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सब कुछ कर्मों के हिसाब से मिलता है तो प्रार्थना कब काम आती है ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

काजल जी दिल्ली से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी अगर सब कुछ कर्मों के हिसाब से मिलता है तो महाराज जी प्रार्थना कब काम आती है मैंने छोटे होते प्रार्थना की थी कि मेरी इच्छाएं पूरी हो पर महाराज जी क्या प्रार्थना में कमी थी या भाग्य के अनुसार ही होता है चाहे हम नहीं नहीं प्रार्थना और भजन यह भाग्य से अलग चीज है। जब हम भगवान से प्रार्थना करते हैं तो भगवान हमारे कर्म को ना देख के वह अपनी कृपा से देते हैं। जैसे आदमी लेबरी कर रहा है तो उसकी नियत कीमत है ₹00 ₹550 लेकिन वो शाम के मेहनत करने के बाद बाबूजी हमारी पत्नी को बड़ी परेशानी है तो वो जो 5000 दिए वो उसकी मेहनत के नहीं दिए वो उसकी प्रार्थना के दिए कि भाई समस्या का समाधान हमने प्रार्थना से करवाया तो हमारे भाग्य में तो जो लिखा है वो तो मिलेगा ही जब हम भगवान से प्रार्थना करते हैं तो भाग्य से अलग भगवान हमको देते हैं।

वो जो बात हमारी बनती है प्रार्थना से वो भाग्य नहीं होता। वो भगवान की प्रार्थना और अगर प्रार्थना पूरी ना हो तो क्या समझना चाहिए? भगवान मंगल भवन है। वो पूरी कर देते तो अमंगल हो जाता। इसलिए वो भगवान पूरी नहीं किए क्योंकि मंगल भवन है। पर हमारे मन में था कि वो होना ही चाहिए था। हां यह हमारी कमजोरी है। यह हमारी कमजोरी है। जैसे हम जान हम चाहते हैं कि अगर यह मुकदमा जीत जाए, इतना रुपया मिल जाए, हमारी नौकरी लग जाए तो हमारा मंगल हो जाएगा भगवान। और भगवान को पता नहीं मुकदमा जीत गए, नौकरी लग गई तब तो तुम माया में फंस जाओगे।

तुमको हम ऐसी विपत्ति देंगे कि हमारे सिवा तुम्हें कुछ और अच्छा ही ना लगे। तो हर जगह हर रास्ते काट दिए। अब तुम निराश हो गए। जब निराश हो गए कोई साथ नहीं दे रहा। तब आया हे असरण शरण भगवान आपके सिवा हमारा कोई वो सत मार्ग में चल पड़ा वो भगवान के मार्ग में चल पड़ा वो अंदर से गृहस्थ होते हुए भगवान का महान भक्त बन गया भगवान मंगल भवन है अमंगल होने नहीं देंगे और जिससे अमंगल होगा वो प्रार्थना पूरी नहीं करेंगे अब हमारी दृष्टि और भगवान की दृष्टि में तो अंतर है ना हमारी दृष्टि में कि यार अमंगल हो गया हम अगर हमारी कामना पूर्ति हो जाती तो भगवान का क्या चला जाता लेकिन वास्तविक मानिए आपकी उस कामना पूर्ति में आपका अमंगल था।

आगे चलकर आपका मंगल हो जाता। भगवान ने इसीलिए विघ्न डाल दिया। तो भगवान की कृपा सदैव मंगल करती है। अमंगल नहीं करती। तो ये भगवान की कृपा ही है। ऐसा समझना चाहिए। हमारी सोच और भगवान की सोच में अंतर हर जगह कृपा होती है। तो हमारी कामना ना पूर्ण होना हमारी प्रार्थना ना सुनना यह भी भगवान की कृपा है। उसमें कोई ना कोई अमंगल है। तो भगवान की हर परिस्थिति में हम कृपा का अवलोकन करें। भगवान हमारी यदि मांग पूरी ना करें तो पक्का समझना वह मांग अगर पूरी हो जाए तो हमारा मंगल हो जाए।

हमारा मंगल हो जाता है। जी

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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