संत-महात्मा पूरा जीवन लगा कर भगवान को प्राप्त करते हैं तो हमें भगवान कैसे मिलेंगे?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
निहारिका जी मथुरा से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी जो संत महात्मा जी हुए हैं उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया भक्ति में तब जाकर उन्हें कृष्ण मिले निकुंज में वास मिला हम मृत्यु लोक के पापी जो ना चाहते हुए भी अनजाने में ना जाने दिन में कितना पाप कर देते हैं कुछ ही माला करते हैं संतों के मुकाबले जरा सा ही नाम जप करते हैं तो ऐसे में निकुंज वास अगर डिब्बा का कनेक्शन इंजन से हटा दिया जाए तो कई किलोमीटर चल पाएगा एक चक्का नहीं घूमेगा नहीं। अगर ब्रेक लगा के और इंजन हटा दिया जाए तो जो 2500 डिब्बा जुड़े होते हैं उनकी कोई सामर्थ्य है और अगर कनेक्शन कर दिया जाए तो जो इंजन जहां पहुंचेगा वही डिब्बा पहुंचते हैं कि नहीं?
तो हम सब डिब्बा हैं और आचार्य गुरु और संत इंजन है। हम अपना कनेक्शन कर लेते हैं। हम उनके चरणों की शरणागति ले लेते हैं। हम उनसे अपना संबंध मान लेते हैं। हमारे गुरु हैं। हमारे स्वामी हैं। हमारे सर्वस्व हैं। तो हजारों को ले जाते हैं। इंजन में दो ही तीन होते हैं। लेकिन डिब्बा में 100 50 बैठे होते हैं। और हर डिब्बा में 100-100 50 तो दो 400 500 एक ट्रेन में जाते हैं। तो ऐसे संत जो भगवान के रात दिन भजन में लगे हैं वो हजारों को समेट के ले जा सकते हैं जो अधिकारी नहीं है उनको भी सा तरति सा तरति सा तरति सा लोक तारति वो स्वयं तर जाते हैं तर जाते हैं तर जाते हैं वो लोक के लोक को तार देते हैं मम भक्ति युक्त भनम पुन तो ऐसा मन में नहीं सोचना चाहिए कि वो इतना भजन करते हैं तो हम कैसे भगवान को प्राप्त कर पाएंगे हम ऐसे प्राप्त कर पाएंगे जैसे पूरा पूरा फुल पावर इंजन में होता है।
डिब्बे में कोई पावर नहीं होता। पर डिब्बे का कनेक्शन इंजन में होने से वो उसी पावरफुल इंजन के बराबर दौड़ता है। और जहां इंजन पहुंचता है वहां वो डिब्बा भी पहुंच जाता है। तो हम लोग एक डिब्बे की तरह हैं। जैसे 500 लोग हमसे जुड़े हैं। लेकिन हम में पावर अपने को भी कल्याण करने का नहीं। तो हम आचार्य के शरणागत हैं। हम गुरुदेव की शरणागत हैं। वो भगवान पावर दिए हैं आचार्य को गुरुदेव को वो हमें पार कर देते हैं। हमारी सामर्थ्य नहीं कि एक मच्छर को भी भगवत प्राप्ति करा सके।
बस उनकी कृपा से हम जिन हजारों को चयन किया वो उनकी कृपा से पास हो जाते हैं। वो उनकी कृपा से पार हो जाते हैं। तो हमें विश्वास रखना चाहिए। हमें संत पर भगवान के आचार्यों पर पूर्ण विश्वास करके उनकी आज्ञा के अनुसार चलना चाहिए तो हम भगवत प्राप्त हो जाएंगे। हमारा संबंध हो जाए कि हमारे गुरुदेव, हमारे स्वामी, हमारे भगवान, हमारे इष्ट इसी संबंध से भगवान कल्याण कर देते हैं। संबंध में बहुत बड़ी ताकत है। हमारा जन्म जन्मांतर से भगवान से संबंध है। मैं ईश्वर का अंश हूं।
पर ये भूल चुका हूं और नए-नए संबंध स्थापित कर लिए और भगवान का जो हमारा पुराना संबंध उसको भूल गए इसीलिए हमारी दुर्गति हो रही तो गुरु के संग से भगवान के संबंध की होते हुए भी नवीन स्मृति जागृत हो जाती है और जहां ये आया कि मेरे भगवान मित्र मेरे भगवान पति मेरे भगवान पुत्र मेरे भगवान स्वामी तो बस भगवान की प्राप्ति सहज हो जाती है जी नितेश कुमार जी बिहार से जय श्री राधे श्री हरिवंश महाराज जी महारा जी जैसे मीरा जी कहते हैं कि मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा ना कोई महारा जी वैसे ही अनुराग वैसा ही प्रेम कैसे होगा श्री जी के प्रति अब हम मीरा जी तो नहीं बन सकते लेकिन मीरा जी के बताए हुए मार्ग पर चलकर जहां मीरा जी पहुंची वहां पहुंच सकते हैं।
मीरा जी तो नहीं बन सकते। हलाहल विष का कटोरा पीकर के नाचती रही। मीरा जी जैसे हम नहीं बन सकते। मीरा जी तो मीरा जी हैं। अद्वितीय है। उनके जैसे जीवन में कभी किसी भोग को स्वीकार नहीं किया उस देवी ने जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो ना कोई बचपन से लेकर पूरा जीवन निर्वाह हम तो उनके चरणों की धूल की याचना करते हैं। मीरा जी बनना तो बात अलग है। मीरा जी कृपा कर दें और थोड़ा सा श्री कृष्ण प्रेम जागृत हो जाए। थोड़ा भगवन नाम में प्रीति हो जाए।
यही बहुत बड़ी बात है। उन देवी जैसी हमारी सामर्थ्य किसी की नहीं है। क्योंकि उन बचपन से लेकर भगवान के प्रेम में मतवाली मीरा हम लोग तो बचपन से लेकर भोगों में मतवाले हो रहे हैं। संसार में मतवाले हो रहे हैं। वो केवल बचपन से जब से सुधि संभाली होगी तब से श्री कृष्ण प्रेम श्री कृष्ण प्रेम के सिवा कोई अन्य बात नहीं। तो मीरा जी जैसा बनने की बात तो हम प्रह्लाद जी जैसा बनने की बात तो हम नहीं कह सकते। ध्रुव जी जैसा बनने की बात तो नहीं कह सकते। हां इन महापुरुषों की कृपा से इनके बताए मार्ग पर चलने की सामर्थ हमें आ जाए।
ऐसी बात हम मांगते हैं। और नाम जप करो। नाम जप में सारी सामर्थ्य विराजमान है। नाम जप नहीं तो फिर सब नाटक हो जाएगा। नाम जप करो। खूब नाम जप करो। कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधा राधा राधा राम राम राम राम देखो आप सामर्थ आती है कि नहीं। खूब नाम जप करो।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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