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साधक की दिनचर्या - नाम जाप नियम, पाठ, स्वाध्याय, सेवा / Daily Routine of Sadhak

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

का नियमित जप का नियम होना चाहिए माला से करो कर माला से करो या मन माला से करो जैसी भगवान ने आपको स्थिति दी वैसे नियम होना चाहिए कि एक घंटा दो घंटा तीन घंटा 24 घंटे में कितना समय आप जब में देते केवल जब तदाकार जप मंत्र आकार जब देना चाहिए इसमें सिद्धि मत दिखाना कि हमारा चलता रहता है जो कहीं उसे ध्यानपूर्वक अपने आचरण में उतारें ऐसा महापुरुषों को गुर्जरों को है भगवत कृपा से चरण में उतरने की कोशिश की है कि 24 घंटे में कुछ समय आप का नियमित जप के लिए केवल

जप के लिए केवल दूसरा कुछ चिंतन नहीं हैं अक्षर मात्रा सहित अब का जप हो कि गृहस्थों 10 मिनट बीच में 30 मिनट कुछ समय निकाल विरक्तों घंटों में निकालिए मिनटों में ने 24 घंटे आपके केवल भजन के लिए हैं जिसमें से कुछ घंटे आप कैसे होने चाहिए तो आप चैतन्य होकर फंसाने की कंबल ओढ़ लिए और कब घंटा की सुई निकल गए हमें पता ही नहीं चला मंत्र चला कि लार टपकाती कुछ पता नहीं चला ऐसा जब हमारे चेतन सावधान जिसको नींद आने की संभावना हो आंख मूंद के भजन ना करें तो है या खून के भजन उनका होता है जो निद्रा विजई होते हैं आंखों धीमन प्राकार वृत्ति राख हम उधार ले हो गए लाल धागे से नहीं आंख मूंद के खोलकर भजन करो अगर फिर भी आपको परेशानियों से ठंडा जलधि में थोड़ी-थोड़ी देर में नींद से लड़ना है कि कुछ समय आपका जब का होना चाहिए आप निमित्त संख्या में नियमित समय में आप जब कांगो स्थान कीजिए सब कि आपकी दिनचर्या में जब होना चाहिए अब स्कूप जो भी ग्रहण कर रहे आपका यह नियम ना हो तो आज से ले लीजिए कुछ समय सच्चाई से में चैतन्यता

पूर्वक मंत्र को समय दीजिए अवश्य ढूंढ को शांत भाव से बैठे हैं या तो मन माला से जप करें अगर माला से जप ले आइब तुलसी माला जो भी गुरु प्रदत्त मामला है वह केवल जप के लिए सावधान रे कोई सोच नहीं कोई सोचने लगे तो तुरंत आटे की यह समय जब का वेतन सचविालय ने बाद में हम आपको सहयोग करेंगे आप इस विषय पर निर्णय करना बाद में जो मन कर ले कोई बात चलाएं तो उसे कह दो कि दर हम आपको समय देंगे अब यह समय हमारा जब का थोड़ा हमेशा योग कीजिए अब हमें बाद में कि बड़े न्याय चलते रहते हैं कोई मतलब नहीं कहीं की बात लाकर प्रश्न उसका उत्तर उसने उसको ऐसा करना चाहिए कर क्यों नहीं करता यही है दुर्गति भोग रहे और खुद अपनी दुर्गति हुए मामला चल रहा है अपनी दुर्गति नहीं देख रहे कि हमारी तथा क्या है हम बैठे किसलिए हैं करके आ रहे हैं वह इधर-उधर उस समय मन को डांटना सी करें हमारे साथ इस समय हमारा जब समय का है बाद में माफ का सहयोग करेंगे हमारे सामने पहले रखना हम उसे देखो देखेंगे लेकिन इस समय आप हमारा साथ दीजिए थोड़ी देर फिर भागेगा

फिर से चलाइए कि कुछ समय तो आपका जो अपने कुछ समय आपका पार्टनर नहीं स्वाध्याय में इस पाठ्यक्रम स्वयं स्वयं उत्तर दिशा में बाहरी शास्त्र सूत्र लेकर अंतः करण से सुवर्ण स्वयं अपने हृदय को पढ़िए साफ सूत्रों के साथ कि श्रीमद्भागवत कार्यक्रम दस का दम चाैधरी संप्रदायों सबके लिए है श्रीमद भगवत गीता जी के भक्ति योग के अध्यायों का आ है और हैं नारद भक्ति सूत्र कि आधुनिकता के आधारशिलाएं पुजवा दावा साधक में साधुता पंडित गया प्रसाद जी महाराज बड़े जो महापुरुषों के वचन स्वास्थय के संप्रदायवाद छोड़कर कि किस संप्रदाय के सिद्धांत में संप्रदाय नहीं होता रस में होता है हम स्वाद लेने के लिए सर्जरी भाव में लेकिन सिद्धांत वैदिक ही रहेगा इसके अलग नहीं उनका यह कि चाय जीत संप्रदाय में हूं सिद्धांत वही रहता है जितेंद्र फालतू सब संप्रदाय में एकाग्रता उत्सव संप्रदाय में पवित्रता उत्सव संप्रदाय में कैसे मन को प्रभु में लगा द यह सिद्धांत इसे कहते स्वाध्याय स्वयं सूत्र उसमें अध्याय पूरा नहीं करना है एक सूत्र बड़ा ऐश-ऐश

ऐसा कि अब उसको रुको अंदर पढ़ो हृदय में कि इस सूत्र से तुम्हारे हृदय में कितना अंतर आए हैं अंदर पड़ा क्योंकि आप अपने रजिस्टर को हृदय के रजिस्टर को आप ही पढ़ सकते हो देखा है सिद्धांत में तो है ही नहीं है के अंदर जल उस समय क्यों नहीं सिद्धांत ने यह बात हमारे हृदय में क्यों नहीं आ रही डायरी पिन साथ रखो इस लोक के इस सिद्धांत में यह हृदय गलत है अभी पूरा नहीं हुआ नोट करो को पूरा आधा घंटा का स्वाध्याय आप अपनी डायरी में लिखा कि व्यायाम कम है हमारे अंदर यह

बात नहीं पाई जा रही यह सुधार नहीं है यह हुआ आपका स्वाध्याय और क्रमशाह बहुत काल तक इस स्वाध्याय चलता रहता है नित्य-नित्य आधा घंटा से ज्यादा स्वयं 20 मिनट का स्वाध्याय लेकिन जैसा हम करें इस रस व दें इसके बाद फिल्म लागा लागा या नहीं यह हम अपने इष्ट को सुना रहे हैं अब सुख मिले न मिले राह बने ना बन राग की आवश्यकता है जिनको राग का ज्ञान हो घातक पर धुंध लिए के गानों धर्मराज निषाद मल्हार राग अगर यह राघवन के प्रति अपनापन नहीं तो कि हमारे मार्ग में मानत अपनों घर तैमूर आफ बहुत सक्रिय भाग दिक्कत सकल अभाव श्री हरिवंश कृपा बिना ना कि हमें जैसा आता है इस बांध नहीं है यह लीला गायन है अपने इष्ट के समीप या कहीं भी गायन करेंगे तो इसकी पद्धति है गायन के पहले आपको भावना करनी होगी हमारे इष्ट बैठें मान लो आप यमुना किनारे हैं गायन कर लें अब थोड़ी सी सामने ऐसे बालों की दादी बनाई भावना की लाल मिर्च यमुना के पुलिन ने आपके पास अगर है तो पानी में वही वाला विराजमान कर दिया की तरफ आनंद आया कि हम इसे लीला लीला में

अंतर स्व हुआ था अपना ध्यान है लालगंज प्रीतम का यशगान है स्वाध्याय सिद्धांत का होता है एक बात को लालगंज और फिर उसमें डूब जाता है लीला चिंतन होता स्वयं लीला लीला सिद्धांत का स्वास्थ्य और स्वास्थ्य का ध्यान उस वक्त दोनों साथ स्वास्थ्य सिद्धांत और आपका हृदय दोनों का मिलन हो कि लीला का सेवन से श्यामा श्याम बहुत शीघ्र कृपा करके बरसते हुए उपासक के ऊपर बरसात जुगल किशोर और को फिर से समय में परिचय दिया आराध्य देव की गुरुदेव की के मंगला से लेकर संयंत्र का आपका जो भी समय यह तरफ गृहस्थी में तो आप अपने अनुकूल देख लीजिए अगर विरक्त है तो सत्संग स्वाध्याय मंत्र जप नाम जप आदि कि जो नियम है उनके अलावा जो आपका समय सब सेवा में जाना चाहिए तुम हो पास समय कहां है कि अब इस कुटिया में वह महल इस्त्री का छोटी सी कुटिया मां महल आप उसमें सोनी लगा रहे पहले फुल सोनी लगाई पूजा ने फिर पोछा लगाया सूजी के पात्र वर्जन किए सुंदर-सुंदर अनुकूल जल रखा स्नान करा रहे चौरचन अनुसार चंदन लगा रहे पुलिस जैसा जो बीच संघर्ष कर रहे हैं

संघार जो कुछ नहीं है तो चार मिश्री के दाने थोड़ी-थोड़ी चार किशमिश के दाने को छप्पन भोग लगाए सब्सक्राइब कर लेना चाहिए किशमिश के दाने को सबस्क्राइब मिश्री इतना समय है मैं जवाब का चित्र जुड़ेगा ना महाराज युधिष्ठिर हमसे पूछ लेना बाहर से आते थे बाबा भीतर वह बाहर से ताला लगा भी तरह में पर हमें लग रहा है कि इस तरफ निकले बाबा निकले अंदर में तालिबान से कैसे लग रहा है वो बोले की फुरसत कहां है देखने का समय कहां है मैं आपको विषयक चिंतन से बचना होगा विषय दर्शन से बचना होगा का या विषय क्रिया से अगर क्रिया हुई की हुई तो आप कैसे भगवत स्वरूप में स्थित हों भगवत स्वरूप में बिना स्थित है भगवत दत्त मिलता नहीं जब तक किशोरी स्वरूप में नहीं होगी तब तक इस चोरी का रस नहीं मिलेगा जो किशोरी की दावत किशोरी महात्मा हम इन्हें सुकुमारी मुकाबले में किशोरी स्वरूप अपराधों तक किशोरी जी की सेवा में अभी तो जीवन में हो विधिवत से ऊपर उठिए दिवस तो शरीर का सुख शरीर संबंधित विभागों का सुख संबंधित वृद्धों का सुख यही तो दूध

पासवर्ड चुनें सुख समर्थक मोटिव प्रवेश शाहिद अनवर इस सीरम निराशा यही जीवन तो को दूर करने के लिए तो बात करें आचार्य चरण कि भगवदरस मे स्थित होने के लिए भगवत स्वरूप में स्थित होना होगा क्योंकि भगवत रस भगवत स्वरूप को करके ही पाया जा सकता है तथा है यदि आपके पास समय कैसे बचा विषयक चिंतन का सेवा नहीं है क्या आप सेवा है तो आप सेवा में रुचि नहीं रख यह क्या फिर केम विद शरीर सुख में लग जाएंगे इस तरह सेवा में भी सावधान होंगी

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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