किसी का अच्छा मकान और गाड़ी देखता हूँ तो लगता है काश मेरा भी ऐसा होता
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
राहुल शर्मा जी राधेधे राधे-धे महाराज जी महाराज जी जब किसी का अच्छा मकान और कोई गाड़ी अच्छी देखते हैं तो लगता है ऐसा बड़ा घर मेरा भी होता गाड़ी मेरे पास भी होती महाराज जी ये सोचना या अगर हम किसी को देखकर के ही सोचते हैं कि अच्छा मकान और अच्छी गाड़ी होनी चाहिए तो किसी को मर के देख के फिर हमारी सोच क्यों नहीं काम करती कि हमको भी मरना है कुछ साथ नहीं जाना है इसलिए यार अच्छा काम कर लो दूसरों को सुख पहुंचा लो नाम जप भगवान का चिंतन कर लो, परलोक बना लो। इस लोक का तो कुछ जाने वाला है नहीं।
तो परलोक के विषय में कभी सोचा? परमार्थ के विषय में कभी सोचा? भगवान की प्राप्ति के विषय में कभी सोचा? हम कह रहे हैं एक अरब का तुम्हारा मकान हो। लेकिन मरोगे तो ईंट लाद के ले जाओगे क्या? शरीर भी तो नहीं जाएगा। अरबों बैंक में जमा हो। यहीं के यहीं रह जाएंगे। यार झूठी चीज के लिए क्यों इतनी बड़ी कामना करना? कामना करूं तो सत्य चीज की करो कि मुझे भगवान की प्राप्ति हो जाए। मैं सबको सुख पहुंचाऊं। मेरे द्वारा कोई पाप ना हो। मैं किसी की हिंसा ना करूं। किसी को दुख ना पहुंचाऊं।
ये बातें सोचो ना। ये बातें सोचोगे तो परेशान हो जाओगे। क्योंकि जितना तुम किसी का मकान देख रहे हो उसके बाद जब तुम अपना मकान तैयार करोगे तो ऐसा मकान भगवान तुम्हें दिखा देंगे जो तुम्हारा मकान कुछ है ही नहीं। उसके आगे फिर क्या करोगे? फिर और बनाओ। बनाते बनाते मर जाओगे। कुछ होगा नहीं अब कितनी आयु रह गई अपने को क्या पता अगला मिनट हमारा है कि नहीं हमें क्या गारंटी हमें क्या गारंटी कि अगला मिनट हमारा है हम अगले मिनट रहेंगे कि नहीं रहेंगे कोई गारंटी नहीं यार ऐसी कमाई करो जो लोक परलोक सब जगह आनंद दे वह भगवान का नाम नाम जप करो और जैसे भगवान रखें वैसे रह लो और हमारा अंतिम बढ़िया बनना चाहिए मृत्यु के विषय में तो कोई सोचता ही नहीं यार और वो सत्य है वो ानी है और सब चौपट कर जानी है।
हमारा मित्र, हमारी पत्नी, हमारा पुत्र, हमारा परिवार, हमारा घर, हमारा बैंक बैलेंस सब यहीं रह जाएगा। यार जब अकेले जाना है। दुनिया में लाखों का मेला जुड़ा। हंसा जब जब उड़ा तो अकेला उड़ा। यार उस समय की बात सोचो। ये क्यों वो समय आने वाला है। अब कब आने वाला है अपने को पता नहीं। 20 साल, 10 साल, 10 मिनट, 10 सेकंड कोई पता नहीं यार। इसलिए सोच करो तो अच्छी करो। काहे कहीं ईंट पत्थर वाली सोच करो हैं अच्छी सोच करो भगवान की कृपा से जैसे तुम्हारा निर्वाह हो रहा है वैसे कर लो अच्छे आचरण करो भगवान का भजन करो किसी को दुख मत पहुंचाओ इसी से तुम्हारा मंगल हो जाएगा मर्जी ईंट पत्थर भी मिल जाए और भगवान भी मिल जाए ऐसा ऐसा ऐसा नहीं भगवान का लक्ष्य कर लो तो फिर सब व्यवस्था हो सकती है ईंट पत्थर का लक्ष्य करोगे तो भगवान नहीं मिलेंगे।
भगवान का लक्ष्य कर लो तो यह सब व्यवस्था हो जाएगी। महाराज जी जैसे जाते रास्ते में कोई मकान देख भाव ऐसा मेरा भी होता है। तभी तो कह रहे हैं जब राम नाम सत्य बोलते हुए देखा होगा तब लेते। महात्मा बुद्ध जी को इसी से तो वैराग्य हुआ था। जब अंतिम शव यात्रा को देखा बोले सबकी होती है तब बोले अब मैं सत्य को प्राप्त करूंगा और उन्होंने नियम लिया कि जब तक ब्रह्म बोध नहीं हो जाएगा तब तक मैं उठूंगा नहीं वैराग्य लेकर के तो जो बोध वृक्ष है उसी के नीचे उनको बोध प्राप्त हुआ ब्रह्म बोध प्राप्त इसीलिए ब्रह्म के मार्ग में चले पहले देखा एक बहुत जजर बूढ़ा आदमी तो उनका यह क्या है बोले मनुष्य है।
बोले ऐसा भी मनुष्य होता है। बोले हर एक मनुष्य ऐसा होता है। वह वृद्धावस्था है। वृद्धावस्था में सबकी जजर अवस्था मेरी भी होगी। बोले हां एक दिन भ्रमण में देखा कि राम नाम सत्य बोले ये क्या है? बोले मुर्दा है। बोले ये मुर्दा क्या होता है? बोले हर आदमी मरता है। बोले हम भी मरेंगे। बोले हां। तो फिर ये राजपाट पत्नी पुत्र परिवार ये किस काम आएगा जब मर जाएंगे। इसीलिए वो वैराग्य ले लिया। घर से भाग पड़े और फिर ब्रह्म बोध प्राप्त किया वो तो भगवान के अवतार कहे गए तो हम सबको चाहिए कि जैसी परिस्थिति भगवान दिए हैं उसमें हम राजी हो जाए और हम चाह करें उत्तम की जो शरीर छूटने के बाद हमारे काम में आवे क्योंकि हमारी यात्रा केवल एक शरीर तक तो है नहीं पता नहीं 84 लाख योनियों में किस-किस योनियों में जाना पड़े तो हम चाह करें भगवान की पूर्ति सब हो जाएगी तो चाह ऊंची करो, चाह भगवान से मिलन की करो तो यह माया अपने आप मिल जाएगी।
माया को सब कोई भजे माधव भजे ना कोई जो एक बार माधव भजे तो माया चेरी होए माया दासी हो जाती है हम कृष्ण कृष्ण कह के कृष्ण के लिए चले तो माया पीछे बाधा के रूप में पड़ जाती है। लो रुपया लो भोग सामग्री लो और जब हम माया के लिए दौड़ते हैं तो पकड़ में नहीं आती है। इसलिए हम कृष्ण के पीछे दौड़े तो माया हमारे पीछे अपने आप लग जाएगी।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- किसी को कोई बात समझाने पर वो न समझे तो क्रोध आ जाता है — शशांक वर्मा जी मुजफ्फरनगर से राधे-राधे श्री राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी ऐसा कई बार होता है कि किसी को अपनी बात समझाते हुए…
- स्वर्ग में वो कौन-सा सुख है, जो धरती पर भी नहीं है? — पारस कोहली जी नई दिल्ली से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी सुख और दुख एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। मेरा प्रश्न यह है कि वह कौन सा सुख स्वर्ग में है…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1401 — विक्रम पांडे जी मिर्जापुर से श्री हरिवंश महाराज जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपका सत्संग सुनता हूं और कृपा का अनुभव है महाराज जी…
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…