चार-पाँच आदमी देखते ही वहीं बैठकर चुगली आदि करने लगता हूँ, यह आदत कैसे छोड़ूं?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
भारत भूषण जी हरियाणा से गुरुदेव आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। गुरुदेव मेरी एक बहुत बुरी आदत है कि मैं जहां भी चार पांच आदमी बैठे देखता हूं वहां ही बैठ जाता हूं। इधर-उधर की बातें करने लगता हूं। जैसे एक दूसरे की चुगली करते हैं। यह फालतू की बातें करने की आदत सी बचपन से ही हो गई है। महाराज जी इन प्रपंचों से निकलना चाहता हूं। क्षमता दीजिए महाराज जी। मैं कैसे अब आप जानते हो कि गलत है तो फिर आपको ही हटना पड़ेगा। और आप अवस्था भी आपकी श्रेष्ठ है। आपको कोई डांट तो सकता नहीं।
इसलिए आपको अपने मन को खुद डांटना होगा। और जब हम जानते हैं कि ये गलत है। देखो बाल्यावस्था गई, जवानी गई। अब आपका पदार्पण जानते हो किस में है? जरा अवस्था। जरा के बाद जो अगली अवस्था उसका नाम है मृत्यु। वो कभी भी हो सकती है। जीवन में सब भोग लिए। जो कुछ देखना था देख लिए। अब समय नष्ट मत करो। अब नाम जपो नानक नाम जहाज है चढ़े सो तर पार पकड़ लो जहाज भव समुद्र से पार हो जाओगे जो नाम प्रिय हो जो गुरु के द्वारा मिला हो राम कृष्ण हरि राधा जो नाम प्रिय बस नाम जप करो हम तुम्हें सब शास्त्रों की सार बात बता रहे हैं वही जीत गया जो नाम जप किया नाम जप नहीं किया तो ज्ञान बघारने से काल पर विजय कोई प्राप्त नहीं कर सकता काल पर विजय प्राप्त नहीं कर अकाल काल पुरुष को प्राप्त करने के लिए निरंतर नाम जप और जैसा विधान करें प्रभु वैसा सह लेना [गला साफ़ करने
की आवाज़] दो बात में भगवान की प्राप्ति पक्की हो जाएगी परमात्मा की प्राप्ति जैसा विधान हमारे ऊपर हो रहा है तेरा किया मीठा लागे हरि नाम पदार्थ नानक मांगे भगवान का नाम जप और जैसा विधान किया है प्रभु ने उसे सह लेना इसी से माया से पार हो जाएगा अब वृद्धावस्था है अब वेद पढ़ने लायक नहीं रह गए साधना करने लायक नहीं रह गए इसलिए जो नाम प्रिय हो कौन सा नाम प्रिय है आद राधा राधा राधा राधा राधा जहां चार लोग बैठे हो वहां से कतरा के निकल जाओ उनके पास बैठने से नाम
छूटेगा जो हम दूसरे की निंदा करते हैं दूसरे की निंदा सुनते हैं इससे हमारे पुण्य नष्ट होते हैं पर निंदा के किए थे आवत नहीं कछु हाथ मूर्ख पर्वत पाप को ले चल अपने साथ। दूसरे की निंदा करने से हाथ कुछ लगा नहीं। अपने पुण्य नष्ट हो गए और उसके पाप हमारे ऊपर आ गए। और कहीं संत भक्तों की निंदा हो रही हो तब तो सर्वनाश हो गया। भक्तन निंदा अति बुरी भूल करे जिन को कोई किए सुकृत बहु जन्म के छिन में डारे खोए। भक्तों की निंदा बहुत जन्मों का किया हुआ पुण्य एक क्षण में नष्ट कर देता है।
साधु अवज्ञा तुरत भवानी कर कल्याण अखिल कहानी अखिल कल्याण को प्रदान करने वाले जो पुण्य कर्म है उनको तुरंत भस्म कर देता है। संत भगवंत अपराध तो अब ये बैठकर के गप्प लड़ाने वाली अवस्था नहीं रही। अब हाथ में माला लूं, नाम जप करो या काउंटर आजकल चले जैसे बच्चा लिया है तो राधा राधा राधा या श्वास की माला से राधा राधा राधा पवित्र भोजन करो अपवित्र भोजन वाला कभी भजन करके भगवान को प्राप्त नहीं होता ये जो मध्य मांसा आदि का सेवन करते हैं इनकी बुद्धि भ्रष्ट है। यह समझते जरूर हैं अपने को लेकिन कुछ नहीं है।
जिसकी बुद्धि भ्रष्ट है वो भगवत आराधना नहीं कर सकता। पवित्र भोजन पवित्र आचरण तो परम पवित्र परम पुरुष परमात्मा को आप अपने हृदय में देखेंगे आप चिंतन कर पाएंगे आप उनकी प्राप्ति करेंगे जो दूसरे जीवों का मांस खाते हैं मदिरा पीते हैं व्यभचार करते हैं ऐसे अपवित्र पुरुष परमात्मा का चिंतन थोड़ी कर सकते हैं परमात्मा परम पवित्र है उसके लिए आपका शरीर पवित्र होना चाहिए मन पवित्र होना चाहिए वाणी पवित्र होनी चाहिए तब उस परम पवित्र परमात्मा को प्राप्त करते हैं हमारे जो गुरुजन हैं उनके जीवन चरित्र पढ़ के देखो।
महापुरुषों के जीवन चरित्र सुनो जिससे तुम्हें भगवान के प्रति लालसा जगे और हम कैसे जी पावे थोड़े-थोड़े संकट में हम अपने धर्म को त्याग देते हैं। हमारे गुरुजनों ने धर्म के लिए अपना बलिदान दे दिया। धर्म के लिए अपने जीवन को कुर्बान कर दिया। धर्म के लिए वो यातनाएं सही जो सुनकर हृदय कांप उठता है। लेकिन वो कह रहे तेरा किया मीठा लागे। सोचो कितनी ऊंची स्थिति है उन महापुरुषों की कि भयंकर पीड़ा शरीर में दी जा रही वो कह रहे वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु तेरा किया बड़ा मंगलमय बड़ा मीठा लग रहा है ये भला ये तेरा किया मीठा लगे ये बात बहुत बड़ी है ये छोटी बात नहीं है जरा जरा सी प्रतिकूलता में भगवान पर श्रद्धा कर लेते हैं और उनका शरीर तप्त बालू में तप्त तवे में भार मतलब इतना जैसे बाहर झोंके ना गरम ऐसा नीचे तवा और तप्त बालू जैसे उसमें दाना डाल दो तो भन जाए ऐसी बालू और वो कह रहे तेरा क्या मीठा लगे ऊपर से डाला जा रहा है तो ये हमें चाहिए कि जो भगवान जैसी परिस्थिति दिए उसको सहें और खूब नाम जप करें महाराज जी जैसे दो चार दिन सोचता हूं ना मैं किसी से बात नहीं करूंगा नहीं जाऊंगा फोन आ जाते हैं महाराज जी उनके आजा भैया बैठेंगे तो हमारी बात मान लो अगर हमसे दोस्ती करो हमारी दोस्ती करोगे मोहन ले लो कह दो वृंदावन में मौन बाबा जी ने दिला दिया।
तुम ऐसे लिख के बता दो वृंदावन में बाबा जी ने खत्म किया वाणी का वेग आए तो वाणी का बहुत बोलने का कमरा बंद करके जोर से चिल्लाओ राधा राधा राधा ठीक हो जाएगा ठीक है रहोगे मौन हैं हां पत्नी बच्चों से भी नहीं बोलना वैसे उचित तो यही है कि बिल्कुल मौन हो जाओ कागज में लिख के बता दो नाम जप करो बढ़िया बात बन जाएगी पत्नी बैठी है दोनों मौन हो जाओ भाई तुम्हें भाई जब चाय दे लिए तो इशारा किया चाय चाय बना लिए भोजन बना लिया नाम जप करो बुढ़ापे में क्या काम है अब बुढ़ापे में क्या काम भगवान का भजन कर लो तो तुम्हारा जन्म सार्थक हो जाएगा गुरुदेव प्रभु प्रत्यक्ष कब दिखेंगे मानस प्रल के बाद जब प्रभु तुम्हें जिया नहीं जाएगा जैसे हमारी स्वास बंद कर ली जाए मु मिनट में हमारी वो दशा हो जाए अब हम जी नहीं सकते अगर अगली स्वास नहीं मिली तो जब ऐसी व्याकुल ता प्राप्त हो जाएगी।
उसी दिन भगवान का दर्शन हो जाएगा। मानस होटल पे आए अभी नहीं आए। वहां आ जाएंगे तो ऐसे सूखी आंख बोलोगे। आंसू नहीं निकलते। गुरुदेव अरे निकलते नहीं है। रोके नहीं रुके रह गए। जिस समय वो रूप आता है सामने ना। अरे बच्चा चाहे मानस पटल पे ही आवे चाहे स्वप्न में आवे चाहे जागृत में आ जाए। वो रूप तो रूप है ना। जिस समय आता है ना तो फिर बहाबा बहा हृदय घूमता है। रुदश्वरम राजन कृष्ण दर्शन लालसा चिल्ला चिल्ला के रोने का मन होगा। इतना वो आनंद समुद्र है। वो आनंद समुद्र है।
हम उसी आनंद समुद्र के अंश हैं। जब कनेक्शन जुड़ जाएगा ना तो फिर हाहाकार मच जाता है हृदय में। रोया था बाबा लेकिन एक बार रोया था। रोया था। है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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