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किन नियमों का पालन करें कि संसार और भक्ति का संतुलन बना रहे ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

अर्पित जी लखनऊ से श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी जब कोई इंसान सेवा भक्ति और ब्रह्मचर्य का मार्ग अपनाता है लेकिन समाज में उसकी जिम्मेदारी जैसे परिवार नौकरी सामाजिक कर्तव्य भी उससे डिमांड रहती है घर वालों को तब किस तरह से संतुलन बनाना चाहिए क्या कुछ ऐसा दैनिक नियम हो सकता है जिससे भक्ति और संसार दोनों अधूरे ना रहे हां अगर पत्नी है तो महीने में एक बार सहवास करें शास्त्र आज्ञा है मासिक धर्म के पवित्र होने के बाद एक बार सहवास करें और तो ब्रह्मचर्य ही पुष्ट माना जाएगा उसका।

पराई स्त्रियों की तरफ गंदी दृष्टि ना करें। अपनी पत्नी से महीने में एक बार भगवान को प्रणाम करके सहवास करें। तो धर्म युक्त काम भगवान कहते हैं मैं हूं। और इसके बाद नाम जप अपना बंद ना होना चाहिए। शराब नहीं पीना, मांस नहीं खाना, कोई नशा नहीं करना, घूस नहीं लेना, चोरी नहीं करना, किसी की हिंसा नहीं करना। तो गृहस्थ धर्म में रहते हुए भी वह भगवान को प्राप्त कर लेगा। नाम जप में बड़ी सामर्थ्य है। पराई माता बहनों की तरफ दृष्टि ना रखें। अपनी पत्नी से ही अनुराग करें।

पर एक महीने में एक बार सहवास करें तो ब्रह्मचारी ही माना जाएगा। समझ रहे हैं? भाई जी जब दिनचर्या में कुछ बदलाव होता है तो उस वक्त मन थोड़ा क्या बदलाव होता है? मतलब जैसे कुछ काम ज्यादा है कुछ कम नाम जब चल रहा है ना हमने ये तो नहीं कहा बैठकर पूजा करो। हमने तो एक भी बार नहीं कहा कि आप बैठकर के पूजा करो। हम तो नाम जप की कह रहे कि सुबह उठो और चल दो और नाम जप चल रहा है। राधा राधा राधा शाम तक काम करो। राधा राधा राधा कोई परेशानी नहीं। हमने तो नहीं कहा पद्मासन लगाओ सिद्धासन लगाओ।

गृहस्थ आश्रम के लिए है भी नहीं क्योंकि उसको कब कौन सा कार्य लग जाए नाम जप करो। पवित्र आचरण से चलो कोई नशा ना करो। इसी से भगवत प्राप्ति हो जाएगी। टाइम भी मतलब नाम जप चल सहवास के टाइम। हां बिल्कुल बिल्कुल छोड़ना नहीं चाहिए। उसी समय दिल रुक जाए तो उसी समय हमारी दुर्गति हो जाएगी तो हम कभी नाम नहीं छोड़ते। राधा राधा राधा ये नाम उस तभी चलेगा जब आप धर्म से सहवास कर रहे हैं। अगर अधर्म से सहवास कर रहे हैं तो फिर नहीं माना जाएगा। फिर वो पापाचरण होगा। धर्म युक्त अपनी पत्नी से धर्म युक्त और समय युक्त अब जैसे संध्या का समय है, दिन का समय है।

ये सब सहवास के लिए निषेध है। रात्रि के समय में भगवानों दिशाओं को प्रणाम करके दिशाओं के देवताओं को तब यह बहुत धर्म युक्त हो जाता है। फिर वह धर्म युक्त हो जाता है।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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