राधा रानी के इन 28 नामों के पाठ से हर मनोकामना पूरी हो जाएगी !
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
श्री कृष्ण के द्वारा इनकी आराधना होती इसलिए इन्ह श्री राधा कहते हैं श्री कृष्ण सदैव आराधना में तत्पर रहते हैं श्री कृष्ण का सदा समा आराधन करते हैं यह गां धरवा जितनी श्री कृष्ण पटरा निया द्वारिकाधीश की हैं ये सब इनके अंश से प्रकट हुई है श्री राधा और रस सागर श्री लाल जू एक प्राण एक मन दो तन एक रुचि एक स्वभाव एक वय लीला के लिए दो बने हुए हैं यह मैं बहुत गुप्त बात बता रहा हूं यह जन साधारण को मूर्त और महामूर्ख को कभी भी इसका श्रवण मत कराना जो राधा किशोरी के इन 28 नामों का जप कर ले तो विश्व की कोई भी ऐसी कामना नहीं जो पूर्ण ना हो जाए अनुभूत विषय आज का नहीं यह वृंदावन आने के पहले का क्योंकि पूज्य भाई जी श्री हनुमान प्रसाद पुदार जी के आदर्श में हम चल रहे थे उनको जैसा निर्देश कर रहे यह 28 नाम जिव्या पर नाचते रहते थे प्रारंभ में जो हित धाम से जुड़े उनको पता हो गया 28 नाम कभी कभी हम उच्चारण कर देते थे राधा रासे शवरी रम्या कृष्ण मंत्रा देवता सर्वा द्या सर्व वंद च वृंदावन बिहार वृंदा राध रमा शेष
गोपी मंडल पूजिता सत्या सत्य परा सत्य भामा श्री कृष्ण वल्लभा वृषभानु सुता गोपी मूल प्रकृती शवरी गांधर्व राधिका रम्या रुक्मिणी परमेश्वरी परात्पर तरा पूर्णा पूर्ण चंद्र निभाना भुक्ति मुक्ति प्रदा दे भ व्याधि विनाशिनी य 28 नाम है अनुभूत इन 28 नामों के मंत्र है इनका जो पाठ करे चाहे लौकिक कामना चाहे पारलौकिक कामना बहुत जल्दी आपको परिणाम दिखाई देगा य राधा किशोरी ज के 28 नाम श्री राधिक उपनिषद में ब्रह्मा जी सनकादिक उपदेश कर रहे हैं परिणाम फल स्तुति में लिखा है भुक्ति मुक्ति प्रदा भोग चाहिए तो भोग मिल जाएगा मोक्ष चाहिए तो मोक्ष और भव्या विनाशिनी आवागमन चक्र से मुक्ति हो जाएगी हर व्याधि विनाशिनी इस संसार चक्र में जितने रोग है सबको शासन में रखने के लिए य नाम पर्याप्त है तुम्हारे ऊपर इनका प्रभाव नहीं पड़ पाएगा येय 28 नामों का जो पाठ करता है व जीवन मुक्त महापुरुष हो जाता है भगवान ब्रह्मा जी ने उपदेश किया नकाद को राधा राश शवरी रम्या कृष्ण मंत्र आधि देवता सर्वा द्या सर्व वंद्य वृंदावन बिहारिणी वृंदा
राध रमा अशेष गोपी मंडल पूजिता सत्या सत्य परा सत्य भामा श्री कृष्ण वल्लभा वृषभानु सुता गोपी मूल प्रकृति ईश्वरी गांधर्व राधिका आर्या रुक्मिणी परमेश्वरी परात्पर पूर्णा पूर्ण चंद्र निभाना और भुक्ति मुक्ति प्रदा भव व्याधि विनाशिनी 28 नाम मात्र जपने से समस्त कामनाओं की पूर्ति यह तो हम अल्लाद का वर्णन कर रहे हैं इनकी संधिनी शक्ति है जो भू सया आसन सेवा की सामग्री सब रूप धारण करती है धाम कुंज निकुंज जब हमारे प्रभु मृत लोक में अवतार धारण करते हैं तो अवतार की पूरी व्यवस्था भूमि की व्यवस्था हो सब चिदानंद भूमि माता पिता परिकर यही सब संधिनी शक्ति तैयार करते अवतार की कारण भूता संदिनी शक्ति है ये क्षेत्र ज्ञ शक्ति है इनकी इच्छा शक्ति के अंतर माया शक्ति है यह सतोगुण रजोगुण तमो मय है यह बहिरंगा शक्ति है यह जगत की रचना करती है यह अविद्या रूप है यह जीव को बंधन में डालकर दुख भगवा है भगवान की लीला शक्ति भगवान की क्रिया से अनंत शक्तियों के स्वामी जो इस 28 नामों को राधा जी के सुनता है उसके जितने दोष नष्ट हो
जाते हैं जो आवृति है वो वृत वान हो जाता है जैसे वायु स्पर्श करती है तो गर्मी का दुख मिट जाता है ऐसे ही जो 28 नामों का जाप करेगा तो सतोगुण रजोगुण तमोगुण माया जनित बंधन का जो क्लेश है वो नष्ट हो जाएगा अरे कुछ ना याद हो राधा राधा राधा पर्याप्त है सबसे पहला राधा राधा श्री लाल जू की श्री कृष्ण की पूजा का अधिकार उसी को प्राप्त होता है जिसने राधा जू का नाम लिया राधा जू के चरणों की बंदना की वही श्री कृष्ण पूजा का अधिकारी है श्री किशोरी ज की पूजा किए बिना
श्री कृष्ण की पूजा का वो अनाधि कारी है अधिकार ही नहीं माना जाता जिसने किशोरी जी की पूजा नहीं की कभी प्रेम प्राप्त नहीं कर सकता श्री कृष्ण प्रेम प्राप्त नहीं कर सकता बिना राधा जू की कृपा के इसलिए वैष्णव मात्रों का कर्तव्य जितने भी वैष्णव है कि वह श्री किशोरी ज का नाम ले किशोरी जी की अवश्य पूजा करें जिससे लाल जू प्रसन्न हो जाते हैं श्री राधा श्री कृष्ण की आत्मा है कैसे कोई आत्मा को अलग कर सकता है जो इस रहस्य को जानता है वही इस रस का अधिकारी है इसीलिए प्रेमी भक्त जनों ने प्रेम रस का आदर्श श्री राधा जी को माना है श्री कृष्ण तो प्रेम रसा स्वादी है रस दात्री तो श्री प्यारी जो है मांगत लाल लाड़लो नागर प्रगट भई दिन दिन की चोरी श्री कृष्ण को सर्वा विध आनंद समुद्र को आनंद प्रदान करने वाली श्री लाडली जो है नित्य रासे शवरी नित्य निकुंज शवरी श्री राधा किशोरी की प्रति जो जरा भी भेद बुद्धि करता है वह कभी भक्ति मार्ग में तो चल ही नहीं सकता उसके चलने का अधिकारिक होख जाता है और श्री कृष्ण की अर्चना
करने का अधिकार कदापि नहीं कृष्णा या नाधिकयम बिना वैष्णव सकल तस्मा कर्तव्यम राधिका चन कृष्ण प्रणा दिका देवी तद आधीन विभूत रासे स्वरी तस नित्यम तया हीनो तिति रानो सकला कामा तस्मा राधे कीर्ति यदि राधा कहोगे तो श्री कृष्ण कभी जाएंगे ही नहीं आपके समीप ही रहेंगे और कृष्ण अर्चना का अधिकार उसी को है श्रीमद देवी भागवत कृष्णा चाया नाधार यतो राधार चन बिना वैष्णव सकले तस्मा कर्तव्यम राध कानम कृष्ण प्राणा दिका देवी तद अधीन विभय श्री राधा श्री कृष्ण की प्राणों
की अधिष्ठात्री देवी हैं कारण भगवान श्री कृष्ण राधा के अधीन है यह रासे शवरी भगवान रास बिहारी को अपने अधीन किए हुए हैं इनके बिना भगवान की सत्ता ही नहीं है कैसे कौन सा ज्ञान प्राप्त किया जाता है शास्त्रों से जिससे ऐसे महामहिम महिमा को ना जान कर के हम इधर-उधर भटकने लगते हैं संकटों में फंस जाते हैं हमारी बुद्धि संशय में फस जाती संशय संकट है श्री राधा के बिना भगवान की सत्ता ही नहीं हे शिव से मात्रा हटा दो शक्ति हटा दो क्या बचा साव शक्ति लगाओ शिव तो शिव
और शक्ति को कभी अलग किया ही नहीं जा सकता ऐसे ही प्रेम और राधा प्रेम बप प्रेम स्वरूप श्री कृष्ण और प्रेम का सर्वस्व सार राधा प्रेमाधार जो राधा के बिना श्री कृष्ण की सत्ता ही नहीं मैं राधा के बिला भगवान के बिला शक्तिहीन संपूर्ण कामनाओं की सिद्धि श्री कृष्ण आराध कों की भी राधा जू से ही पूर्ण होती है श्री राधा श्वेत चंपा कुसुम के सदस्य गौर वण करोड़ करोड़ शारदी सश के गर्भ का अपरण करने वाली एक साथ करोड़ करोड़ चंद्रमा शरद ऋतु के प्रकट हो तो उनकी भी चांदनी के गर्भ का अपरण राधा मुखारविंद श्री अंगों की असंख्य चंद्रमा की कांति झलम झलम हो रही है शरद ऋतु के खिले हुए कमल के समान अधर बिंब के फल के सदस्य कैसा सुंदर स्वरूप श्री राधा किशोरी का और दिव्य नील साड़ी धारण किए हुए है प्रसन्न मुखारविंद मनमोहन के नेत्र इनके नेत्रों में अर्पित है मुको तो भावती ठोर प्यारे के नैनन में प्यारो भयो चाहे मेरे नैनन के तारे श्री स्वामिनी जू नमस्ते परमेशा निरास मंडल वासिनी रासे स्वरी नमस्ते स्तु कृष्ण प्राणा िक प्रिय
नमस त्रैलोक्य जननी प्रसिद्ध करुणा वे ब्रह्म विष्ण वाद भीर देव वंद्य मान पदामिनी रूपे षष्टि मंगल डि के नमस्ते तुलसी रूपे नमो लक्ष्मी स्वरूपिणी नमो दुर्ग भगवती नमस्ते सर्व रूपिणी मूल प्रकृति रूपा त्वम भजामि वाम संसार सागरा दसमा दु धराम दयामय श्री रास मंडल वासनी परमेश्वरी श्री राधा जी है बड़भागी है जो इनको नमस्कार करता है ये रासे शवरी कृष्ण प्राणा अधिक प्रिय हैं श्री कृष्ण को अपने प्राणों से भी अधिक प्यारी है जितनी त्रिभुवन में मां है सब हमारी किशोरी जी के एक वात्सल्य समुद्र के एक अंश वात्सल्य से है
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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