Saar Ki Baat / 19-07-24/बस प्रभु पर भरोसा करलो पक्का जीत जाओगे !/ Shorts Compilation
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
भगवान का एक कमजोरी है वह भरोसा नहीं तोड़ते कभी भगवान भरोसा नहीं पक्का यह पूरे जीवन का अनुभव की बात बता रहे हैं भगवान कभी भरोसा नहीं तोड़ते भरोसे पर हो जाओ कि प्रभु अब आपका भरोसा है हमारे साधन भी आप हो हमारे साध्य भी आप हो मेरे से साधना तो बनने वाली नहीं जिससे आप प्रसन्न हो तो नाथ मेरे साधन भी आप हो साथ भी आप हो राधा राधा राधा सब बढ़िया काम बन जाएगा ठीक है भगवान के स्मरण से हर ग्रह विपरीत हो और भगवान का आश्रय भजन हो जाए तो सब ग्रह अनुकूल हो जाएंगे
और सब ग्रह अनुकूल हो और भगवान से विमुख हो तो कभी उसको स्वप्न में भी सुख शांति नहीं मिल सकती जो उपय कृष्ण चरण मन अर्पित तो करिह का नवग्रह रंक क्योंकि सब भगवत पार्षद है आज तक हमको एक बात पर विश्वास है कि यदि आप अच्छे कर्म करोगे नाम जप करोगे दूसरों को सुख पहुंचाओ ग तो बुरे ग्रह भी आपका मंगल ही करेंगे और आप दूसरों को दुख पहुंचाओ ग आचरण करोगे तो अच्छे ग्रह भी आपका मंगल कर देंगे हर ग्रह विपरीत बैठा हो और भगवान के आश्रित हो कोई अमंगल नहीं सता कहीं भी कोई है और नाम जप रहा है राधा राधा और सब कर्म प्रभु को समर्पित कर रहा है और अंदर से कि प्राण वृंदावन जीवन वृंदावन सर्वस्व वृंदावन तो यही आएगा कहीं भी शरीर छोड़ेगा तो यही आएगा श्री जी के चरणों में आएगा नाम में अपार सामर्थ्य है और कर्म समर्पण में निश्चित भगवान प्रसन्न हो जाते हैं जो भी हम कर्म करें पाप कर्म नहीं समर्पित होते धर्म पूर्वक करें उन्हें भगवान को समर्पित कर दे और नाम जप करें तो कर्म समर्पण और नाम जप क्योंकि कर्म किए बिना कोई एक क्षण रह
नहीं सकता अगर भगवान का लक्ष्य नहीं बनेगा तो पाप कर्म बन जाएंगे पाप कर्म बन जाएंगे तो बुद्धि पतित हो जाएगी और हमारा जीवन फस जाएगा माया में हमसे पाप कर्म ना बने सत्संग सुने नाम जप करते रहे बुद्धि शुद्ध और जो व्यापार आदि है हे प्रियालाल हे राधा वल्लभ लाल आपके चरणों में समर्पित करते हैं एक हम आपको अंदर की बात बता देते हैं किसी को साधना का बल होता है किसी को ज्ञान का किसी को योग का बल होता है और हम लोगों को राधा रानी का बल है हम कई बार बता चुके हैं कि
हरि हमारे प्रभु जो हमारे हैं जब हम बार-बार गलत करते तो उनको गुस्सा आ जाती है कि अच्छा आप तुमको हम दंड से सुधार लेकिन मेरी किशोरी जी को कभी गुस्सा नहीं आती नेक हो न रिस्क हो भूल हो न होत सकी रहत प्रसन्न सदा ही मुख से जब हरी जू लाल जू कि अब यह दुष्ट ऐसे नहीं सुधरेगा तो श्री जी फिर उनके ऊपर गुस्सा करती हमें बचाने के लिए तो ऐसी अलबली सरकार की हम शरण में है उन्हीं के वादे के अनुसार हम आपसे कह देते चिंता मत करो निश्चित भगवत प्राप्ति होगी क्योंकि श्री जी हमारी बहुत करुणामय है उन्हीं की णा पर विश्वास करके कहते अपने में कोई सामर्थ्य नहीं भारी विपत्ति में एक बार भी यदि नाम जपा है तो काम आ जाता है ये जो गजेंद्र था पूर्व जन्म का इंद्र दमन नाम का राजा था मनमानी ऐसे ही तपस्या करने लगा यह निषेध है यह बात जब अगस्त जी ने देखा तो इंद्र दिम से पूछा वो ऐसे तपस्या में बैठे थे पर कहीं ना कहीं भगवान का नाम जप करते खास बात खड़े हो किसने तुमको आदेश किया तपस्या के लिए किससे तुमने संस्कार कराया उनका किसी से नहीं
और फिर भी मैं आया तो हाथी की तरह बैठा रहा जा गजेंद्र योनि को प एक दिन पानी ने गए तो ग्राह ने पकड़ लिया पैर जलचर जीव जल में बलवान होता है इनकी हाथी हाथिया इनका सहयोग करती रही वो छोड़ के चली गई कि जब नहीं कोई बचने का उपाय है अब वो घटता हुआ उनको अता जल में ले गया अब बस शूर्ण इतनी रह गई त उनको याद आ हरि का नाम जप किए थे ना पीछे भाव को भावन खाल स नाम हरि देही पुकारा सुदर्शन चक्र तत्काल प्रकट हुआ ले ग्राह का उद्धार फिर गजेंद्र को भगवान ने पकड़ कर बाहर निकाल भारी विपत्ति में तुम्हारे काम आ जाए अन लगे ना लगे अपने बचाओ पक्ष के लिए अपने कल्याण के लिए राधा राधा राधा कृष्ण कृष्ण कृष्ण बिना भगवान का नाम जप कि कर्म होंगे कर्म योग नहीं एक लोहा जंग जंग लगी हुई मार्ग में पड़ा है सबके पैरों की ठोकर लग रही और पारस मणि छुआ दी जाए सोना बनके देवताओं का मुकुट बने जगा कंकण कुंडल बन जाएगा लोहे में सामर्थ्य नहीं थी ये पारस म य राधा नाम य कृष्ण नाम भगवन नाम य पारस जैसे दो लकड़ियों के घर्षण से अग्नि पैदा हो जाती है
ऐसे हम जबान पर जब नाम जप करते हैं राधा राधा राधा तो हमारे हृदय में ज्ञानागुरु ना मत झुकना मत टूटना मत हालत थी कांधे पर झोली हाथ में श्री जी रहने का ठिकाना नहीं खाने का ठिकाना नहीं श्री जीी के लिए रुमाल नहीं थी इसलिए तुम्हें हिम्मत बनाने के लिए बात कह रहा हूं डरना मत टूटना मत था नहीं है वोह है त्रिकाल में है वो मेरा दोस्त है वो मेरा प्रीतम है हे सब ठुकरा दो मैं उसको नहीं छोडूंगा एक दिन ऐसा आएगा कि आप हमारे इस बात को खुद बोलेंगे एक दिन ऐसा मेरे साथ
ऐसा हुआ और आज दिन ऐसा है कि मैं यह हूं तो मेरे लिए एक आंसू बहा मैं ऐसा प्रेम प्रकट करूंगा कि जगत तेरे लिए आसू आएगा परिस्थिति कैसी भी आवे मार्ग छोड़ना नहीं निकल जाओ अगर घबरा गए तो सब अनुकूलता आने लगेगी यह भी ध्यान रखना वह देख रहा है तुम्हें हर समय देख रहा है यही तुम्हारी कसौटी आगे बढ़ गए निहाल हो जाओगे शब्द हमारा याद करलो बोले लाल ज की श्री कृष्ण चंद्र की बंसी गिर गई पीतांबर खिसक गया मोर मुकुट भी गिर गया हुआ क्या कोटि कोटि कामों को अपनी मुस्कुराहट
से मोचित कर देने वाले श्री कृष्ण को प्रेम मूर्छा गए बोले क्या हुआ बोले किशोरी जोने मुस्कुरा कर तिरछी चितवन से देख लि अच्छा ये हमारी बात नहीं कट्टर सन्यासी राधा बाबा कट्टर सन्यासी श्री कृष्ण की बात आती तो बाबा उदास हो और कहते कि मेरी रुचि नहीं तो बोले एक बार भाई जी सुन मुझे किसे संयोग साथ एक बार जब गीता प्र के दर्शन के लिए आए तो पता चला कि भाई जी बस इतना स्पर्श किया था ऐसे दाता नहीं दिखाई दिए पैर छुआ के देने वाले तो दिखाई दिए लेकिन पैर छू के देने वाले चरण स्पर्श के राधा बाबा के आश्रम गृहस्थ में सन्यास आखिरी जीवन बाबा का राधा ही राधा राधा हम आपको सच्ची कहते हैं यहां ऐसे आशीर्वाद नहीं दिया जाता लेकिन यहां आशीर्वाद के जाओगे नहीं ये भी बात समझ लेना य यहां की एक महिमा तुम्हें हम आंतरिक बता रहे हैं हमारी महारानी जू की लाडली ज की तेरे दरबार की आली निराली शान ये देखी सखावत खुद तेरी गलियों में चक्कर काटते देखा फैलाया हाथ जिसने तेरे दरबार में आकर तुझे देते नहीं देखा मगर झोली भरी देखी हमारी श्री जी
की करुणा ऐसी बरस्ती ये नहीं कि यहां कुछ जंतुर कोई प्रसाद कुछ भी नहीं मिलता यहां प्रगट में कुछ आपको क्या मिला प्रगट में कुछ नहीं मिला लेकिन आप जाइए और आपको वो चीज मिलेगी जो कहीं नहीं मिलेगी केवल श्री जी के चरणों की कृपा से आपका परिवर्तन होगा आपको एक आध्यात्मिक उन्नति मिलेगी आपको एक आनंद मिलेगा एक दिव्यता मिलेगी वो श्री जी की कृपा से मिल रही है सबका परिवर्तन होगा अगर सुनोगे ध्यान से चलोगे तो आपको शब्दों से ही शक्ति मिल जाएगी शब्दों से य आशीर्वाद मिल जाएगा क्योंकि केवल उद्देश्य एक ही है कि जब तक इसमें स्वास रहे तब तक परिवर्तन हो सबका मंगल हो सब स्वस्थ रहे अपने को निराश हताश उदास मत होने दो कैसी भी परिस्थिति आवे प्रभु की तरफ देखो जिसने एक मिनट नहीं एक पलक झपक में अनंत ब्रह्मांड बना दिया वो जिस दिन चाहेगा मुझे धनी बना देगा जिस दिन चाहेगा वो सुख की बौछार कर देगा ऐ प्रभु मैं तेरे सहारे हूं किसी और की तरफ नहीं देख सकता अगर तुम चाहते हो कि मैं द दरदर भटक तो तुम्हारा नाम लूंगा और दर दर भटक लेकिन
भरोसा केवल तुम्हारा ही रखूंगा वो जीत जाएगा वो जीत जाएगा पक्का जीत जाएगा कि पूरे जीवन की कमाई कहीं ऐसा ना फंस जाए कि भगवान से बड़ा कोई हो जाए हमारे चित्त में प्यारा वो वस्तु व व्यक्ति व स्थान और हम प्रभु को भूल जाए यही सबसे बड़ा डर है पर इस डर से हमें लाभ मिलता है कि हमारा प्रभु की तरफ और मन बढ़ता है नहीं जैसे कोई वस्तु प्रिय लगी तो प्रभु भूल जाएंगे प्रभु को भूल जाएंगे इसलिए कोई वस्तु ही प्रिय नहीं जब शरीर प्रिय नहीं तो सारी वस्तुएं इसी से प्रिय होती है अब इसकी क्या प्रियता ये तो देखो सूझा हुआ है दर्द हो रहा है जाने वाला है इससे क्या प्यार करना आज नहीं तो कल जाएगा तो हम हर समय जैसे गार्ड रखा जाता है सावधान ऐसे किडनी मानो हमको हर समय गार्ड की तरह सावधान करते सा जाना है राधा राधा राधा राधा जाना है राधा राधा राधा राधा राधा हमारे कल्याण में अब संशय नहीं पहली बात तोय समझ लो हम अपने लिए नहीं कह रहे हम अपने सबके लिए कह रहे एक बात अगर पकड़ लो जो है श्री भगवान मेरे और मैं भगवान का अब उन्नति जो
होगी अध्यात्म की आप देखते जाना उनका नाम जप करो उनके आश्रित रहो परम मंगल उनका ऐसा करुणामय भाव ऐसा दयालु घोर वैश्या गामी भगवत प्राप्त हो गए नीच आचरण हिंसा करने वाले ब्रह्म ऋषि बन गए केवल भगवान का आश्रय उनके नाम का जब यार हम लोग क्यों नहीं हो सकते गलतियां हो सकती है हमसे पाप हो सकते हैं हमसे क्या हम भगवान को प्राप्त नहीं कर सकते क्या हम पाप को मिटा नहीं सकते क्या हम अपना मंगल नहीं कर सकते हमें बताओ हम इतने कमजोर क्यों होते जा रहे हैं कि भगवान को प्राप्त करना बड़ी कठिन बात कैसी कठिन बात बाप को बाप कहना कठिन बात है कठिन बात है संसार को छोड़ना भगवत प्राप्ति कठिन नहीं है कठिन जो हमने अपने को फास दिया ना ये अमुक अमुक अमुक रा मोह ममता भोग वासना कामना इनसे कठिन है प्यारे एक झटके में सब कट जाएगा वो जरा सा ज्ञान देंगे सब संबंध ढीले पड़ जाएंगे भगवान का आश्रय जितना बन सके नाम जप करो हो सके तो पाप ना हो जो सहन करना सीख गया तितिक्षा वही हृदय प्रेम और मोक्ष सुख का अधिकारी होता है इसलिए सहन करो अपनी
बात किसी से कहो मत और गंदा कोई आचरण चिंतन करो मत नाम जप जितना हो सके हो सके नहीं भरोसा तो लाडली ज का अंदर है ना वो निकाल देगा वही बहादुर है वही हमको माया से निकालेंगे हम बहादुर नहीं कि माया से निकल जाए बहुत फिसलन है माया में बहुत फिसलन आप जैसे रो रहे हो ना ऐसे सबको रोना पड़ा है अगर कोई निकला है तो बिन रोए किन पाइया प्रेम प्यारा मीत माया ऐसी ल कि वैसे बख्श दे आप बहुत कठिन है माया से पार होना भगवान का नाम लेके भगवान की प्रार्थना करके भगवान की सेवा करके भगवान के भक्तों का दुलार करके इस माया से पार हुआ जाता है और चिंता मत करो शरणागत हो प्रभु का एक स्वभाव है कि अपने शरणागत का कभी पतन नहीं होने देते अब हम अपनी मन माने हमारा मन मन किसका नहीं लगता विषयों में मन लगता है संसार में लगता तो है ना कहीं ना कहीं उसी को मोड़कर इधर लगाना है और वो लगे ना लगे हम श्री जी के हैं हमें श्री जी की प्राप्ति होगी इसको लगना ही पड़ेगा जहां हम वही मन अभी क्या जहां मन वही तुम अब पहले नेगेटिव भाव हृदय में भर लोगे तो
नष्ट हो जाओगे जहां हम वही मन हम कहां श्यामा श्याम के नाम रूप लीला धाम थोड़ी तो अपने अंदर शक्ति जागृत करो तुम परमात्मा के अंश हो कोई साधारण नहीं हो वही मन वही इंद्रिय वही रोना वही भोग अरे तुम चाहो तो भगवान को वश में कर सकते हो अजीत को जीत सकते हो सुमिर पवन सुद पावन नामु अपने बस करी राखे राम वही गियाना वही रोना अगर हम पैर फैलाए पड़े भी हैं तो तेरे भरोसे में पड़े हैं और मंगल पक्का हो होगा उसका वो प्यार किस काम का जो प्रभु से विमुक्त कर दे जो हमारे जीवन को नष्ट कर दे सच्ची बहुत धोखा हो जाता है इंद्रिय मन शरीर का प्यार पूरे जीवन को बर्बाद कर देता है बड़े भाग्यशाली है जो व्यवहार तो धर्म युक्त करते हैं प्यार प्रभु से करते हैं आप लोग जैसे बैठे हो आकर तो प्रभु ने आप पर कृपा करी ये बातें सुन पा रहे हो नहीं बातें सुनना यह अध्याम की प्रभु की प्रभु के मार्ग में चलना यह दुर्लभ वस्तु है
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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