आप हर प्रश्न का उत्तर नाम जप देते हैं क्या कोई सरल या बाहरी उपाय है ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
महाराज जी, आप हर एक प्रश्न का उत्तर काम, क्रोध, लोभ, मोह जिसका भी उत्तर होता है। नाम जप का क्योंकि बिना नाम जप के पावर नहीं है। महाराज जी कोई ऐसा उपाय नहीं है कि बाहर बता दें कहीं दीपक चढ़ा दें या कहीं ये सब नौटंकी है। अगर ऐसा हो तो 10 20 टेन घी लेकर के जला दो और हमें बताओ तुम्हें लाभ मिल जाए तो। कुछ नहीं होने वाला। बिना अंदर के तुमने पाप किया है अंदर के चिंतन से। ध्यान दीजिए अंदर आपने कामना की और शरीर से आपके पाप हुआ। अब अंदर कैसे ठीक होगा? अंदर नाम जब ठीक करेगा।
सांप बैठा है बिल के अंदर ऊपर सैकड़ों लाठी जमा दो। उसको कोई फर्क पड़ेगा क्या? बिल के अंदर घुस के मारा जाए तब वो मरेगा। तो इस शरीर रूपी बिल के अंदर बैठा हुआ पाप है। उस पाप को मारने के लिए नाम जपना अत्यंत आवश्यक है। गंगा पाप नष्ट कर सकती है। लेकिन पाप की प्रवृत्ति भजन नष्ट करेगा। पाप किया गंगा नहाया फिर पाप किया तो मतलब क्या रहा गंगा नहाने से पाप की प्रवृत्ति का नाश होगा तो नाम जप से होगा भजन से होगा अगर भजन नहीं करोगे तो हर प्रश्न का उत्तर नाम जप है अगर नाम जप नहीं करोगे तो समाधान हो ही नहीं सकता या आप करके देख लो जंतु बंधवा के देख लो हवन करवा के देख लो कलावा बंधवा के देख लो कुछ नहीं होने वाला राम राम राम राधा राधा राधा सब बात पर जी वो अच्छा लगता है कि दूसरे जैसे पंडित जी कर लें ठीक रहेगा बट हमें कुछ ना करना पड़े तुम करो पाप वो पंडित जी करें जब तो तुम्हारा कल्याण हो जाएगा ऐसे हो जाएगा नहीं ऐसा कदापि नहीं हो सकता कदापि नहीं हो सकता तो जी बाहरी इससे मतलब उतना इफेक्ट नहीं पड़ेगा महाराज जी बिल्कुल असर नहीं पड़ेगा हम कह रहे हैं देखो खास बात समझिए स्वप्न में एक आदमी समुद्र में डूब रहा है अब वो कह रहा है बचाओ आवाज बाहर जोर से निकली मैं समुद्र में डूब रहा हूं बचाओ अब हम लोग सैकड़ों तैराक उसके सामने एकत्रित कर दे, नौकाएं एकत्रित कर दे।
क्या वह बच सकता है? एक उपाय केवल है। जगा दो उसे। समझ रहे हो ना? उसे जगा दो। अब एक बूंद पानी नहीं जब वो समुद्र में डूब रहा था। ऐसे ही यह जगत माया प्रपंच है। जब तक ज्ञान नहीं होगा। जब तक भजन नहीं होगा। जैसे उसका एक ही उपाय केवल जगा देना है। आप सैकड़ों तैरा के एकत्रित कर लो। बचा नहीं सकते उसको। नौका जल जहाज नहीं बचा सकते क्यों वह स्वप्न में डूब रहा है उसको जगा दो बस उसका स्वप्न टूट जाए वो जग गया अब वो बच जाएगा जो सपने सिर काटे कोई बिन जागे दुख दूर ना होई ऐसे जब तक आपको ज्ञान नहीं होगा तब तक आप रोते रहोगे इस जगत के मोह में राग में काम में क्रोध में लोभ में थोड़ा दान पुण्य किया थोड़ा पाप नष्ट हुआ फिर पाप किया फिर इससे इससे काम नहीं बनेगा काम बनेगा पाप की जड़ का नाश हो और पाप की जड़ है पाप की प्रवृत्ति।
उस प्रवृत्ति में जब तक ज्ञान नहीं जागृत होगा तब तक बात नहीं बनेगी। इसलिए खूब नाम जप करना अत्यंत अनिवार्य है। जी और कैसे पता लगेगा कि हमारे पाप नष्ट हो रहे हैं और हो गए हैं। जैसेजैसे पाप नष्ट होते जाएंगे चिंता शोक भय ये सब नष्ट होता जाएगा। अपने अंदर अपने आप हृदय में आने लगेगा। मैं निष्पाप हो गया हूं। अपने आप हृदय में आने लगेगा। मेरे पाप कम हो रहे हैं। अपने आप अनुभव में आएगा। जैसेजैसे भजन बढ़ता चला जाएगा। भगवान प्रिय लगने लगे, धर्म प्रिय लगने लगे, गंदे आचरणों से घृणा होने लगे।
यह है पवित्रता का लक्षण। पापी पुरुष के हृदय की स्थिति क्या होती है? हर समय वो चिंता डिप्रेशन शोक में रहता है। हां नेगेटिव उसका हर हर चिंतन नेगेटिव हो। यहां तक नेगेटिव हो जाएगा कि करने की वो सोच लेगा। अब उसको कल्पों तक भटकना पड़ेगा। अरे मनुष्य जन्म मिला है समस्या का समाधान करने के लिए ना कि समस्या बढ़ाने के लिए। क्या समस्या बढ़ाना है ना कि समस्या मिटाना है। लोग समझते नहीं है। सोचते हैं आप कर लेंगे तो हम समस्याओं का निदान कर लिया और घोर समस्या में फंस गए।
समस्या का निदान करने का उपाय मनुष्य शरीर था। उसको खो दिया। अब तो सवाल नहीं उठता। 8399 योनियों में एक भी योनि ऐसी नहीं है जिसमें आप भजन करके भगवान को प्राप्त कर ले। 84 लाख योनि की पूर्ति ये मनुष्य शरीर से होती है। इसी मनुष्य शरीर से भजन करके हम अपना कल्याण कर सकते हैं। समस्त समस्याओं का निदान भजन है। अगर भजन नहीं तो कुछ नहीं है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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