जानिए ये मन क्या है ? कैसे काबू में आएगा, कैसे इसने फंसाया है ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
शुभम परमार जी ग्वालियर से म राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी यह मन क्या है क्या यह वही विचार है जो हमने पहले जन्म लिया था उस उनके विचारों का संग्रहण है या यह मन भगवान ने ऐसा ही बनाया गेम गेम खेल होते है ना उसमें अनुकूलता प्रतिकूलता जय पराजय मानी हुई होती ना भाई ऐसे करोगे तो इतना हो जाने पर आप य विजय मानी जाएगी इतना सत्य तो नहीं है ना जैसे गेम में बिल्कुल ऐसे ही ना हार सत्य है और ना यहां जय सत्य है ना यहां कुछ अच्छा है
ना बुरा है तीन गुणों से बाहरी खेल रचा गया और तीन गुणों से अंदर यंत्र रच दिए गए और उन्हीं के हैं वह अब आपको उनसे हटाकर परमात्मा में लगाना है परमात्मा में लगा दिए तो जय जीत गए और अगर वही माया के आकर्षण हा वो माया रची थी अगर माया के आकर्षण में चले गए तुम्हारी हार तुम्हें दुख भोगना पड़ेगा अगर तुम जीत गए तो मां सुख में निमग्न हो जा एक गेम रचा गया है कुछ चला है अच्छा उसमें ना तुम है ना हम है एक ही है वही यहां है वही यहां है वही मन में पावर दे रहा है वही माया को पावर दे रहा है एक ही अपने आप से अपने आप का गेम खेल रहा है ये है गेम से निपटने का सूत्र पर ऐसा नहीं लग रहा है हम और तुम अलग र और कोई भगवान अलग लग रहा है यही भ्रम है इस गेम का और इसी भ्रम से भ्रमित होकर के हम गेम हार जाते हैं हार जाने का फल होता है 84 लाख योनियों में भ्रमण करना और अगर जीत गए तो इसका फल होता है इस माया से मुक्त हो जाना और परमानंद में निमग्न हो जाना समझ पा रहे हो महाराज जीय संतुष्ट ही नहीं होता कभी संतुष्ट तभी होगा जब
इसको आप अपने स्वरूप में लाओगे माया में थोड़ी संतुष्ट होगा गेम है इसको घसीट के अपने में लाना है और यह बना माया के द्वारा है जाएगा माया में आपको इसको घसीट में अपने अपने मिलाना है एक बार रंगनाथ जी का एक मेला में एक इनाम रखा गया था और हर साल रखा जाता है उसमें मनुष्यों की सीढ़ी बना कर के बहुत ऊंचे पर स्वर्ण कुछ चांदी की मुद्राएं अच्छी धनराशि उसमें बांधी जाती है एक खंभे पे ऐसे खंभे का आपको सपोर्ट नहीं लेना मनुष्यों की सीढ़ी से आपको यहां से चढ़ना है खंभा ये और खंभे के बगल से सीढ़ी लगा कर के जो धनराशि टांगा गया है वो आप प्राप्त ना कर पाए केवल आप लंगोट पहने होंगे और आपके शरीरों में घी तेल मिश्रित दूध डाला जाएगा अब आप चढ़ जिसने धनराशि बांधी है वही गेम में आपको बुलाया है वही आपको ना चढ़ पाओ इसलिए गेम में घी तेल दूध आपके शरीर प डाल रहा है और आप केवल लंगोट पहने क्योंकि कपड़ा पहने हो तो उसका सपोर्ट मिल जाएगा और शरीर में जब घी तेल बनेगा तो आप फिसल जाएंगे ना और केवल शरीरों की सीढ़ी बना के जाना है 25
बार गिरते हैं फिर जमा जमा के एक बार पकड़ते सब तालिया बजाते और वो विजय होता है वो स्वर्ण धन राशि तो सब कोई तो नहीं ले पाता 2500 बार गिर कर भी वो निराश नहीं होते हैं तब वो बिल्कुल ठीक परमात्मा ने ऐसे गेम रचा है वो आपको माया के फसाओ वाले फिसलन वाले डालेगा सूत्र और ऊपर परमानंद बांध दिया है अखंडानंद ब्रह्मानंद भगवता अंद और चढ़ना है आपको आपको अकेले चढ़ना है और जिससे चढ़ना उसमें फिसलन डाल दिए लुभावने ऐसे दृश्य डाल दिए अब बचा के अपने आपको चढ़ के जाओ तो परमानंद प्राप्त करलो फिसल जाओ तो फिसल जाओ गेब है कोई लाखों में एक चढ़ पाता है तो उन लाखों में आप लोग हैं सब कितने लोग बैठे हैं कांतिक में फिल्म के उसमें देखो कितने लोग होते हैं सांसारिक मनोरंजन में कितने होते हैं मतलब मांग किसकी है संसार की भगवान की तरफ कौन चलना आप भगवान की तरफ चलना चाहते इसलिए पकड़ पा रहे हैं ये है क्या ये है क्या कभी संतोष नहीं आज सत्संग सुना है जो ना खाए तो पछतावे जो खावे तो पछतावे ऐसे भूत के लड्डू है वही चतुर है जो समझ पावे
कि आखिरकार रहस्य क्या है बार-बार भोगने पर भी सुख नहीं बार-बार सब तो सुख तो कोई और है एक बार कदम अंदर की तरफ बढ़ावे अंदर की तरफ हम बाहर खोज रहे चाबी गिरी है अंदर घर के और खोजे बाहर तो जिंदगी भर खोजे रहे हम तिजोरी की चाबी नहीं पाएंगे व अंदर चाबी अंदर खुल गई ना तो मालामाल हो जाओगे कई बार कहा है अंदर का मामला है इस मन को अभी जो विषयों में जाता है इसको हटाओ राधा राधा राधा इसी से मन की बातें डिलीट होंगी और मन हटेगा देखो ऐसा तो नहीं कह सकते कि एकदम मन नहीं लगता कुछ तो लगता होगा लगता है ना 24 घंटे में कुछ मिनट तो आप अगर परमार्थ में कुछ दिन से सत्संग सुन रहे हो तो कुछ तो लगने लगा है क्योंकि कुछ ना लगता तो आप यहां आते ही नहीं हैना कुछ लगने लगा इसका मतलब हमारी दवा काम कर रही है नहीं 24 घंटे में जब कभी नहीं लगता था कुछ लगने लगा और दवा काम कर रही इसकी पहचान कि हम मन की कमजोरियां पकड़ने लगे पहले जैसा मन कहता था वैसा हो जाता था तो हम हर्षित होते थे आज जब वैसा हो जाता तो हम दुखी होते हैं कि यार ये गलत
सोचा गलत किया हां इसका मतलब दवा काम कर रहे नहीं कर रहे अब आप नाम जब और बढ़ाइए और प्रवीण बनिए तो एक दिन देखेंगे मन शांत हो जाएगा ये शांत गिलानी होने लगी मतलब ठीक हो रहा है वही गंदा मन जो सलाह दिया वही गंदा मन जो क्रिया कराई अब वही मंदा गंदा मन क्लान कर रहा है मतलब एक अंश में सुधार हो चुका है नहीं गिलान क्यों कर रहा है उसने ही तो सोचा था उसने ही तो करवाया था फिर गिलान क्यों इसका मतलब अच्छा पन अभी मन में बकाया रह गया है अभी पूरा मन पापी नहीं भला है तो इसका मतलब हम धुलाई शुरू करें तो पूरा मन हम साफ कर देंगे निर्मल मन जन सो मोहि पावा भगवान की प्राप्ति के लिए मोही कपट छल छिद्र न भावा आप चिंता मत करो राधा राधा राधा राधा नाम करो और जो गंदी बातें जानते हो मन की उसको सपोर्ट मत करो यह बहुत खतरनाक होता है कि हम जानते हैं कि ये गलत है नहीं करना चाहिए पर हम सपोर्ट कर देते हैं चलो यार देख ले चलो यार खा लेते हैं चलो यार भोग लेते हैं वही हम डाउन हो जाते फिर मन आपका ऐसा चिंतन दि देखो चार छ महीना से तो
प्रयास कर रहे हैं और हर बार हम असफल हो जाते हैं तो यार ना यह मिला ना वो मिला इससे अच्छा है कि हम उसके योग्य नहीं कोई साधु महात्मा परमार्थ अध्यास में प्राप्त हम तो यही मौज ले यार जो होगा सो देखा जा ऐसी सलाह दे देगा बहुत गलत है ये सलाह लड़ना हार गए तो तब तो मार देगा हम अंतिम स्वास तक लड़ेंगे चाहे हजार बार हार जाए हम कोशिश यही करेंगे अबकी जीत जाएंगे अबकी जीत जाएंगे फिर भी हार जाते फिर भी हम कोशिश करेंगे तो एक दिन हम इस पर विजय प्राप्त कर लेंगे और भगवत प्राप्ति कर लेंगे स यह जो मन है ना यह भगवान ने इसकी रचना की है इंद्रिया मन यास्म कह इंद्रियों में मैं मन हूं और त्रिगुण माया का इसमें भरा हुआ पूरा पॉइजन जहर है आप देखो मन छोड़ के गंदी बात में जाएगा नहीं जाएगा यह नहीं कि अच्छी बात में नहीं जाता अच्छी बात में लगाव तो लगेगा और वो भी भी थोड़ी देर और बुरी बात में लगाने की जरूरत नहीं आराम से इसका स्वभाव रचना ऐसी रची गई अब यही गेम रखा गया है कि अब इसकी गति को रोको अंतर्मुखी प्राप्त कर लोगे वह
अद्भुत आनंद अंदर ही मिलेगा किसी से कहने की जरूरत नहीं आनंद मगन हो जाओगे और उसी आनंद की खोज देखो जब हमारा मन कहता है इस शरीर को भोग ले इस वस्तु को भोग ले अमुक देखो सब अपने घर के जैसे बैठे हैं क्या उसके भोगने के बाद मन को शांति मिलती है थोड़ी देर के बाद फिर एक नया संकल्प बनता है फिर एक नई मतलब हमारी खोज अधूरी रही वो नहीं मिला जो मैं सोच रहा था सोचने में जैसा सुख मिलता है वैसा ना भोगने में नहीं मिलता चाहे वो भोजन हो चाहे वो दृश्य हो चाहे वो कोई क्रिया हो आप देखना जो मन हमें सचवा के पागल बनाता है और जब हम उस परे जाते हैं तो वह चीज हमें नहीं मिलती है तब लगता है कि वो यहां नहीं शायद यहां हो यहां नहीं शायद यहां हो ऐसे भटकते पूरा जी वन व्यतीत हो जाता है बुद्धिमान वो है जो दो चार कदम में ही लौट आवे कि गलत दिशा में जा रहे हैं पर हम पूरा जीवन चलते रहते हैं लौटने की बात ही नहीं आती और यहां तक कि शरीर वृद्ध हो जाता है इंद्रिया काम नहीं करती पर मन वैसे ही सलाह करता रहता है फिर भी नहीं सोच पाता कि
चलो अब हुआ पूरा जीवन की शाम अब तो राधा राधा जब कर अपना काम बना ले लेकिन नहीं बूढ़ा है फिर भी शराब पीता है बूढ़ा है फिर भी गंदी बातें देखता है बूढ़ा है फिर भी गंदी चेष्टा करता है बूढ़ा है फिर भी नहीं सोच रहा कि मुझे मरना है और भगवत प्राप्ति का अब की उपाय कर लू इतना जीवन रह गया यह क्या है यह मन का केवल खेल है वह अपने मन के गेम में फंस गया निकल नहीं पा रहा है अच्छा इसमें हो कि चलो मन सुखी रहेगा तो भी नहीं आप जितना गलत करते जाओगे उतना वो नकारात्मक सोचे पैदा करता चला जाएगा और उसका परिणाम ये आएगा कि आपको डिप्रेशन में पहुंचा देगा मतलब किसी भी तरह से इस चैन नहीं लेने देगा तो इसको लाना तो भगवान की शरण में पड़ेगा तभी शांति मिलेगी तभी सुख बहुत गंदा बहुत गंदा बहुत नीच है और यह बहुत उत्तम है यह अगर सही रास्ते को पा जाए तो दूसरे के लिए अपने प्राण दे सकता है परहित के लिए अपने प्राण दे सकता है यह भगवान से मिला सकता है यह सब सुख दे सकता है बस इसको गलत ढंग से जो प्रयोग होना शुरू हुआ है इसका यह बंद कर दे
वही बहादुर है देख देखो विरक्त मार्ग एक अलग होता है लेकिन गृहस्थी में तो एक धर्म पूर्वक विषय सेवन की मर्यादा है ना तो आप धर्म पूर्वक देख लो अगर आपको अपनी पत्नी में अपने पति में सुख नहीं मिला तो विश्व में कहीं सुख नहीं मिलेगा क्योंकि है लही तो आपको सीमित हो जाना चाहिए ना लेकिन ऐसा नहीं होता हम धर्म विरुद्ध बढ़ते चले जाते हैं जो हमारा पाप बनता जाता है और हम क्लेस होते जाते हैं इसलिए हमें लगता है बहुत अच्छे अभी सत्संग के प्रभाव पड़ रहे हैं तो हम निकल
चले गंदी बातों से हम निकल चले इस माया के फसाओ से नहीं तो धोखा ही धोखा पूरी जिंदगी व्यतीत हो जाती है भोगते भोगते हर इंद्रिया सब नष्ट होती जा रही फिर भी भोग इच्छा य है क्या समझो ना पूरा जीवन हमको बेवकूफ बनाया जा रहा है गौर से देखो पूरा जीवन नहीं बेवकूफ बलाया जा रहा एक बार और देख लेते हैं इसमें हमारा पूरा जीवन जा रहा है सुख तो नहीं मिला पर एक बार ऐसे देखते हैं शायद इस पद्धति से देखते हैं ऐसे भोजन बनाते हैं ऐसे यह भोगते हैं ऐसे यह देखते ऐसा फसाओ करके
रोज हमको गिराता है रोज हमको मन भ्रष्ट करता है कभी नहीं कहता कि एक बार भगवान से मिलू क्या कभी उसका मन नहीं होता इसको तो जबरदस्ती लगाना पड़ता है इसको भगवान में लगाने के लिए भी भोगों का प्रलोभन देना होता है तब ये भगवान में लगता है धीरे-धीरे यह भोगी मन भगवान में भी लगने के लिए तैयार तो भोग के लिए देखो भगवान को मना लोगे ना तो बढ़िया व्यवस्था बन जाएगी चक जो चाहोगे सब हो जाएगा जो चाहेंगे भगवान दे दे बहुत मन बेवकूफ बनाता है इसलिए हमें लगता है मन की बेवकूफी से बचना चाहिए एक आया था भगत ला उसने कहा भगवान से मैं भजन करूंगा सब करूंगा लेकिन एक लाख सुंदरियां स्त्रिया चाहिए गजब का दिल है तेरा गजब का दिल है यार जिनके एक है ना वो कभी-कभी एक आलत में ऐसे बैठ के बैठते इसीलिए मल की कही में मत रखो बहुत बड़ा भूत है ये परेशान कर देगा नष्ट कर देगा इसे सत मार्ग में लाओ भगवत मार्ग में लाओ तभी आनंद की इसकी केवल चाल है यह नहीं यह यह नहीं यह व है कहीं नहीं पक्का समझ लीजिए यह हमारे को भ्रम पैदा करता कुछ नहीं कुछ
नहीं है नाम जप करो सत्संग करो धर्म पूर्वक विषय भोगो हम मना नहीं करते एक उसे सीमा में रख के भोगो धर्म में तो उससे क्या होगा तुम्हें घृणा हो जाएगी धर्म पूर्वक विषय भोगने से घृणा हो जाती है कि यार और जो ये व्यसन करके और फिर इधर उधर मन तो पाप के कारण बुद्धि ठीक निर्णय नहीं देती और बुढ़ापे तक पापा आचरण फिर दुर्गति को प्राप्त होते हैं अभी समय है अभी मन को समझा लो मन को सम यही पांच भोग है शब्द स्पर्श रूप रस गंध इसी में मनुष्य फसा है और इन्हीं भोगों से हमारी दुर्गति हो जाती है बोलो अभी तक फाइनल में अगर बोला जाए तो अभी तक क्या है अपने पास कोई अनुभव है क्या बस एक ही है कि एक बार और चांस मिल जाए बस किसी भी विषय का मतलब किसी भी विषय का मन में हर बार यता कि अब की बार लेकिन कभी अबकी बार पूरी नहीं हुआ तो इसको रोकना जरूरी है कि भजन साधन धर्म पूर्वक विषय सेवन और समाज की सेवा एक कभी एक बार ऐसा करके देखना कोई बूढ़ा ऐसा भूखा प्यासा फुटपाथ में पड़ा हो उसको कभी अपने घर लाना नहलाना लाना कपड़े पहनाना भोजन पवा
फिर वो जब तुम्हारी तर तरफ देखेगा तो तुम्हें जो सुख होगा वो जिंदगी में किसी भी भोग में नहीं मिला होगा आप लिख लेना हमारी बात कभी कोई बीमारी से तड़प रहा हो किसी के सेवा का वहां कोई अवसर नहीं है व आप सेवा का अवसर देकर उसे आप स्वस्थ करो आप अस्पताल ले जाओ फिर जो आपको सुख मिलेगा हम आपको कैसे बताएं वो भगवान का आशीर्वाद होता है जब कोई बूढ़ा कोई बीमार कोई असहाय और जब आप उसकी सहायता करते हो तो उसके हृदय से जो आशीर्वाद वो सुख जो मिलता है जैसे हम आपको एक एक दिन करके देखना तुम अपना भोजन बढ़िया जो है कोई ऐसे भूखे को खवा देना जो भूखा बैठा हो और ऐसे जल्दी जल्दी और आप देखो उसको पाते हुए और उस दिन आप वो भोजन ना पाओ उसे पवा दो तो आपको जो सुख मिलेगा वो 56 प्रकार के भोग पाने में भी कभी सुख नहीं मिला होगा वो सुख परहित करने से दूसरे को सुख पहुंचाने से जो हृदय शीतल होता है वो कभी किसी से नहीं होता इसलिए मानव जीवन के लिए मन को थोड़ा विरुद्ध जो चलने वाला है उसके विरुद्ध आप बनो उसे सत मार्ग में लगाओ अब देखो आजकल
ऐसी बुद्धि बिगड़ गई कि अपने पूज्य माता-पिता को ही बच्चे दुख दे रहे हैं महानंदा थप्पड़ मारना क्या या आज के जवान अपने माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं अगर थोड़ा भी अध्यात्म से जुड़े होते तो मुझे लगता है शायद ऐसा नहीं करते नहीं ना धर्म से जुड़े होते अध्यात्म से जुड़े हु ऐसे माता-पिता तो भगवान होते हैं उनकी आंखें नहीं उनको नहला धुला हो किसी मंदिर जा जाने की और जरूरत नहीं उनको भोग लगा उनको पवाओ उनका जो आशीर्वाद है लोक परलोक तुम्हारा सब बना देगा लेकिन जब अध्यात्म से नहीं जुड़े तो लगता है कौन इनको तो ये क्या है यह है मन का वो पापी मन देखो कैसे पाप कराता है कैसे नेगेटिव चलाता है कि अब ऐसे पुत्रों की क्या दुर्गति होगी तो कभी अगर ऐसा ऐसा अवसर किसी को मिले कि कोई फुटपाथ में ऐसे तड़प रहा हो तो आपको जरूर लगेगा कि काहे को बोझा ले लेकिन आप उसका अगर बोझा ले ले तो भगवान तुम्हारा बोझा ले लेंगे जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं जब ऐसे दन दुखी आशीर्वाद देते ना उसे भगवान का आशीर्वाद समझना है और जब
माता-पिता अंदर से साप देते ना कि भोगो ग तो फिर भगवान भी नहीं टाल पाते फिर भोगना पड़ता है इसलिए धर्म से चलो किसी का अपराध मत करो गंदी बातों में मन को ना जाने दो खूब नाम जप करो यही मनुष्य जीवन का लाभ लो मनुष्य जीवन एक दिव्य जीवन है इसका एक दिव्यता का लाभ है समझ रहे हैं आप
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- स्वर्ग में वो कौन-सा सुख है, जो धरती पर भी नहीं है? — पारस कोहली जी नई दिल्ली से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी सुख और दुख एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। मेरा प्रश्न यह है कि वह कौन सा सुख स्वर्ग में है…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1401 — विक्रम पांडे जी मिर्जापुर से श्री हरिवंश महाराज जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपका सत्संग सुनता हूं और कृपा का अनुभव है महाराज जी…
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…