॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

रवि प्रताप सिंह जी आगरा से राधा राधा श्री हरिवंश राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी आपके एक सत्संग में सुना था कि हमारी विवेक रूपी कैची और साधन का बल कम है इन पहाड़ रूपी विकारों को जड़ से उखाड़ने के लिए किंतु अगर प्रभु की कृपा रूपी तलवार चलेगी तो यह पहाड़ रूपी विकारों को एक बार में ही उखाड़ फेंके गी महाराज जी कैसे प्रभु की यह कृपा रूपी तलवार चलेगी हमारे सभी विकार हां शरणागत हो जाओ अंदर से पहले तो देखो तुम हार गए हो कि नहीं हार गए हो अंदर से देखे कि हम हार गए अब हमारा बस नहीं है कि मैं इन पर जीत सकूं सच्चाई से और तुम्हें वास्तविक उन भोगों से दुख महसूस हो रहा हो अभी क्या होता है हम लोग सुन के के पापा चरण नहीं करना चाहिए पर लगता अंदर से बहुत अच्छा है हमारी बात क्यों नहीं सुन रहे भगवान उसकी बात समझो हमने सुना कि ऐसा नहीं करना चाहिए नहीं करना चाहिए पर अंदर से बहुत अच्छा लग रहा है वो करने के लिए अंदर सुखद लालसा है फिर कहते भगवान बचा लो यह बोला ऊपर से व अंदर क्या है

अंदर वो बहुत तो जब तक उसका दुख का अनुभव नहीं होगा तुम्हें उनमें घृणा भाव नहीं होगा उनमें यह भाव नहीं होगा कि मेरा नाश करने वाले तब तक अंदर से पुकार नहीं होती जहां अंदर से वो जो सुखद बात थी वहां क्लेश पैदा हो गया शांति अब नहीं बहुत हो चुका बहुत हो चुका हे प्रभु आप कृपा करो मैं निकलना चाहता हूं आप देख लो शरणागत होकर अंदर से बल बात समझ लेना नंबर बिना मिले हेलो नहीं होगा नंबर तभी मिलेगा जब अन्य कोई आश्रय अन्य कोई चाह और भरोसा नहीं एक भरोसो एक बल एक आत्म विश्वास फौरन बात होगी फौर मतलब सेकंड तब व्यतीत होगा जब उत्तर तुम्हारे सामने होगा फाइनल तुम्हारे सामने होगा वो भगवान है पर हमारा क्या होता है अंद जैसे हम चाहते हैं कि यार हम ऐसा ना करें गंदी बात है भगवान के खिलाफ बात है पर अंदर से मिठास है सुखद वृति फिर तुम्हें कोई नहीं बचाएगा पहले जाओ वहां ठोकरे खाओ और दुखी हो और जब तुम्हें असलियत में दुख समझ में आ जाए तब बताना तब रोना तब उसी समय फ बात बना बिन रोए किन पाइया प्रेम पियारा मीत हम लोगों का जो

कपट भरा प्रार्थना है वह इसीलिए नहीं सुनी जाती कि अंदर से कपट है बीच में कि मुझे प्रिय लगता है संसार छोड़ना चाहते अभी नाम जप करो जब शुद्ध बुद्धि हो तब आपको दिखाई देगा कि अरे वास्तविक यह दुख में है दुखाल में सुख कहां है जब वास्तविक होगा तब अंदर से प्रार्थना होगी और वह प्रार्थना अनसुनी नहीं होती उसी प्रार्थना से भगवान का अवतार होता है तुम्हारे हृदय में भगवान प्रकाशित हो जाएंगे नाम जप करो सत्संग सुनो पवित्र भोजन पाओ दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने का भाव सोचो फिर आपके हृदय में धीरे धीरे धीरे यह जो विकार हैं यह चुभने लगेंगे बुरा बुराई जब अपने को बुराई रूप में आती है ना दिखाई देती है ना तो उसको हम निकाल सकते हैं लेकिन बुराई जब हमें सुखद लगने लगती है फिर हम नहीं निकाल पाते अगर हम सो रहे हैं तो हमें कोई जगा सकता है पर सोने का नाटक कर रहे हैं फिर नहीं जगा सकता क्योंकि हम सोने का नाटक कर रहे हैं बात हमारी समझ में आ रही होने के बाद महा बहुत गलानी होती है बाद में अभी वो गलानी नहीं जिसके गिलान के

बाद फिर मन भयभीत हो जाए ऐसे भयभीत हो जाता है कि आप अगर ऐसा हुआ तोब जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा अब नहीं वह ग्लानि उसे कहते अब नहीं हो सकता यह हमें काट दे चाहे पर हम अब यह नहीं कर सकते उसे देखो सदन जी महाराज ठाकुर जी के दर्शन जगन्नाथ जी के दर्शन करने के लिए जा रहे थे बड़े महान भगत हुए तो रास्ते में भिक्षा के लिए किसी घर में गए अब भजन करने वालों का एक अलग आकर्षण खिंचाव होता है जो घर में वो देखा तो नई अवस्था और भजन का बल तो तेज प्रकट हो रहा उसने कहा बैठकर पा लीजिए संध्या का समय था सोचा चलो ठीक है बैठ के पा उ क आज यहां विश्राम कर लीजिए सरल हृदय ठीक ऐसा नहीं होना चाहिए भिक्षा लो बाहर जाओ मंदिर में सो जाओ वृक्ष के नीचे सो जाओ घर गृहस्ती में क्योंकि वहां उनके परमाणु है वहां उनकी गृहस्ती की लीला है या कोई अलग ऐसा वास हो जो परिवार से अलग तो फिर साधु महात्मा के लिए जिस घर में सब उसी घर में सय करने के लिए बाहर या तो बाहर दरवाजे के बाहर छप्पर पड़ा है ऐसा या कोई देवालय या वृक्ष ऐसा साधुओं के लिए कि घर

गृहस्थ हों से अन्न तो ले लिया और शयन हमारा एकांत में हो पर वो सरल भक्त वही अब वो रात में तब उन्होंने उत्तर दिया कि तुम कैसे स्वभाव वाली हो तुम्हारा पति है अभी और तुम ऐसा तो उसको लगा कि अगर पति ना रहे तो स्वीकार कर लेंगे क्योंकि उन्होंने ऐसा कहा तो पति की हत्या कर दी भाई बोले हमने पति को मार दिया व सो रहे थे क घोर अपराध तू कितनी पापिनी है अपने पति की हत्या बोले ज्यादा उपदेश मत करो जो मैं कह रही हूं वो करो नहीं अभी हल्ला मचाती हो पूरे गांव के लोग आएंगे तुम्हें जान से मार देंगे उन्हो कहा नहीं मरना तो है ही है एक दिन मैं तैयार हूं मरने के लिए पर मैं कुमार्ग का आचरण नहीं कर सकता कुमार्ग का तुम्हारी श्रद्धा भावना के कारण में रुक गया उसने बचा दिया अल्ला लोग आ गए उनका पहले इसने हमने छेड़ने की चेष्टा की जब मैं राजी नहीं हुई मेरे पति बचाने पक्ष में है तो पति की हत्या कर दी और मेरे साथ य अपवित्र व्यवहार करना चाहता पूरा का पूरा भाव ही बदल दिया अब उनको बंदी बनाया गया राज दरबार में ले जाया गया पूछा

गया कि आपने ऐसा आचरण किया उ कहा नहीं व स्त्री बोलने लगी झूठ बोल रहा है राजा ने कहा य स्त्री तो फिर जैसा य बोल रही वैसा आप करो एक बार केवल नहीं बोला था दोबारा नहीं दोबारा सफाई की मालिक की जैसी इच्छा होगी वैसा बोले इनके दोनों हाथ काट दिए जाए काट दिए गए दोनों हाथ काट दिए जाए दोनों हाथ का वे में इसलिए उनको जेल तो सजा तो नहीं इनके दोनों हाथ काट के इनको छोड़ दो दोनों हाथ काट दिए ग गए जगन्नाथ जी हस करके कहेगी अब प्रणाम भी कैसे करे हाथ भी कैसे जोड़े आपले

तो कटवा दिए जोय ऐसे किया नवीन हाथ ज गए ना हाथ कटने में उनको दर्द हुआ ना कोई कष्ट हुआ भाव यहां दिखाया कि अगर हम धर्म से चले हमें काट दिया जाए तो भी हम अधर्मा आचरण नहीं करेंगे फिर हमारा मन हमारी बुद्धि हमको गंदे आचरण में कैसे फिसला देती हमारी निष्ठा होनी चाहिए अभी हम लोग थोड़ा सुन सुना के वो जलन है अभी वास्तविक जलन नहीं अगर वास्तविक जलन होगी तो कोई हमें गिरा नहीं सकता पक्का कोई नहीं कोई नहीं गिरा सकता भागोगे भागोगे जब आपको ज्ञान हो जाएगा ना कि असलियत में क्या है संसार का खेल माया कैसे फसाक हमें भजन विमुख करते लगे रहो नाम जप करो अच्छे आचरण करो वो स्थिति कोई दुर्लभ नहीं अपने हृदय में जब भगवान बैठे तो कौन सी स्थिति अब हमारे लिए दुर्लभ है सब स्थिति आ जाएगी

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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