भगवान हैं इसका क्या प्रमाण है ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
बी पराग जी चंडीगढ़ से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी क्षमा कीजिएगा अगर कोई प्रश्न में चक हो महाराज जी भगवान के होने का प्रमाण जहां जाते हैं वही मांगते हैं कुछ लोगों से आप के होने का प्रमाण कौन देता है दे सकता है मां जहां जान से सब कोई नहीं दे पाएगा बहुत सूक्ष्मीयता से समझना हमारा असली पिता कौन है केवल मां जानती केवल मां और मुझे परिचय केवल मां दे शक्ति है भगवान है इसका प्रमाण सद्गुरु रूपी मां से मिलता है दूसरे से यह विषय पुरुष संसारी आदमी या प्राकृतिक भोगो को भोगनी वाला नहीं जान सकता अब उसको समझिए रचनाकार है ना है ना अब उसके प्रमाण के लिए तुम्हें विवृत थोड़ी है वह बुद्धि का विलास थोड़ी है की ऐसे ऐसे तुम्हें तारक से समझाया जाए वो साधना से समझ में आता है अभी तुम धर्म आचरण त्यागी पवित्र हर कीजिए और जो हम तुम्हें नाम बताएं जितनी संख्या बताएं जब ये 1 वर्ष तक चलिए प्रश्न नहीं समाधान तुम्हारे हृदय में जागृत हो जाएगा वो इतनी साधारण से नहीं वो कृपा से जागृत होगा कृपा से पर तुम कम से कम स्वाद
लेने योग्य तो हो नेम की पट्टी मुंह में ऐसे हो या तुम्हारे अंदर पित्त बाढ़ गया हो वो मिश्री तुम्हें ख्वाहिश जाए तो तुम्हें मीठी नहीं लगेगी लेकिन वही मिश्री शोध कर लंबे समय तक पाया तो पित्त का संबंध करके तुम्हें मीठा स्वाद है राधा नाम सुधार समृद्धि तुम हम लोगों जब बच्चा अपन से घर से चले थे तो आप जैसे ही थे प्रश्न करता ही तो थे उत्तर थोड़ी था हमारे जीवन में लेकिन आपको कहता कम कम पे जैसे अनंत माता का दुलारे से मेरे प्रभु कम कम पे प्यार और दुलार कैसे हो मतलब क्योंकि वो ऐसे है की वाणी के समर्थले की बोल सके हमारी क्या सरस्वती की समर्थ रहे हैं पर वो हैं आपको कभी अनुभव करना हो थोड़ा आहार शुद्ध कीजिए और थोड़ा नाम जाप कीजिए और किसी असहाय की सहायता कर दीजिए और फिर प्रभु से प्रार्थना कीजिए की आप अनुभव करिया आप कहां हैं और कैसे हैं दोनों को मिल जाएगा अब ये प्राकृतिक वास्तु तो ये बुद्धि के द्वारा जो समझाया जाता है वो हम भी बोल सकते हैं साथ कुछ फर्क नहीं पादना उससे तुम्हें जब अनुभव होगा तब तुम्हारे समझ
में बुद्धि के द्वारा तुम बुद्धिमान बनी चंद्र को कौन प्रकाशित कर रहा है यह पृथ्वी जल में नहीं डब रही पेट की तरह भारत की जनसंख्या है तो कोई एक मलिक अगर राष्ट्र है तो राष्ट्रपति भी तो है ना अगर पुत्र है तो उसका पिता भी तो है ना तो ब्रह्मांड में तो ब्रह्मांड नायक भी है ना अब गांव के आदमी से पूछो की राष्ट्रपति है तो क्या जान बेचारा पड़ी नहीं की राष्ट्रपति होता है अब वो कैसा राष्ट्रपति वो भी नहीं जानता क्योंकि समाचार देखने के लिए टीवी उसके नहीं अपना पता नहीं है प्यार साढे तीन हाथ के शरीर में र रहे हो अपना पता नहीं अपना प्रमाण नहीं दे सकते की तुम हो क्या अगर तुमसे पूछा जाए तुम हो क्या तो ऐसी करोगे यही मैं हूं देखो मैं बोल रहा हूं मैं का रहा हूं मैं इतने फिट कहूं मैं इतना मोटा हूं मैं इतना क्या किसका वर्णन कर रहे हो शरीर का वर्णन कर रहे हो जैसे एक अच्छा आदमी कोई धनी आदमी चलेगा ना तो एक बनियान एक सर एक ऊपर से को समझ और करण शरीर बनियान थोड़ी है हम शर्ट थोड़ी है पहने वाला तो अलग होता है ना तू
पहने वाला है कौन बोलेगा तो जानवर ही अपने को जब भी समझना की नहीं है अपने को समझना की क्षमता नहीं है और तुम क्षमता और बुद्धि की रखते हो की भगवान अगर है तो प्रमाण दीजिए तू है तू है ना स्वीकार तो करता है की मैं हूं तो प्रमाण दीजिए तू है क्या इसको खोपड़ी कहते हैं इसको आप कहते हैं इसको कान कहते तू नहीं है पूरे ढांचे को शरीर कहते हैं वो अंदर घुसो तो मेरा मां मेरी बुद्धि जैसे मेरा हाथ मेरी मेज मेरी घड़ी मेरे से अलग है ऐसे तन भी अलग है और वो मां भी अलग है
फिर मेरा स्वभाव ये तो नहीं का रहा कोई मैं स्वभाव वाणी पकड़ो उसकी मेरा स्वभाव ऐसा नहीं है मेरा है ना तुमसे अलग है खुद तुम्हारी बनी बता रही है मेरा मां आज अशांत है मतलब अलग है ना तेरे से मेरा तन अलग है ना तो तू कौन है जो मैं है अब जीरो पे ए गए साधना वेदांत करता है मैं को जन के लिए अब जब मैं को जान लोग तो तू को अपने आप तुम जान लोग पहले तुम अपने को ले जा लेते तुम तुमको क्या जान लोग मैं तुम्हें फैंस हुए माया के चक्कर में उसे परमात्मा का प्रमाण किया जान की जरूर है बैठा है सर्वप्रथम बेटे प्यार कभी देख पे बार घूम रहे हो घर के दौड़े बाहर घूम रहे हो मिलने वाला प्रीतम घर में इंतजार कर रहा है तुम्हारे कांतिक गुफा में बैठा हुआ तुम्हारे कांतिक कमरे में बैठा हुआ और तुम खोज कर रहे हो बाहर भटकती रहो जब लोट के अंदर आओगे तो पहले अपने को तो समझो तब प्रभु को जान पाओगे तो इसलिए भैया इसका उत्तर सही होगा पहले साधना में लगा जाए क्योंकि भगवान बौद्धिक वास्तु प्राकृतिक रही है की हम बुद्धि से संपूर्ण ब्रह्मांडों
में सबके पास बुद्धि है उसे सब बुद्धि का विधान करने वाला ब्रह्मा को जो बुद्धि देता है वह भगवान है जब ब्रह्मा जी कमल से प्रकट हुए तो शास्त्रों में पढ़ लेना उनके जीवन में है की मेरा उत्पन्न करने वाला कौन है तो कमल लाल पड़ा और जल में उतारना शुरू किया तो 100 दिव्या वर्षों तक उतरते रहे लेकिन प्राप्त नहीं कर पे की मैं कहां से प्रगति हूं उन्हें जान पे फिर सड़के आए तो कमल पर बैठे गए और आंतरिक भाव से पुकार की मैं जहां से प्रकट हुआ हूं उसका मुझे अनुभव कराया
जाए तो शब्द प्रकट हुआ तप तप परायण हो और के भी तपस्या में संलग्न होकर मंत्र जब किया तो वहां उतारना नहीं पड़ा उनको दिखाई देने लगा की भगवान की नाही कमल से मैं प्रगति हुआ हूं और भगवान सामने है सामने अनुभव हुआ सो दिव्या वर्षों तक उतरते रहे और जब कृपा करें तो सामने दिखाई दिया की भगवान उनकी नाही से एक कमल में मैं तो जो कमल से प्रगति हुए ब्रह्मा जी को बुद्धि देते हैं उन ब्रह्मा जी की बुद्धि से अनंत ब्रह्मांडों के जीवन की बुद्धि है कैसे उसको पर आप जान पाओगे इस बुद्धि से क्या करूं बुद्धि का समर्पण अभी बुद्धि का समर्पण तो भोगो में है शरीर में है विषयों में है प्रभु अगर ये बात समझ में ए जाए तो जितने महात्मा लोग लगे ना साधना में पूर्व शेर इसी बात को समझना के लिए वो कौन है मैं कौन हूं वो कैसा है वो क्या है तो जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूर्ति अच्छी तीन तैसी किसी ने देखा निराकार भावना आई ना वो निराकार है किसी ने सरकार है किसी ने शगुन किसी निर्गुण जैसी भावना की वैसा और हम क्या देख रहे हैं स्त्री और
पुरुष दुष्ट दुराचारी और आत्मा वही दिखाई दे रहा है दूसरा कोई नहीं वही है वही इस आवास निगम सरवन यज्ञ एक कद भी ऐसा नहीं जहां मेरा परमात्मा ना हो और उसके अनुभव करने के लिए हमें दृष्टि का परिवर्तन करना होगा अगर हमारी दृष्टि त्रिगुणात्मक का माया से आकृष्ट है तो परमात्मा के देखने लायक नहीं हमारी बुद्धि अभी माया सकते इस सिंपल प्रमाण कहानी बाहर थोड़ी परमात्मा को आप बेटा प्रमाण है आप का आप सुख चाहते हो और आप मरना नहीं चाहते प्रमाण की अब भगवान के हो क्योंकि
भगवान अविनाशी है अब मरना नहीं चाहते और भगवान सुख सिंधु है तो आप सुख की ही छह कर रहे हो भगवान शांता कर्म है आप शांति की खोज कर रहे हो आपके गन बेटे में आते हैं आया है की नहीं आपके अंदर बोलो इन तीन बटन के शिवा आपकी और कौन सी खोज है यही खोज है मैं सुखी हो जाऊं मैं मरूणा और मैं शांति प्राप्त करूं पर गलत दिशा भोगो में सुख भोगो के संग्रह में शांति खोज रहे मरण धर्म शरीर को मैं मानकर अमृत कवि किसी को नहीं मिला आज तक नहीं मिला हमारे आप के अंश लक्षण हमने जागृत हो रहे हैं मैं अविनाशी हो जाऊं मैं ऐसा सुख हो जाऊं की दुख देखना ना पड़े और मैं परम शांत हो जाऊं ये सब लक्षण हमारे भगवान के शांता कर्म जो आनंद सिंधु सुखरासी अविनाशी वही तो मांग रहे हैं वही हमारा स्वरूप है मां का मतलब सद्गुरु सद्गुरु देव के द्वारा दिए हुए मंत्र और बताई हुई उपासना से करो अनुभव हो जाएगा सियाराम में सब जग जानी करूं प्रणाम जोड़ी जग मनी नहीं का रहे मैंने मां लिया की सबसे आराम नहीं नहीं जानी मैं जान गया मैंने देख लिया मेरे सियाराम
जादा चेतन राम में जानी बंधु सबके पद कमल सदा चोरी जुगतापन सब चेतन मेरा प्रभु है दूसरा कोई नहीं है अब अनुभव करने वाले तो महात्मा लोग जी मार्ग में लगे तो उनको अनुभव होता है अभी इस में लागू तो आपको अनुभव हो जाएगा अभी ऐसा तो है नहीं कोई जादू तमाशा या प्राकृतिक वास्तु जिससे प्रमाण दिया जा सके आप अपना प्रमाण नहीं दे सकते हैं फिर भगवान का आज तक कितने वैज्ञानिक पद गए आज तक कोई कैसा है वह यह सब बाहरी उसका स्वरूप क्या है आज आज देश विदेश कहानी कभी वैज्ञानिक बताओ की उसने शोध किया है की जीव ऐसा है जो स्वरूप है वह तो योगिया का विषय है तो ज्ञानियों का विषय वो भक्ति का विषय तुम्हारे यंत्रों का विषय यंत्र प्राकृतिक चलो जीव छोड़ो मां आज तक कोई भी मां को पकड़ के टीवी में दिखा दिया हो एक सलाह करोगे ढांचे का करोगे मां का करके दिखाओ प्लॉट लगाया मशीन रख दी और मां में जो चल रहा है वो चल रहा है दिखाई दे रहा है भगवान भगवान का प्रमाण मांग रहे तो क्या दे
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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