दहेज प्रथा (Dowry System) पर क्या बोले महाराज जी !!
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
अमित भाटी जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन महाराज जी की कृपा से आप से पहले भी एक प्रश्न पूछ चुका हूं की अगर कोई मां बहन के साथ हिंसा कर रहा हो तो हमें क्या करना चाहिए गुरुदेव आपके इसका जवाब बहुत ही सुंदर दिया आशा है उससे लोग काफी प्रेरित हुए होंगे गुरुदेव आपको आज के समय में लाखों लोग सुन रहे हैं और आपकी वाणी पर लोग काफी अमल भी कर रहे हैं आज के समाज में आपने राधा नाम की एक नई ऊर्जा प्रधान की है गुरुदेव की फिल्म प्रार्थना करते हैं साउंड में कोई समर्थ नहीं होती बात मशीन की होती है मशीन हटा दो तो साउंड कुछ नहीं बोल पाएगा यह साउंड है इसमें पावर ऊर्जा गुरुदेव के सामने जब अकबर सम्राट ने ताज उतार के रखा तो आंसू ए गए बाद में उनके न्यूज़ जनों ने पूछा की प्रभु बादशाह ने प्रणाम किया ताज रख दिया इसलिए आंसू आए नहीं इसलिए आए की जब राम का नहीं था तो मांगने से रोटी भी नहीं मिलती थी आज राम ने स्वीकार कर लिया तो बादशाह भी ताज उतार के रखना है उनकी स्वीकृति से है अपने
लोगों का क्या है पूरा जीवन भिक्षुक जीवन भला हमारी समर्थ क्या की हम राधा नाम की महिमा प्रकाशित कर सके हमारे समर्थ हम किसी के अंतरण का परिवर्तन बेस की करें करावे आप सब और जन बड़ा ही थे जी महाराज जी आशा है की आज के प्रश्न से भी काफी लोग कुछ सीखेंगे गुरुदेव जी आप ने अपनी जान से भी प्यारी बेटी दी हो जी भाई ने अपनी हमजोली बहन दी हो एक बहन ने अपनी परछाई दे दी हो एक मां ने जो दुनिया सब कुछ दे शक्ति है बट अपने संतान उस्मान ने अपनी बेटी दी हो गुरुदेव फिर भी लोग आजकल की शादियों में काफी दहेज मांगते हैं और अगर मां मुताबिक दहेज नहीं मिले तो लड़की के साथ हिंसा तक कर देते हैं गुरुदेव इस पर भी थोड़ा प्रकाश डालेंगे तो सब लोगों की आंखें की जो अपनी बेटी को दे रहा है तो मुझे तो लगता है की जितनी उसकी समर्थ होगी उठा नहीं रखेगा जैसा हमने देखा है क्योंकि कहानी तो पैदा हुए हैं परिवार में ही देखा है की जितनी अपनी समर्थ होती है आप मां और परिवार वो कर्ज लेकर भी चाहता है भले मैंगो या एन मैंगो क्या अच्छे से अच्छा
अपनी बेटी का ब्याह करें बरतिया का स्वागत करें पर जब वर्ग पक्ष के यह बात रख देते हैं इतने लाख या इतने तोष ममता भरे परिवार में विषमता पैदा हो जाति इससे अच्छा है बेटी पैदा नहीं होती यह जो आज गर्भवती आए हमारे बहुत बड़े आप की प्रवृत्ति बाढ़ रही है माता बहनों में भी समाज में भी तो उसका कहानी ना कहानी काफी दोस्त इस दहेज प्रथम पर है क्योंकि हमने देखा है की गांव के जैसे किसान आदमी है बेटी को पटाया लिखिया सुंदर पुष्ट किया करें बुद्धि भ्रष्ट हो गई दहेज प्रथम के भैंस अच्छा कुछ ऐसे आंखें नींबुआ घाट गंगा जी के किनारे भ्रमण करते फतेहपुर जिले में तो ऐसे संतो के पास तो आते रहते ना दर्शन वासना अर्थ तो एक ग्रस्त ब्राह्मण परिवार के आते थे अब जो मार्ग में चल रहे हैं तो कभी कोई एन कोई बात तो हो ही जाति भगवती तो अपनी बेटी को ले थे तो यहां सब जाली हुई थी ऐसे पूरे ऐसे इतना चेहरा ऐसे और सुंदर इस बच्चे को क्या हो गया उनका महाराज इसका ब्याह किया था जितने हमारे समर्थ जितना उन्होंने मांगा था उतना दहेज दिया था पर
वो लोग सुशील बच्ची थी जब बता रहे थे तब उसके आंसू चल रहे थे उसे बच्ची के तो बोले फिर भी उन्होंने मांग की हमने फिर भी दोबारा जो कम से बना दिया बोले तिवारा हमारी बच्ची को चारपाई में बांधकर के आज लगा दी चारपाई में बांधकर और भगवान की लीला की रस्सी का वो हिस्सा पहले टूटा जो और ताकत लगा को उठने पर खुला जाए वो पहले जल जल रही थी वो भी भाग और सीडीओ से चढ़ के उनके चाचा के घर में कूद गए छप्पर होते ना आंगन में छप्पर के सारे नीचे जलती उन्हें देखा तो कंबल आज से
ढाका और उनके पास बंदूक थी की अब नहीं अब मेरी बेटी हो गई उन्हें के परिवार अगर किसी ने दिमाग को टाइट गली मार देंगे वो बोले हमें सूचना दी गई हम अपनी बेटी को ले अब बोलो ये रक्षा है या मनुष्य है वह बेटी जिंदगी अब उसके अंतरात्मा में जो उनके प्रति भाव आएगा वह उसे जेल नहीं पाएंगे चाहे जितना तो कई तरह से दहेज प्रथम से बहुत हनी है और हमें लगता है की अगर तुम्हें सुंदर सुशील कन्या मिल जाए और उससे तुम्हारी वंश परंपरा देश भक्ति भागवत भक्ति बुद्धिमान पुत्र पैदा
हो वो अच्छा या उसको इस तरह से परिवार को क्लेश देना उसे बच्ची को क्लेश देना या वह परिवार वाला बच्ची जिसके है वह सोने पर मजबूर हो जाए इससे तो अच्छा है की हमारे बच्चे ना होती तो दहेज प्रथम तो बहुत ही कहानी किसी भी तरह लाभदायक नहीं है कहानी भी किसी और जो इस तरह से दहेज लिया जाएगा लिख लो उसे परिवार की जांच कर लेना कुछ वर्षों के बाद उसे परिवार में ऐसा खनयंत्र और सुख नहीं होगा शांति सुख नहीं आज तक कभी कोई सुखी नहीं हुआ है ये पक्की बात है और सबसे प्रार्थना है की बेटियों की भावना में उनका गर्व की हत्या कर देना इसलिए समझ लो आपके पास कोई प्रायश्चित नहीं इस पाप से हटे का अरे आप पढ़ने लिखने दो आजकल बहुत हमारे मतलब पढ़ाई लिखी तो कहानी ना कहानी वो कुछ ना कुछ करेंगे अपने हिसाब से वह जीने लायक बुद्धि भगवान सबको दे देते हैं हमने तो दिखाई दे रहा है की बच्चियों बड़ी उन्नति में जा रहे हैं तो हमारा दुर्भाग्य है ऐसा माता-पिता को नहीं और कई जगह हमने देखा जहां बूढ़े माता-पिता को कोई सहयोग नहीं देता तो
हमने देखा बच्चियों ही साहब देती है कभी लड़कों को किडनी देते हुए नहीं देखा अपने आप को जहां सुनने को आता है तो बेटी किडनी देती नजर आई है लड़के कर हैं हिस्सा बांट लिए अब एक-एक रोटी देने के लिए पहले वो भाग के भी जब माता-पिता बेटी के पास वही दलाल करती क्योंकि करुणामई है ना मंत्र शुरू हृदय में विराजमान ना अच्छा बेटी नहीं होगी तो बेटा आसमान से पैदा हो जाएगा क्या करोड़ का घर हो और एक स्त्री शरीर ना हो उसे घर में किसी कम का घर नहीं है और मेहनत करके आते हो
भले ₹200 लेट हो और देवी शक्ति के हाथ में रख दो तुम्हारी पूरे परिवार का पोषण करेगी किसी को भूख नहीं रहने देगी सबको वाणी के द्वारा चेषताओं के द्वारा प्रश्न ये मंत्र शक्ति है इसके साथ ऐसी भावना करना की तुम्हारे केवल चिन्ह का ही तो फर्क हुआ तुम्हारी संतान पुरुष चंद्र से युक्त हुई तो तुम इतने महान हो गए की आप गली दे रहे हो आप उसको कष्ट दे रहे हो आप पैसे ले रहे हो वो अपने पूरे जीवन को तुम्हारे को समर्पित की है यह भारी दंडनीय अपराध यहां दादा अगर नहीं मिला ना तो तैयार रहो फिर भगवान के शासन से फिर किसी की किसी को बचाने का चेस नहीं मिलता दिनकर कल रूप में भ्राता बहुत-बहुत सावधान ये तो बहुत अच्छा प्रश्न आपने किया है क्योंकि समाज के लिए बहुत सुधार जिसने अपनी बच्ची हमें दे दी अपना सर्वस्व दे दिया मानो अब उससे हमें मांगने की जरूर नहीं है और भगवान जब आप नहीं ऐसा दबाव डालोगे तो देने वाला वो है वो ऐसा कुछ देगा एक घर में उनको अलग कर दिया क्योंकि उन्होंने दहेज नहीं दिया था गरीब परिवार थे तो अब उसे लड़के
ने राजी होकर ब्याह किया क्योंकि कुछ लड़के ऐसे बुद्धिमान होते हैं की अगर हमारा भाव बन रहा है हमारे अनुकूल पद रहा है तो हम धन लेकर क्या करेंगे पर माता पिता का भाव धन के प्रति धातु उसको अलग कर दिया एक कैमरा केवल दिया फिर इतना देश बड़ा परिवार का उसको जहर दे दिया और वो विकसित होगा मारा तो नहीं पर पागल हो गया अब उसकी लड़की की दशा सब कुछ परिवार वालों ने लिया एक कैमरा दे दिया एक दो बीघा जो खेती वो करने लायक नहीं क्योंकि रोड में बैठा अब जो उसकी संताने हुई
थी आज ऐसी हाइट ऊंची डिपार्मेंट में है की गांव पर मकान बना हुआ है वो जब आते हैं ना तो गाड़ियों से आते हैं जिनके खाने का नेता धर्म से चले ना तो आज पिता हूं जो पागल पिता है ना ऐसे गॉड में रख रहे हैं बच्चे उनकी सेवा में और जो मां घरों में कम करके अपने बच्चों को पटाया ना कोई एयरफोर्स में है कोई ये फल से ना इसमें है मतलब कहानी तो फोर्स में है और इतने विद्वान हैं की जो आचार्य महर्षि महर्षि योगी के उसके आचार्य हैं और उनमें पढ़ा रहे हैं छोटे-छोटे बच्चे जो
थे वो अच्छे बहुत तो भगवान दिया ना देखो अच्छी पटिया दे दी अच्छा और वो जो घर वाले इस की स्थिति पर अगर भगवान देंगे ना तो आप महान बन जाओगे और किसी भी जीव को सतना फिर वो तुम्हारी शरणागत हुई है पानी ग्रहण तुमने क्या तुम्हारे घर में आए कितने राक्षसी स्वभाव के होते हैं घर में आए हुए एक शरण में आए हुए एक कबूतर के लिए मारा शिविर ने अपने शरीर का मांस चड्ढा दिया और वो कन्या आई है तुम्हारे घर में अपने माता-पिता मानकर अपना भाव रख करके तो उसको यह समझना चाहिए की
बहुत बड़ी लक्ष्मी हमारे घर ए गई है अब इससे जो संतान होगी कल परंपरा चलेगी तो यह दहेज प्रथम तो बिल्कुल ही इस पर सरकारी शासन भी होना चाहिए और सामाजिक खुद हमारी ऐसी स्थिति हनी चाहिए की हमें चाहिए की हम अपने धन से संतुष्ट रहे आपने कन्या दे दिया बहुत सुंदर बात है अब हमारा खुद भाग गया आगे कम करेगा हमें आपसे नहीं चाहिए और हमने देखा है की माता-पिता ऐसे बात अलग है कोई दुष्ट स्वभाव का हो नहीं कोशिश करते हैं मैं क्या दे डन अपनी बेटी को पक्का ये पक्का हां मतलब जब बेटी पैदा होती है ना जनक जी को विदा कर रहे हैं कोई भी ऐसा पिता नहीं जिसके हृदय में तो वो कहे को रखेगा अपने जो जितनी समर्थ इतना तो दे देगा इसलिए मुझे लगता है दहेज नहीं मांगना चाहिए दहेज देने के भाई से गर्भ में बेटी की हत्या नहीं करनी चाहिए वो आईटी आज का समय देखो आज का समय ऐसा है की देखो हमारे राष्ट्र में तो बेटी राष्ट्रपति हमारे देश के राष्ट्रपति कौन है मतलब राष्ट्र के स्वामित्व का जो प्रथम पद है राष्ट्रपति है राष्ट्रपति पद पहले नाम तो
हमें यादें देखो कितनी सुंदर बात हमारे राष्ट्र के प्रधान पद पर देवी बैठी हुई है तो हमें चाहिए की हम अपनी पुत्री को पढ़ाया लिखा है सुशील आज के वातावरण की गंदगी से दूर बचे और फिर भगवान है की वह अपनी समर्थ से जी सकते धीरे धीरे भगवान भी ऐसी उन्नति उनकी कर रहे हैं मानसिकता की अच्छे से हां माताजी के कई रूप हैं हमारी फेक जो रूप है ना प्रचंड दंड देने वाला फिर वो रूप जब प्रेरित कर देते ना तो फिर नाचनी नाच नच लेती उसे परिवार को नच देती है फिर हमारी भगवती की
बड़ी समृत है वह बैठ जाएगी बुद्धि में की तुम देखना चाहते हो इस टाइम क्या समर्थ पुरी का पानी का जाएंगे क्योंकि देवी शक्ति है इसलिए नमन तो तुम्हारे परिवार का पोषण और मंगल हो हमें लगता है दहेज प्रथम बहुत ही हानिकारक है बहुत ही हमारे समाज का एक ऐसा रोग है जो बहुत पुराने से चला रहा है और इस रोग से ग्रसित होकर के बहुत लोग छिन-भिन्न हो जाते हैं उदास हो जाते हैं बेटी पक्ष के लिए उनके हृदय में पैदा हो जाति की अगर आज बेटी ना होती तो मैं ऐसा नहीं बिल्कुल धैर्य पूर्वक चलो भगवान ने सबके भाग्य की रचना की है और पढ़ लिख करके हमें लगता है की कोई भी कोई भी अच्छा सा जीवन जी सकता है भेज सकता है नौकरी करो व्यापार करो देखो माता मैंने बहुत सी जगह उन्नति को प्राप्त हो रहे आजकल तो बच्चे पढ़ते-पढ़ते ऐसे नौकरियां करने लगता हैं की माता पिता की भी सेवा करते हैं और जहां ब्याह उसे पक्ष को भी संतुष्ट करने की समर्थ नहीं बछिया में ऐसे पैसे कमाने लगी है पर दहेज लेने वाली भावनाओं का त्याग कर देना चाहिए हां सब नौजवान भाई
समाज सुधारक बानो बसंत त्यागो गांधी बातें गांधी आदते जो हमारे समाज में फेल रही एक दूसरे मिलकर के रुको अगर आप रुक और एक मित्र को रॉक तो दूसरे को रोकने की समर्थ रखना है ऐसे अगर हमारा एक मोहल्ला सुधार गया फिर गांव सुधार जाएगा एक गांव सुधार गया तो एक नगर सुधार जाए धीरे-धीरे हम लोग भारतवासी हैं सौहार्द ही हमारा स्वरूप है गांव में रहते हजारों लोग थे पर लगता था हम सब एक ही घर के हैं जो हमारी विविधता भावनाओं में ये उच्चता नीचता ये सब बड़े छोटे ये सब जो धन
को लेकर के जन्म को कल को लेकर के कई तरह इस मानसिकताएं केवल हैं हम एक ही प्रभु के बच्चे हैं अगर हम अच्छे आचरण से चलें तो हम मनुष्य जीवन बड़ा आनंद में सुख में वित्त अच्छा ये हमारे जवान भाइयों को ही जरूर है क्योंकि यही हमारे देश के भविष्य हैं अब 15 से लेकर के 35 तक की अवस्था के जितने एन ये तूफानी अवस्था होती है अगर इसमें गांधी बातें ए गई गंदा हर गंदा वसंत तो फिर ठीक नहीं है हां अच्छे अच्छे समाज का संगठन करो और स्वयं अच्छे बानो और दूसरों को अच्छा है की मार्ग पर चलने का सहयोग दो प्रेरणा दो
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- क्या भगवत् प्राप्ति होने पर भगवान से भी मोह खत्म हो जाता है? — श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1402 — महेश कुमार चौबे जी राधे-राधे प्रभु राधे-धे महाराज जी महाराज जी आपकी आज्ञा से मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा भगवान की शरणागति और आश्रित होने के लिए हमने लगभग सारे भोग भोग लिए हैं और…
- किसी को कोई बात समझाने पर वो न समझे तो क्रोध आ जाता है — शशांक वर्मा जी मुजफ्फरनगर से राधे-राधे श्री राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी ऐसा कई बार होता है कि किसी को अपनी बात समझाते हुए…
- स्वर्ग में वो कौन-सा सुख है, जो धरती पर भी नहीं है? — पारस कोहली जी नई दिल्ली से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी सुख और दुख एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। मेरा प्रश्न यह है कि वह कौन सा सुख स्वर्ग में है…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1401 — विक्रम पांडे जी मिर्जापुर से श्री हरिवंश महाराज जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपका सत्संग सुनता हूं और कृपा का अनुभव है महाराज जी…
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…