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मैं सबके साथ अच्छा करती हूँ पर बदले में मेरे साथ अच्छा क्यों नहीं होता ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

सुरवी कुमारी जी नोएडा से राधे राधे राधे राधे महाराज जी महाराज जी मैं सबके लिए अच्छा सोचती हूं लेकिन बदले में लोग अच्छा नहीं करते हैं मेरे साथ बस महाराज जी फिर मन अशांत हो जाता है ऐसे में महाराज जी उस समय कैसे कैसे समझे कि लोग अच्छा नहीं करते आपके साथ आप लोगों के साथ अच्छा करती हैं ये आप कैसे समझे किसका प्रश्न है कैसे आप समझे आप क्या लोगों के साथ अच्छा करते हैं और क्या लोग बदले में आपको बुरा करते हैं आप बताइए कभी किसी ने कुछ सुझाव मांगा या फिर जितना मुझसे हो पाया किसी के लिए मैंने किया लेकिन आपको उस समय सोचना है जब किसी का परोपकार किया जाता है तो सोचा जाता है भगवान ने हमें जो ज्ञान दिया वो मैंने आपको दिया भगवान ने हमारे पास जो वस्तु दी उससे मैंने आपका सहयोग किया धन से बुद्धि से शरीर के द्वारा इन्हीं के द्वारा परोपकार होता है वह भगवान के द्वारा दी हुई तो हमें बदले में थैंक यू लेना नहीं है कि हमने आपको कुछ सेवा की बाद में आप हमें धन्यवाद कहे यह परोपकार नहीं कहलता ये स्वार्थ कहलाता है अब

हम अच्छा किया इसके बाद परिणाम में उससे हमें कुछ लेना नहीं अब वो जो हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहा है वह हमारे कर्म की पवित्रता के लिए हमारा कोई पूर्व कर्म है जो अपवित्र है पाप कर्म उसको पवित्र करने के लिए भगवान उसे निमित्त बनाकर कटु वचन या कटु चेष्टा करा रहे हैं जो संत भाव में अध्यात्म भाव में चलते हैं वह इस विचार से युक्त रहते हैं कबीरा निंदक नेरे राखे आंगन कुटी छवाय बिना साबुन बिना पानी निर्मल करे स्व भाय तो हमें बुरा तो नहीं मानना चाहिए हा जैसे तुम्हारा स्त्री शरीर है अब कोई शरीर की तरफ गंदी बात देखे तो कानून है फिर उसे कानून के द्वारा सहायता लेकर दंडित करना चाहिए उसमें क्षमा नहीं करना चाहिए जैसे मानो स्त्री शरीर है अब कोई छेड़ रहा है कोई परेशानी प्रकट कर रहा है अब उसमें साधु नहीं अब सठ साम समा चरित तो उसे कानून के हवाले कर दे बहुत सुंदर सुंदर कानून बने हुए बच्चियों स्त्रियों माताओं बहनों की सुरक्षा के लिए ऐसा ऐसे साधारण व्यवहार में यदि कोई ऐसा तो फिर उसमें क्षमा कर देना चाहिए और ये

सोचना चाहिए मेरे ही किसी अनुचित कर्म का मार्जन कराया जा रहा है [गला साफ़ करने की आवाज़] क्योंकि भगवान ईश्वर सबका विधान जो करता है वह अमंगल नहीं करता वो मंगल भवन है मंगल ही हो रहा है यदि कोई हमारी निंदा कर रहा है कोई अवहेलना कर रहा है कोई तिरस्कार कर रहा है तो हमारे पापों की सफाई हो रही है सम्मानम कलित घोर गलम नीचा अप मानम सुधा श्री राधा मुरली धरो भज सख वृंदावन माते श्रीपाद प्रभु धान जी कह रहे सम्मान को सदैव विष के समान समझे नीच पुरुषों द्वारा किए

हुए अपमान को अमृत के समान समझे और राधा माधव का भजन करें मनुष्य जीवन की सार्थकता का यही स्वरूप हमें बुरा तब लगता है जब हम सम्मान चाहते हैं और सम्मान नहीं मिलता आपको सम्मान दिया आप हमें सम्मान दे आपका हमने हित किया आप हमें धन्यवाद बोले यह प्राया मनुष्य के अहम की पुष्ट के लिए मांग होती रहती है और भगवान इसी का नाश करते रहते हैं ताते करे कृपानिधि दूरी सेवक पर ममता ति भूरी तो आप भगवान की कृपा पात्र है अगर कोई आपकी ऐसे अवहेलना करता है तो आप उसे सहो अगर कोई सांसारिक भावना से छेड़ता है तो उसे कानून के हवाले करो अपनी मस्ती में रहो राधा राधा राधा नाम जप करते हो आप बसना हा नाम जप करते है आप करती हूं ब नहीं करती नहीं करते रहे नाम जप और करते रहे बैठे बैठे क्या करोगे ओवर थिंकिंग करोगे डिप्रेशन में पहुंच जाओगे मन को नाम जप में लगाओ मन को अधिक से अधिक नाम जप में लगाओ तभी मंगल होगा जी

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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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