SSB Inspector ने जब पूछा, कि ज्ञान -विज्ञान ने भगवान को मानने में ही संशय ला दिया, अब क्या करूँ ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
राहुल कुमार जी सब इंस्पेक्टर महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी बचपन से ही सत्संग और प्रवचन के सॉन्ग में रहे परिवार की सहायता से लेकिन जैसे-जैसे बड़े हुए पढ़े लिखे ज्ञान विज्ञान ने भगवान को माने में ही तारक ला दिया अब संशय ही राहत है पूर्ण विश्वास वाली स्तुति नहीं आई मार्गदर्शन कीजिए जैसे पिता का दिशा करने की समर्थ बालक में नहीं है यह मेरा पिता है उसका निर्णय मां करती है और मां के वचन पर विश्वास करके हम पिता पर ए शक्ति कर लेते हैं इसमें कोई सांस है आपको हम पिता का परिचय नहीं जानते क्योंकि पिता का परिचय सिर्फ मां जानती है और मां के ही संबोधन से और उसके वचनों पर सहज ममता भरे वचनों पर दृढ़ विश्वास करके हम पिता की गॉड में बैठ जाते हैं और जीवन भर याद नहीं करना पड़ता वो बात मेरे बैठी रहती है की यह मेरा पिता है ऐसे ही हम स्वयं भगवान को नहीं जानते हैं गुरुजनों के संत महापुरुषों के वचनों पर दृढ़ विश्वास करके यदि हम चल रहे तो हम भगवान की गॉड में बैठ जाएंगे भगवान बड़े करुणा में
उनको जी भाव से बजाया जाता है वो बैंड शाखा तुम्हें वो तुम्हें विद्यार्विन तुम्हें शर्म मैं देव अभी हम पूछ रहे थे किसी से की सूर्य किसने रचा है ये चंद्र किसने रचा है आपकी बुद्धि को किसने रचा है आपने बाल किसने दिया है आपकी दोनों आंखें क्यों दी है वो हरण करना चाहता गर्व से ही तुम्हें अंधा बना देता गर्व से तुम्हें मूर्ख बना देता गर्भ से तुम्हें अपंग बना देता गर्व से तुम्हें किसी लायक नहीं रखना है ना कोई मां है ना कोई ईश्वर जिसके आश्रय से संपूर्ण सृष्टि चल रही जल में नव की तने पृथ्वी टिकी हुई है आसपास जल नीचे जल और टिकी कौन है जो इस धरण शक्ति प्रधान कर रहा है कौन है जो ऑक्सीजन दे रहा है कौन है जो पूरे जीव को अनंत जीवन को जिनका सबका मानो भजन है एक बार का उनका भरण पोषण कर रहा है वो विश्व का भरण पोषण करने वाला कोई है कोई है जिसके शासन से सब चल रहा है वो प्रभु उसको महापुरुषों ने अनुभव किया है जैसे मां ने अनुभव किया पिता से ऐसे मां के आनंद अनुभव का परिणाम हम हैं तो संतो के आनंद अनुभवों में जो
परम ब्रह्म परमात्मा तत्व हिट तत्व प्रेम तत्व जो भी उसे बोला जाए वो जो आया बस उनके वचनों पर विश्वास कर ले प्रथम इस मार्ग में अध्यात्म मार्ग में श्रद्धा कम करती है प्रथम हृदय श्रद्धा जो करें आचार्य अनुसार है जहां हमारे हृदय में श्रद्धा और विश्वास हुआ वही हमारा कम बन जाता है भगवान के शिवा किसी के सत्ता नहीं है अभी भगवान इसके अंदर से अंतर्दम हो जाए तो जो शरीर आपका पदम है जो शरीर आपका कई लोगों को प्रिया इस को परिजन भस्म कर देंगे आपके अंदर जो तत्व विराजमान था उसको प्यार कर रहा था अनजाने में भी भगवान का ही आसमान हो रहा है भगवान का ही प्यार हो रहा है वो जी क्षणेत्तर ध्यान हो जाएंगे इस क्षण इस शरीर की ऐसी दुर्दशा की जाति है आज में जल दिया जाता है गढ़ दिया जाता है फेक दिया जाता है ना कोई ईश्वर यह बात माने के लिए संत का वचन ही प्रमाण होगा अगर वचन को हम मां लेने तो फिर बात शुरू हो जाएगी आध्यात्मिक की मां लेने से सवाल हाल हो जाता है जब हम स्कूल में थे तो था की मनी संख्या इतनी सवाल हाल हो जाता था
मां के ही जान सकते हो जान के माने के योग्यता नहीं र गई है की हम पहले उसे तत्व को जान इसके लिए पहले मानना पड़ेगा गुरु मानना पड़ेगा उनके वचनों को मानना पड़ेगा शास्त्रों की बात माननी पड़ेगी श्रद्धावन लगती ज्ञानम तत्प्रद सहित केंद्रीय प्रबल श्रद्धा के द्वारा गुरुजनों की बात शास्त्र की बात मनी तो उसे ज्ञान हुआ की मैं व्यर्थ में अपने जीवनी शक्ति को भोगो में नष्ट कर रहा हूं अब इंद्रियों को शासन में लिया तब उसको असली ज्ञान हुआ फिर वो देख पता है अपने हृदय
में नारायण या गौर से हमको हृदय निकुंज यही भगवान को प्राप्त कर लेट है और तृप्ति हो जाता है उन्हीं भगवान में अब ना कोई कर र गई ना कोई लाल सा ना कोई दुख ना कोई सुख महान प्रसन्नता अखंड प्रेम अध्यात्म मार्ग कोई सांसारिक मार्ग तो है नहीं अब इस मार्ग में विश्वास पूर्वक चलना चाहिए और संत संगी इसका मूल है अगर संत का संघ नहीं है तो अध्यात्म में प्रवेशी नहीं हो सकता है साधारण धर्म में भी चलने के लिए किसी ने किसी महापुरुष का समय लेना होता है इस से हम आगे बढ़ते हैं सत्य वास्तु है उसमें किसी के प्रमाण की जरूर नहीं है आपका भी हृदय कहता कोई तो है ऐसा किसी का हृदय नहीं है जो का नहीं जानता कोई भगवान भगवान हम एक बार ऐसा उसको घुटने टेकना पड़ेगा एक बार उसे लगेगा कोई है कोई है मुझे बच्चा ले सबको लगेगा इस जीवन में है वो परम तत्व है वो तो उसको अभी स्वीकार कर लो तो बचाने की बात ही नहीं आएगी आप और वो साथी हो गई दूर नहीं है इतने नजदीक है की शरीर बहुत दूर है वो हमारे बहुत नजदीक है वही बैठा हूं चुपचाप मोहन शांत
तुम्हें देख रहा है जी दिन तुम प्यार से उसे पुकारोगे गले लगा लगा बस वो प्यार की जरूर है और वो प्यार बाजार में मिलता नहीं रंजन मुझे प्रेम भक्ति कर दी प्रेम कारी बाटी साध संगत कारी और दिन रात्रि तभी उसका अनुभव होता है चौथ का रहे हैं की मेरा कुछ नहीं शिष्य गुरु को मैन की मेरे परम ब्रह्म या मेरे गुरुदेव या मेरे ईश्वर उसको वैसे ही अनुभव होगा जब हम पाषाण विग्रह को लेकर के उनमें भगवान की भावना करके आराधना करते तो हमको संकेत मिलने लगता है मेरे भगवान के हैं हमारा प्यार पाषाण में भगवान को प्रकट कर देता है धातु में भगवान को प्रगति कर देता है तो क्या चैतन्य धन शरीर में विराजमान जो आनंद स्वरूप परमात्मा है विश्वात्मा है प्रभु है हिट है क्या मुझमें पर भाव करेंगे तो नहीं ए जाएगा पर वो आपका भाव होगा हमारे माननीय जी ने एकलव्य को हटा दिया हम राजकुमारों को शिष्य रूप में स्वीकार करते हैं कल भी लोगों ने कैसे करण दुर्योधन अर्जुन भीम के साथ तुमकाम शिक्षा देंगे उसने कहा मैंने तो उसे एक मां में मैंने तो स्वीकार
कर लिया आपको गुरु और एकांत में जाकर वैसे ही मानो भावनायुक्त मिट्टी की मूर्ति बनाएं और रोज प्रणाम करके पूजा करके प्रत्यंचा चड्ढा ऐसा धनुर्धर हुआ की अर्जुन को सिखाया तो ऐसा धन उधर नहीं हो पे अर्जुन के साथ एक कुत्ता गया था आबू बगर के भूख तो एक बूंद खून नहीं कहानी गाव ने पूरा मुंह बालों से भर दिया अर्जुन का इतना हस्तकला हो समीप गए कहा वीर मैं तुम्हारी सराहन करता हूं तुम्हारे गुरु कौन है तो उनका भगवान द्रोणाचार्य उनका कभी हमने नहीं देखा तुमको की वो शिक्षा दे रहे हैं और मां में सोचा की द्रोणाचार्य जी ने तो मुझे आशीर्वाद दिया है विश्व का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर और मैं इसके आगे कुछ नहीं हूं अपनी छोटी सी कुटिया में मिट्टी की मूर्ति द्रोणाचार्य को भी पता नहीं है उसकी निष्ठा उसका भाव आपका भाव आप जितना भाव करेंगे उतने उत्तर आपको मिलता चला जाएगा
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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