जो हमेशा जल्दबाजी में रहते हैं वो जरा ध्यान से सुनें
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
आशीष शर्मा जी दिल्ली से राधे राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मन विचलित सा रहता है जल्दबाजी में असंतोष की स्थिति रहती है हमेशा व्यस्त रहते हैं जिससे जीवन में दुख और नहीं हम कह रहे हैं कब तक जल्दबाजी करेंगे आखिरकार मृत्यु भी तो आ रही है अब उसका तो पता नहीं है ना कि कल हो जाए या पर ये जल्दबाजी कब तक रखोगे कभी तो विश्राम कीजिए कभी तो धैर्य कीजिए कभी तो अपने अंतिम परिणाम की तरफ झांक कर देखिए कि आप जब यहां से जाएंगे तो आप क्या ले जाएंगे। वह चीज तो कमा रहे हैं कि नहीं कमा रहे हैं जो ले जाना है।
इस देश की कोई भी चीज नहीं जाने वाली। शरीर सहित सब कुछ यही छूट जाएगा। उसके लिए जल्दबाजी है। और मृत्यु आ रही है। वो तुम्हारी एक-ए सेकंड गिन रही है। जिस समय आखिरी सेकंड होगा वो चाहे जवान हो, चाहे बूढ़े हो, चाहे बालक हो, चाहे गर्भ में हो, चाहे गर्भ के बाहर हो। वह मार देगी। अब जब यहां से हम जाएंगे तो हमारे पास क्या है? यदि नाम जप किया है तो हमारे पास है या पाप कर्म किया है, पुण्य कर्म किया है वो हमारे पास है। तो ज्यादा क्या हमने किया है? ये मरने के पहले गणित लगा लो।
अगर पाप किए हैं तो उस गठरी में आग लगाओ। नाम जप करके, तीर्थ याटन करके, दूसरों को सुख पहुंचा करके जल्दबाजी ज्यादा ठीक नहीं है। कब तक करते रहोगे? पूरा जीवन हो गया। कभी विश्राम भी तो सोचिए कब विश्राम मिलेगा। यह हो जाए, फिर यह हो जाए, फिर यह हो जाए, फिर यह हो क्रम बना ही रहेगा। आज तक किसी का ऐसा नहीं हुआ कि अब मैं ओ यह करना है, यह करना है, यह करना है। यही भ्रम बना रहता है। लेकिन मुझे भगवत प्राप्ति करनी है। मुझे भगवान से मिलना है। मुझे अब इस जन्म में ऐसा भजन करना है कि अगला जन्म ना हो।
इसके विषय में कौन सोचता है? अगर यही सब करते रहे शरीर छूट गया तो फिर पता नहीं कौन सी योनि प्राप्त हो सूअर कुत्ता गधा ऊंट कितनी योनियां है फिर हम जल्दबाजी में कुछ नहीं कर पाएंगे तो हमें विवेक चाहिए हम नाम जप करें भगवान का चिंतन करते हुए कार्य करें और बहुत धैर्य पूर्वक कार्य करें जल्दबाजी में कभी भी हमारा शरीर छूट सकता है हमारे हाथ क्या लगेगा इसलिए सावधान रहिए पवित्र भोजन पवित्र विचार पवित्र आचरण और नाम जप तो आपका जीवन अच्छा रहेगा। फिर मन शांत रहेगा।
फिर प्रसन्न रहेगा। कितनी जल्दबाजी। क्या क्या एक कार्य हो तो एक कार्य एक पूरा करोगे पांच खड़े हो जाएंगे काम। पांच पूरा करोगे 50 व्यवस्थाएं लग जाएंगी। ये माया है। ये कभी चैन से किसी को नहीं रहने देती। वही चैन से रह पाया जो भगवान का आश्रय ले लिया और भगवान का भजन किया। नहीं सब परेशान है। सब परेशान है। सबकी खोपड़ी परेशान है। जो भजन नहीं करते सब परेशान है। आप देख लीजिए कोई एक व्यक्ति बतावे मैं संतुष्ट हूं अपने जीवन से। मैं संतोष को प्राप्त हो रहा हूं। वो वही कह सकता है जो भगवान से जुड़ा हुआ है।
अन्यथा नहीं। इसलिए नाम जप कीजिए। पवित्र आहार, पवित्र विचार, पवित्र आचरण कीजिए। जल्दबाजी कहां तक करेंगे? कितना करेंगे? और जो कुछ करेंगे सब यही रह जाएगा। इसलिए आनंद मनाइए। मस्ती से जीजिए। मनुष्य जीवन मस्ती और आनंद के लिए है। और हम लोग मस्ती और आनंद शराब व्यभचार गंदे आचरणों में ले जाते हैं। नहीं जितेंद्रियता पवित्रता भगवान का चिंतन इसमें आनंद और मस्ती होती है। जहां मस्ती की बात आई तो शराब और गंदे आचरणों की तरफ लोग भाग जाते हैं कि मस्ती नहीं उधर मस्ती नहीं।
उधर तो पतन है नाश है। मस्ती तो सच्चिदानंद भगवान की तरफ है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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