॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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सब कोशिश करता हूं फिर भी गलती हो जाती है, करोड़ों का कर्जा हो गया है, क्या करूं?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

राधे-राधे गुरुदेव भगवान जी गुरुदेव आपके चरणों में प्रणाम गुरुदेव मैं आपका सत्संग वार्तालाप केवल 10 11 महीने से YouTube के माध्यम से देख रहा हूं। आपकी वाणी से सब बुरी आदतें और व्यभचार छोड़ दिया है। जीवन में हमेशा स्ट्रगल आ जाता है। समझ नहीं आता क्या करूं। कहां जाऊं? इन तीन चार साल में मैं शून्य हो गया हूं। अभी भी मेरे सिर पर बहुत सारा कर्ज है। महाराज जी मैं क्या करूं? राधा राम कोशिश भी कर रहा हूं। इस विषय में हमारी सामर्थ्य नहीं है। क्योंकि आपका व्यापार कैसे चले, आपका कर्जा कैसे मिटे।

आपने जो अपने मनोरंजन की विषय विलासता की उस समय आपने हमसे आदेश थोड़ी लिया था। तो जो हम कर्म करते हैं उसे हमें भोगना पड़ता है। अब आज राधा नाम नई फसल तैयार हो रही है। अब किसान आज बो दे और कह दे कि हमको 40 म दो चार दिन में काटने को मिल जाए। बार-बार खोदे तो बीज भी नष्ट हो जाएगा। उसको एक दाना नहीं मिलेगा। पांच छ महीने मेहनत करके वह अपनी फसल को सुरक्षित जब लगता है तब 40 मन एक बीघा में काटता है। आज आपने भक्ति शुरू की है। आप सोचे कि हमारा कर्जा मिट जाए। हम जो चाहे वह सब प्राप्त कर ले असंभव।

क्योंकि जब शरीर निर्माण हुआ था तब हमारे कुछ पाप और कुछ पुण्य दोनों से मिश्रित शरीर बना था। और जब हम इस शरीर में आए तो कुछ पुण्य और कुछ पाप फिर बन गए। शुभ अशुभ बन गए। तो अवश्य में भोक्तव्यम कृतम कर्म शुभाशुभम आपको अपने कर्मों को भोगना पड़ेगा जो आप कर्म करते हैं। अब जो हमारे संचित कर्म है हम उनको भस्म कर सकते हैं भजन बढ़ा के लेकिन प्रारब्ध भोग बड़े-बड़े संतों को भोगना पड़ता है। भोगना पड़ता है ना। तो हमारे पास ऐसे उपाय जैसे ऐसी चर्चाएं कि अमुक कार्य करो आपका कर्जा मिट जाएगा।

अमुक कार्य करो आपको नौकरी मिल जाएगी। अमुक कार्य करो आपका मुकदमा जीत जाएगा या अमुक कार्य करो आपके लिए सब काम ऐसी हमारे यहां चर्चा नहीं होती हमारे यहां चर्चा होती है कि आपको श्यामा श्याम की प्राप्ति कैसे और श्यामा श्याम की प्राप्ति के मार्ग में चलने मात्र से सारी कामनाएं अपने आप पूर्ण हो जाती है सतार्ग में जैसे मूल को पकड़ो ना मूल में जल चढ़ा दो तो डाल में पत्ते में पुष्प में फल में सब जगह पहुंच गया ऐसे हमारी जो चर्चा चर्चा होती है वह मूल की होती है।

भगवत प्राप्ति की होती है। जीव भगवत प्राप्ति करके परम सुख को प्राप्त करें। इसलिए हमारी चर्चा होती है। अब हमको टोटका टोना और जंतुर ये सब आता नहीं कि आप ये जंतुर बांध लो। कुछ दिनों बाद आपका कर्जा मिट जाएगा। ऐसे तो ऐसा तो हमारे पास कुछ ऐसा जुगाड़ है नहीं। और मुझे लगता है कि अगर नाम जप करते रहे तो इस जन्म का कर्जा क्या अनंत जन्मों की बिगड़ी बन जाएगी। विश्वास करके पर हम यह नहीं कह सकते कि इससे तुम्हारा कर्जा माफ हो ही जाएगा और हम यह जरूर कहते कि इस जन्म का क्या करोड़ों जन्मों का ऋण मुक्त हो जाएगा देव ऋण पितृ ऋण ऋषि ऋण मातृ ऋण सबसे यदि हम नाम जप करें और प्रियाजु को पुकारे तो उनकी कृपा से सब कुछ सुलभ हो सकता है।

पर अपने को अब आचरण ठीक करने पड़ेंगे। अब आचरण सुधारने पड़ेंगे। पीछे की खेती बहुत खराब है। आगे की फसल हमारी अच्छी है। मिलेगी। पर अभी जो पीछे का बोया हुआ है उसे हमें काटना पड़ेगा। इतना ज्ञान है नहीं आप में इतना तप है नहीं भजन है नहीं कि उसे आग लगा दो। ज्ञान के द्वारा सब कर्म संस्कार भस्म कर दिए तो फिर अवश्य में भोक्तव्य फिर भोगना पड़ेगा। तो धैर्य रखो। कर्जा लेकर के अपनी उन्नति के लिए जो चला जाता है बहुत धोखे का खेल है। कर्जा लेकर अगर व्यापार किया जाए, कर्जा लेकर वासनाओं की पूर्ति की जाए तो हमें लगता है इसमें मूढ़ता ही है क्योंकि व्यापार में हानि हो गई तो कर्जा वो हो गया और ऊपर से हानि का दुख भोगो तो देहातीती भाषा में कहते उतने पैर पसारो जितनी लंबी चादर हो तो अपनी चादर से ज्यादा पैर क्यों पसार दिए?

किसी से सलाह नहीं ली किसी महापुरुषों से कर्जा तो बिल्कुल लेकर व्यापार आदि नहीं करना चाहिए नहीं एक कर्जा छुपाने के लिए दूसरा लिया दूसरा लेने के लिए तीसरा लिया तो एक ऐसे एक गलती छुपाने के लिए दूसरी की दूसरी छुपाने के लिए तीसरी इसी में तो हम फेल होते जाते हैं इसी में तो हम बनते जाते हैं अब सुधार कर लो अब सुधार कर लो सब सुधर जाएगा भगवान बड़े कृपालु है उनका आश्रय लो नाम जप करो अच्छे आचरण करो मेहनत करो कम खर्चे से जियो पैसा बचाकर कर्जा पूरा करो हैं हम तो ऐसा कोई जादू ऐसी आशा रखते हो महाराज जी आप हृदय हो मेरा आप मेरा जीवन हो आप जो सलाह दोगे वो मेरे लिए प्राण प्रिय है अब असली बात में हमने कभी कर्जा लिया ना कभी निपटाया मांगा खाया और भजन किया तो अच्छा इस विषय का विज्ञान है ले अब हम मतलब इस विषय में घुसे होते तो हमें सब पता होता कि यार ऐसे से ऐसे हम तो यार मांगा है खाया है और जिंदगी में भजन किया तो वही भजन की बात बताते शास्त्रों की बात बताते और तो हमें संसार का ज्ञान आप लोगों से हो रहा है।

बहुत बहुत संसार का ज्ञान आप लोगों से हुआ है। नहीं हम गंगा किनारे का आदमी हमको ज्यादा ज्ञान नहीं था। ज्यादा बुद्धि हमारी जो सांसारिकता को जान पाए वो आप लोगों से जान पाए। ये नए-नए बच्चे जो सब साधु बने इनके द्वारा हमें जानकारी हो पाई। नहीं तो बहुत एकदम एकांतिक जीवन था। अब ये तो भगवान की लीला है कि वह सेवा देर करवाना चाह रहे इसलिए नहीं तो एकांतिक जीवन था मांगना खाना बस रात दिन अपनी श्री जी के इसलिए मुझे लगता है भैया अगर आप हमें हृदय मानते हो तो हम आपको ये जरूर बताते हैं कि भगवान का आश्रय और भगवान का स्मरण ये सब दुखों से बचा लेता है।

हरि स्मृति सर्व विपद विमोक्षणम भगवान की स्मृति समस्त विपत्तियों से भगवान का विस्मरण ही समस्त विपत्ति है कहा हनुमंत विपत्ति प्रभु सोई जप तो सुमिरन भजन तो नाम जप करो अच्छे आचरण करो और भगवान का भरोसा रखो और मेहनत करो जो [गला साफ़ करने की आवाज़] अर्थ आप विलासिता में खर्चा करते हो उसे कम करो और कर्जा पटाओ धीरे-धीरे परेशान होने की जरूरत नहीं ठीक है हां क्योंकि मतलब जिसे हम इसलिए बोल दिया कि अभी कई लाख लाखों लोग सुनते हैं तो किसी को यह लगता हो कि बाबा हमको कुछ राख दे देंगे कुछ जंतु बांध देंगे तो हमारा कुछ हमारे यहां केवल भगवत चर्चा होती है और ना ऐसा कोई टोटका ना किसी तरह का ऐसा कुछ पर नाम जप करो भगवान के आश्रित रहो सतार्ग में चलो अच्छे आचरण करो इसी से सब ठीक हो जाएगा और हमें विश्वास नहीं है हमारे लिए तो बाबा आपकी वाणी ही जंतु है हमारी वाणी ही राख है हमारे महाराज जी एक समय ऐसा भी आया था आत्मदेह का भी ख्याल आ गया था बट आपकी वाणी और आपका स्मरण उसने संभाल लिया महाराज हां नहीं नहीं आप आगे बढ़ो

अध्यात्म में आप दुखी मत हो ये हमारी लाडली जो ऐसी है ऐसी कृपालु है कि आप खुद देखना वो सब बाक बना देती हैं जिससे जीव का निस्तार हो जाए परम मंगल हो जाए हम सब अधम ही हैं हम सबसे गलतियां होती हैं पर वो प्रभु अगाध ज्ञान समुद्र लाडली जो कृपा समुद्र है उन्हीं से काम बनता है आप चिं चिंता ना करो जिसने आकर प्रभु को तो वो हर उपाय उन्हीं के हाथ में है। कहते हैं ना ऊपर वाला जब देता है तो छप्पर फाड़ के देता है। ले कहां से कैसे विधान बना देता है वो बला देता है। आप निश्चिंत रहिए बिल्कुल आनंदित रहिए।

भगवान के भरोसे रहिए और नाम जप कीजिए। भगवत आश्रित रहिए। कोई रास्ता ऐसा निकल आएगा जिससे हर समस्या का समाधान हो जाता है। देखो मिले तो आप हो आज लेकिन मिलने के पहले ही समस्या का समाधान श्री जी ने करवा दिया कि नहीं आप कह रहे आत्म करने की हम सोच रहे थे हम ऐसा गलत सोच रहे थे जब सत्संग मिला तो आप बदल गए आप आज तो सामने बैठकर सुन रहे हो तो विश्वास करो आगे और हमारा प्रकाश होगा आगे उन्नति होगी और आज दुख है तो यह रहेगा नहीं अगर आज सुख है तो अभिमान मत करो यह भी नहीं रहेगा जैसे दिन नहीं रहता रात आती रात नहीं रहते दिन ऐसे सुख दुख का चक्र चलता रहता है।

आप बहुत सावधान होकर रहिए। नाम जप कीजिए। कोई व्यसन मत कीजिए और किसी भी तरह किसी को दुख ना पहुंचे। बस यह ध्यान रखिए तो मालिक इतना कृपालु अपने आप ऐसी व्यवस्था कर देगा कि सब चलता है। बिल्कुल आप विश्वास कीजिए। ये सब सृष्टि भगवान से ही चल रही। हम लोग अहंकार में है इसलिए हमको करना लगता है कि मैंने किया मैंने किया। सब कुछ करता धर्ता हरी ही है। वही कर रहे हैं। यह बात समझ में आ जाए तो हम अभी निश्चिंत हो जाए। अभी निश्चिंत हो जाए।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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