हम तो बहुत पापी हैं, अधम हैं हमें कैसे भगवान मिल सकते हैं ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
जब भी भजन करने का प्रयास करते हैं या नाम जपने का प्रयास करते हैं तो बार-बार मन यह कहता है कि तुम्हें प्राप्ति तो नहीं हो सकती ईश्वर की या साक्षात्कार नहीं हो सकता क्यों नहीं हो सकती आप प्रश्न नहीं करते मन से हा प्रश्न करता हूं कहते तुम बहुत अधम हो बहुत ही पाप हु तुम तो हमारे प्रभु का नाम सुनो ना हमारा संबंध है प्रभु से हमारे प्रभु का नाम अधम उदाहरण हम बहुत पतित है तो प्रभु का नाम है पतित पावन हम बहुत अनाथ है उनका नाम है दीनानाथ हमारा उनका रिश्ता पक्का है भगवान तो हमें मिलेंगे मन को उत्तर देना सीखो हमारे प्रभु का नाम अधम उदाहरण हे भगवत प्राप्ति हमारे घर की बात है बाप की प्रॉपर्टी का अधिकारी मूर्ख पुत्र भी होता है पड़ोसी वकील हो तो नहीं हो जाएगा समझ में आ तो हमारे प्रभु है हम जैसे हैं तो ही मोहि नाते अनेक मानिए जो भावे ज्यों त्यों तुलसी कृपालु चरण शरण पावे तू दयाल दीन हो तू दान हो भिखारी हो प्रसिद्ध पात की त पाप पुंज हारी नाथ तू अनाथ को अनाथ कौन मोसो मो समान आरत नहीं आरत हर तो स ब्रह्म तू
हो जीव तू ठाकुर हो चेरो तात्मा हमारे सारे संबंध आपसे हम नीच है पतित है अनाथ है दुर्गति युक्त है पर नाथ आपके हैं क्या चला जाएगा हमें भगवत प्राप्ति इसी भाव से होती है अगर किसी को अभिमान हो जाए मैं बड़ा पुण्यात्मा में तपस्वी में साधक अब भगवत प्राप्ति दूर है अगर यह अंदर रहा कि नाथ मैं जैसा हूं आपका हूं हमारी क्या सामर्थ्य कि आपको मैं प्राप्त कर सकूं पर प्रभु मन में आ गई बात कि आप हमारे हो मैं आपको देखना चाहता हूं तो वो गले लगा लेंगे देखने सुनने की तो
बात जाने दो आपने जाना नहीं है ना हमारे प्रभु के स्वभाव को भगवान शंकर कह रहे हैं उमा राम स्वभाव जही जाना ताही भजन तजी भावना आना आप तो भगवान को भगवान मानकर कुछ ना कुछ तो भाव करते हैं ना पूतना भगवान को मारने गई थी जहर लगा के तो उसको वह गति दी जो यशोदा मैया को मिली शिशुपाल गिन गिन कर गाली देता था भरी सभा में भगवान ने उसको वो गति दी जो सारू मोक्ष बड़े-बड़े ऋषि मुनियों को प्राप्त होता है आप विचार करके अघासुर बकासुर ऐसे कितने राक्षस जिनको मुनि जन वांछित
परम पद भगवान ने दिया जिनको जो भगवान को गालियां देते थे भगवान से लड़ते थे भगवान को मारने गए उनको तो परम पद दे दिया हम तो उनके अंश हैं जैसे भी हैं और हम राधा राधा बोलेंगे हमें श्री जी नहीं मिल जाएंगे हम राम कृष्ण हरि बोलेंगे हमें प्रभु नहीं मिल जाएंगे अब एक बात समझ लो पहाड़ जैसी रुई जमा हो तो पहाड़ जैसी आग की आवश्यकता नहीं एक तिली की आवश्यकता है पूरा भस्म हो जाएगा ऐसे पहाड़ जैसे पाप हो एक भगवान नाम की रगड़ चाहिए जैसे हम दो लकड़ियों के घर्षण से अग्नि पैदा कर देते हैं ऐसे जवान से जब हम राम राम राधा राधा कृष्ण कृष्ण हरि हरि बोलते हैं तो इससे ज्ञाना आग्नी पैदा होती भक्ति की प्रेमग्रंथ है विश्वास करो भगवान हमारे हैं हम जैसे भी हैं भगवान के हैं हम प्रयास करेंगे कि हम नाम ना भूले तो भगवत प्राप्ति हो जाएगी आपने उतने पाप ही नहीं किए जिन जिन को भगवत कृपा हुई अगर उनके पापों का रजिस्टर देखा जाए तो पूरा का पूरा केवल पाप से ही भरा था लेकिन धोखे से निकल गया नारायण उल्टा बोलने लगे मरा मरा ब्रह्म ऋषि
बन भगवान को प्राप्त हो गए तो हिम्मत बनती है कि शेर भर वो थे तो पाव भर हम भी है जब शेर भर को स्वीकार कर लिया तो हम पांव भर हमको भी स्वीकार कर लेंगे समझ में आ रहा ना निराश तो होने की जरूरत हमारे प्रभु का बहुत करुणामय स्वभाव सच्ची कहते हैं किसी पक्षपात की बात नहीं जिस दिन जिस प्यार के लिए हम ललक रहे हैं यहां संसार में और वह प्यार वहां ठिकाने पर पहुंचा उस दिन बस एक ही बात रह जाती है रोने किसी और कुछ नहीं लगता प्रेमी क्या कर सकता है केवल रोता ही है और
जिनने रोना पसंद कर लिया तो हरि उसको मिल जाते हैं बिन रोए किन पाइया प्रेम प्यारा में बहुत कृपाल भगवान है वैसे हम भगवान की प्राप्ति के अधिकारी नहीं पर उनकी कृपा से हम सबके लिए कहते हैं कि हम ऐसे भगवान की प्राप्ति के अधिकारी हैं जैसे पिता ने बड़ी मेहनत से रुपए की संपत्ति कमाई बड़ा विद्वान पढ़ा लिखा सब समाज प्रतिष्ठित पर हम उसके मूर्ख पुत्र हैं गवार पुत्र है तो सरकारी हिसाब से प्रॉपर्टी हमारे नाम आएगी पड़ोसी बहुत विद्वान है उसको नहीं चली जाएगी ऐसे ही
अगर हृदय से हमने स्वीकार कर लिया कि मैं नीच हूं पर अपने प्रभु का हूं तो निश्चित भगवत प्राप्ति हो जाएगी हमारी बात मान लो निश्चित भगवत प्राप्ति हो जाएगी और जिनको यह घमंड है मैं तपस्वी हूं मैं बड़ा जितेंद्रीय हूं बहुत अभी दूर नगरी अब जन्म जन्म यत्न करना पड़ेगा वह अहंकार नष्ट होगा तब भगवत प्राप्ति होगी व अपने लोग अहंकार करने लायक ही नहीं रहे जितेंद्र कैसे जितेंद्र जब जो मन चाहता व करवा लेता है हम तो पापी है हम तो अधम है हम तो फिसड्डी है तो हमारे अंदर
पहले ही बात आ गई कि हम किसी काम के नहीं तो वो बात आ गई जिससे भगवत प्राप्ति होती है हे दीन बंधु हे प पावन जैसे बन रहा हो आप भजन करवा रहे हो मैं भजन कर सकूं इतनी मेरी सामर्थ्य नहीं नाथ मैं आपका हूं इसी से बात बन जाएगी समझ पा रहे आप
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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