी गोपी बन कर के जिनके गले में हाथ डालना चाहते हैं श्री कृष्ण और जो कभी मर्यादा से एक भी विचलित नहीं हुए वही है भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम वहां मर्यादा सत शास्त्र से युक्त और यहां सत शास्त्रों का फल प्रेम प्रेम मर्यादा अगर प्रेम
का परिचय नहीं तो कृष्ण चरित्र नहीं जान सकता जैसे भगवान श्री कृष्ण चंद्र का एक नाम है ब्रज में माखन चोर बिचारा कोई गरीब लड़का हो फिर माखन गली गली चुराए तो बात समझ में आती है ना बाबा के कितने थे 9 लाख गए माखन जानते हो कहां रखा जाता था कुंड में कि रोज अगर श्री कृष्ण स्नान करें तो माखन दही दूध के कुंड थे वहां कोई पात्रों में दूध थोड़ी रखा जा दूह दू के कुंडों में डाला जाता था दूध का कुंड दधि का कुंड घृत का कुंड मक्खन का कुंड ऐसे थे पर जब यशोदा मैया अपने हाथ से लाला को पवा लाला तो जो गोपी जनती वो कामना करती कि कार अगर मेरे य लाला होते कभी मेरे घर आते मेरा दही पाते मेरा कितना हो भाग क्या यह मुझे सुख देंगे जाकी रही भावना जैसी उसकी भावना पूर्ति करने के लिए यथा माम प्रपद्यंते ताजाम भगवान वैसे ही जाते जब कभी उपद्रव करते हुए लाल जू को मैया पकड़ती बाह और डाट और प्रभु का वह डरा हुआ रूप तो गोपी सोचती क्या कभी मुझे ऐसा सौभाग्य मिलेगा कि मैं इनकी बाह पकड़ू और इनको डांट और य डर पे वही भगवान जाकर के चाहे
जितने ऊंचे में दही रखा गया हो सखा के ऊपर सखा आप चढ़ कर के और फिर पकड़े जाते फिर डाट लगती तो वो सुख भगवान प्रदान कर रहे माखन की कमी तो बाबा के घर में थोड़ी है भगवान भन की लीला को बिना प्रेमी महापुरुष के कोई जान नहीं सकता हमारे श्री कृष्ण की लीला बड़े टेढ़ यह कभी सीधे खड़े नहीं मिलेंगे यह जब आपको खड़े मिलेंगे तो आप देख लेना इनकी जो झांकी होगी ना व टेढ़ी होगी इनकी लीला इनका नाम है बांके बिहारी इनको समझ पाना बहुत कठिन है पहले राम जी की मर्यादा को समझो और आराधना करो तब कृष्ण जी की प्रेम मर्यादा में प्र यहां केवल प्रेम की मर्यादा प्रेम ही प्रेम प्रेम ही प्रेम जूत की जूत गोपियां और एक गोपी एक श्री कृष्ण एक गोपी एक श्री कृष्ण ऐसा सुख प्रदान कर रहे हैं ये गोपियां कौन है य सब ऋषि मुनि है जो तप करके भजन करके भगवान के समीप इस प्रेम रस का रसास्वादन पाए जिनकी चरण रज उद्धव आदि वंदना करते हैं वो एक भगवान श्री कृष्ण के लीला को बिना प्रेमी के नहीं समझा जा सकता इनको दार्शनिक तौर पर नहीं समझा जा सकता
इनको प्रेम प्रेम बिना ढाई आखर प्रेम के पढ़े सु पंडित हो यह जब तक प्रेम नहीं समझोगे तब तक और प्रेम समझ के परे की बात है सूक्ष्म तरम प्रतिक्षण वर्धमान कामना हितम अनुभव स्वरूपम यह प्रेम का जो स्वरूप है अनुभव स्वरूपम इसलिए वही हरि राम है वही हरि कृष्ण है श्री कृष्ण से प्रार्थना करो कि मुझे योग्यता प्रदान करो आपके पावन चरित्र के विषय में हम कुछ गान करना चाहते हैं तो वही योग्यता देंगे वही लिखवा देंगे व मु कम करोति वाचाल पंगम लंगते बकाया व इतने लीला बिहारी हैं कि उनको समझ पाना बड़ा कठिन है ललकार रहा है कालयवन अरे कहां भाग रहे हो तुम अपनी महिमा में समझो तुम्हारा विश् नाम ले रहा है कि बहुत बलवान हो ये पीछे मुड़ के देख रहे भाग रहे पीतांबर पहरा रहा है क्या नाम पड़ा जानते हो ठाकुर रण छोर पढ़ा अब आप विचार कीजिए जिनकी भृकुटि टेढ़ी हो जाए तो काल भी थर र जाए वो श्री कृष्ण है और भाग रहे हैं और कहां ले गए भगा के उसको मुचकुंद की गुफा में ले गए और मुचकुंद से भस्म करवाया और मुचकुंद को दर्शन दिया इनकी लीला
को समझना बड़ा हर बार जला संध को फस लेते थे बलराम जी अपने हल में तो भैया छोड़ दो हम जिस काम के लिए आए बड़ा काम कर रहा है ये एक एक अक्षण सेना समेट समेट कर करके बारबार जगह जगह से ऐसे करके लाता है हम जिसका भार उतारने के लिए आए बहुत बड़ा सहयोग कर रहा है छोड़ दो 18 बार आक्रमण किया भगवान पर 2 अक्षण सेना लेकर 23 2 अक्षण सेना लेकर के 18 भीम अर्जुन और आप साथ गए द्वंद की भिक्षा मांगी और फिर फड़वा के फवा दिया बड़े लीला बिहारी उनकी लीला को समझ पाना बिना भगवत प्रेम के नहीं हो सकता इसलिए बहुत संभाल के बहुत संभाल के उन्हीं से प्रार्थना करोगे राम जी की लीला के विषय में उनकी कृपा से कुछ समझ सकते हो क्योंकि सीधे हैं बहुत सीधे सरकार गंभीर और यह कभी सीधे नहीं मिलेंगे हा इनकी चित है तो वही कोई दूसरे थोड़ी बहुत प्रेमी है इसलिए बहुत अच्छा सौभाग्य कि आप भगवान के विषय में कुछ भी लिखें बहुत सावधानी से लिखे हमारी प्रभु की महिमा प्रकाशित हो कहीं कोई अवहेलना या निंदा ना हो तो जीवन धन्य है प्रभु के विषय में लिखना
प्रभु के विषय में सोचना प्रभु के विषय में बोलना यह सब मंगलमय हो जाता है जीवन काला जी
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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