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10 घंटे Job और फिर गृहस्थी के काम ऐसे में लगता है दीक्षा ना ही लें

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

श्वेता अवस्थी जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी हमने आपके श्री मुख से सुना कि बिना गुरु दीक्षा के भगवत प्राप्ति नहीं होती तो क्या ऐसे में हम मतलब अगर जब दीक्षा नहीं ले पा रहे क्योंकि नाम जप में बहुत श्रद्धा है लेकिन नौकरी 10 घंटे गृहस्ती के कारण नियमित फिर डर लगता है कि कहीं नाम की मर्यादा भंग ना हो जाए इसलिए कोई अपराध ना बने नहीं ले लेना चाहिए कहीं कहीं किसी महापुरुष से ले लेना चाहिए तो कम से कम हम भगवान के मार्ग में रजिस्टर्ड तो हो गए जो हमारी आचार्य परंपरा से हम वहां जुड़ गए।

अब हमें संख्या दी गई जैसे हम संख्या देते हैं प्रारंभ में 11 माला। अब हम चार दिन बिल्कुल दोद माला ही जप पाए। काम हमारा लगा रहा। तो हम अगले बार 111 में दो-दो माला बढ़ाते चले जाएंगे। तो जो हमारी ये कमी हुई पूरी हो गई। ऐसा नहीं कि हम 10 घंटे काम करते हैं तो हम एक घंटे भजन में नहीं दे सकते। हम दे सकते 24 घंटे में अगर 10 घंटे काम करते हैं तो आप हिसाब लगा लीजिए 6 घंटे सात घंटे सो लीजिए तो 17 घंटे हो गए। एक घंटे मनोरंजन कर लीजिए तो 18 घंटे हो गए। तो अभी तो बहुत बचे।

19 20 21 22 23 24 छ घंटे बचे। छ घंटे में हम तीन घंटे और छोड़ देते हैं। तीन घंटे भजन करें तो भगवत प्राप्त नहीं हो जाएगा। 24 घंटे के समय का विभाग कर लीजिए आप। तो 10 घंटे काम करना कोई बड़ी बात थोड़ी है। आपके पास 24 घंटे हैं। 24 घंटे में सात घंटे सोने के रख लीजिए। 10 घंटे काम के रख लीजिए। एक घंटे मनोरंजन के लिए रख। दो घंटे भोजन आदि के लिए रख लीजिए। अगर आप समय का विभाग करें तो आपके पास समय भजन के लिए है। हमको भजन के लिए समय निकालना चाहिए। नहीं मृत्यु कब किस समय हो जाए किसी को पता नहीं और मृत्यु हो गई तो सब धरा रह जाएगा।

तुम्हारा काम धंधा बैंक बैलेंस पढ़ाई लिखाई सब यहीं की है। जो नाम जप लोगे वही तुम्हारी आखिरी उन्नति है। नाम जप नहीं तो सब यहां का यहीं रखा रह जाएगा। हमारी बात मान लो। गुरु मंत्र कहीं किसी महापुरुष से लेकर के और जो जितना बने उतना नाम जप करो उसी से मंगल हो जाएगा। यह बहानेबाजी ना करो कि हम 10 घंटे काम करते हैं। ये यमराज नहीं सुनेंगे बहानेबाजी। समझ रहे हो ना? ये यमराज ये बहानेबाजी नहीं चलेंगे। वो तो मार के ले ही जाएंगे। काफियों को महाराज जी प्रश्न रहता है ऐसा क्योंकि गस्थ जीवन में फिर उनको एक ये भय रहता है कि अगर गुरु द्वारा जो प्रदत नियमावली है वो अगर नहीं कर पाए तो अपराध लगेगा तो और हानि हो जाएगी नहीं भगवान के भजन से कभी हानि होती है भगवान के शरणागत में कभी हानि होती हम कह रहे हैं जैसे नियमावली तो उसकी पूर्ति के उपाय भी तो है ना हम मान लो पांच दिन बिजी रहे एकदम भजन नहीं कर पाए तो हम जिस दिन से फिर फुर्सत मिलेगी तो 11 माला का नियम 11 माला और एक माला और जोड़ लेते हैं और महीना भर चलने देते हैं तो पूरा नियम पूरा हो जाएगा।

बेईमानी ना करें। ईमानदारी से यदि हम भजन करें तुम्हारे पास समय है। पक्का समय है। उठते बैठते चलते फिरते भी तो माला होता है। बिना माला के भी माला होता है। मान लो हम ट्रेन में जा रहे हैं या हम काम कर रहे हैं। तो हर समय हम बोलते थोड़ी रहते हैं। और उस समय हमारे चल रहा है राधा राधा राधा तो हमारी गणना तो पूरी हो रही ना। ऐसा नहीं करना चाहिए कि हम गृहस्ती का बहाना लेकर भगवान से विमुख हो जाए। अपने काम का बहाना लेकर भजन ना करें। यह गलत बात है। आप गृहस्थ हो आराम से गुरु मंत्र लो और जितना बन सके भजन करो।

तुम्हारा मंगल होगा। नियम पूरा नहीं होगा तो भी अमंगल नहीं होने वाला। जी मन छूट ढूंढता है। छूट ढूंढता है कि गुरुदेव से छूट मिल जाए। कहीं भजन में बस और सांसारिक उसमें तो हां इसमें छूट ही छूट है बस थोड़ा नियम पालन करो और चलते फिरते उठते बैठते नाम जप करो तुम्हारा मंगल ही हो जाएगा इसमें कोई अमंगल होने के चांस नहीं कि नियम नहीं पूरा किया तो अमंगल हो जाएगा ऐसा नहीं ऐसा नहीं महाराज जी जैसे चलते फिरते भजन तो कर ही रहे हैं और नाम जप भी करते हैं लेकिन वो संतुष्टि नहीं आ पाती ऐसा लगता है कि अभी उतना हो नहीं पा रहा है ये संतुष्टि तो ये संतुष्टि तो हमें में भी नहीं हो पाई आज तक तो तुम्हें कहां से होता जैसे जैसेजैसे लाभ मिलता है वैसे वैसे लोभ बढ़ता है यह सिद्धांत है किसी भी विषय में तो जैसे हमें भजन करते हैं ना तो आज तक हम अपनी बात कह रहे हैं आज तक कभी ये नहीं हुआ कि छक के भजन हुआ ऐसा कभी नहीं हुआ उसकी लोलुपता बढ़ती रहती है ऐसा लगता है यार और करें और करें ये सब झंझट छोड़ो रात दिन भजन करो भजन करने पर भी भजन की भूख भूख बढ़ती रहे।

यही भजन का फल है। यही पहचान है कि आपका भजन सही हो रहा है। जब भजन करने पर भी भजन की भूख बढ़ती रहे।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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