माँ वैष्णो देवी, शेरावाली के दर्शन करना चाहता हूँ ! क्या करूँ ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
अमित जी हरियाणा से हरिवंश श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी इनका भाव है कि बचपन से ही इन्होंने मां वैष्णो देवी और शेरावाली जी के प्रति इनकी लगाव हो गया और मुझे जब कुछ समझ नहीं आता था तो मैं मां वैष्णो देवी की पिंड स्वरूप को ही अपना गुरु मान लिया और मां की अपार कृपा भी बहुत है जो उन्होंने मुझे दर्शन के लिए आपके भेज दिया जब से मैंने आपके प्रवचन सत्संग सुना अब मुझे मेरी मां वैष्णो देवी से मिलने की एक अजीब सी चुबन होने लग गई है कृपा करके मुझे इस भक्ति मार्ग पर चलने का सही मार्ग दर्शन करें कैसे इस मार्ग पर चलता रह उनकी साकार करना सही मार्ग है आप चलते रहो वह जगत माता है या देवी सर्व भूते सु बुद्धि रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्ये ही प्रीति थी अब थी इसलिए कह रहा हूं कि वह नाम बदल गया है अब नाम दूसरा हो गया है लेकिन है तो उन्हीं की शक्तिया सब जैसे पहले दुर्गा मां की उपासना करते थे भगवान शिव की उन्होंने कृपा कर भेजा तोब श्री किशोरी जो हैं किशोरी जी के ही सब स्वरूप है दूसरा थोड़ी अंतर अब
इधर राधा व अंश में दुर्गा है कोई अंतर थोड़ी विविध रूप वही धारण किए हुए हैं तो बस नाम जप करो और अंदर से ये अंदर की बात अंदर से उनको सब कुछ मान लो वो स्वयं जैसे भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के रथ की बागडोर पकड़ ली ना वैसे जीवन की बागडोर मां पकड़ लेंगे और आपको पार कर देंगे राम कृष्ण परमहंश जी मां को ही मानते थे काली मां को सब कुछ प्राप्त हो गया कहीं एक जगह आसक्ति कर लो भगवान 100 200 रूप धारण करते हैं है एकही भगवान 100 200 नहीं होते व एकही वही मां है वही पिता है वही शिव है वही अंबा है कोई अंतर नहीं है बस भाव से लग जाओ नाम जप करो और मांस म ये सब चीजें गंदी चीजें कभी जैसे कुछ लोग जो अज्ञानी जन है नहीं जानते हैं तो कहते हैं मां को शराब का भोग लगाते हैं बकरे काटते हैं ऐसी सब क्रियाएं नहीं करनी चाहिए मां जगत माता है तो जैसे हम उसके पुत्र ऐसे बकरा भी उसका पुत्र है अपने पुत्र के गला कटवा के कभी मां प्रसन्न होती है क्या और मां कभी मदिरा और गंदी चीजें सेवन करने वाला कभी मां का आराधना कर सकता है ये सब
रिष्ट लोग हैं अज्ञानी लोग हैं यह लोग नहीं जानते हैं तो कभी ऐसी गलती मत करना तो ऐसे प्रसाद को भी नहीं लेना चाहिए कि कोई बकरे का मांस और मदिरा या कुछ ऐसा दे कि मां का प्रसाद ले नहीं भाई ये मां का प्रसाद आप ही पाओ हमारी मां दूसरी है जो सात्विक है जो देवी है जो जगत माता है परम पवित्र है नारियल की बलि दो नींबू की बलि दो सुंदर 56 प्रकार के भोग लगाओ वो प्रसाद पाओ ठीक है
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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