ज्योतिष हूँ, चेहरा देखकर भविष्य बताता हूँ, पर पूरा भविष्य बताने में झिझक होती है
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मैं एक ज्योतिष हूं और चेहरा देखकर भी लोगों का भविष्य बताता हूं। महाराज जी पर जब किसी का भविष्य फल उनकी आशा के अनुरूप नहीं होता नकारात्मक होता है तो मुझे उन्हें सच्चाई बताने में झिझक सी होती है। कहीं मेरे उत्तर सुनकर वो मायूस ना हो जाए तो महाराज जी इस स्थिति में मेरे को क्या करना चाहिए महाराज जी? वैसे हमें ऐसा लगता है अपने भविष्य की जानकारी नहीं करनी चाहिए। आपका कार्य है इसलिए आप करेंगे। आपके पास लोग आएंगे लेकिन हमसे प्रश्न किया है तो हम इसलिए कहते हैं कि भविष्य को सुधारने के लिए हम प्रयास आज नाम जप करें सत शास्त्रों का स्वाध्याय करें तीर्थ याटन करें दान पुण्य करें दूसरों का उपकार करें तो हमारा भविष्य अच्छा होगा अपने आप अच्छा होगा जब हम भगवान का नाम जप करेंगे जैसे हमारे भविष्य में बुरी बातें आनी है वह हमारे पूर्व पाप कर्म के अनुसार जो हमारे भाग्य में लिखा है उसी के अनुसार आती है।
तो हम अपने भाग्य को बदलने के लिए मनुष्य शरीर प्राप्त किया है ना कि अपने भाग्य में जो लिखा है वही भोगते रहे। हमें भाग्य बदलना है। हम मनुष्य हैं। हम भगवान के अंश हैं। तो अब हम हाथ या मस्तक की रेखा से हमें कोई बतावे कि कल आपके ऊपर भारी विपत्ति आने वाली है तो परेशान हो जाएगा। जोप कृष्ण चरण मन अर्पित तो कर है का नवग्रह रंक यह ग्रह यह नक्षत्र तो हमें भगवान का भजन करना चाहिए अच्छे आचरण करने चाहिए भविष्य जानने की कोशिश नहीं करना चाहिए माना आपको ज्योतिष का ज्ञान है तो आप भविष्य भाग्य देखकर बता सकते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको कुछ ज्ञान नहीं होता है और लोगों को संकट में डाल देते हैं।
उनके दिमाग में वैसे ही डिप्रेशन हो रहा है लोगों को और डिप्रेशन में डाल देते हैं कि तुम्हारे ऊपर तो यह चढ़ा है वैसा होगा वैसा होगा वो आदमी पर इतना तक गलत शिक्षा दे देते हैं ऐसे भी उपदेशक होते हैं जिनको ज्ञान नहीं है ऐसा ऐसा कैसे हो सकता है इस तरह के व्यवहार हमें लगता है कि ज्योतिषचार्य या शास्त्रज्ञ ज्योतिष शास्त्र है हमारा लेकिन हम कह रहे हैं हम कल की समस्या को क्यों देख आज हम नाम जप करेंगे जिससे सारी समस्याएं खत्म हो जाए। मंगल भवन अमंगल हारी उमा सहित जे जपत पुरारी भगवान शंकर जिनका नाम जप करते हैं उन भगवान श्री हरि का नाम जप करें उसी से मंगल हो जाएगा और आपको चाहिए कि जो उनका मंगल करें जिससे उनका उत्साह बढ़े वो बातें आप बताइए।
हां, यह जरूर बता सकते हैं कि अगर आपको समय मिले तो रुद्रा अभिषेक करवा लीजिए। समय मिले तो मृत्युंजय जाप करा लीजिए। यह मंगलमय कार्य बता सकते हैं। लेकिन ऐसी कोई बात ना बताएं जिससे वो आदमी डिस्टर्ब हो जाए जिससे आदमी अपनी शांति खो दे जिससे आदमी अपनी वो बुद्धि का कंट्रोल खो दे और कुछ ऐसा कर बैठे। तो ऐसे कोई कार्य ना करे जो धर्म विरुद्ध हो। जो शास्त्र सम्यक हो ऐसे कार्य बताएं। किसी का भाग्य जैसे आपको दिखाई दे रहा है कि 101 दिन में कोई दुर्घटना घटेगी तो उसे बता दे कि 101 दिन में कुछ संकट आने की बात है तो भगवान संकट मोचन का आप पाठ कीजिए।
आप मृत्युंजय का जप कीजिए। आप नाम जप कीजिए। बहुत उसे सहज में कह करके जैसे हम डॉक्टर को शिक्षा देते हैं कि पहली डॉक्टर ही आपकी मृदु भाषा है। अरे कुछ नहीं है। आप जैसे हजारों रोगी ठीक हो गए। भाई तुम निश्चिंत रहो। वह एक आदमी रिलैक्स हुआ क्योंकि दवा तो बाद में काम करेगी। आप पर विश्वास पहले होना चाहिए। तो ऐसे ही आप उसको रिलैक्स वाली बात तो बता दीजिए और जिसमें डिस्टर्ब होना है उसको छुपाकर उसका उपाय बता दीजिए कि हो सके तो आप ऐसा कर लीजिए। हो सके तो आप जो आपको जानकारी है तो मुझे लगता है कि हम समाज को डिस्टर्ब ना करें।
क्योंकि ऐसे जैसे मान लो आप मुस्कुरा रहे हो। अभी कहे आप इनका भाग्य अभी बता दे कि परसों घटना घटेगी पता नहीं घटना घटेगी कि नहीं घटेगी लेकिन तुम आज से आज से कहला आज से घटना जी एक आए थे कह रहे वो पंडित जी ने बता दिया कि मतलब ये मेरे बेटे की अल्प आयु है कह रहे तब से मेरा इतना वो हो गई डिस्टर्ब महाराज जी जाना तो है ही है इनको भी जाना है उनको भी जाना है सबको जाना है बट पहले भविष्य देख के या मतलब बहुत ज्यादा नकारात्मक विचार महाराज जी मन में भर जाते हैं महाराज जी इन बातों से हमें लगता है बच बचना चाहिए।
इन बातों से बचना चाहिए। भगवान का भजन करो। धर्म से चलो। कोई तुम्हारा बाल बांका नहीं कर सकता। हर विपत्ति को ताल ठोक के निकल आ जाए। बट ऐसा लगता है महाराज जी कि बता देंगे तो हम अपने भविष्य को सुधार देंगे। क्या सुधार लेंगे? भाग्य का परिवर्तन वशिष्ठ जैसे महापुरुष। वशिष्ठ जैसे महापुरुष भरत जी से कह रहे सुनो भरत भावी प्रबल। बिलख कहो मुनि हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधिहा खूब सीता जी की पत्रिका जन्म पत्रिका मिलाई थी राम जी से सतानंद जी ने और इधर वशिष्ठ जी ने कहीं योग नहीं था कि 14 वर्ष का वनवास होगा लेकिन होना था हो गया जो होना इतने बड़े-बड़े महापुरुषों के बीच में जो होना है उसे होना ही है महाराज ये भी नहीं रोक सकते जन्मजन जन्म से हम भटकते आ रहे हैं।
मनुष्य देह पाया है। अबकी बार हमें ब्रह्म प्राप्ति होनी चाहिए। भगवत प्राप्ति होनी चाहिए। हमारी बात को समझो। हम मतलब उपहास नहीं कर रहे। हमारी बात को समझो और हम किसी भी आदमी को डिस्टर्ब करने का कार्य ना करें। हम किसी आदमी को सुखी करने का कार्य करें। जैसे हमारे पास कोई आया है भाई हमारे भाग्य के तो हम उसके भाग्य में अगर देख पा रहे हैं कि संकट है तो हम उसको उपाय बताते हैं लेकिन संकट नहीं बताते। यार ऐसा कुछ लगता है कि अगर आप मृत्युंजय जाप करा लो तो और अच्छा रहेगा।
यह नहीं बता रहे कि 15 दिन में ऐसे से ऐसा हो जाएगा। नहीं ऐसे ऐसे नहीं। ऐसा अगर होता तो बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि हुए जो सब कुछ जानते हैं। सब कुछ जानते हैं। आप ऐसा ना समझो। हम बचपन से बाबा जी हैं। केवल मंत्रों में ही खेला है। जैसे लोग गुल्ली, डंडा और क्रिकेट खेलते हैं ना हम मंत्रों में ही खेला है। शास्त्र का मनोरंजन किया है और जीवन भर जितेंद्र और ब्रह्मचर्य का पालन करके भगवान के मार्ग में चले हैं। तो किडनी फेल है और डायलिसिस हो रहा है और जीना मुश्किल है।
कर्म का यह फल होता है। अब ये आज के कर्म का फल नहीं ये पूर्व के कर्म का फल है। ऐसे हम मिटा सकते हैं। आप विचार करो इतना भजन कर तो मिटा सकते हैं तो यह किसी के भाग्य को मिटा सकते हैं क्या भाग्य को मिटारने की ताकत किसी को नहीं है जो कुछ लिखा है वो होके रहेगा होई सोई जो राम रच राखा को कर तर्क बढ़ा तो अस जपन लगे हरि नामा भगवान का नाम जप करो इसी में मस्ती है
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…
- भगवान मिलेंगे या नहीं कैसे पता चलेगा? — भगवत दर्शन का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवान के दर्शन करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवत दर्शन का सरल और सर्वोत्तम उपाय दिन रात उनके नाम का जप करो और एकांत में रो भगवान मिल जाओ।…
- अगर एक नाम का इतना बड़ा फल है, तो निरंतर नाम क्यों जपें? — निखिल जी मुंबई से राधा वल्लभ श्री हरिव श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी एक नाम का फल पूरा त्रिभुवन से भी बड़ा है तो फिर निरंतर नाम जप क्यों कहा जाता है क्योंकि एक नाम जिसको कहा…