॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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राष्ट्र सेवा तो कर रहे हैं गर्व है इसपर , मन को विशेष शांति कैसे मिले ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

कि हम जो भी जितना भी समय दे रहे हैं भगवान की पूजा है भारत की सेवा राष्ट्र की सेवा यह हमारे भगवान की पूजा है और सच्ची मानी भगवान की पूजा है वो नाच पड़ता है सामने वाला देखते ही नाच पढता है हम कोई हीरो है क्या हम कोई अभिनेत्री है क्या य हमको देखकर कोई खुश हो जा बाबा जी है यार जय जय श्री राधे श्री राधे भारत माता की माता की जय देश के सेवा कर सब कुछ कर रहे ब मन विचलित रहता है हमेशा लग रहा है किसी के लिए कुछ करही नहीं पा र नहीं मन को आनंद चाहिए एक ध्यान

रखना तब लग कुशल न जीव को सपने मन विश्राम जब लग भजन राम को शोक धाम तज काम शरीर राष्ट्र सेवा में है पर मन को आनंद की भूख रहती है सबके मन को आपको नहीं पूरे संसार में जितनी भी क्रियाएं हो रही व सब सुख प्राप्ति के लिए हो रही है आप हमारी बात को गौर से देखना जितनी भी क्रियाएं हो रही चीटी से लेकर सबका उद्देश्य सुख प्राप्ति करना सुख भोगना सबकी चा है आप इस विषय पर सहमत है सबकी सब क्रियाओं का उद्देश्य सुख प्राप्ति है लेकिन सबको दुख भोगना पड़ता है इस बात को भी आप समझ रहे सुख प्राप्ति की चाह से सब क्रियाएं कर रहे हैं जितनी जेल भरी है वह सुख प्राप्ति की चाह की क्रियाओं से ही भरी है जितने पाप होते हैं वो सुख प्राप्ति की चाह की क्रिया से ही होते हैं आप ध्यान दे रहे हैं ना इसका मतलब है सुख की तो चाह है पर चेष्टा गलत है मार्ग गलत है तो जेल है रोग है नर्क है पाप है दुर्गति है लेकिन चाह पकड़ी गई सबके अंदर सुख की सुख भोगने की अब जो हमारा राष्ट्र सेवा में है आपने कहा मैं सब कुछ करता हूं पर मेरा मन अशांत है तो

वोह नहीं करते हो जिससे मन शांत हो साव मन कृष्ण पदार विंद हम इसीलिए कई बार अपने राष्ट्र सैनिकों को सम्मानित भाव से पूज्य भाव से आदर पूर्वक य कहा कि मन को जो काम क्रोध लोभ मोह मद मत्सर यह शत्रु परास्त कर रहे इनके लिए बाहरी राइफल काम नहीं करेगी बाहर से आए हुए शत्रु पर हम विजय अपने अस्त्र बल से बौद्धिक बल से प्राप्त कर लेकिन आंतरिक जो अटैक हो रहा है हमारे अंदर उसको आध्यात्मिक बल से ही मार सकते हैं और कोई बल नहीं है यह जो मन अशांत है इसको कैसे इसे अध्यात्म बल से सुधारना है ज्यादा अध्यात्म बल के लिए कोई यह करने की जरूरत नहीं अगरबत्ती धूपबत्ती आरती य अध्यात्म का एक बाहरी अंग है जो अध्यात्म है वह चिंतन प्रदान होता है हमारी हर बात को समझते जाना कि अब हमारे पास टाइम नहीं कि मैं आरती करूं मैं कर नहीं रहा मेरे पास टाइम नहीं कि भगवान को विराजमान कर के पूज वो मैं कह नहीं रहा क्योंकि एक बाहरी अंग हैय अध्यात्म का वास्तविक जो पूर्ण अंग है वह चिंतन है अगर हमारा नाम चिंतन होने लगे भगवान का और उसका अधिक

बढ़ने लगे रे अंदर आध्यात्मिक पावर आ जाएगा जो हमारी बुद्धि को कंट्रोल करेगा इस पूरे सिस्टम को शरीर के सिस्टम को बुद्धि कंट्रोल करती है शरीर एक रथ है रूपक में इंद्रिया इसके घोड़े हैं मन उसकी लगाम है और बुद्धि उसका सारथी है पूरा कंट्रोल करने वाला बुद्धि है अगर वही बेवकूफ हुआ सारथी ड्राइवर ही बेवकूफ हुआ तो एक्सीडेंट होने में देर नहीं लगेगी या वो नशे में हुआ तो मार देगा हमको तो हमारी बुद्धि तो है लेकिन बुद्धि को कंट्रोल करने वाला विवेक नहीं अध्यात्म का हमारी बुद्धि अगर ठीक कंट्रोल ना करे हम अपने को छूट कर देंगे बहुत हो गया यार कितना सय क्या क्या वो दिमाग इसके लिए अध्यात्म बल चाहिए अगर हम निरंतरता नाम जप करने का अभ्यास करें और हमारा सोच कि हम जो भी जितना भी समय दे रहे हैं भगवान की पूजा है भारत की सेवा राष्ट्र की सेवा यह हमारे भगवान की पूजा है और सच्ची मानी भगवान की पूजा है अगर आप बंदूक से सेवा कर रहे हैं तो मैं माला से सेवा कर रहा हूं अपने राष्ट्र के हर समय नाम जप करते भजन करते हु मेरा

राष्ट्र सुखी हो तुम बाहरी शत्रुओं से रक्षा कर रहे हो हम आंतरिक शत्रुओं से रक्षा कर रहे हैं हम तुम्हारे अंदर के शत्रुओं से लड़ने की बात तुम्हें बता रहे हैं आंतरिक बल तुम्हें प्रदान ऐसा नहीं जैसे आप हमारे पास आए तो खाली नहीं जाएगा आपको एक आध्यात्मिक मिलेगा एक जो आप खुद अनुभव करेंगे एक जो यहां एक शांति मिलेगी आपको एक जो एक आनंद जैसा मिलेगा व आपको किसी क्रिया से नहीं मिलेगा क्योंकि भागवत है येय भजन के प्रभाव से हम भी सेवक है राष्ट्र के और आप भी सेवक है बस बात इतनी संभालने है कि मन को खुराक चाहिए आनंद और यह छोटे मोटे आनंद में टिकने वाला नहीं जैसे पुरुष शरीर या स्त्री शरीर इसमें मन हमारा कहता है इस शरीर में सुख है लेकिन बहुत बार उस शरीर का सेवन करने के बाद मन कहने लगता है इसमें नहीं उसमें इसमें नहीं इसमें आप इसकी चाल को पकड़ते जाइए अर्थात जितने भी भोग भोग लिए जाए य कभी संतुष्ट नहीं होगा क्योंकि यह भोगानंदीश्वरा भगवत भाव रखो मेरी पत्नी मेरा पुत्र मेरा परिवार मेरे बूढ़े माता-पिता मेरे लिए हर समय

चिंतित रहते हैं मुझे हर चेष्टा उनके सुख के लिए करनी है राष्ट्र सुख के लिए करनी अभी आनंद का अनुभव आने लगेगा यदि अध्यात्म चिंतन में नाम चलाने लगो इसलिए हम सबसे कहते क्या जाता है हम कहते कभी माला मत पकड़ो अभ्यास करो राम कृष्ण हरि जो नाम प्रिय हो रहा हम तो राधा राधा राधा जो नाम प्रिय फिर आप देख लेना आनंद की फान आती है 2 किलोमीटर में सुबह रात्रि में जब हम आए ठसा ठस दो किलोमीटर भरे हुआ था सबको देखना सबको प्रणाम करना सबको आनंद प्रदान करना ये फ्री नहीं होता ये अंदर से दिया जाता है वो नाच पड़ता है सामने वाला देखते ही नाच पड़ता है हमको हीरो है क्या हम कोई अभिनेत्री है क्या कि हमको देखकर कोई खुश हो जाए बाबा जी है यार किस बात से अध्यात्म सुख से और या कोई आनंद से नाच रहा है दो ही बातें ई या तो प्रेम में रो रहा है या आनंद में नाच रहा है क्यों अध्यात्म वही अध्यात्म मन को विश्राम देगा मेरी बात मान लो इसलिए नाम जप कीजिए परिवार से बहुत प्रीति रखिए परिवार के लिए तुम्हारा यह राष्ट्र सेवा का जीवन जो है

राष्ट्र सुख का जीवन जो है वो परिवार के लिए बहुत सुखदायक है इससे कभी कोई ऐसा कार्य ना होने पावे जिससे आपके परिवार को दुख हो हमारे राष्ट्र की हानि हो इसलिए खूब नाम ज नाम के बिना आप अध्यात्म बल नहीं प्राप्त कर सकते व आध्यात्म बल के बिना मन को कंट्रोल नहीं कर सकते क्योंकि आप परिवार से दूर है आप कहीं भी तैनात किए जा सकते हैं आपका परिवार का प्रेम आपको खाएगा अंदर से वो आपको तोड़ेगा फिर राष्ट्र प्रेम लघु हो जाएगा नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए फिर आप विक्षिप्त

होने लगेंगे आप असंतुष्ट होने लगेंगे यार क्या जिंदगी है दो महीना हो गए ना घर गए ना किसी से मिले या आठ महीना हो गए या 10 महीना हो गए ऐसा नहीं आप एक संत है पक्का मानिए हम सैनिक का इसीलिए सम्मान करते हैं संत की तरह क्योंकि हमने वो जिंदगी जी है गंगा के किनारे वही जिंदगी आप राष्ट्र सेवा में जी रहे हैं कहीं भी पहाड़ में लगा दिए कहीं भी लगा दिए महीनों अपने परिवार से दूर जैसी व्यवस्था उसमें जीते हुए आप खड़े ये सब अंदर के नहीं जानेंगे अंदर जो आनंद ले रहे हैं ना वो तो नहीं जानेंगे गाड़ी है बंगला है अंगरक्षक है सब व्यवस्था है आप एक संत है तो आप सैनिक रूप में रह रहे हैं आपको हर कष्ट सहना है हमारे राष्ट्र के लिए पर नाम जप करो तो आध्यात्म बल आपकी रक्षा कर लेगा नहीं फिर गड़बड़ हो जाएगा देखो आप परि से दूर है आप विक्षिप्त हो जाएंगे जब काम सताएगा आपको जब आपके परिवार का मुह आएगा तो आपको विक्षिप्त कर देगा और वही भजन बल आपको विक्षिप्त से बचाएगा इसलिए नाम जप कीजिए और प्रसन्न लाओ सबको व श्री जी के प्रसाद अच्छे

वाले वस्त्र प लाओ और सखियों को चुनरी बढ़ दो सबको सबको प हम हृदय से सम्मान करते हैं आपका और हृदय से मंगल कामना आपकी मना आप स्वस्थ रहिए स्वस्थ रहकर हमारे देश में जो हमारे देश की सेवा में और अपने परिवार को सुख देने की भावना में रहे आपके आचरण ऐसे होने चाहिए आपके परिवार को सुख हो हमारी राष्ट्र सेवा बने श्री राधे श्री राधे एक बार वो भी बोल दो वंदे मातरम भारत माता की माता की जय ये ये हमारी छाती कालो जय हिंद जय हिंद

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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