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वो हर विचार जो मैं सोचता हूँ वो मेरा है या कोई और इसे चला रहा है ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

अतुल जी राधे-राधे गुरु जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी अपने मन के विचारों को कैसे समझाएं क्या हर वो विचार जो मैं सोचता हूं वो मेरा है या कोई और इसे चला रहा है हे त्रिगुण माया के द्वारा मन फालतू विचार फेंकता रहता है कोई पॉइंट का आया तो आया 100 में एक दो बात पॉइंट की आएगी नहीं 98 बातें फालतू फेंकता रहता है और जो नाम जप नहीं करते और इसी मन की फालतू बातों में फंसते रहते या तो जेल में होते हैं या डिप्रेशन में होते हैं। यह ओवरथिंकिंग बढ़ाते बढ़ाते बढ़ाते बढ़ाते मन में आई लेकिन उसे काट दिया और जो मन में आई और काटना नहीं जानता या तो जेल जाएगा और या दुर्गति उसकी होगी जीते जी तो यह जो हमारा मन हमारे सामने बातें पेश करता रहता है हर समय उसका कार्य है ऐसा हो जाए ऐसा कर लिया जाए ऐसा कर लिया जाए ऐसा कर लिया जाए उसको काटना होगा विवेक के द्वारा जो सही बात है उसे सपोर्ट कर देना है।

जो गलत बात है उसे काट देना है। और जब आप मन की बात को काट दोगे तो मन तुम्हें जलाएगा व्यथित करेगा। इसका स्वभाव परमतम स्वभाव मतलब मत देगा आपको तो उसी मंथन उसी व्यथा को उसी जलन को सह जाओ तो आप आगे बढ़ जाओगे परमार्थ में और नहीं सह गए तो दुर्गति हो जाएगी। फिर तो दुर्गति हो जाएगी। ये मन के चक्कर में ना पड़े। मन ने ही पूरे संसार को क्लेश में फंसा रखा है। बोले यार मन नहीं माना अगर मान जाता तो मैं बच जाता। तो मन को मनाओ और मन को मनाने के लिए आपको पावर चाहिए।

वो आध्यात्मिक पावर चाहिए। नाम जप करो। राम कृष्ण हरि राधा जो नाम प्रिय हो नाम जप करो तभी तुम्हारे हृदय में पवित्रता आएगी। पावर आएगा। मन कह रहा है कि देखो पवित्र मन गलत आचरण की सलाह नहीं देगा। घृणा होगी। अपवित्र मन अच्छी बात की सलाह कम देगा। गंदी बात की ज्यादा सलाह देगा। आजकल मोबाइल चल गया है। इसमें भी सद्गुण है। मोबाइल में भी जैसे आप लोग बैठे हैं तो मोबाइल की ही कृपा से बैठे। YouTube में देखा और यहां तक पहुंच गए। तो गंदी बात जो मोबाइल में देखते हैं जो लोग वो मन को और गंदा सपोर्ट करते हैं और गंदा बना रहे हैं।

मन की जो कल्पनाएं हैं वह और बढ़ा रहे हैं। हमें लगता है मोबाइल से गंदी बातें देखना बंद की जाए। गंदा भोजन बंद किया जाए, गंदा संग बंद किया जाए तो मन अच्छी बातें फेंकने लगेगा। अगर हम गंदा भोजन करेंगे, गंदा संग करेंगे, गंदा दृश्य देखेंगे तो वह गंदी बातें फेंकेगा। हमारे द्वारा फिर गंदी बातें होंगी और उसका परिणाम बहुत बुरा होता है। एक बार गंदा आचरण हो गया और वह प्रकाशित हो गया और हम फंस गए तो पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है। समाज में कलंकित और जेल भोगना पड़ता है।

इसलिए मन की कल्पनाओं को काटना सीखो। विवेक के द्वारा उनको काटो। जो गलत सलाह है उनको नकार दो। चाहे जितना कष्ट हो वो सह जाओ। दो मिनट के लिए वह जलाता है। तुम हमारे हमें लगता है अगर हम ऐसा कह लेते हैं तो शांति मिल जाएगी। आनंद मिल जाएगा। नहीं वह घोर अशांति में फेंक देगा। अगर अभी मान जाओ ना करो तो शांत हो जाएगा। पर यह विवेक तभी काम करेगा जब अध्यात्म होगा। नाम जप करो, सत्संग सुनो, पवित्र भोजन, पवित्र संग करो। तब आपके अंदर पवित्र विचार आएंगे।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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