भगवान ने यह काम, क्रोध, लोभ, विकार हमारे अंदर क्यों डाले ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
महाराज जी हम सब परमपिता परमेश्वर के अंश हैं वही हमारे माता-पिता है हम जानते हैं कि माता-पिता हमारा कभी बुरा नहीं चाहते गुरु जी परमेश्वर ने हमारे अंदर काम क्रोध माया लोभ लालच जैसे विकारों क्यों डाले उस तो सब जानते हैं कि इस विकारों से भरा शरीर हानि ही होगी इसकी और उसके साथ पाप आचरण करेगा तो महाराज जी आपको एक गाड़ी दे दी है गाड़ी में ब्रक भी है और गाड़ी में रेस भी है उस गाड़ी को आप गलत चलाते हो या सही चलाते हो य आपके ऊपर छोड़ दिया है मार्ग दो रख दिए हैं खेल है उसका आप गलत मार्ग में ले जाते हो अच्छे मार्ग में ले जाते हो आप उनके ऊपर दोषारोपण क्यों करते हो शौचालय में बदबू होती है दुर्गंध होता है अपवित्र होता है पर हमारे घर का एक हिस्सा है ना है ना रसोई जैसे हिस्सा है जैसे शौचालय भी हिस्सा है ना ले गंदी चीज ना होती तो हमारा क्या पूरा दिनचर्या सही ढंग से हो पाएगी अगर हम रसोई में पवित्र भोजन बनाते हैं तो जो बचा हुआ अन्न मल रूप में है वह शौचालय में जाता है दिन है तो रात्रि जरूरी है 100 परट
जरूरी है अगर रात्रि ना हो तो वो लोग क्या हालत हो जाएंगे अशांति पैदा हो जाएगी क्योंकि रात्रि का एक अपना प्रभाव प्रकृति के ऊपर है रात्रि का एक अपना प्रभाव जीवन के ऊपर है भगवान ने संपूर्ण पूर्ण सृष्टि में गुण दोष में रचना पूरी की है तुम्हारे ही अंदर नहीं की पूरी सृष्टि में की है और दो विभाग करके रख दिए हैं और दोनों को गुरु रूप में स्पष्ट वर्णन कर रहे हैं अगर उन्होंने खेल रचा तो इस खेल से निपटने के लिए पूरी युक्तियां दी है गीता जी भागवत जी संत जी गुरु जी महात्मा जी के रूप में वही तो उपदेश कर रहे हैं अब आप किस मार्ग में चलना चाहते हो सत मार्ग में आनंद के मार्ग में तो आप दमन करो इन शत्रुओं का खेल है आप आ निकल जाओगे अब क्यों रचा तो अब उसका उत्तर हम दे रहे हैं कोई भगवान और नहीं तेरे अंदर है तू ही है तू अपने आप से अपने आप में फस गया है देख अनुभव करके कोई और है ही नहीं तू ही तू है है तुम्हारे पास उत्तर है तुम्हारे पास जानकारी इसकी कि तू वही है एक ढांचे में अपने को मान लिया केवल ऐसे कल्पना में
बोल रहे सुनी सुनाई बात कि मैं उसका अंश हूं जानते हो उसका अंश वही है तू जानत तु तुम हो जाए किसका खेल है तुम्हारा कौन बंधा है तुम किससे बंधे हो अपने भ्रम से कोई नहीं आप देखो स्वप्न में बाजार पूरी देखी मारने पीटने वाले देखे या पूजने व्यवहार करने वाले देखे कोई और था क्या केवल तू ही था पूरी बाजार तू बना था शत्रु तू बना था मित्र बना था और जब जगा तो केवल तू ही था कुछ नहीं था ऐसे पूरी सृष्टि है बच्चा तर्क से नहीं यह श्रद्धा से जाना जाता है मत्ता पर तरम नानत किंच दस्ती धनंजय मेरे सिवा किंचन मात कुछ नहीं तो ना सत है ना असत है केवल कृष्ण है ये अनुभव यही गेम रचा है निकल जाओ तो मुक्त नहीं निकल जाओ तो भोगो बस खेल है क्यों रचा किसने आपने आप ही हैं आपके सिवा कोई नहीं बच्चा हमारी बात को ईमानदारी सत्यता से समझ लोगे तो फसो नहीं हीटर में गर्मी फ फेंकता है हैलोजन में प्रकाश फेंकता है एसी में ठंडी फेंकता है लेकिन उसका पावर एक ही होता है पावर एक ही है ना यंत्रों के प्रभाव से करणों के प्रभाव से उसका अलग अलग
रूप लेकिन पावर एक ही है बच्चा वही पावर अंश और अंशी के भाव से कहा जाता है वही पावर जिसे कृष्ण कहते हैं वही वही वही वही दूसरा नहीं अब उस जीरो वाट का तो जीरो वाट का हजार वाट का तो हजार वाट का बिजली तो बराबर संचारित हो रही वह किसी वाट का मतलब नहीं रखते तुम्हारा करण यंत्र कितने पावर का बोले जीरो वाट का तो बिजली जीरो वाट का प्रकाश दे रहे अगर वह अपने स्वरूप में आ जाए तो फट फट फट सब फोड़ के फेंक देना तो वही है यह फट फट सब खत्म हो जाएगा स्थूल सूक्ष्म कारण
अज्ञान सब तू वही है जानत तुम्ह तुम्ह सूत्र को समझिए अगर सोई जाने जही देव जनाई तो जानत तुम्ह अब किसको दोष दोगे आप ही थे आपका ही भ्रम था स्वपने में लाठी चल रही थ जाके किसको रिपोर्ट लिखा होगे हमें बताओ बिल्कुल जागृत में ऐसे ही है बच्चा उमा कह मैं अनुभव अपना शंकर जी का अनुभव झूठा होगा क्या सत हरी भजन जगत सब सब बच्चा यही बात जाल के पर आनंद में निव आ जाता है अब आप दोष देगे भगवान ने काम क्रोध लोभ मोह क्यों रचा तो हमको बताओ स्वप्न में जो हो रहा था उसमें क्या था कुछ था क्या बच्चा तुम्हारे सिवा कोई था तुम्हारे सिवा कोई था क्या पर सब कुछ था अगर स्वप्न में पिटाई हो रही तो सच्ची व सही पिटाई लगती कि मरा नहीं लगता व आंख ना खुले तो कभी-कभी ऐसे स्वप्ने देखे गए कि चाकू पूरी पर आंख खुल गई तो लगा या बच गए यार ले यार ये स्वप्न था यार बच गए एकदम और कुछ नहीं था ना चाकू था ना चाकू वाल हम ही थे चाकू और हम ही थे चाकू मारने वाले और हम ही थे जिसके ऊपर चाकू मारा जा रहा है हमारे सिवा कुछ नहीं था मानते हो इस बात को
स्वप्ने की बात को तो मानते होगे आपके सिवा कुछ नहीं था म आपकी ही कल्पना आपके विविध रूप दिखाई दे रहे थे यह जगने पर पता चला ना ऐसे ही अभी अज्ञान में हो जब ज्ञान में जगो ग तो यह प्रश्न खत्म हो जाएगा कि भगवान ने काम क्रोध क्यों रचा भगवान क्यों ऐसा किए उनको सरल भाषा में बताया मानो मान के दूसरे रूप में कि पिता ने पूरी सब व्यवस्था की अब दो मार्ग है एक जा रहा गलत और एक जरहा सही तो तुम अपनी गाड़ी तुम्हें पेट्रोल भी दिया ब्रक भी दिया ड्राइविंग भी आपके हाथ में अब अपनी गाड़ी इधर क्यों ले जाओ इधर चलो ना परमानंद का मार्ग है इन काम क्रोध आदि पर विजय प्राप्त करके वदा आनंद में डूबो भगवान ने दिया है अगर ऐसा ना होता तो आप किसके पास आए हो भगवान के दास के पास ही तो आए हो किस मार्ग इसी मार्ग के लिए तो आए हो अगर इसी मार्ग में यह शरीर चल सकता है तो क्या आपका शरीर नहीं चल सकता क्या आपका नहीं चल सकता क्या आप भगवान के अंश नहीं हो क्या कपड़ा संत होता है संत तो स्थिति होती है ना वो तुम भी ला सकते हो पेंट शर्ट में
संत हो सकते हो मुझे लगता है बच्चा भगवान में दोषारोपण ना करके हम अपने अज्ञान को दूर करने के लिए भगवान की शरण में होकर नाम जप करें तो बात बन जाएगी कोई और भगवान नहीं बच्चा नहीं है तुमसे सच्ची कहते हैं बच्चा कोई और भगवान नहीं यह केवल शरीर बल्ब समझ लो इन में जो तेज है वही है वही छुपा छुपी का खेल खेल रहा है देखो इस साढ़े तीन हाथ के शरीर में आप अपने को जाने बच्चा नहीं जाने देख लो यह शरीर आप का कपड़ा है आप नहीं हो और आप हो कहां इतने में हो ना एक सरा मशीन
बता सकती ना अल्ट्रासाउंड बता सकती ना सिटी स्कैन बता सकता है भजन करो तो आप अपने आप को ढूंढ लोगे अपने आप को ढूंढ लिए तो प्रभु को ढूंढ लिया प्रभु को ढूंढ लिया तो अपने आप को ढूंढ लिया एक खेल ऐसा है करो चलो सत मार्ग में चलो नाम जप शुरू करो कोई नशा ना करो गंदे आचरण ना करो अभी ठीक होने लगोगे अभी सब प्रश्न समाप्त हो जाएंगे आपको कोई संशय लग रहा है इसमें इसलिए हम बिल्कुल सरल भाषा में प्रश्न का उत्तर विस्तार से देते हैं क्योंकि आज आजकल तार्किक बुद्धि है तो उसको तर्क के द्वारा इसलिए और कोई नहीं बचा सच्ची मानना कोई नहीं है वही है चीटी में आराम से सो रहा है और पूरे ब्रह्मांड को एक रोम कूप में रख रहा है वही तुम्हारे अंदर है तुम और वो वो और तुम ऐसे समझो जैसे शीशा और हम हम और शीशा शीशे वाला कौन शीशे में जो दिखाई दे रहा है सामने शीशा रखा है वो कौन हम अब हम शीशे वाला अलग माने और अपने को अलग माने तो फिर कहा जाएगा कि तुम्हारी बुद्धि ठीक नहीं नहीं जो शीशे में वही हमारे अंदर क्योंकि हम ही तो दिखाई दे रहे हैं
जो ऐसे बच्चा जो मंदिर में वो यहां अगर यहां नहीं तो कहीं नहीं घूम आओ जाओ कर आओ दर्शन हमें बताओ कि हो गया भगवत साक्षात्कार यहां कर लो तो कण कण में झाकी भगवान की किसी सूझ वाली आंख ने पहचान की ये बच्चा परमार्थ है बुद्धि गत तो नहीं जाना जा सकता ना संतो की बात समझने के लिए साधना करनी पड़ेगी तब समझ बच्चा बिल्कुल कुछ काम भी भगवान है क्रोध भी भगवान है लोभ भी भगवान है मोह भी भगवान है जब सब कुछ भगवान बना हुआ वही भगवान बना हुआ है अधर्म पूर्वक सेवन करोगे तो दूसरा दंड मिलेगा अब जैसे लोभ भगवान कैसे हो सकते हैं तो हमें नाम का लोभ राधा राधा राधा अधिक से अधिक जमा करें हमें भक्ति का लोभ सेवा का लोभ हमारे को दूसरे को सुख पहुंचाने का लोभ तो लोभ का प्रयोग कहां हो रहा है काम अगर काम बुरा है तो हम सब पैदा काहे से हुए हैं काम से पैदा हुए बुरी जगह उसका प्रयोग ना करो बुरा है क्या उसका प्रयोग बुरा है अब जैसे काम अपनी पत्नी से तो धर्म युक्त है दूसरी माता बहन के तो पाप कर्म हो गया क्रोध अगर हमारे अंदर थोड़ा अपने
बच्चों के प्रति को आता समाज में किसी असभ्य के प्रति उसके सुधारने के काम में आएगा बहुत विनम्रता से नहीं कभी-कभी काम कभी-कभी रोस तो उसकी जरूरत है आप देखो नहीं जरूरत है भगवान रामचंद्र जो तीन दिन उपवास करके सब द्र के सामने बैठे नहीं आया अब लक्ष्मण जी ने कहा प्रभु ये जड़ है ऐसे समझेंगे नहीं भगवान ने कहा लाओ लाओ सारंग धनुष चढ़ाई प्रत्यंचा चढ़ाया अग्नि बाण अभी सोख लेता हूं सत्सन विलय कुटन सन प्रीति सहज कृपण सन सुंदर नीति ममता रत सन ज्ञान कहानी अति लोभी सन बति बखानी लोभ समझी में हरि कथा उसर बीज बय फल जथा लाभ लक्ष्मण बान सरा स नानु शोष वारिद विषिक सानु लाओ अभी इसको शो अलो मैं इतना कहना था कि ब्राह्मण रूप धर के बड़ी थाल में रत्ना आद लेके तीन दिन उपवास धरे थे पहले आ जाते तो इज्जत रह जाती अब तो कहीं कहीं क्रोध आवश्यक है कि नहीं क्रोध भगवत स्वरूप होता है कहीं कहीं कि नहीं तो हम उसका बुरी जगह प्रयोग क्यों करें कोई भी अच्छा मोह अगर मोह ना हो तो हम अपने माता-पिता पुत्र परिवार का पोषण कैसे करें वह मोह
करा रहा है मोह पोषण करा रहा है पर हम अपने परिवार का पोषण करने के लिए दूसरे परिवारों का नाश क्यों करें अब एक दूध बेचने वाला केमिकल मिलाकर अपने बच्चों के पोषण के लिए दूसरे बच्चों की जान घातक वस्तुएं दूध में मिलाकर बेच रहा है अब उसे यह क्या है मोह का दुरुपयोग ठीक है मोह का सदुपयोग करो भगवान सब में विराजमान है सब शरीरों को भगवान का मंदिर मान के चाहे पत्नी को चाहे पुत्र का धर्म के अनुसार सेवन करो सब बढ़िया है कुछ बुरा नहीं बुरा करो तो आपका विचार बुरा है ले कुछ बुरा नहीं है कामदेव जो प्रकट हुआ तो क्या नाम था जानते हो प्रद्युमन प्रद्युमन जी साक्षात कामदेव के अवतार है भगवान ही तो है बच्चा हम उसका बुरा प्रयोग क्यों करें अगर काम ना हो तो पत्नी से प्रीति ना होगी पत्नी से प्रीति ना होगी तो संतान उत्पन्न नहीं होगी भला य सृष्टि चलेगी सृष्टि में काम की आवश्यकता है तो काम कौन धर्म युक्त काम अब उसे पाप से अधर्म में करो तो तो आपकी रुचि हो गई ना फिर तो दंड भोगना पड़ेगा आपको ऐसे बच्चा भगवान ने बुरा कुछ नहीं
बनाया संपूर्ण सृष्टि की आवश्यकता जैसे हमने पहले कहा कि रसोई की आवश्यकता है तो शौचालय की भी आवश्यकता है दिन की आवश्यकता है तो रात की भी आवश्यकता है दैवी संपदा है तो आसुरी संपदा भी है रचना हो रही तो विनाश भी जरूरी है जरूरी है पक्का जरूरी है व हम मोह के कारण कहते हैं अगर विनाश ना होता तो बहुत जरूरी है बच्चा अगर सोचो मरना बंद हो जाए और 10 20 50 पीढ़ी से बुड्ढे बैठे होते बाबा पर बाबा पर बाबा सब 50 स बुढे बैठे हुए हैं और मरना किसी को है नहीं अब बोलो हालत क्या होती तुम्हारी नहीं है ना विनाश लीला जरूरी आप सच्ची वालो जिसे आप बुरा मानते हो वोह जरूरी है जैसे रचना जरूरी ऐसे पालन जरूरी है ऐसे सार जरूरी तो बच्चा भगवान को दोष ना देक उनकी शरण में होकर यदि नाम जपा जाए तो बढ़िया आनंद हो जाएगा और यह समझ में आ जाएगा कि कहीं कुछ बुरा नहीं है मेरे विचार बुरे हैं अगर मेरे विचार ठीक हो जाए तो देखो गोस्वामी जी तुलसीदास जी कहते हैं सिय रामम सब जग जानी करू प्रणाम जोरी जुग पानी जड़ चेतन जग जीव जत सकल राम में जानी
कहां काम है बच्चा विचार में देखो तो वो भी राम है तुम देखो तो तुम्हारी दृष्टि अगर राम में तो राम गोपी जन कहते जित देखू तित श्याम मई अब श्याम श्याम उनको दिखाई दे रहे हैं और हमको काम दिखाई दे रहा है ड़ हमको इसको ठीक करना है यह ठीक हो जाए तो सब बढ़िया हो जाएगा कुछ बुरा नहीं है कुछ बुरा नहीं बच्चा क्योंकि भगवान ने रचा उनकी मौज है अमृत का महत्व जहर से है दिन का महत्व रात्रि से है साधुदा का महत्व दुष्टों से है नहीं कौन जानेगा साधु किसे कहते हैं जब दुष्ट
उनके ऊपर दुष्टता करते हैं तब उनकी साधु प्रकाशित होती दुष्टता रूपी झंडे पर साधु रूपी झंडा फहराता है दूसरा जब दुष्ट उनके डंडे बनते हैं इतना सताया गया फिर वो भगवान की स्थिति में रहा अरे बोले तो महात्मा है यह किसने प्रमाणित किया दुष्ट ने सब कुछ जरूरी है बच्चा सब कुछ जरूरी भगवान को आप यह नहीं कह सकते कि यह गलत बनाया आपने क्योंकि आपकी सलाह की जरूरत नहीं भगवान नहीं अगर सब व्यवस्था है तो परमाणु बम भी है ले विनाश की व्यवस्था भी बहुत जोर की है नहीं भारत आप
अपने दे अगर विनाश की व्यवस्था भारत से हटा दी जाए तो अधूरा हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा असमर्थ हो जाए कि नहीं हो जाएगा जितनी जोर की विनाश की व्यवस्था होगी उतनी जोर का देश माना जाएगा नहीं माना जाएगा बोले बड़ा पावरफुल देश है बोले क्यों बोले दो परमाणु बम है चार परमाणु बम है बड़ा पावर तो विनाश की सेवा त्रिलोचन भगवान शिव पालन की सेवा स्वयं श्री हरि और रचना की सेवा भगवान ब्रह्मा यार बच्चा हमें लगता है सब ठीक है हमारा दिमाग ठीक हो जाए बस यह बात बोले सृष्टि कैसी तुम्हारी दृष्टि जैसी वैसी सृष्टि एक को राम दिखाई दे रहे एक को श्याम दिखाई दे रहे आपको काम दिखाई दे रहे हैं मतलब क्या क्या है इसमें बोले चश्मा जैसा चढ़ा वैसा दृश्य दिखाए लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल और लाली देखन मैं चली तो मैं भी हो गई आप बताओ दूसरा बचा कौन यार बड़ा मस्ती का मा परमानंद का मार्ग है अब ये यहां से परमानंद यहां बिगड़ा है तो सब बिगड़ ही है फिर तो गड़बड़े ही बच्चा ठीक है
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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