श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी और पूज्य महाराज जी के बीच क्या वार्तालाप हुई ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
आप पहले आप कृपा कर ठाकुर जी की बधाई भाई पोशाह बहुत ठाकुर जी नहीं विराज ऊपर कुटिया में पहुंच और हमारे जी गौर गुरु राधा रमण जी प्रसादी और जी बाबा की और कुछ ऐसे अब पूरे अब मेरो तन बैठो और सब तो लो अब हम अंदर से नहीं बतावे कि अपार आनंद की अनुभूति हो रही अपने बाबा से लेकर आपके पिताजी ने जो दुलार किया राधा रमण जी में ना वो हमें याद कोई परिचय नहीं था कोई कुछ नहीं था पर ऐसे बुलाया और दुपट्टा डलिया और तुलसी दल सब ऐसे हम का हेतु की कृपालु राधा रमण जी तब से आगेगे आपके बाबा चल रहे थे पीछे पीछे हम राधा रमण जी में प्रवेश कर रहे थे तो हमें जो ब्रजवासी थे परिचय बता रहे थे कि आप आप हैं और ये आप हैं और उस समय आपका प्रकाश नहीं हुआ था कि आपका नाम प्रकाशित हो उस समय आपके पिताजी का बहुत नाम प्रकाशित था उस समय वो चल रहे थे पर दुर्भाग्य की ज्यादा दिन अपने बीच में नहीं रह पाए अंतर ध्यान हो गए पर वो आप जो उनके पास था वो सब आपको प्रदान करके गए।
हां बहुत हमारे वैष्णव समाज को बड़ा हित मिल रहा है। बड़ा मंगल हो रहा है आपकी वाणी से और यह सदैव मंगल होता रहे। यही सदैव हित बरसता रहे। सब नाम वाणी में लगे। भगवान की चर्चा में लगे। बिना अध्यात्म के पशुता का नाश नहीं होता। हमारे धर्म में अध्यात्म की प्रधानता होनी चाहिए। अध्यात्म में भगवत चर्चा है। वो सजीव अध्यात्म का मूर्तिमान स्वरूप है। और कुछ ना आवे केवल कथा सुने तो भगवत प्राप्ति हो जाएगी। धुंधकारी को कुछ नहीं आता था। केवल कथा सुनी भगवत प्राप्ति हो गई।
मथुरा की ब्रजवासनी जो गोपियां थी केवल कथा सुने भगवत प्राप्ति हो गई। रत्नावती जी केवल कथा सुनी भगवत प्राप्ति हो गई। कथा मात्र भगवान की भगवत प्राप्ति करा देती है और वो आप भूदा जना उस समाज को खूब पिला रहे हैं पिलाते रहिए खूब स्वस्थ रहिए और अपनी वाणी के द्वारा समाज को जागृत करते रहिए ये कथा जागृत करती है हम जो मोह निद्रा में सो रहे हैं ये भगवत चर्चा में जागृत करती है तो ये कार्य जो आप कर रहे हैं बहुत बड़ा कार्य कर रहे हैं जागृत कर रहे हैं समाज को भगवत कथामृत का पान करा रहे हैं और वंश परंपरा से परम पूज्य जी और पवित्र यह जो वाणी चली आ रही है वाणी तो वाणी ही होती है लेकिन ये कहां से प्रकट हो रही इसका भी प्रभाव होता है।
जब हम स्वयं उस मार्ग में चलते होते हैं और फिर हम वो बोलते हैं तो उसका प्रभाव बहुत जोर का पड़ता है। तो आपकी कुल परंपरा से इसी कथामृत का पान करते हुए राधा रमण जी के प्रेम रस का वितरण करते हुए तो वही आप कर रहे हैं और भगवान आपको स्वस्थ रखे। खूब खूब वितरण कीजिए। खूब कथामृत का पान कराइए। हमारे जो धर्मावलंबी जन है और जो धर्म से विमुख है उनको घसीटिए। नाम से भगवान के चिंतन से उनको घसीटिए और उनके मन को बलात परिवर्तन करके जय राधा रमण जी की बुलवाइए। महाराज जी मैं तो एक ही पंक्ति कहूंगा।
आपने इतनी सब बात कह दी तो बल मिल गया। पर अपने अंतःकरण से तो महाराज जी केवल पिताजी महाराज बाबा ने मैं चाहे मालास भी स्वीकार करूं चाहे प्रणाम करूं चाहे बोलू चाहे सुनू एक ही अनुभूति है बस महाराज जी कि ये उनकी सेवा में कर बिल्कुल महाराज जी कथा के क्रम में ऐसी ऐसी मैं बाबा जब अस्वस्थ हो गए जी वृंदावन थे छोड़ते नहीं मुझे तो एक ही बल है महाराज जी वो डॉक्टर आए थे कुछ ऐसे इलाज के लिए तो कुछ दे रहे थे तो मैं पास बैठ भगवान पिता ऐसे श्लोक सुनाने लगे तो एकदम चेतना ये मेरी दवाई दे रहा है नहीं दे रहे जी फिर महाराज जी मैं एक जगह कथा थी मैं गया दिल्ली तक पहुंचा चंडीगढ़ तो बीच में खबर आई कि बहुत अस्वस्थ हो गए तो दास वापस लौट कर आया जी वहां बोला तुम लोग कीर्तन करो हम नहीं पहुंच पाए तो थोड़ी देर शाम को चेतना आई तुम जो तुम यहां कैसे तुम तो कथा की आज्ञा ले गए थे।
मैं बोला मुझे पता चला। बोले ये क्या कर रहे हो? मेरा शिष्य व्यासपीठ पर कथा कह रहा हो और मैं प्राण छोड़ दूं। हां इससे बड़ा मेरा क्या? बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। और महाराज जी अगले दिन ऐसे ही हुआ। दास सेवा कर रहा था। जी जी और वो मां ने फोन पे चालू किया। बाबा सुनते रहे। जी जी तो मैं महाराज जी चाहे आपके चरणों में बैठूं कहीं बैठूं। मैं तो अभी भी उसी आसन पर बैठा हूं। बिल्कुल बिल्कुल आप ऐसी कृपा नामे रुचि जी द्वया वैष्णव सेवन ए से अधिक धर्म नहीं सो हां बिल्कुल बिल्कुल इससे बढ़कर सब शास्त्रों का सार महाप्रभु ने बता दिया सब शास्त्रों का सार आज तो स्ट हम तो सफेद पहने डोला करते हैं महाराज जी शरद पूर्णिमा पर तो पीतांबर धर श्रंगी तो आज ही जय हो अभी तक तो पीरी में छुप रहे थे आज पीो खोल के दिखा सफेदी में कौन सा पीो छुपा हुआ है पड़ो आपको कष्ट की अरे नहीं बहुत कृपा करी हमारा हृदय नाच पड़ा नाच पड़ा आज प्रभु ने मुझे
कृतार्थ कर दिया हां बहुत हम अंदर से लालायत थे पर तभी होता है जब प्रभु मिलाना चाहते हैं अंदर से पर यह जो डायलिसिस प्रक्रिया है यह इतनी खराब प्रक्रिया है कि इसके बाद फिर उठने की हिम्मत नहीं रह जाती खड़े हो तो अंधेरा छाता है चक्कर होता है तो इसलिए कहीं जा ही नहीं पाते बहुत कृपा करी कि दर्शन सेवा में महाराज जी मैं एक और अनुभूति कहूं मैं प्रतीक्षा चल रहा था क्योंकि दास मैं आने के कहना चाहिए था पर उसकी तैयारियों की वजह से नहीं कह पाया तो सेवा में प्रतीक्षारत तो था जी मन में उत्साह इस बात का था कि मैंने खूब प्रयास करके श्रृंगार किया।
जी फूल भी लगे ये लगे सब लगा। पर मन में यह भावना थी कि भगवान का श्रृंगार संत है जी और कोई श्रृंगार नहीं इसलिए सबको विनती करी जी अब महाराज जी आपका स्वास्थ्य ऐसा तो वो बात रही तो सेवा के बाद में मन में ऐसी रही बात कि सब चीज बनी बस आपकी तुलसी रह गई बस सब भोग बन गया तुलसी रह गई फिर कुछ दिन के बाद में जी आप पधारी राधा रमण जी भी गए थोड़े दिन बाद वो हमने मैंने उसमें वीडियो में देखा जी जी तब महाराज जी मन में एक बड़ी अद्भुत बात आई बोले ठाकुर जी आपने बड़ा समाधान कर दिया जी अब महाराज जी भी खड़े होते और आप भी खड़े रहते तो हम ही भ्रम में पड़ जाते कि सेवा यहां करनी है कि वो छज्जू का कहना एक पासे रहे तो इसलिए दास बस ये सब कहना है आपकी शरणावती उदार शिरोमणि है और आपके अनुग्रह से महाराज एक घर से भी एक बालकों के लिए इस समय दो लाख बालक हैं।
तो निमाई पाठशाला के नाम से आए वो सब सेवा कर रहे हैं शास्त्र की आशीर्वाद भोपाल पहले महाराज जी मंदिर में जय जय अच्छा
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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