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अगर आपको कोई गाली दे, पीटे, प्रतिकूलता दे, तो क्या करें ? | Shri Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

यह जो उपासक नाक में गुस्सा रखते हैं। कोई हमारी तरफ अगर ऐसे देख भी ले तो हम उसको गाली देने की चेष्टा या बुरा भला कहने की या अपने परिवारिवारिक जनों की किसी का भी आश्रय लेकर यह भी ध्यान रखना उपासक जो परिवार से संबंध रखे हुए हैं। वैराग्य धारण किए हुए हैं। सबसे पहली बात है कि उनको राग त्यागना है। नहीं तो वैराग का एक नाटक केवल है। कुछ नहीं वैराग्य वो तोता है। आप परिवार में रह रहे हो वृंदावन धाम है इसलिए छूट है कि आप ठीक है वनवास कर रहे हो वह भी वनवास कर रहे पर राग रहित अगर आपने कोई आपको किसी ने जरा सा भी कुछ किया आप अपने परिवारिक जनों का बल या रिश्तेदारों का या किसी का बल लेकर आप उसको त्रास देना चाहे तो आप उपासक नहीं है नहीं है हमारा बल केवल लाडली जो है प्रियाल है और वो सबका मंगल करें सबको आनंद प्रदान करें यदि कोई हमें पीड़ा पहुंचाता है तो देखो हमारे आचार्य कैसे हैं कह कह रहे करत जे अन सहसहन निंदक तीनों पे अनुग्रह कहीं भी किसी भी भक्त के चरित्र को आप पढ़ के देख लीजिए ये सहनशीलता आना ही चाहिए माना कि बुरा लगता है तो अंदर सह जाओ और भी बुरा लगे तो श्री जी से कह दो लेकिन किसी बाहरी बल का प्रयोग नहीं होना चाहिए कैसी निष्ठा होनी चाहिए उपासक की कह रहे हैं यदि कोई हमारी गर्दन भी उतार ले बहुत बड़ी बात है यद्यपि ये सहन करना बहुत उद्धव जी ने पूछा है कि प्रभु इन दुष्ट ों के द्वारा किया हुआ ऐसा प्रतिकूल व्यवहार कैसे सहन करना पड़े बहुत कष्टप्रद लगता है।

तब तितु ब्राह्मण की कथा आगे के अध्याय में सुनाई है। इसलिए देखो यहां भी भक्त चरित्र में हमको उपदेश मिल रहा है कि अगर ये होगा जीवन में बहुत ऐसे लोग होते हैं। बड़े विचित्र विचित्र रूप धर के प्रभु आते हैं। बेमतलब टक्कर मारते हैं। अब जैसे कोई कह सकता है हमारी जेब से मोबाइल पर्स ले लिया, यह कर लिया, वो कर लिया। देखो हम आपको सही बताएं। आपके ऊपर कृपा ही हो रही है। यह बात सबको पचेगी नहीं कि हमारी पर्स कट जाना कोई कृपा होती है। हां बड़ा अमंगल नष्ट हो गया। हम जानबूझ के ऐसा ना करें कि हम किस मतलब किसी की पर्स काटे उसका अमंगल दूर कर रहे हैं।

ऐसी बावला ना करें। पर अगर कोई हमारे साथ ऐसा करता है बिहारी जी या राधा वल्लभ जी कहीं भी भगवत धामों में भगवत दर्शन में ही होता है क्योंकि हम उनसे आंख मिलाए तो उनके सखा लोग है ना इशारा कर दिया इसकी जेब काट दो इसके पर्स हटा दो तो कोई ना कोई अपराध वृत्ति का नाश कर रहे कोई ना कोई ऐसा पाप जो हमें नष्ट करने वाला है अमंगल नहीं हो सकता मंगल भवन को हम देख रहे थे हमारा मोबाइल चला गया हमारी पर्स चली गई हमारी सोने की जंजीर चली गई ये कैसे अमंगल अमंगल नहीं उसके जाने में कोई महा

मंगल छिपा हुआ है पक्का माना ना यह उनहीं के पार्षद है कोई और नहीं है ये कहते हैं हम फसा रहे हैं अपने में तुम लगो अब वो बेचारा देख रहा बड़ी मुश्किल से तो दरअसल मिले बिहारी जी वो धीरे से निकाल ले काट लिए अब यहां होता है यार बिहारी जी के दर्शन में हमारी चैन कट गई अरे वो बेचैन कट गई अब चैन जुड़ी है अब चैन की जिंदगी होगी उसका प्रतिकूल भाव ना सोचे तो भक्त के साथ यदि कभी कोई ऐसा गाली देना मारना पीटना ऐसा कोई व्यवहार कर रहा है तो सहो नहीं सह सकते तो प्रभु

से जाकर प्रार्थना करो। प्रभु सहन नहीं हो रहा। वो ऐसा बोला है ऐसा कहा है तो वह आपको सामर्थ्य दे देंगे। लेकिन ऐसा कोई व्यवहार नहीं बनता कि उसने डंडा मारा तो हम भी डंडा मारे लड़े झगड़े ऐसा नहीं। यह सहन करना साधु की साधुता है।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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