Vastu Consultant ने जब पूछा कि कभी मन पैसा कमाने का करता है तो कभी सब कुछ त्यागने का
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
कह आप क्यों बदले बैठे हो मेरे भाग्य में यही लिखा है अगर उद्देश्य परिवर्तन नहीं हुआ तो भेष बदलने के बाद भी यही सब चलता रहता है नौटंकी नाटक बात समझ में आ रही है आपकी आपको बाबा जीवन का प्रणाम करवाना हो तो कोई बात नहीं फिर तो थोड़ा द 20 रुप बचा लिए तो किसी गरीब की बीमारी में लगा देते हैं किसी पशु पक्षी की सेवा में लगा देते हैं ऐसी जगह हम वो सेवा दे देते हैं जिससे हजारों को लाभ मिले मन बड़ा चंचल है अब आजकल स्मार्ट मोबाइल चल गया है भजन करने के लिए जो हम एकांत भागते थे अब एकांत में मोबाइल लेकर बैठे हैं कभी त्याग अच्छा लगता है कभी रुपया अच्छा लगता है तो इसकी अच्छे लगने और त्याग की बातों पर विश्वास ना करें यह छोटी मोटी हस्ती नहीं है मन बड़े बड़ों को नचा देता है भावना उपाध्याय जी फरीदाबाद से राधे राधे राधे राधे महाराज जी महाराज जी मैं एक वास्तु कंसल्टेंट हूं मतलब वास्तु शास्त्र का व देते होंगे कभी-कभी मन पैसा कमाने में लगता है तो कभी सब कुछ त्याग करके मन होता है कि प्रभु की सेवा में लगे महाराज जी
इनको बैलेंस कैसे करूं किसका नाम जप करो त्याग कर कहां जाओगे क्या त्यागना है कपड़ा बदलना कोई त्याग कहलाता है या स्थान बदलना त्याग कहलाता है यह तो बाहरी बात है इससे कोई भगवत प्राप्ति नहीं होती कह आप क्यों बदले बैठे हो मेरे भाग्य में यही लिखा है अलग-अलग होता है ना हमारा भाग्य विरक्त मार्ग से बचपन से लिखा है तो ऐसे चल रहे तभी हम वो अनुभव करके तुम्हें बता रहे वही तो सुनने आए हो भगवत प्राप्ति के लिए वेश परिवर्तन जरूरी नहीं है स्थान परिवर्तन जरूरी नहीं है उद्देश्य परिवर्तन जरूरी है अगर उद्देश परिवर्तन नहीं हुआ तो भेष बदलने के बाद भी यही सब चलता रहता है नौटंकी नाटक रूपया पैसा खानपान भोग सामग्री और संसार अच्छा लगने लगता है फायदा कुछ नहीं हुआ उद्देश्य परिवर्तन हो जाए तो राधा राधा नाम जप करो और जिस विधान से बढ़िया परिवार का पोषण हो धन कमाओ धर्म पूर्वक अधिक लग रहा है कि 100 200 अधिक है तो अस्पताल में किसी के दे दो गरीब की दवाई में लग जाए भूखे को भोजन दे दो नाम जप करो जहां हो वहीं भगवान की प्राप्ति
हो जाएगी और हजारों लोग भगवान का भाव रखकर प्रणाम करते हैं अगर सही माने में भजन नहीं तो नरक जाना पड़ेगा प्रणाम खाली नहीं है सबका हिसाब है एक बार सर झुकाया किसी ने तो तुम्हारे पूण्य हो लेगा कोई फी में तो दंडवत नहीं करता ध्यान रखना तुमको 00 रुपया चढ़ाया उसका हिसाब भजन से जाएगा वो तो नाशवान पैसा दे रहा तुम्हारा भजन कटेगा इसलिए रात दिन भजना आनंदी महात्मा जब भजन करते तब संसार का मंगल और स्वयं का कल्याण करते हैं बाबा जी बनकर भंडारा खाना या ऐसे खा पी के ऐसे पड़े रहना तो नरक की प्राप्ति होती है अगर भजन ना हो केवल वेश धरने से कल्याण नहीं होता भजन करने से कल्याण होता है तो भजन तो किसी भी बश में किया जा सकता है किसी भी देश में किया जा सकता है किसी भी कार्य करते हुए किया जा सकता है जब युद्ध करते हुए किया जा सकता है अर्जुन जी को भगवान कह रहे मामन स्मर युद्ध तो युद्ध से बड़ा खतरनाक कोई काम है ही नहीं युद्ध में जब भजन हो सकता है तो सब जगह भजन हो सकता है बात समझ में आ रही है आपकी आपको बाबा जीवन का प्रणाम
करवाना हो तो कोई बात नहीं फिर तो अगर भगवत प्राप्ति करनी है तो ऐसे ही हमें सही बात यह लगती है घोर वैराग्य और व बात अलग है नहीं तो बाबा जी बनना खतरे से खेलना है बाबा जी बनकर यद सही मार्ग में ना चल पाए ना तो ऐसे ना वैसे रहे मजरे डो पाछ लियो जी करी निर्भाग ना गृहस्ती धर्म में रह पाए ना विरक्ति धर्म में रह पाए ना इधर का ना उधर का बे मतलब में जीवन नष्ट हो जाता है तो गृहस्थी में रहकर के क्या धर्म पूर्वक धन कमाए चार की सेवा करें परिवार का संचालन करें और नाम जप करे बहुत बढ़िया है संत बने तो फिर बहुत कष्ट में जीवन व्यतीत करके भगवत प्राप्ति करें फिर भगवान जैसे चाहे तैसे रखे पहले भगवत प्राप्ति करें और वो बहुत कठिन है जब एक हिरन का बच्चा भरत जी को याद से रहित कर सकता है तो करोड़ों अरबों रुपया भगवान की याद में कितना बड़ा विघ्न पहुंचा सकते हैं यह भोग सामग्री नाना प्रकार की वाहवाही कितना बड़ा भगवान तो हमें लगता है छुपकर भजन करके निकल जाए बहुत बड़ी बात है तो राधा राधा जपो धर्म पूर्वक धन कमाओ अपने परिवार
का पोषण करो और घर में सादगी से रहो 10 पैसा बचा कर के दूसरे की सेवा में लगा दो हैना मान लो हमारा काम 00 से चल जाता है हम थोड़ा 10 20 बचा लिए तो किसी गरीब की बीमारी में लगा देते हैं किसी पशु पक्षी की सेवा में लगा देते हैं ऐसी जगह हम वो सेवा दे देते हैं जिससे हजारों को लाभ मिले ऐसा कर देते हैं बहुत से ऐसे स्थान है जहां हजारों प्राणियों को लाभ मिल सकता है जैसे हम गर्मी का समय धीरे-धीरे पैसा एकत्रित करके ऐसी जगह पौला लगा दे ठंडा पानी हजारों लोग पिए तो
धर्म के कार्यों में हम थोड़ा-थोड़ा धन बचा करके एक गाय को एक महीने में अगर हम एक बार भोजन पवा देते हैं तो हमारा एक धर्म बन जाता है अब एक गाय को भोजन प क्या 10000 रप तो महीने में तो 100 डे स निकाल सकते हैं अब कोई बहुत बीमार है तो हम अपने एक दो दिन के खर्चे कम करके उसको दवाई दिला देते हैं तो भगवान उसके अंदर है हमारा मंगल हो जाएगा यह बातें गृहस्थी में बहुत आनंद पूर्वक भगवत प्राप्ति हो अच्छा इसलिए कह रहे हैं गृहस्थ में कि देखो मन बड़ा चंचल है अब आजकल स्मार्ट मोबाइल चल गया है भजन करने के लिए जो हम एकांत भागते थे अब एकांत में मोबाइल लेकर बैठे हैं और मोबाइल में पूरी विश्व है गंदी बातें भी है अच्छी बातें भी हैं तो अच्छी मन कम देखना चाहता है एकांत में देखना एकांत में बैठकर कोई सत्संग सुने बिरली बात है नहीं एकांत में जब यह तो है कि समाज में बैठक घर परिवार में तो सत्संग सुनोगे लेकिन जब कमरा बंद करके मोबाइल लेगे तब सत्संग कोई बरले सुनेगा फ कुसंग देखने का मन होता है और जब कुसंग देखोगे तो फिर कोई भी हो
नष्ट हो जाओगे जो देखते हैं जो सुनते हैं जो बोलते हैं वही क्रिया बनती है इसलिए हमें लगता है सावधानी पूर्वक गृहस्थ धर्म में चले खूब भजन करें बाबा जी बनने की ना सोचे कलिकाल है कोई बिरला ऐसा बाबा जी बनने का मतलब है अपने को मरा हुआ समझ के चले और कठिन है मन को मारना इंद्रियों को मारना बुद्धि देखो बातें बनाना अलग यार मन को मारना बहुत कठिन है देखा है मन को मारते हुए कभी अपने जब मन कहता है ये चाहिए फिर कह दो नहीं फिर देखो कैसे तुम्हें जलाता है तुम उसको मार के दिखाओ अब बड़े बड़ों को घुटने टिकवा देता है मन वो चीज है अब इसी को मारना है सो महात्मा तो गृहस्थी में है कि थोड़ा छूट है आज यह पाएंगे तो बनाओ ठाकुर जी को भोग लगाओ मन खराब हुआ तो तुम गृहस्ती में हो तुम्हारे कोई पाप नहीं लगेगा विरक्ति में बहुत होश में चलने का तो इसलिए हमारी सलाह है नाम जप करो और मन की दशा तो बदलती रहती है इसको कभी वैराग्य अच्छा लगता है कभी विवाह अच्छा लगता है कभी त्याग अच्छा लगता है कभी रुपया अच्छा लगता है तो इसकी अच्छे लगने
और त्याग की बातों पर विश्वास ना करें यह छोटी मोटी बा हस्ती नहीं है मन बड़े बड़ों को नचा देता है तो अगर भगवान की प्राप्ति करनी तो धर्म पूर्वक चले अपने अपने धर्म का पालन करते हुए पर विरक्त धर्म बहुत कठिन धर्म है विरक्त वेष धर्म मतलब लाखों में कोई एक सच्चाई से भगवान के मार्ग में चल पाता है बहुत कठिन है जी
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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