माँस-मछली बेचता हूँ, पर खाता नहीं हूँ क्या यह सही है ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मनोज जी राजस्थान से श्री हरिवंश गुरुदेव राधा वल्लभ श्री हरिवंश आपके चरणों में दंडवत प्रणाम गुरुदेव आपकी कृपा से य पर वीडियो देखकर मैं आपको मन से अपना गुरु मान चुका हूं गुरुदेव आपकी कृपा से रोज हमें गुरु मानो चाहे ना मानो गुरुवाणी मानो हमारे मानने से काम नहीं चलेगा हम तोम पक्की बात कहते हैं हमारी बात मान लो गुरु की वाणी मान लो अगर गुरु की गुरु तो बनाने वाले लाखों लोग हैं गुरु गुरु मानने वाले लाखों लोग लेकिन गुरु मानने वाले कितने हैं गुरु को मानने वाले लाखों लोग हैं लेकिन गुरु की मानने वाले कौन है और यहां काम बनता है गुरु की मानने वाले गुरु की बात मान लो व जो आदेश कर रहे हैं जो उपदेश कर रहे हैं वैसे आप अपना जीवन बना लो आप हमारे लाड़ले हो आप हमसे कहो कि हम आपको गुरु मानते हैं और हमारी बात ना मानो आप हमारे प्यारे नहीं बनोगे इसलिए हम बोल दिया बीच में कि आप हमको गुरु गुरु मानो या ना मानो हमारी बात मान लो री बात ना मानोगे तो गुरु मानने से कुछ नहीं होना हम तुम्ह बता रहे यह पांच भौतिक शरीर है कुछ
दिन का है ये गुरु नहीं हो सकता कोई पांच भौतिक शरीर गुरु नहीं हो सकता अच्छा जो हम है वो तुम्हें परिचय नहीं है उसी परिचय के लिए नाम है मंत्र है उपासना है आप बात मान लो आप हमें जान जाओगे बिना जाने हमें कैसे गुरु बना सकते हो बिन जाने न होए प्रतीति बिन परतीत होए नहीं प्रीति बिन प्रतीत उपजे नहीं विश्वासा और बिन विश्वास भगत नहीं ते बिन द्रव न राम राम कृपा बिन सपने जीव नला विश्राम एक क्रम है जान गए अपने गुरु को कौन है तुम्हारे गुरु नहीं जान गए तो उनकी बात मानो जान जाओगे अगर बात नहीं मानी तो फिर सारी की सारी परमार्थ की शक्ति गुरु वाक्यम ध्यान मूलम गुरु मूर्ति पूजा मूलम गुरु पदम तो मंत्र मूलम गुरु वाक्यम और मोक्ष मूलम गुरु कृपा सब कुछ परमार्थ गुरुदेव में ही रखा है वाणी जी को मानो बात को मानो बस उसी से परम मंगल हो जाएगा अब आगे प्रश्न कर महाराज जी आपकी कृपा से रोज सुबह 4 बजे उठकर राधा नाम जप करने का अभ्यास करना शुरू किया है लेकिन मेरा मन कभी-कभी अशांत हो जाता क्योंकि मेरा व्यापार पूर्व से ही माछ
मछली संबंधित रहा है मैं माछ मछली का सेवन तो नहीं कर रहा लेकिन व्यापार करता हूं इसलिए मन अशांत रहता भगवान भगवत प्राप्ति में कोई बाधा तो उत्पन्न नहीं होगी इससे पक्की हो जाएगी करता रक अनुमोदन तीनों को समान फल मिलता है करता जिसने माला तो आप उसमें सहयोग तो है ही है आप व्यापार क्या जी वही हत्या वाला केवल है क्या सृष्टि में आप भाग्यशाली हो आपको सत्संग सुनने की रुचि आई तो क्या एकही व्यापार है हां अगर आप ऐसे जगह जन्म में हो कि जहां आपका धंधा यही चल रहा है
कुल परंपरा से तो हम प्रणाम करते हैं आपको कि आप ऐसी कुल परंपरा में जन्म लेकर भी नाम जप करते हो यदि नहीं है तो छोड़ दो जैसे सदन जी थे ना तो मांस जाकर के कसाई के घर में जन्म हुआ था तो मांस जाकर के वहां से ले आते खरीद के और उसको थोड़ा बेच देते जो मुनाफा होता उससे माता-पिता के सेवा भजन करते थे क्योंकि उनके कुल के अगर आपका ऐसा कुछ है तो देख लो अगर आप ऐसे नहीं है तो छोड़ दो जीव हत्या करके रुपया कमाने से कभी किसी को शांति सुख नहीं अब दवा बहुत बढ़िया इसीलिए तुम्हारी बुद्धि अभी काम कर रही है कि आप यह देख पा रहे हैं कि आपका मन जल रहा है उस बात के लिए जल रहा है जो गलती हो रही यही भजन का प्रभाव होता है तो अगर आप ऐसे आपका है क्या कुल परंपरा से व्यापार यही हा सर मतलब आपके बाप बाबा दादा यही सब करते चले आए हा हां तो ठीक है जो कर रहे हो करते रहो क्योंकि अपने फिर गीता का एक सूत्र लागू होता है स्वधर्म निधन श्रेया पर धर्मो भयावह जो स्वधर्म है अब जैसे आप बारबार करते चले आ रहे हैं आप अभी तक कर रहे हैं अब
अगर आपको अस नहीं हो जाए आगे तो छोड़ देना मतलब भगवान छुड़ाना चा रहे थे कि छोड़ देंगे ब थोड़ा सा समय चाहिए महाराज तो हम इसीलिए कह रहे हैं हम आज नहीं कहा कि आज से अगर ये कह देते व ऐसा नहीं चल रहा तो हम नया खोले तो अभी मना कर देते पर जब जैसे चल रहा है तो इसीलिए छूट दे दी कि आप देखो जब असनी हो जाए मतलब कि अब हम कुछ रहे अब हम नहीं कर सकते तो फि छोड़ देना और ये नाम सब करा देगा नाम आपको उठा के जगह बैठा देगा जहां और यह चिंता मत करो कोई कि हमारा भरण पोषण कैसे चलेगा या ज्ञान के कारण चिंता करते हो और भी बहुत से कर्तव्य करो भगवान का नाम विश्व भरण पोषण करने वाला विश्वंभर है तो तुम तो मनुष्य हो तो देख पा रहे इतने कितने जीव हैं 84 लाख योनि भगवान सबका भरण पोषण करते हैं सबको भोजन पहुंचाते सबको पानी पहुंचाते अच्छा डॉक्टर हमारे शरीर की स्वस्थ के लिए मनुष्य शरीर या बहुत जो पशु पाले उनके और लाखों जीव जंगलों में रहते उनको कौन से डॉक्टर हैं बड़े स्वस्थ रंगीले छबीले देखो छलांग लगा रहे गरज रहे क्या है उनको कौन
दे रहा है सब खानपान जो जंगली है उनसे बलवान घरवाले नहीं होते पशु वोह बहुत स्वस्थ देखो ना एकदम क्यों वो हरि के सहारे हैं रहिमन बहु भे सज करत व्याधि न छाड़ साथ और खग मृग बसत अरो बन हरि अनाथ के नाथ समझ रहे ना हा तो बच्चा जब ऐसा आ जाए तो हिंसा तो किसी तरह भी सुख कारी नहीं है किसी भी जीव की जितने हमारे अंदर प्राण है ना जीवात्मा है उतने चीटी में है जानबूझ के किसी जीव की हिंसा करना यह हम मनुष्यों के लिए नहीं राक्षसों के लिए तो है आसुरी प्रवृत्ति वालों के
लिए है लेकिन अपने लोग तो हमें लगता है बचना चाहिए तो अगर बच्चा जब आपको ऐसा लगे तो भले लेवरी कर लो नहीं लो नहीं ट गारा वाला किसी की हिंसा तो नहीं अपने शरीर को पीड़ा देके और जो पैसा मिले अपने परिवार का भरण पोषण करो एक और देख लेना चार दिन भले दुख पाओ क्योंकि धर्म पर आने के लिए जब कदम रखोगे तो पाप बाधा पहुंचाते हैं किसी रूप में भी व आपको रोकने की चेष्टा करें अगर आगे कदम बढ़ गया तो सुख ही सुख है जहां पाप नष्ट हुए फिर सुख सिंधु है भगवान सुखी मीन जिम नीर
अगाधा तिम हरि शरण न एको नाम जप करो और बस कोशिश करो कि जितना हो सके हम किसी को दुख ना दे परहित सरिस धर्म नहीं भाई पर पीड़ा सम हमें तो लगता है कै निर्दय स्वभाव हम लोगों का हो गया पशुओं को काट करके भूज करके खाना अब देखो यहां से शुरू हुआ फिस के बाद व्यभिचार प्रवृत्ति बड़ी कि बाल बच्चे पराई बहन बेटी माता उनके साथ ऐसा व्यवहार राक्षसी व्यवहार जैसे घटनाए होती है ना तो समझ में आ है मनुष्य कैसे कर सकता है ऐसा मनुष्य कैसे कर सकता है यह तो राक्षस ही है तो आ गई ना तमोगुण राक्षसी वृत्ति और वो राक्षस कौन है हमारे अंदर बैठा हुआ दो है बुद्धि के दो स्वरूप हैं एक है सुमति एक है कुमति अगर कुमति वाले आचरण करेगे तो राक्षस हो जाओगे और सुमति वाले आचरण करोगे तो महात्मा हो जाओगे रक्षा करने वाले बन जाओगे आप ही के अंदर सब बैठा है सुमति कुमति सबके उर राही जहां सुमति त संपति नाना और जहां कुमति त विपत्ति ढेर सारी विपत्तियां आ जाएंगी कल आपके मानस में सड़न शुरू होगी कैंसर की अन्य रोगों की तब जब बता देगा दो महीना रह गए
मरने के फिर और जब यहां से जाओगे इस कमरे को खाली करके तब फिर जो हिसाब किताब होगा यह है भारतीय कानून और वह है भागवत कानून जहां किसी भी सपोर्ट की जरूरत नहीं साक्षी की जरूरत नहीं है वह अपने आप जैसे होता है ना कि यहां से पैसा डालो अपने आप आपको रास्ता खाली आप निकल जाओ ऐसे वहां अपने आप सिस्टम सब चालू है वहां थोड़ी कि न्यायाधीश बैठे और सब बातें वहां तो एक सेकंड में हिसाब किताब सर्व साक्षी है तुम्हारी एक एक बात पहले ही देख रहे जान रहे कितने जीव जाते होंगे
फिर तो वहा मतलब लाइन लगी रहे वर्षों ऐसा सेकंड में हिसाब किताब इसलिए उस हिसाब का चिंतन करो जहां कोई गड़बड़ी ना हो जाए जाने पर यहां जो हिसाब है तुम्हारे काम का नहीं है एक चवन्नी नहीं जाएगी शरीर यही रह जाएगा रिश्ते लाते यही रह जाएंगे यश कीर्ति यही रह जाएगी बस समझ लो जन्म जन्मांतर का हिसाब किताब मिटाने आए सजाने नहीं आए हम आए हैं परमेश्वर से मिलने के लिए परमात्मा से मिलने के लिए कोई मेहनत की जरूरत नहीं है जो कर रहे हो शास्त्र सम्मत करो और भगवान को अर्पित कर दो और नाम जप लो इसी से भगवत प्राप्ति हो जाएगी गृहस्थ में हो इसमें कोई ऐसा नहीं कि जाकर गंगा जी में हाथ उठाकर खड़े होना या राधा राधा राधा और जो सुबह से शाम तक किए यह देख लो किसी को दुख देने वाला पाप कर्म ना हो और भगवान को अर्पित कर दो इसी से भगवत प्राप्ति t
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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