॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

महाराज जी ने स्वयं दिखाए लाल बाबा जी महाराज द्वारा लिखे हुए दिव्य सूत्र।

▶ YouTube

श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

आओ महाराज जी आओ आनंद आ गया संतों की कृपा से आपका दर्शन होता रहता है आपकी कृपा से संतो का दर्शन होता है आपकी कृपा से तामस बहुत रजोगुण छोरा कल प्रभाव विरोध चोरा और राम जी कहे हैं सब मम प्रिय मम उपजाए इसका काट कैसे हो माजी काम देखो व्यवहार को परमार्थ में अगर चढ़ाओगे तो समझ में नहीं आएगा परमार्थ को व्यवहार में चढ़ाना अभी उल्टा जोड़ रहे हो आप ये व्यवहार है सतयुग का व्यवहार त्रेता का द्वापर का कलयुग ये कलयुग का व्यवहार है। तमोगुण बढ़ेगा। रजोगुण मिक्श रहेगा।

लोग काम आदि में फंसे रहेंगे। द्वेष आदि करेंगे। ये कल धर्म का प्रभाव है। तो कलयुग भी तो भगवान का प्रकट किया हुआ है ना। हां जी। तो ये व्यवहार को हम ये परमार्थ की भगवान बात कर रहे हैं। सब मम प्रिय सब मम उपधाय। मेरे द्वारा सब प्रकट किए गए। राक्षसों में राक्षसी बल भगवान ही तो देते हैं ना। आसुरी बल मैं हूं। देवताओं में दैवी बल मैं हूं। भगवान भगवान का ही तो बल है। भगवान से ही उपजा है। छाती से धर्म प्रकट हुआ है और पीठ से अधर्म प्रकट हुआ है। तो जहां भगवान व्यवहार की बात जैसे अभी व्यवहार की बात हो रही थी।

कि जो दुष्ट लोग हैं उनका संग साधू को नहीं करना चाहिए। जो अभिमानी है, संतों को भिखारी समझते हैं, जो झूठ बोलते हैं, जो पाप कर्म करते हैं, व्यभचार करते हैं, ऐसे दुष्टों का दूर से त्याग कर देना चाहिए। ये देखो व्यवहार है। अब परमार्थ क्या कहता है? सियाराम मयं सब जग जानी करौ प्रणाम जो जुग पान जहां व्यवहार का वर्णन होगा वहां शुभ और अशुभ अच्छा और बुरा त्याग और ग्रहण करने की बात आएगी और जहां परमार्थ की बात होगी तो वो बाढ़ है। जैसे बाढ़ में छोटा बड़ा गड्ढा वो सब बराबर हो जाता है।

तो उसमें बराबर जड़ चेतन जग जीव जत सकल राम मय जानी बंधो सबके पद कमल सदा जोरि जुगपाल सबके पद कमल और जहां बात व्यवहार की आई बोले जाके प्रिय न राम वैदेही तजिए ताहि कोटि बैरीसम यद्यपि परम वो चाहे रिश्तेदार हो चाहे नातेदार हो चाहे पूज्य हो चाहे कोई हो तजो पिता प्रहलाद विभीषण बंद भरत महतारी गुरु बल तजो कंत ब्रज बल तन भेद मंगल वाह श्री राम हमें परमार्थ वाली बात नहीं कह कह रहे जाके प्रिय राम वैदेही तजिए ताहि कोटि बैरी करोड़ों दुश्मनों के समान उसका त्याग कर देना चाहिए तो परमार्थ का उपदेश और व्यवहार का उपदेश अलग-अलग स्थानों पर अपनी-अपनी अपनी जगह शोभा पा रहा है।

एक को उठाकर एक पे नहीं रख सकते। दोनों का मार्ग अलग अलग है। व्यवहार और परमार्थ का मार्ग अलग अलग है। जब साधक परमार्थ की दृष्टि पे आता है तो उसकी दृष्टि अलग हो जाती है और जब व्यवहार की दृष्टि होती है तो उसकी अलग दृष्टि होती है। तो ये वर्णन है। पहले व्यवहार की दृष्टि रहेगी। व्यवहार की दृष्टि से वर्णन किया गया है। महाराज जी एक बार आपने पूज्य लाल बाबा का नाम लिया था गंगा जी के किनारे। आपने एक बार लाल बाबा जी महाराज का तो पूज्य गुरुदेव का कृपा पात्र जी तो आपके ऊपर एक जीवनी पर छोटा सा भाव एक सेवक ने लिखा है।

अपने गुरुदेव के ऊपर एक भाव लिखा हुआ है अच्छा लाल बाबा जी महाराज को आपने एक जगह निवेदन किया था कहा था कि उस समय हमारी बिल्कुल नई अवस्था थी 1820 की अवस्था थी। जी जी गंगा जी की रेती पर जी कहां घटिया घाट में शायद था घटिया घाट में तो महाराज जी बिल्कुल नेत्रों में बसे हुए हैं परिचय मिला और इन्होंने कहा था हां बिल्कुल बाल योगी लाल जी भाई छोटी डायरी रखि है ना ऊपर जी छोटी डायरी ला दो उनके उनके हाथ से लिखी बात उन्होंने अपने हाथ से लिखी जी जी जी छोटी दास जी महाराज जी आपने समाधि में अपना शरीर छोड़ा खिसरी मुद्रा लगा के समाधि में खिचरी मुद्रा लगा के अपना शरीर समाधि में ही छोड़ा खिचड़ी मुद्रा में ही प्रवीण थे जी

खिचड़ी मुद्रा में ही प्रवीण थे महाराज जी बहुत प्रवीण थे रात्रि के समय गए थे तो कह रहे थे वो सब खिचरी मुद्रा में जाने वाले ही है तो ये डायरी हमारी सन्यास की डायरी है जी ये उनके हाथ की राइट बाबा जी जी उनके हाथ की राइटिंग पहले पेज से जी जी सुनाओ जैसा सोचोगे वैसा हो जाओगे इसीलिए जैसा होना है वैसा सोचो अहम शून्य जीवन ही परमात्मा के साम्राज्य में प्रवेश करता है सरल एवं सहज जीवन में ही श्रद्धा का जन्म होता है और पावन देवी संपदा भी महापुरुषों के लिए जी उत्तराखंड साथ ही श्रेष्ठ अभ्युदय पंचवटी गुरुकुलम समझाड़ी मुनि की ऋषिकेश जी जी सब बहुत पुराना हो गया उन्होंने लिख के दिया था बैठे हुए थे और उन्ही की डायरी दी हुई है डायरी भी उन्ही की यह सब पायलन की राम है बस्ती का देश बिना पिंड का पुरुष है कबीर संदेश जय श्री राम सन 2000 की अमर 26 साल पहले की डायरी है हां ये सब उन्ही का लिखा उन्ही का लिखा हुआ है यहां तक उन्ही का लिखा हुआ है जी जी बहुत

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

संबंधित