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नाम जप करता हूँ पर गुरु ग्रंथ साहिब जी को साक्षात गुरु रूप में अनुभव कैसे करूँ ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

राजदीप सिंह जी अंबाला से वाहेगुरु जी राधे राधे महाराज जी पूज्य महाराज जी मैं पिछले कुछ समय से सिख मर्यादा अनुसार वाहेगुरु नाम के जाप में प्रयासरत हूं गुरुवाणी अनुसार हुक्म है गुरु ग्रंथ जी मान प्रकट गुरा के देह महाराज जी नाम जप करते समय जैसे मैं आपको गुरु साक्षात प्रकट रूप में महसूस करता हूं वैसे गुरु ग्रंथ साहिब जी को साक्षात गुरु प्रकट रूप में अनुभव नहीं कर पाता कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि आगे चलकर अमृत छक करर पूर्ण गुरु सिख बन सकूं हां बिल्कुल ठीक बात है तो प्रगट रूप आप मानस के पिंड को देखकर गुरु मान रहे हो मानस का पिंड देखा इसलिए ज्यादा श्रधा हो रही है मानस के पिंड के अंदर जो तत्व है वो वाणी जी में भी विराजमान है गुरुवाणी में व विराजमान है तत्व वाणी जी में विराजमान है वो यहां भी है और देह यह तुम्हें दिखाई दे र इसलिए हम लोग आकार में फसे हैं इसलिए वाणी के स्वरूप को हम गुरु मानने में वो भाव नहीं पा रहे बकाया जो वाणी जी है वही गुरु तत्व है वाणी जी तत्व से गुरु मानी जाती है क्योंकि

उसमें प्रगट नरा का तो नहीं है लेकिन शब्दा का तो है ना तो शब्द शब्द को ब्रह्म ब्रह्म को गुरुदेव तो गुरु स्वरूप तो है ही शास्त्र जो वाणी है गुरुवाणी वो गुरु स्वरूप ही है पर हम लोग फस गए आकार में जैसे आप अपने आकार में फसे हो तो आपको आकार में जल्द श्रद्धा हो जाएगी क्योंकि आकार में फसे ना वाणी आकार रूप तो है नहीं शब्दा का रूप है व आपको बोलती नहीं है आपको डांटते नहीं है आपको प्यार दुलार प्रगट में और प्रगट में आकार में प्यार दुलार बातचीत देख तो हमारी ज्यादा श्रद्धा बनती प्रकट आकार में लेकिन प्रकट आकार स्थाई नहीं है आपको आना वाणी में ही पड़ेगा मान लो य शरीर पूरा हो जाए तो फिर इसकी वाणी ही तो पकड़ के चल पाओगे गुरुवाणी ही तो स्थाई गुरु है महाराज की वाणी में कैसे कैसे आए वैसे नाम जप करो वाणी में पूर्ण श्रद्धा हो जाएगी वाणी में नाम जप मब हमारे जीवन का सार है नाम जप और सब कुछ ठीक हो जाएगा सब जिधर जो चाहोगे ब्रह्म ज्ञान चाहोगे प्रेम चाहोगे वैभव चाहोगे लोक लोका तर में जहां जो चाहोगे सब नाम से प्राप्त

हो जाएगा हम अपने अनुभव की बात कहते हैं संतों के अनुभव की बात कहते हैं गुरुवाणी के अनुसार कहते हैं सब कुछ नाम से प्राप्त हो जाएगा मराज जी व्यस्तता इतनी रहती है शिक्षक है पढ़ाना है घर प बच्चों को भी देखना है हम शिक्षक नहीं है क्या मान लो आप शिक्षक हो तो आप तो बच्चों को पढ़ाते हो हम तुम्हें पढ़ा रहे हैं नहीं पढ़ा ये पढ़ा नहीं रहे क्या हमारा क्लास नहीं लगा क्या तो हम क्या भजन से विमुख है क्या हम पहले सब जब आप आते हो तो हम अपने भगवान के चिंतन में होते

हैं और जब हम आंख खोलते हैं तो सबसे पहले भगवान का रूप देखते हैं कि सब रूपों में मेरे भगवान आए हैं मुझे प्यार करने और यह प्रश्न करके और यहां से उत्तर देकर के करते दोनों काम वही है आनंद बढ़ाते हैं अब हमसे जो भी बात करोगे हम बात करेंगे अपने भगवान से बात कर रहे हैं जब आपके विद्यार्थी आवे तो सबसे पहले आप देखो कि भगवान विद्यार्थी रूप में आए क्योंकि जब सृष्टि नहीं थी तो केवल भगवान थे जब सृष्टि नहीं रहेगी तो केवल भगवान रहेंगे तो बी में जो कुछ है व सब भगवान ही है पक्का समझो तो हम पहले देखो व्यस्तता बाहर से होती है अंदर से रिलैक्स रहो जैसे बच्चे ने कहा ना अंदर से रिलैक्स रहो कोई भी कार्य करना है हाड़ बड़ाव मत उतावलापन मत करो बड़े धैर्य पूर्वक राधा राधा राधा कितना आनंद रहेगा कितना आपको जिम्मेवारी कितना काम है परिवार में दो चार लोग होंगे य ह 500 है कोई रंग संसार का ना रह जा तब भगवान का रंग चढ़ता है कितनी कठिन बात है तुम खिलवाड़ एक आदमी को संभालना कितना कठिन होता है फिर यह सब नौजवान पढ़े लिखे

संसार देखे हुए कोई आर्मी में कोई यह कोई वो लेकिन कुछ नहीं है हम पाई भर ना चिंतित है ना कल की व्यवस्था के लिए चिंतित है ना इनकी जीवन के लिए चिंतित है क्योंकि सीधे भगवान को समर्पित है आप देखो और सबका परिवर्तन सबका परिवर्तन हो रहा है सब सुव्यवस्थित चल रहे हैं सबकी व्यवस्था हो रही हमें चिंता क्या करना जो अनंत ब्रह्मांड को चला रहा है वही इनको भी चला रहा है हम इतना बिजी ना हो जाए कि अपने जीवन के लक्ष को भूल जाए हम इतना ना दौड़ लगा दे कि अपना मार्ग ही भूल जाए जाना था इधर दौड़ में निकल गए उधर जीवन भर दौड़ते रहो लक्ष्य तो मिलेगा नहीं क्योंकि मार्ग तो ये था तो हम भगवान के मार्ग को भूल जाए दौड़ते हुए संसार में बजी पूरा जीवन आ गई मृत्यु शरीर छूटा अब क्या होने वाला है जब शरीर छूट गया तो फिर भजन साधन होगा नहीं फिर तो कर्मानुसार योनियों की प्राप्ति होगी अन्य योनियों में भजन होता नहीं अन्य योनियों में भगवत प्राप्ति का कोई चांस नहीं है मनुष्य योनि में ही चांस है कल एक कह रहे थे कि अभी ऐसा लगता है कि कुछ

समय खूब डट के मेहनत करके पैसा कमा लूं फिर भजन करूंगा आराम से कभी नहीं हो सकता पैसे के बल से तो भजन हो ही नहीं सकता है महाराज जी अगर आपकी शिक्षाओं को अपने मन में ही बिठा ले तो गुरु में वाणी में गुरु रूप आ जाएगा बिल्कुल बिल्कुल आ जाएगा देखो आप जो श्रद्धा करके सुन रहे हो तो आकार से वाणी तो प्रकट हो रही उसी से तो आपका समाधान हो रहा है गुरुवाणी से ही तो समाधान हो रहा है गुरुवाणी से समाधान हो रहा है गुरुवाणी मानने से आपका परिवर्तन हो रहा है गुरुवाणी पर

श्रद्धा करने से ही आपका उज्जवल भविष्य होगा तो उसको समझिए वह लिखित रखी है यह आवाज में निकल र बात है तो गुरुवाणी ही

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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