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अगर गलती से भगवान का श्रीविग्रह टूट जाए तो इसका क्या संकेत है ? इसके बाद क्या करें ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

अमन जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी यदि घर में भगवान जी का विग्रह स्वरूप गलती से टूट जाए तो इसका आध्यात्मिक अर्थ क्या है महाराज जी कुछ नहीं कुछ नहीं कास्ट अष्टम धातु पाषाण मिट्टी इनहीं की तो मूर्तियां होती है और ये सब मायाकृत है और ये सब नाशवान है तो अगर कभी मूर्ति गिर जाती टूट जाती है तो उसको लेकर के हम यमुना जी या गंगा जी पवित्र नदियों के समीप खोद के और समाधि दे देते हैं और नई मूर्ति ले आते हैं। भावना में उपासना करनी है। यह मूर्ति तो आज नहीं तो कल एक समय है।

एक समय है अगर हमसे चूक हो गई या फिसल गए तो ये तो टूट जाएंगे। ये टूटने वाली है। तो उसमें कोई विषय विशेष विषाद करने की बात नहीं। नवीन विग्रह विराजमान कर ले और उनको समाधस्त कर दे। ऐसी बात ऐसा कुछ नहीं कि बड़ा अमंगल हो गया। मूर्ति कहां टूट गया या मूर्ति टूट गई तो बड़ा कुछ नहीं। गोचर जहां लग मन जाई सो सब माया जानो भाई। अब जैसे आग लग जाए तो ये सब जलेंगे कि नहीं? जलेंगे कि नहीं? तो क्या भगवान जलने वाले होते हैं? क्या तो यही बात समझ ली। हम भगवान का प्रतीक मान के विराजमान किए हैं।

तो अग्नि भी तो भगवान है तो भगवान भगवान में लीन हो गए। ज्यादा विषाद की बात नहीं है। अभी आग लग जाए तो जितनी मूर्तियां छवियां हैं ये सब अंतर्ध्य हो जाएंगे। ये राख हो जाएगा सब। तो जहां तक हमारी इंद्रियां जाती हैं। जहां तक हमारा मन जाता है ये सब मायाकृत है और मायाकृत है तो भाई गिरेगा। अब बाढ़ आई मंदिर बह के चला गया। भूकंप आया मंदिर ढह गया तो भाई यह तो लीला होनी है क्योंकि अशाश्वतम ये परिवर्तनशील नाशवान संसार परिवर्तन होता ही है इसमें चिंता की कोई बात नहीं कोई अमंगल हम शालिग्राम भगवान स्नान कर हाथ से गिर गए बोले कोई अमंगल कुछ नहीं फिर उठाओ फिर स्नान करो कोई ऐसा नहीं बोले मूर्ति जल गई वो अमंगल कुछ नहीं ऐसा भावना नहीं करना चाहिए मंगल भवन भगवान को कोई जला नहीं सकता।

आग में जो दाहिका शक्ति वह उन्हीं की दी हुई है। उनको आग छू नहीं सकती। तो जो मायाकृत है वो तो जल जाएगा। तो जो जलने वाला है वही जलेगा। जो जलने वाला नहीं वो नहीं जलेगा। बात समझ में आता है? जैसे इस शरीर को जला दिया जाए तो शरीर जल जाएगा लेकिन आत्मा नहीं जलेगी। क्योंकि वो जलने वाली है ही नहीं। वो अविनाशी है। अविनाशी का विनाश नहीं हो सकता। विनाशी को बचाया नहीं जा सकता। आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों यह सब जितना आप देख रहे हैं यह सब परिवर्तनशील है। इसलिए विवेक का भी आश्रय रखना चाहिए।

हम कम आस्था वाले हैं तो हमें थोड़ा संशय हो जाता है कि भगवान ऐसा क्यों वो तो सर्वशक्तिमान है। उनके सामने हमारे साथ ऐसा या उनके साथ ऐसा क्यों हो गया? यह है वो है। बहुत सारे विचार। नहीं नहीं ऐसे नहीं करना चाहिए। ऐसा भाव नहीं रखना चाहिए। अब कई सिंहासनों को जलते हुए देखा है अगर वो आरती की और रख दिया और ध्यान नहीं दिया वो पर्दे पर्दे में हवा जरा सी लगी और पर्दे में आग लगी और मैं भगवान से सब तो खेल है उनका वो नया अपने को विराजमान करना चाहते अब नया पर्दा और नया ठाकुर विराजमान करो आरती करो पूजा करो भगवान को तो कई बार बिजली का वो तार आपस में वो उस का तार से हां हां उससे पूरा मंदिर का सब जल गया ऐसे कई जगह ऐसे पाए जाते ऐसा भगवान अविनाशी है उनको कोई विनाश कर नहीं सकता और माया विनाशी है इसको बचाया नहीं जा सकता इसमें जो आप देख रहे हो हमारी भावना है कि हमारे भगवान है नहीं तो कागज और रंग से आकृति भावनात्मक की गई है तो इसमें भगवान है तो आग में भी तो भगवान है इसलिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं रहेगी है।

हम्म।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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