॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

चोर, डकैत और व्यभिचार करने वालों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है कैसे उन्हें सुधारूँ ?

▶ YouTube

श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

मलो जहां ये टीचर है ऐसी जगह पर हुआ जहां सब चोरी डकैती घर से ही उनको सिखाया जाता है बट मेरा उधर अभी कार्य हो गया कार्य क्षेत्र हो गया पर मैं कैसे आध्यात्मिक ऊर्जा के द्वारा और अपने बौद्धिक स्तर किसी का पलट देना ये केवल भजन बल से हो सकता है केवल उपदेश से नहीं हो सकता मान लो हम केवल पढ़ लिखकर उपदेश दे इससे परिवर्तन नहीं होगा जैसे संतों के वचनों से बुद्धि का परिवर्तन होता है उसमें गुरु कृपा भगवत कृपा भजन बल तप बल सब एक साथ लगता है तब जाकर के सामने वाले की बुद्धि बदलती भाई हम जब से सुना तब से मांस छोड़ दिया मदिरा छोड़ दिया गंदी बात छोड़ दी भजन की तो यह ऐसे नहीं होता सुषमा शर्मा जी राजस्थान राधा वल्लव श्री हरिवंश महाराज जी मैं एक शिक्षिका हूं मेरा पद स्थापन जिस जगह पर हुआ है वह विशेष जनजाति की बस्ती है महाराज इन्होने लिखा है वैसे इनका मुख्य कार्य है चोरी डकैती व्यभिचार आदि उनके घर से ही यह मिलते हैं उन्हे मेरा प्रश्न है कि मैं उन्हें जिस प्रकार आध्यात्मिक राह पर लेकर आऊ वो कैसा रहेगा महाराज

जी मार्ग मतलब इनका कहने का मतलब जहा य टीचर है ऐसी जगह पर हुआ जहां सब चोरी डकैती घर से ही उनको सिखाया जाता है बट मेरा उधर अभी कार्य हो गया कार्यक्षेत्र हो गया पर मैं कैसे आध्यात्मिक ऊर्जा के द्वारा हा इसका परिवर्तन किसका इसका परिवर्तन तो तभी हो सकता है जब में भगवन नाम जप का बल हो क्योंकि बौद्धिक स्तर किसी का पलट देना यह केवल भजन बल से हो सकता केवल उपदेश से नहीं हो सकता मान लो हम केवल पढ़ लिखकर उपदेश दे इससे परिवर्तन नहीं होगा जब स्वयं में हमारे तप

बल होगा भजन बल होगा तब हम बदल सकते हैं नहीं तो दूसरा बहुत चोर और हिंसक को जब कोई महात्मा मिला और उपदेश किया तो उसका जीवन बदल गया इतिहास साक्षी है संतों के चरित्रों को पढ़कर देखो तो खूब नाम जप करो और उनमें भगवत भावना करो हे प्रभु ये रूप में आकर के चोरी डकते जो भी गलत काम इनके यंत्र का प्रभाव लेकिन आप जो पावर हो वो मुझे पता है कि आप सबके अंदर प्रभु मेरा सहयोग करो इनकी बुद्धि का परिवर्तन करो इनके जीवन परमानंद में आपके चरणों में लगे ये सच्चे आचरण वाले बने भगवान से प्रार्थना और नाम जप मुझे तो यही लगता है कि भगवत बल के सिवा कोई किसी की बुद्धि को बदल नहीं सकता अगर किसी का परिवर्तन हो रहा है तो भागवत बल से हो सकता है बौद्धिक स्तर से किसी का परि वो आपका उपहास करेंगे क्योंकि उनके हृदय में रजोगुण है तमोगुण है उद्दंडता है तो वो टीचर को गुरु थोड़ी मानेंगे वो तो आपका उपहास करेंगे आपकी अवहेलना कर देंगे यदि आप में नाम जप और प्रार्थना बल है तो प्रार्थना बल और नाम जप से किसी को भी सुधारा जा सकता है पर

उसके लिए स्वयं में भजन होना अति अनिवार्य है तो आप नाम जप कीजिए और भगवान से प्रार्थना कीजिए सम में सद्भावना कीजिए तो परिवर्तन तो निश्चित है म जी कुछ चरित्र भी सुना सकते हैं जैसे कुछ भक्तों के चरित्र हो या सुनेंगे अपवित्र बुद्धि वालों में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिनका जैसे स्वभाव बन चुका है ना पवित्र अब उनको दया धर्म की बातें अच्छी नहीं लगती जो ममता रत सन ज्ञान कहानी अति लोभी सन विरत बखानी उ सर्व बीज फल जथा जैसे तो उनको अगर वो प्रय प्रार्थना मान ले कि थोड़ा नाम जप करने लगे और आप खूब नाम जप करें और वह संकल्प करके उनको दे इनकी बुद्धि सुधरे तो मुझे लगता है परिवर्तन हो सकता है हां और जब हम नाम जप करेंगे तब फिर चरित्र सुने तो प्रभाव पड़ेगा क्योंकि अपवित्र बुद्धि अवहेलना कर देगी वो मानेगी ही नहीं य सब पुरानी लिखी पड़ी बातें हैं भगवान का नाम जब करोगे तो तुम्हारे अशुभ का नाश होगा और सुंदर बुद्धि होगी तो अच्छे कर्म करोगे सुख प्राप्त होंगे दुख किससे मिल हैं पाप कर्म से कर क्या रहे हो पाप कर्म तो

मिलेगा क्या दुख चाहते क्या सुख यह उल्टा बुद्धि हो गई देखो ना जितनी जेल भरी है वह सब सुख प्राप्ति के लिए भरी सुख प्राप्ति के लिए किया और परिणाम में जेल जितने रोग हो रहे हैं ये सब सुख प्राप्ति के लिए कोई पाप किया उसी का फल भोगना पड़ रहा है हमारा मतलब है कि हमें सुख चाहिए लेकिन हमसे क्रियाएं होती दुख प्रदान करने वाली पाप कर्म की वही हमें सुधारना है शास्त्र स्वाध्याय कर के संतों के पावन वचनों से पर जिनकी मलिन बुद्धि है वह संतों के वचन ही नहीं सुनेंगे

वह शास्त्र स्वाध्याय नहीं करेंगे अब उनके लिए चाहिए हमारा भजन हम खूब डट के भजन करें और उनका मंगल तो उनकी बुद्धि का परिवर्तन जैसे संतों के वचनों से बुद्धि का परिवर्तन होता है उसमें गुरु कृपा भगवत कृपा भजन बल तप बल सब एक साथ लगता है तब जाकर के सामने वाले की बुद्धि बदलती है कि भाई हम जब से सुना तब से मांस छोड़ दिया मदिरा छोड़ दिया गंदी बात छोड़ दी भजन की तो यह ऐसे नहीं होता है ये भगवान के बल से होता है भगवत बल से होता है वही बल आप धारण करो नाम जप करो

भगवत प्रार्थना करो तो परिवर्तन हो सकता है क्योंकि दुष्ट स्वभाव और पाप स्वभाव वालों को भगवत चर्चा अच्छी ही नहीं लगती पाप वंत कर सहज स्वभाव भजन मूर्ति भाव ल काऊ जोप दुष्ट हृदय सोई होई मोरे सन्मुख आव के पर दुष्टों का भी सुधार करने के लिए हमारे भजन से हमारी प्रार्थना से भगवान उनका परिवर्तन करते हैं तो यह हम कर सकते हैं कि हम देखो संत जन यही करते हैं एकांत में भजन करते फ सर्वे भवंतु सुखना सर्वे संत निरामया तो उनका वह संकल्प जाता है और सामने वाले की श्रवण इद्री से वचन जाकर उसका परिवर्तन कर देते हैं भजन बल से परिवर्तन हो सकता है वहां बुद्धि की प्रवीणता से परिवर्तन नहीं हो सकता अध्यात्म के द्वारा हम उनका परिवर्तन कर सकते हैं

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

संबंधित