महाराज जी कोई उदाहरण जब भगवान ने Seconds में आपकी सुनी हो
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
हम आपको बताएं आज तक की बात सेकंड में बात सुनी गई है। सेकंड में मिनट नहीं सेकंड में क्योंकि भगवान के सिवा हमारा कोई है नहीं। बचपन से भगवान में लगे हैं। भगवान के सिवा कोई है नहीं। तो हम मिनट की बात नहीं कहते। सेकंड में बात सुनी गई है। आर भाव होकर जे ही कनेक्शन हुआ ते परिणाम तुरंत दिखाई दिया। तुरंत परिणाम बदलते दिखाई दिया है। भारी से भारी समस्या ऐसे निकल गए। ऐसे एक उदाहरण बताइए ना महाराज जी। हम जा रहे थे गंगा किनारे आगे दलदल ही था और ऊपर पपड़ी पड़ी हुई थी।
भगवान का स्मरण कर रहे हैं। मस्ती से छड़ी घुमाते हुए चिंतन करते हुए। बड़ा सुंदर जीवन था गंगा किनारे का। अचानक आवाज आई। ए आगे दलदल है। तो हमने आसपास देखा कोई नहीं हमारे कानों में आवाजें कैसे आई जे हुई छड़ी ऐसे मारी तो पूरी छड़ी चली गई ऊपर पपड़ी है और नीचे दल अब बताओ अगर वहां हम फंस जाते फंस जाते तो क्या दूसरा उदाहरण महोबा से हम बनारस जा रहे थे हमारे पास छोटी सी टिकट थी वो जो दे दिया था हम ज्यादा पढ़े लिखे हैं नहीं अंग्रेजी हमें बिल्कुल नहीं आती तो वो ऐसे जनरल की टिकट दे और हमको बैठाल दिया था एसी वाले उसमें अच्छे वाले उसमें तो हम तो टिकट है यह बात से हम बैठे थे बाबा जी हमें क्या
फर्क इतने में वो पूरा बैच आया जब चार छह स्टेशन निकल गए तो हमारे कहा टिकट तो हमने बड़े गर्व से दिखा दिया तो कहा ये क्या है ये पहली बात तो आप कोच में बैठे हुए हो इसकी टिकट नहीं आपकी और दूसरी बात ये जनरल की टिकट और तीन स्टेशन की टिकट है आप कहां जा रहे हो हम कहा बनारस तो बोले आपके पास टिकट ही नहीं अब वो वो जो दो चार सबकी श्रद्धा संतों पर थोड़ी होती तो वो गालियां बकने लगे बोले खड़े हो हम खड़े हो गए बस भगवान का चिंतन किया कि हमको तो प्रभु कुछ पता नहीं है ना हमारे पास पैसा है तुरंत ऊपर से एक आदमी उतरा अंग्रेजी से उनसे बात की तुरंत हमको इतना बड़ा कागज जैसा उन्होंने दिया और उसको रुपए गिन के दिए और कहा महाराज जी आप बैठ जाइए हम आराम से बैठ गए वाराणसी में उतर गए कौन था।
किससे हमारा परिचय था? एक सेकंड में भगवान ने ऐसे एक जगह नहीं हमने हजारों बार देखा कि हमारे भगवान हमारी एक-एक बात सुनते हैं। हमारे पास हैं। हमारे साथ हैं। हम अगर एहसान अनुभव ना हो तो हम बाबा जी लोग जिए कैसे? रोटी दाल के लिए थोड़ी जी रहे हैं। भगवान के प्यार के लिए जी रहे हैं। उनका संबंध है। उनके सिवा हमारा कोई है नहीं। भारी से भारी समस्या को मिटाते हुए भगवान को देखा। भारी से भारी। एक बार हम आ रहे थे गिरिराज जी की परिक्रमा देख के रात्रि के 2:00 बजे के लगभग और वो जो ऊपर ऐसे बने होते डिवाइडर डिवाइडर में गाड़ी चढ़ गई वो सो गया ड्राइवर जो ये ऐसे चढ़ी वो गाड़ी एकदम पलटने वाले राधे श्याम गाड़ी बंद वैसे खड़ी हो गई अब ड्राइवर एकदम उतरा और कहा माफ कर दीजिए माफ कर वो मतलब भयभीत हो गया कि लोग मारेंगे हम कहा नहीं नहीं उसने कहा हम सो गए पता नहीं कैसे माफ कर दीजिए कभी नहीं सोए हम कहा बिल्कुल ना तो पीछे से कोई गाड़ी आई ना अपनी गाड़ी पलटी सब सुरक्षित भगवान का एक एक पल एक-एक पल अपने भक्तों का साथ देते देखा गया है जहां मेरा भक्त चरण रखे वहां रखूं मैं हाथ पीछे पीछे मैं फिरूं कभी ना छाणू साथ भगवान बहुत कृपाल है।
हजारों घटनाएं ऐसी जीवन की है जिनमें दिखाई दिया मेरे भगवान ने तुरंत तुरंत व्यवस्था की तुरंत संभाला तुरंत नहीं तो घटना घट जाती है। महाराज जी आप परिक्रमा मार्ग पे बताते थे कि एक सीधा मोटरसाइकिल हां वो शराब पिए मोटरसाइकिल से सीधे आया और हमारे दोनों पैरों के बीच में उसका मोटरसाइकिल का पहिया हम कहा राधा मोटरसाइकिल बंद हम कहा ए भैया तो वो नशे में था हम कहा ए भैया ये क्या है तो हमने कहा ए बाबा तू बता मोटरसाइकिल बंद कैसे हो गई हम कहा आपने नहीं बंद किया क्या बोले नहीं तो हम कहा हमारे ठाकुर जी ने अगर राधा वो बंद श्री जी सब कितनी बातें भगवान सब पूरा जीवन ही भरा हुआ है।
55 से 11 वर्ष से लेकर के आज 55 56 वर्ष की आयु उन्हीं की शरण में तो व्यतीत हो रही है। उन्हीं की शरण में अच्छा लगता है। आप
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…
- भगवान मिलेंगे या नहीं कैसे पता चलेगा? — भगवत दर्शन का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवान के दर्शन करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवत दर्शन का सरल और सर्वोत्तम उपाय दिन रात उनके नाम का जप करो और एकांत में रो भगवान मिल जाओ।…
- अगर एक नाम का इतना बड़ा फल है, तो निरंतर नाम क्यों जपें? — निखिल जी मुंबई से राधा वल्लभ श्री हरिव श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी एक नाम का फल पूरा त्रिभुवन से भी बड़ा है तो फिर निरंतर नाम जप क्यों कहा जाता है क्योंकि एक नाम जिसको कहा…