अगर हम सारे पाप नर्क में भोग लेते हैं तो मनुष्य जन्म में कष्ट क्यों पाते हैं ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
आभास सिंह जी राधे-राधे गुरुदेव गुरुदेव भगवान आपके चरणों में अनंत कोटि प्रणाम राधे-राधे गुरुदेव गुरुदेव आपके श्री मुख से हमेशा सुनती हूं कि बहुत सारे जन्मों के गोदाम से शुभ और अशुभ कर्म निकालकर प्रारब्ध का निर्माण होता है जिसको हमें भोगना पड़ता है गुरुदेव हमें यह समझ नहीं आया कि जब शरीर छोड़ने के बाद हमारी जीवात्मा को नरका आदि यातनाएं सहनी पड़ती हैं अपने कर्मों के अनुसार तो इसका अर्थ ये है कि हर बार मृत्यु के बाद उस जन्म के कर्मों का निपटारा हो जाता है तो का गोदाम कैसे बनेगा नहीं पूरा नहीं पूरा निपटारा क्या होता है एक कत्ल किए ना तो पूरे आजीवन कारावास आपको मिला एक कत्ल करने के बाद तो यहां तो एक ही खुला ना लेकिन वहां तो एक-एक चेष्टाएं आपकी पता है ना आपने जो स्वप्न में जागृत में सुशुप्ति में तो वो एक-एक चेष्टा पता है।
अब उसमें मानसिक शारीरिक वाणी के द्वारा एक-एक अपराध है। तो अब जैसे एक कत्ल किया तो आपको आजीवन कारावास मिला। यहां मिला। अब ऐसे सैकड़ों अपराध हमारे गुप्त हैं जिनको कोई नहीं जानता है। लेकिन वो भगवान के दरबार में तो उनका है ना तो एक-एक अपराध का अलग-अलग दंड भगवा भुगवाया जाता है। कुछ ऐसे अपराध होते हैं कि जो ऐसे छोटे-मोटे अपराध तो उनमें जैसे हाय हमारा एक्सीडेंट हो गया, हाथ टूट गया, पैर टूट गया। यह साधारण पापों वहां असाधारण पापों का होता है। भारी नर्क में भारी पापों का भोग भोगाया जाता है।
जो थोड़े-मोड़े पाप होते हैं उनसे मिलाकर के फिर मानो दे दिया जाता है। तो थोड़ेथोड़े अच्छा किसी किसी को देखो कि भयानक पीड़ा युक्त शरीर की पूरे जीवन निकल जाता है। भयानक पीड़ा होते हुए। वो महत पाप भोगने के बाद जो बचा हुआ है वो जैसे आप देखो सजा मिलती है तो बोले इसको 20 साल की सजा 1 लाख का जुर्माना। जब सजा दे दी तो जुर्माना काहे को दिया? विधान है। तो सजा हुई नरक में और जुर्माने में यह पॉइंट जब मनुष्य शरीर दिया गया तो रख दिया गया। 20 साल में एक्सीडेंट होगा पैर टूट जाएगा।
ये उसका हिसाब हमारे भगवान के न्याय में इतनी भी चूक नहीं है। आप ये पक्का समझ किसका प्रश्न है? हां। इतनी भी चूक नहीं है और पूरे जीवन में आपने एक पाप नहीं लाखों पाप किए हैं। जिनका आपको ज्ञान है और ज्ञान भी नहीं है। कुछ अज्ञान में हुए और कुछ ज्ञान में हुए और जिनका कोई दंड आपको नहीं मिला है। उनका दंड आपको भोगना पड़ेगा। वह सब स्टॉक में जमा हो रहा है। वहां ऐसा थोड़ी कि भूल भुलैया हो गए। कोई ऐसा शरीर धारी नहीं है जो भगवान का प्रेमी और भगवान का अवतारी पुरुष है।
उसकी बात नहीं करता। नहीं सबसे कुछ पुण्य और कुछ पाप बनते हैं। कुछ पाप होते हैं जैसे हमने किसी को अभी छेड़ा और खुल गया तो उसकी सजा होगी। किसी किसी माई बहन को छेड़ा ऐसा लाखों बार हो चुका है लेकिन खुला नहीं है तो वह एक बार हमारा केस कोई खुल गया तो उसकी सजा क्या होगी बोले नाबालिक के साथ ऐसा किया बोले फांसी की सजा लेकिन ऐसा 50ों बार अपराध किया जो नहीं खुला है अब वो दंड वो तो मिलेगा ना दंड बोले भगवान के दरबार में न्याय ये क्या न्याय हमने तो कोई गलती नहीं की जैसे बिना किसी गलती के दंड मिल रहा है तो तुमने ने वो गलती की है जो कोई नहीं जानता है वो दंड कर्म आकर के अब इस रूप में दंड देगा जहां तुम्हारी कोई गलती नहीं वहां फंस जाओगे और वहां तुम्हें पीड़ा सहनी पड़ेगी अवश्य में भोक्तव्यम कृतम कर्म सुभास शुभम तो अगर इसी जन्म का देखो बचपन से अभी तक और ईमानदारी से जितना ध्यान है उतने को देखो क्या उन चेष्टाओं का दंड नहीं है क्या तो क्या वो फ्री ही चली गई क्या खुली नहीं है हम हो आप हो आप हो ईमानदारी से सच्चाई से देखो।
श्री धाम वृंदावन में बैठे हो। इतनी गलतियां हुई है कि अगर आपके सामने न्यायाधीश बनाकर आपको बैठाला जाए कि आपको इन का तो आप कहोगे अच्छा अपराध है दंड मिलना चाहिए। मुझे मिलना चाहिए। अगर सच्चे हृदय के हो तो स्वीकार कर लोगे। हमारे भगवान कितने कृपालु हैं। इसके बाद भी अवसर दिया है आपको। अब भी भजन कर लो। अब भी उनको नष्ट कर सकते हो। जो इसी जन्म में हुए हैं और भजन के द्वारा तुम तो पूरे गोदाम पर आग लगा सकते हैं। आम स्वर पाप मोक्ष्याम मासचा यही समझाने के लिए तो सत्संग हो रहा है कि यह जन्म तुम व्यर्थ मत जाने दो अब अपना काम बना लो लेकिन यहां काम बनाने की जगह बिगाड़ते चले जा रहे हैं स्टॉक पर स्टॉक रखते चले जा रहे हो बड़े खुशी की कोई नहीं जानता है भैया यहां कोई जानने ना जानने का मतलब नहीं जिसको जानना है वो निर्णायक तुम्हारी एक एक बात को जान रहा है भजन करो कर्मों को भोग लो और कर्मों को भस्म कर दो ये मुक्त होने का अवसर है और अगर इसी हम नए-नए कर्म पाप कर्म करते रहे तो यह जो अवसर मिला है इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
हिसाब किताब में एक सेकंड की भी चूक नहीं है। पक्का समय एक सेकंड भी जो तुम कर रहे हो उसका फल तुम्हें मिलेगा। यहां तुम आए हो तो जा जब से आपकी सुधि हुई तब से मृत्यु तक का पूरा हिसाब होगा। अब कुछ ऐसे हैं जो केस फंस जाते हैं और हम दंड भोग लेते हैं और कुछ ऐसे उसमें हैं कि हजारों केस दबे हुए हैं। तो यहां भी भोगो नरक भी भोगो अगले जन्मे में भी भोगो उसका हिसाब है। जैसे नहीं अब जब 20 साल की उसको कैद दे दी तो जुर्माने की जरूरत क्या है? तो दिया जाता है ना जुर्माना 500 जुर्माना 1 लाख जुर्माना।
अब वही मेहनत करो और वहीं से तुम्हारा पैसा कटता जाएगा और जेल की सजा भी भोगो। इसलिए कर्म है का एक कर्म है 10 मिनट का व्यभचार उसकी सजा एक कर्म है 10 मिनट में क्रोध को कंट्रोल नहीं कर पाए हिंसा बन गई आज ऐसे कितने गुप्त पाप हैं जिनको कोई नहीं जानता तो उनका दंड हमें भोगना पड़ता है और ऐसे बहुत जन्मों में अपराध हो चुके हैं बहुत से पाप हो जाते हैं जो जान करके होते हैं। किसी भी जीव की हत्या करना पाप है। है ना? यह जो मुर्गा, मुर्गी, बकरी, बकरा यह खा रहे हैं पाप नहीं हो रहा है।
शराब पी रहे हो, मांस खा रहे हो पाप नहीं हो रहा है। आप विचार करके देखिए आपके लिए क्या शास्त्र आज्ञा करता है कि आप ये पाइए। आपके लिए 56 प्रकार के भोग हैं। सुंदर-सुंदर भोग हैं। तो, हम लोग मनमानी कर रहे हैं ना आप। लेकिन आप गौर से देखिए। अगर तुम्हें शास्त्र का ज्ञान हो जाए तो अभी थर्रा जाओगे कि इस पाप का इतना बड़ा दंड, इस पाप का इतना बड़ा दंड। देखो ना 10 मिनट उसने गलत किया। आजीवन बर्बादी जेल में आप विचार करके देखो। आपने ऐसे हजारों कर्म किए हैं। अभी कोई दंड नहीं मिला तो क्या दंड नहीं मिलेगा?
एक सरकारी न्याय है भारतीय तो यहां ये दंड और एक होता है भागवतिक। वहां तो कोई ना वकील की जरूरत है और ना वहां किसी साक्षी की जरूरत है। आप ही उसके साक्षी हैं। वह एक सेकंड में न्याय हो गया। इतना इतना इतना हिसाब इसीलिए डरो यही डर ही डरप हरिवंश हित डरो इस बात से कि अब दोबारा हमको नरक ना जाना पड़े। हमारा काम बन जाए तो राधा राधा राधा राधा भगवान कह रहे मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूंगा। वही बताने के लिए बैठे कि नाम जप लो अपने कर्तव्य का पालन करो। भूलकर पाप मत करो।
वो भोगना पड़ेगा। वो किसी न किसी रूप में आएगा और आपको दंड देगा। लेकिन हम उससे लड़ जाएंगे। अगर हमारे पास नाम जप है भगवान का आश्रय उससे हम सह जाएंगे और आगे चलकर हम मुक्त हो जाएंगे। इसको भोग लिया। पुराने को भगवान भस्म कर दिए और नए सावधानी से चल रहे हैं कि पाप बनने ना पावे। मुक्त हो गए। समझ में आ रहा है आपको?
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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