क्या आपके जाने के बाद भी राधा केली कुंज से सत्संग और प्रवचन का लाभ मिलता रहेगा ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
सोमवीर सिंह जी हैदराबाद से राधे राधे पूज गुरुदेव आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम गुरुदेव राधा केली कुंज विश्व की पावन जगह है यहां भारत और विश्व के ईश्वर तुल्य महापुरुष आपके दर्शन के लिए आते रहते हैं तथा करोड़ों लोग यहां के पावन सानिध्य से अपना जीवन बदल रहे हैं महाराज जी इस दास का भय और संकोच व यह सवाल है कि आपके राधा रानी के पास चले जाने के बाद भी राधा केली कुं से ऐसे ही सत्संग प्रवचन आदि चलता रहेगा और हम लोगों को इस पावन धाम के दर्शन होते रहे अब
ये तो हम नहीं कह सकते हम इस ये कैसे कह सकते हैं क्योंकि यह तो भगवान के हाथ है श्री जी के हाथ है कि वह क्या करें क्या ना करें इतना तो समझ लो कि असंभव है संकेत में इतना ही है कि चलता रहेगा पर असंभव है उड़िया बाबा जब थे जैसा कृष्णा आश्रम उड़िया बाबा के जाने के बाद फिर थोड़ी र जाता है तो सांप की मणि चली गई तो सांप र ग मणि तो चली जाती है ना तो अब यद्यपि संत भगवान है बहुत से संत भगवान है सब प्रयास करेंगे कि पर यह प्रयास वाला नहीं तुम सुन रहे हो हम किसी
योग्य नहीं है अयोग्य के द्वारा भगवान जो करवा रहे हैं वह योग्यता से नहीं हो सकता है य हम आपको बता रहे यह जो हो रहा है ये अयोग्य से भगवान करवा रहे हैं तो योग्य कि कोई योग्य पुरुष तैयार कर दिया जाए कथावाचक कथावाचक हो सकता है वो सब ये कर सकता है लेकिन परिवर्तन नहीं कर सकता जीव की मानसिकता का परिवर्तन नहीं हो सकता और खास बात होता है जीव की मानसिकता का परिवर्तन करना और वह होता है श्री भगवान से और वह किसी को कभी-कभी निमित्त बनाते हैं निमित्त कभी किसी को
बनाते हैं तो ये हम इस समय जो देख रहे हैं कि वो प्रेमानंद नाम के शरीर धारक को एक निमित्त बनाकर अपना कार्य कर रहे हैं हजारों लोगों की मानसिकता हों को बदल रहे हैं तो वो चाहे तभी हमने कहा भगवान चाहे तो हो सकता है अन्यथा असंभव है ये किसी विद्वता से या पढ़ लिख के या प्रवचन से नहीं हो सकता यह केवल भगवान के द्वारा करें करावे आप सब जने बढ़ाई दे यह उनका कार्य हम कभी बैठ के प्रवचन नहीं सीखे हम कोई व्याकरण चार्य नहीं है हमारे पास कोई वो डिग्री नहीं है बस इतना जरूर है कि हम श्री जी के है श्री जी हमारी है अब वोह क्या करना चाहती है उनका विधान है तु महाराज जी कह सकते हैं तुमरी कृपा पाव कोई हास बिल्कुल तुम्हरी कृपा पाव कोई कोई कृपा पात्र जन के द्वारा य होता है मतलब विद्वता या इसके द्वारा तो हम समझते मु कम करोति वाचाल प लते गिरि यत कृपा तम हम वंदे परमानंद माधव नहीं ना जिसका शरीर ठीक है उसका क्या दूसरों का परिवर्तन कर सकता है पर यह है कि वो सर्व सामर्थ साली है बस इतना हम कहते हैं वो क्या करना चाहते हैं
हमें तो डॉक्टर ने कहा था पाच वर्ष में मर जाओगे बहुत ढाई वर्ष कहा था फिर कहा था बहुत बहुत पाच वर्ष चलोगे 19वां 20वां वर्ष चल रहा है डॉक्टर के कहे के अनुसार से 19वां 20वां वर्ष चल रहा है अब भाई भगवान कब तक चलाना चाहते हैं वो जानते हैं अब वो श्री जी के पास जाने के बाद श्री जी क्या यह जरूर हम कहते हैं कि किसी की कोई जगह ले ले ऐसा नहीं होता उड़िया बाबा की जगह कोई दूसरा बैठ ऐसा नहीं हो सकता श्री रामचंद्र डोंगरे की जगह कोई दूसरा बैठ जाए ऐसा नहीं हो सकता
वो एक होता है भगवान एक प्रभाव प्रकाशित करते हैं और फिर गुप्त कर देते हैं फिर दूसरी जगह किसी भक्त को प्रकाशित करते हैं फिर गुप्त कर देते हैं ये उनका खेल चलता रहता है वह अपने संत जनों से धर्म को बढ़ावा अधर्म की वृत्तियों का नाश कराते रहते हैं और कहां बैठ जाए वो वह किसके बैठ जाए ये ये राध कल कुंज से होगा ये नहीं कह सकते हो सकता है दूसरी जगह किसी महात्मा के प्रकाश कर भगवान और वो प्रकाशित होकर जन समुदाय को भक्ति के रंग में रंग दे किस संप्रदाय का किस मार्ग का सब उनके संप्रदाय सब उनके मार्ग इसलिए यह नहीं कह सकते कि ऐसा ही होगा कैसा होगा जैसा प्रभु जाएंगे वैसा होगा जोई जोई प्यारो करे सोई महि भा
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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