॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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मन एक लड़की की ओर बहुत आकर्षित हो गया है गलत आदतें आ गई हैं, क्या करूँ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

राधा वल्लभ राधा वल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी भजन और दिनचर्या में आलस प्रम आपकी आज्ञा उल्लंघन और दोष दृष्टि हो जाने के कारण अब भजन बिल्कुल नहीं हो रहा और मन एक लड़की के प्रति गाढ़ हो गया है जिसके कारण मन जलता रहता है और सारे दुर्गुण आ गए हैं वो बुद्धि बहुत खराब हो गई है हां बच्चा अब गलत करोगे तो गलत तो होएगा अब जवान अवस्था आ रही इधर-उधर माता बहनों की तरफ गंदी दृष्टि करोगे तो पतन तो हो ही जाएगा हमारी बात मानो तो भाई सुधर सकते हो।

बात ना मानो मनमानी आचरण करो तो बात नहीं बनेगी। और देखो यह माताओं बहनों की तरफ गंदी दृष्टि है। बहुत पतन का कारण है। बहुत पतन का कारण है। और आगे चलकर के फिर इसमें जो व्यर्थ चिंतनों के द्वारा फिर ऐसा नहीं है कि सब प्रेम ही करते हैं। कुछ ब्लैकमेल भी इसी में हो जाते हैं। फिर लड़के क्या होते हैं? डिस्टर्ब हो जाते हैं या बच्चियां हुई वो डिस्टर्ब हो गए तो फिर एक उपाय आखिरी सुना मतलब उनको सूझ मिलती है कि शरीर जो है छोड़ दें बच्चे नहीं सब हमें लगता है यार होश में चलो अपने माता-पिता के अनुसार जब समय आवे तो फिर ब्याह कर लो और गृहस्ती में जाओ ये बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड इस जहर में फसोगे तो फिर ऐसे असर नहीं पड़ता प्रभु इसका असर ऐसे ले ये अवस्था ऐसी है अब प्यार से समझ जाए तो समझ कैसे तुम्हारी बहन की तरफ तरफ कोई देखे तो तुम्हें कैसा लगेगा और तुम किसी की बहन की तरफ देख रहे हो तो कैसा लग रहा है?

अरे जब हम कह रहे हैं कि जवान हो गए माता-पिता हैं उनकी भी जिम्मेदारी है। तुम्हारा कहीं कोई मित्रता ऐसी बन जाए तो अपने माता-पिता से सूचना दे उनको समर्पित करो। अपनी दोनों बातें और दोनों जगह पवित्रता से हो तो पानी ग्रहण संस्कार करके अपना घर गृहस्ती बसाओ। वो तो ठीक है। ये गंदी प्रवृत्तियां जो चल गई व्यभचार प्रवृत्ति। अच्छा देखो जैसे एक बच्ची है एक बच्चे से बॉयफ्रेंड से फिर ब्रेकअप फिर बॉयफ्रेंड या एक बच्ची बच्चा बच्ची से ब्रेकअप फिर इसे क्या कहते हैं तो आप सोचो कैसे जीवन रहेगा और आज ये एक मतलब नॉर्मल सी बात हो रही है नहीं हो रही नॉर्मल मतलब किसी की बहल की तरफ देखोगे उसके परिवार के समर्थ लोग हुए तो भाई व्यभिचारी की पूजा फूल और अगरबत्ती से तो होती नहीं है तो हमें लगता है कि छोड़ दो अच्छे बच्चे बनो गंदी बात मत करो हैं छोड़ोगे मान जाओ तो बच्चा मंगल है ठीक है और नाम जप करो मतलब ऐसे गंदे कार्यों की तरफ कदम मत बढ़ाओ नहीं तो बहुत तरह से [नाक से की जाने वाली आवाज़] फिर विक्षेप हो जाता है बहुत तरह से विक्षेप हो जाता है बहुत डरना चाहिए ये जो पुरानी परिपाटी बहुत अच्छी परिपाटी थी कि घर के बड़े बूढ़े सदस्य सब जाके वर देखे या कन्या देखे और शास्त्री पद्धति से मिलाकर फिर ब्याह होता था।

बड़ा मतलब एक बड़े और उनमें समर्पण भी होता था। जिन जिसको पति रूप में वरण किया आजीवन ऐसा भाव होता है ना और आजकल के लव मैरिज होता है और चार छ महीने में तलाक हो जाती है। नहीं हो जाती लव मैरिज कहा जाता है। तो हमें तो लगता है आधुनिकता जो फैल गई है व्यभचार की इसको छोड़ना चाहिए। ये इसमें पवित्रता नहीं है। पति पत्नी में पवित्र प्रेम में जीवन लंबा गृहस्थी का व्यतीत हो वो धन्य हो जाती है। गृहस्ती भी धन्य हो जाती है। अब पति पत्नी में प्रेम नहीं पति किसी और को चाह रहा है।

पत्नी किसी और को चाह रही कल अशांति तो वो घर गृहस्थी नहीं बसेगी। उसमें अशांति ही बनी रहेगी। और आज के जो नए बच्चे हैं अब इनका कैसे स्वभाव बनेगा? एक पति एक पत्नी में कैसे बनेगा? जब 14 जगह ब्रेकअप हो चुका है तो कैसे एक पति को उसमें भी ब्रेकअप आएगा ना उसमें भी ब्रेकअप आ जाएगा जीवन में तो हमें लगता है ये हमारी भारतीय पद्धति नहीं है इसको छोड़ना चाहिए और हमें धर्म पूर्वक चलना चाहिए साधना जी कानपुर से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी जब किसी मनुष्य की कोई सकारात्मक और प्रबल इच्छा होती है जिसमें किसी का अहित शामिल नहीं होता तो ये कह रहे हैं कि पूरी कायनात उसे पूरा करने में लग जाती है ये सत्य या असत्य यदि सत्य है तो इसका क्या चीज यह कह रहे हैं कि जब किसी की कोई सकारात्मक और प्रबल इच्छा हुई जिसमें दूसरे का अहित नहीं है तो नहीं दूसरे की अहित नहीं लेकिन धर्म युक्त है कि वासना युक्त है यह तो देखना पड़ेगा ना और दूसरी बात है तुम में उतना तप है उस कामना के कायनात क्यों लग जाएगी को काू के सुखदख कर दाता निज कृत कर्म भोग सुल भ्राता यहां जो आप करोगे अवश्य में भोक्तव्यम कृतम कर्म सुभा शुभम आपको भोगना पड़ेगा और आप कामना कर रहे हैं तो वह धर्म युक्त है या धर्म विरुद्ध है?

धर्म युक्त है तो आपके अंदर उतना तप है कि नहीं उस कामना की पूर्ति के लिए यह भी बात देखी नहीं है। धर्म युक्त है आप चाह कर रहे हो लेकिन आपके अंदर तप नहीं है तो आपको नहीं प्राप्त होगा। नहीं महाराज जी पूर्णत धर्म युक्त है। तो उसके लिए आपके अंदर तप होना चाहिए। आपके अंदर तप होना चाहिए। जब तप होगा तो उसका परिणाम आपको मिलेगा। सहयोग कोई नहीं करता इस सृष्टि में। सृष्टि एक दुकान है। यहां से लेकर देवता तक जितने भी देवी देवता हैं आपको उतना अनुष्ठान करना पड़ेगा जितनी आपकी कामना की पूर्ति का है स्वरूप।

अगर नहीं तो फिर नहीं पूर्ति होगी। अगर पूर्ति हो जाती है तो आपका पुण्य जमा है। उस पुण्य से हुई है। नहीं वर्तमान के अनुष्ठान से ही उसकी पूर्ति होगी। जैसे लोग कहते हैं मैंने भगवान से मांगा भगवान ने दिया नहीं। क्यों दे दे? क्यों दे दे? आपने भगवान को क्या माना है? आपने अपनापन भगवान से क्या किया है? अगर भगवान का पूरा सृष्टि है तो तुमने अनुष्ठान किया उतना जितना मांगा। अनुष्ठान किया होता तो पूरा हुआ होता। अनुष्ठान करो उससे पूर्ति होगी सकामता की और अगर नहीं कि हम भगवान को अपना मानते हैं तो मांगने की जरूरत क्या है?

वो सर्वज्ञ है वो सर्वशक्तिमान है। जितनी व्यवस्था कर रहे उसमें राजी रहो। जो जो प्यारो कर रहे स्वयं भाव है तो दोनों सिद्धांतों को समझना होगा। हमारी बात समझ पा रहे हो? क्योंकि जहां प्रश्न कर रहे हो सीधे अध्यात्म का उत्तर है। महाराज उतना तप करना पड़ेगा। हां, साधन ऐसे मिल जाए, तो फिर सब भगवान के हैं। भगवान सबके बैरी है क्या? इनको दे देंगे और दूसरे को नहीं देंगे। पूरी कायनात इनके सहयोग में हो जाएगी। दूसरे के मतलब प्रकृति से है। प्रकृति सहयोग जी। प्रकृति सहयोग थोड़ी करती है।

प्रकृति प्रकृति किसे कहते हैं? समझो। आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी तभी सहयोग होगा जब तप होगा। इसके अलावा नहीं इसके अलावा हमें बताओ ना सब चाह रहे हैं सब कामना कर रहे हैं सबकी पूर्ति हो रही प्रकृति सहयोग कर रही क्या फिर यह चीजें सबको मिल रहे हैं वायु जल पृथ्वी आकाश तेज अंदर जो अंदर हमारे अन्न जाता है पचता है ना वो अग्नि के द्वारा पचता है वैश्वानर अग्नि सबके उदर में विराजमान जठराग्नि के रूप में ये सब प्रकृति का अपना सिस्टम चल रहा है हमारी जो कामना है उसमें जब तप है भजन है साधन है तो हम प्रकृति रूपी दुकान से ले सकते हैं अन्यथा नहीं।

यह प्रकृति परमात्मा की है। इसका उतना ही भोग कर सकते हो जितना तुम्हारा तप है। जितना तुम्हारा भजन है जितना तुम्हारा पुण्य है अन्यथा नहीं। है तो पूरी प्रकृति में अगर समर्पण हमारे राजा रानी के प्रति फुल है। अगर हम उसमें तप उसमें तब भी पुण्य देखा जाएगा। जब समर्पण है तो मांग कैसी? तुम्हारा क्या रह गया मांगने का अधिकार? तन समर्पित मन समर्पित प्राण समर्पित अपना सर्वस्व समर्पित तो जो जो राखत हो त्यों त्यों रही तुम्हारी मांग कैसी बदले के बदले में कुछ नहीं मांगना राइट समर्पित हो समझ रहे जैसे हमारे सब कुछ राधा रानी है तो उनसे अपने लिए जैसे कि किसी और से अपना क्या रह गया अपना क्या रह गया बहुत शब्द अध्यात्म शब्द पे टिकता है समर्पण किसका तन वांग मनोभी रमलेश तवािता शरीर का मन का वाणी का अपने का जब अपने का समर्पण तो मांग किसके लिए वो खुद जिम्मेदार हैं योगक्षम वाहम्य हमम

क्या उन पर विश्वास नहीं तो फिर मांग कैसी समझ पा रहे हो अब ये बात है कि मैंने समर्पण नहीं किया लेकिन माना है ये अपने हैं आप मांग सकते हो अब उसके लिए साधन क्या है आपका हमारी बात समझ पा रहे हो हां बिल्कुल अध्यात्म अंधेरा नहीं होता है एकदम क्लियर मार्ग होता है और उसमें किसी के त्यों क्यों म तर्क नहीं चलता सीधा क्या हिसाब किताब है समझ पा रहे हैं आप समझ नहीं सके महाराज जी जप करते हैं ना जप करने के बाद में दो चार दिन सही चलते हैं चलने के बाद ऐसा आता है कि एक संख्या रोज बढ़ जाता है उठते हैं जप करते हैं उसके लिए मार्गदर्शन और और जप बढ़ते बढ़ाते जाओ और जैसे कोई रुपया तुम्हारा बातों में लगा के छीनना चाहे तो आप अपना हाथ एक रुपए में ही रखेंगे नहीं रखेंगे ऐसे ही जब तुम्हारे अंदर बात आ जाएगी कि मेरा भजन नष्ट करने के लिए मुझे क्रोध दिलाया जा रहा तो आप क्रोध नहीं करोगे भजन को पकड़े रहोगे राम राम कृष्ण कृष्ण कह देते हैं महाराज जी आप जानो हम नहीं जानते तो फिर चिंता मत करो राधा राधा राधा राधा राधा आपके

दर्शन होगा बहुत प्यास होता नहीं हो पाए फिर मैंने कहा महाराज जी अब आप सबको बुलाते हैं मेरे को क्यों नहीं बुला रहे तो आपने खटाक से मेरे को ये तो श्री जी का उनहीं के उन्हीं के कृपाव बल से

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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