॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

Mobile में सामने गलत दृश्य आता है तो ना चाहते हुए भी देख लेती हूँ

▶ YouTube

श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। महाराज जी मोबाइल पर आपके प्रवचन सुनने के बाद नाम बार-बार जपने के बाद जब भी मेरे मोबाइल के सामने कोई बुरा दृश्य आता है तो मैं उसे देखती हूं। भले ही मुझे पता है कि यह गलत है। इस वजह से बार-बार अपने भक्ति मार्ग से भटक नहीं देखना चाहिए। नहीं देखना चाहिए। यह गलत बात है। ये गलत आदत को छोड़िए। जो गलत आदत है उसको आप अपनाएंगे तो फिर कैसे बात बनेगी? हमें भक्ति मार्ग में चलना है। अच्छे बनना है। भक्ति मार्ग का मतलब कोई बाबा जी बनना नहीं होता है।

भक्ति चक्रवर्ती सम्राट अमरीश जी भी कर रहे हैं। चक्रवर्ती सम्राट है। अमरीश जी भक्ति कर रहे हैं। सुदर्शन चक्र उनकी रखवाली में रहता है। भक्ति का कोई तात्पर्य ऐसा नहीं कि वे भष बदल लेना ही भक्ति है या मतलब बाहरी दिखाओ। ये सब नहीं है। आप पट शर्ट में आप सलवार कुर्ता में आप साधारण वेश में भक्ति हो सकती है। क्योंकि भक्ति का मतलब होता है प्यार। अच्छे आचरण करना और दिल से भगवान को भजना। उसका मतलब बाहरी से केवल नहीं होता। अब हम लोग विरक्त हैं तो हमारा ये पोशाक है।

हमारी बाहरी पोशाक भगवत स्वरूप है। आप लोग गृहस्थ हो। आप गृहस्थ में हो। लेकिन हमको गलत आचरण जो हम जानते हैं गलत है। अगर आप गलत दृश्य देखोगे तो गलत आचरण करने का मन होगा कि नहीं होगा? उसमें रुचि होगी कि नहीं? तो गलत आचरण करोगे तो फिर भक्ति का मतलब क्या रहा? एक बात समझो। भक्ति का मतलब क्या रहा? एक तरफ आप संत के प्रवचन सुनकर के अच्छे बनना चाहती हैं। एक तरफ गलत दृश्य देखकर तो गलत आचरण तो आपकी उन्नति नहीं होगी। आपकी आध्यात्मिक उन्नति नहीं होगी। इसलिए आपको कठोर बनना पड़ेगा।

उन दृश्यों को तुरंत हटाना पड़ेगा। जो दृश्य हमारे मार्ग के नहीं है हमको उनको नहीं देखना है। हमें गलत बातें नहीं देखनी है। और आज हमारे नौजवान बच्चे गलत बातें देख कर बहुत ज्यादा गलत होते जा रहे हैं। गलत आचरणों में प्रवत्त होते जा रहे हैं। क्योंकि मोबाइल वो सब कुछ दिखा देता है। तो ये सब बातें अगर करोगे तो भक्ति कैसे होगी? बिल्कुल नहीं। अच्छे बच्चे बनो और ये जब गलतियां है इनको छोड़ो। बिल्कुल छोड़ो। सचिन जी शिमला हिमाचल से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में दंडवत प्रणाम महाराज जी भगवत मार्ग के पथिक को भगवत साक्षात्कार होने से पहले ऐसे कौन-कौन से अनुभव या संकेत या बहाव मिलते हैं जिससे पता चले कि वह सही मार्ग पर चल रहा है।

कामादि विकार निष्प्रभावित होने लगते हैं। जो पूरे त्रिभुवन को अधीन किए हुए हैं। काम भक्त के हृदय में वो स्फुरित होता है और नष्ट हो जाता है। जब काम का आकर्षण, परिवार के मोह का आकर्षण, धन की महत्व बुद्धि, मान प्रतिष्ठा ये सब सुनने लगने लगे। तो समझना चाहिए कि जो मैं नाम जप कर रहा हूं, जो भगवत कथा वार्ता सुन रहा हूं, सत्संग सुन रहा हूं, अध्यात्म में चल रहा हूं, उसका लाभ हमें मिल रहा है और हम उन्नति को प्राप्त हो रहे हैं। यदि विकार ग्रसित बुद्धि है, धन पर महत्व बुद्धि है, मान प्रतिष्ठा की चाह है, अभी भजन का रंग नहीं आया।

भजन का रंग तभी माना जाता है जब इन विकारों पर विजय प्राप्त हो जाए। काम क्रोध मद मान न मोहा लोभ न शोभ राग नहीं द्रोहा जिनके कपट दंभ नहीं माया तिनके हृदय बसो रघुराया जहां काम क्रोध अभिमान द्वेष राग ये सब नष्ट हो चुके हैं। शांत हृदय है। कोई चाह नहीं एक अद्भुत आनंद एक अद्भुत उमंग प्रतिपल यही कब मिलेंगे प्रभु कब मिलेंगे प्रभु तो समझना चाहिए कि हमारा मार्ग बहुत ठीक है और हम उन्नति को प्राप्त हो रहे हैं। अगर कंचन कामिनी और कीर्ति में हमारी प्रियता है तो अभी भजन हमारा रंग नहीं लाया।

कामिनी प्रिय लगे, धन प्रिय लगे, मान प्रतिष्ठा प्रिय लगे तो समझना चाहिए अभी मार्ग ठीक नहीं है। अभी अध्यात्म मार्ग में हमारी उन्नति नहीं हो रही। अध्यात्म मार्ग में उन्नति तभी मानी जाती है जब इन तीनों पर हमारी अनाशक्त बुद्धि हो जाए। ना कंचन में ना कामिनी में ना मान प्रतिष्ठा कीर्ति में। तब हमारा भजन सफल माना जाएगा। निरंतर भगवत स्मृति विकारों पर विजय और मान मदादि का त्याग। समझ पा रहे हैं आप? ठीक।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

संबंधित