॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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अगर कोई गंदा आचरण छूट नहीं रहा हो तो यह सुन लेना बहुत बल मिलेगा !

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

आपको अपनी इज्जत बचाना है तो हमें सुधार दो नहीं हम आपके हैं पक्का बुरे हैं यह भी पक्का पर आपको नहीं छोड़ सकते हमारा स्वभाव है ना छोड़ने का आपके गले पड़ गए अब जहां जाएंगे घसीटेंगे आपको भी हमारी बाजी जीत गई हम पतित है लेकिन पतित पावन वह भी है हमारा उनका संबंध है मैं अधम हूं उनका नाम अधम उदाहरण है और जब कहीं गिरो तो वहां गिरे मत पड़े रहो खड़े हो रे कुछ नहीं बिगड़ा इस बार फिसल गए वैसी दौड़ लगाएंगे निकल जाए फिर गिर गए फिर कुछ नहीं हजार बार गिरेंगे तो भी कदम प्रभु की तरफ ही बढ़ेंगे देख लो प्रभु हमारी दुर्दशा देख लो अगर राजी हो तो राजी रहो महाराज अगर नहीं राजी हो तो ठीक कर दो प्रभु पक्का हम नसे पक्की बात कहते हैं वो प्रार्थना जरूर सुनते हैं और एक दिन हमको निहाल कर देते हैं हमें ज्यादा परेशान नहीं होना भगवत आश्रय हर परिस्थिति में ऐसे रहो अगर हम कहीं ममता में आसक्ति में विकार में फंसे भी है ना तो घबराने की जरूरत नहीं है नाम भक्ता प्रणति नाश तो होना नहीं जो भजन कर रहे अविनाशी है अब हमें प्रभु की

याद में डूब हे प्रभु देखो मैं कामी हूं अगर आप मुझे निष्काम बना दे तो बना दे नहीं ऐसे ही बजेंगे हम जब काम को नहीं छोड़ सकते तो तुम्हें नहीं छोड़ सकते ये हमारी बात को पकड़ना हम बुरा तो छोड़ नहीं पाए हमारा स्वभाव है तो अब हम गुरु पा से राधा नाम मिल गया आपके भजन मिल गया अब हम यह नहीं कहते हम अच्छे बन के भजन करेंगे यह नहीं कहते क्योंकि हमारे सामर्थ्य नहीं जब हम बुराई नहीं छोड़ सकते महाराज तो आपो को नहीं छोड़ सकते हम हमारी बात पकड़ लो आप जीत जाओगे हां जैसे लिखा जाए किसी अस्पताल में कि कृपया यहां बुखार जुखाम कैंसर यह सब कुछ नहीं होना चाहिए आओ फिर आपका स्वागत है तो क्या क्या कहा जाएगा कि पागल है क्या अस्पताल वाला नहीं कहा जाएगा भैया या जितने आते सब बीमार आते हैं नहीं आते तो हम लोग कामी क्रोधी लोभी मोही नाना प्रकार के विकारों से ग्रस्त है तब हम सदगुरु वैद्य के पास गए और उन्होंने हमको नाम रूपी औषधि दी अब हम प्रयास करेंगे कि हमसे गलती ना हो लेकिन वादा नहीं करते कि हम सही बने रहेंगे आप देख लो आपको

जैसे चलाना चला दो मलो हमारी सामर्थ्य नहीं कि हम गलत से रुक सके तो हम लेकर आपको भी जाएंगे आपका नाम साथ रखेंगे आपके ही कहा आएंगे अब आपको सुधारना है अब आप सही मतलब विनोद भाषा में आपको अपनी इज्जत बचाना है तो हमें सुधार दे नहीं हम आपके हैं पक्का बुरे हैं यह भी पक्का पर आपको नहीं छोड़ सकते हमारा स्वभाव है ना छोड़ने का हम आज तक बुरी बातें नहीं छोड़ पाए हैं तो अच्छी बात कैसे छोड़ देंगे तो हे नाथ हम बुरे हैं पर आपके हैं और आपको चाहे जहां हो हम पकड़े रहेंगे और आप चाहो अब कि मेरा दास कहलाता है ऐसा गलत नहीं होना चाहिए तो हमें सुधार देना मैं आपका हूं ये शुद्ध शरणागति यहीं से प्रारंभ होती है जब हम वो नहीं छोड़ पा रहे तो हम यह कैसे छोड़ सकते हैं अब आपके गले पड़ गए अब जहां जाएंगे घसीटेंगे आपको भी बड़ी मस्ती है पहली बात तो हमारा शब्द याद कर लो नामे भक्ता प्रणति आप दो चार बार नाम जप किए हृदय से बोले भगवान में आपका तो फाइनल में समझ लो नाम भक्ता प्रस्थिति अब यदि बीच में हमारे द्वारा गलती होना एक अलग

बात है और अपराध करना एक अलग बात है उसमें ध्यान रखना जानबूझ के नाम के बल पर और फिर अ तो फिर पिटाई होगी वो संभाल लेंगे उ संभालने का तरीका उनका अलग है गलती हो जाने में अलग तरीका संभालने का कोई प्रश्चित की जरूरत नहीं अपने आप ठीक हो जाएगा और अपराध करना जानबूझ के फिर इसके लिए उनका कड़वा विधान होगा जिसको हमें लगता है इतनी कड़वी दवा है फ हो सकता है कि भक्ति में भी संशय हो जाए कि भगवान ऐसा हमारी रक्षा नहीं की क्योंकि आपने भगवान की आज्ञा का उल्लंघन किया त्रुटि मतलब पूर्व संस्कार वस ऐसे गलती हमसे हो गई है तो भक्त का हृदय चलता है और सुधार हो जाता है य हम आपको आगे बढ़ने के लिए कह रहे बिल्कुल हमारी बात पर 100% विश्वास रखना हम जो नहीं छोड़ पा रहे जहां हम गलत हैं पहली बात तो हम स्वीकार करते हैं कि हम गलत हैं पर महाराज मेरे में सामर्थ्य नहीं रह गई कि मैं इसको छोड़ सकूं इसलिए आपको भी नहीं छोड़ पाऊंगा अब आपको लगता हैय नहीं होना चाहिए तो आप सर्व सामर्थ्य साली हो मेरे हृदय में वो सामर्थ्य दीजिए कि मैं आपके

अनुकूल बन जाऊं इसे शरणागति कहते हैं और सही माने में वही साधु बनाते हैं अंदर से देखो भगवान कह रहे अपि चत सुधरा चारो भजते माम अनन्य भाग साधुर सम मंतव्य सम्यक विवशता हिसा जिसने सम्यक भाव से स्वीकार कर लिया सम्यक बुद्धि से कि अब मेरा कल्याण और कहीं तो होने वाला है नहीं और मैं कुछ कर सकता नहीं क्योंकि मैं दुराचारी रहा हूं अब एक मात्र भगवान की शरण में हूं भगवान कहते हैं मैं उसे साधु बनाऊंगा करो सद्य ते साधु समाना साधु रे समं तव्य आप साधु मानो मैं उसे बनाऊं और आप जिसे साधु बनाना चाहे फिर वह साधु कैसे रह सकता है तोम अंतिम स्वास तक हारेंगे नहीं राधा राधा कहेंगे कृष्ण कृष्ण कहेंगे और यह विचार करते रहेंगे कि प्रभु आप अपने लायक बना लो मुझे आप अपने लायक मैं मानता हूं गलत हूं पर आप अपने लायक बना लो मेरी सामर्थ्य नहीं नहीं देखो आप क्या सामर्थ है हर बार चाहते हैं हम सब कि हमसे कोई गलती ना हो हम अच्छे कर्म वाले बन और जहां संयोग होता है विषयों का वह हम सब भूल जाते हैं और हमसे गलती हो जाती है देखो अंदर की

बात देखो अब हम क्या करें अगर हम यह बात नहीं स्वीकार करते तो माया हमें हरा कर के अपने में लगा ही देगी अब हम यह बात गलत तो हम है पर हम प्रभु को नहीं छोड़ सकते ये हमारी अंदर की बात है इसको समझ लेना गलत है अपराध गलती जो मानो आप पर हम आपको अब नहीं छोड़ सकते और मंस क्या कहेगा कि देखो तुम बार-बार गलत कर रहे हो ना छोड़ो भक्ति लायक नहीं हो तुम तुम आगे नहीं चल पाओगे तुम्हें भगवान की प्राप्ति नहीं होगी हम तुम्हें कह रहे भगवान की प्राप्ति होगी उसकी बात मत मानना बिल्कुल मत मानना नहीं हरा देगा यह हम बिल्कुल खुल के इस समय हृदय की बात कह रहे हमारे प्रभु का स्वभाव और प्रभाव जान लो एक बार जिसने हृदय से कह दिया हे नाथ मैं आपका उसका उद्धार करके व छोड़ते हैं और प्रभु एक बार स्वीकार करने के बाद यह नहीं देखते कि यह कैसा है बस ये ध्यान रख हमारी बाजी जीत गई हम पतित हैं लेकिन पतित पावन वो भी है हमारा उनका संबंध है मैं अधम हूं उनका नाम अधम उदाहरण है बस मतलब कैसे तुम्हें बताया शब्द हमारे अंदर नहीं आ रहे बस इतना

समझ लो और बिल्कुल विनोद की भाषा में हमने दिन सत्संग में कहा था कि हम तो जाएंगे ही जाएंगे लेकिन तुमको घसीटेंगे नहीं सत्संग में कहा था कि आप हमारे प्रीतम हो आप हमारे प्राण प्यारे हो पर हमारी इंद्रिया हमारा मन ये हमारा साथ नहीं दे रहे आपकी तरफ तो अब जहां भी जाएंगे हम जोर से कहेंगे कि आपके हैं अब आप देख लो इस परे हम नहीं भूलेंगे राधा राधा कहेंगे आपके हैं अब आप देख लो अपने लायक बना लो हमें लगता है बहुत बढ़िया ही रहेगा क्योंकि हम लोग इतने समर्थ नहीं है

कि जहां चाहे वहां मन को रोक दे एकाग्र कर ले जितेंद्रिय संयम आसन प्राणायाम समाधि यह सब देख लो ना एक गुलाब जामुन में मन फेल हो जाएगा 00 रप में फेल हो जाएगा और भक्त किसे कहते हैं त्रिभुवन की राज्य लक्ष्मी मिलने पर भी आधे पल के लिए जो भगवान को ना भूले तो हम लोगों की बहुत गिरी हुई स्थिति है तो जहां गिरे हैं ना व से पुकारते हैं हे हरि हे किशोरी जू हे राधा किशो बच्चे के लिए नारायण पुकारा तो परम पद मिल गया हम तो जानबूझ के पुकार रहे हैं राधा राधा राधा हमारा घाटा होगा क्या पूरा रजिस्टर हमारा गंदा है लेकिन हमने कुछ दिन से सुना है सत्संग और राधा राधा जपने लगे अब वो भी तो रजिस्टर में जाएगा अब उसकी कीमत बताओ एक राधा नाम की कृष्ण नाम की कीमत माया जनी त्रिभुवन थोड़ी हो सकता है तो रजिस्टर का दो चार 10 20 जो नाम जप कर रहे हो वह हिसाब में बहुत भारी पड़ेगा और फिर यदि आप 10 पाच माला जप रहे हो तो आपका पतन कैसे हो सकता है आपका नाश कैसे हो सकता है पर इसका मतलब यह नहीं कि य बल्ले के हम पापा चरण करें भूल भूल

हमारा पूर्व संस्कार वस हम नहीं रह पाते हमसे जो गलती हो जाती है तो राहत ना प्रभु चित चूक किए की करत सुरत स बार भगवान से यही प्रार्थना करो और रहो और नाम जप करो परम मंगल हो जाएगा चिंता ना करो हम सब एक लाइन में खड़े हैं व ऐसे ही हैं वो पकड़े हैं ऐसे सबको तो जैसे बच्चे का ऐसे हाथ माक पकड़े हो ना वो टफी देखता है खिलौना देखता है तो उसके उधर वो खींचती रहती है धप काती रहती है अब वो चुपचाप भले रोए पर उसको चलना माके अनुकूल पड़ेगा ऐसे ही हम सब है संसार की तरफ देख के मन ललचाता है पर हमारे मां रूपी प्रभु इधर चल इधर चल वही चला रहे हैं एक एक कदम वह चला रहे तो हम चल पा रहे हैं और अगर वह छोड़ दे तो ऐसी चका चौन माया की है पता नहीं किस खिलौने से खेलने लगे माया के इतने खिलौने इसलिए हमें सबको चाहिए भगवान का हृदय से आश्रय भरोसा दृढ़ और जितना बने नाम जप और जब कहीं गिरो जैसे तो वहां गिरे मत पड़े रहो तुरंत खड़े हो रे कुछ नहीं बिगड़ा इस बार फिसल गए वैसी लगाएंगे निकल जाए फिर गिर गए फिर कुछ नहीं हजार बार गिरेंगे

तो भी कदम प्रभु की तरफ ही बढ़ेंगे और मन क्या कहेगा अब तो तुम चलने लायक ही नहीं हमारे में लगो कभी इसकी बात य बत मानना नहीं निराश कर देगा हताश कर देगा हम तुम्हें फाइनल में बता रहे हैं जब कॉपी जांची जाती है ना तो ज्यादा वहां उत्तर नहीं देखे जाते नंबर दिया जाता है दो चार प्रश्नों का जहां देखा गया ना कि बहुत सही उत्तर तो यहां सही पूछो तो अंदर की कॉपी जाती ही नहीं जाती केवल नंबर दिए जाते हैं किस बात से भगवान की शरणागति से जो नर होए चराचर द्रोही आवे सय सरण तक मोही तो तज छल कपट मोह मद माना करो शद ते साधु भगवान पक्का हम तुम्हें हाथ उठाकर कहते हैं कि भगवान की कृपा से ही भगवान की प्राप्ति है भगवान की कृपा से ही इस भव समुद्र से उद्धार है हम उनका आश्रय ले ले और जितना हमसे बने वह हम भगवान का भजन साधन कर रहे और जो नहीं बन रहा वह उनको दिखाते जा रहे हैं कि देख लो आपके होते हुए हमारी दुर्दशा देख लो इसीलिए घर में ठाकुर विराजमान किए जाते हैं कि हम मंदिर में तो रोज ना जा पाए तो अपने घर के ठाकुर से बात कर

सकते क्योंकि अपने घर के हैं दरवाजा बंद किया उनसे रो सकते हैं उनसे प्राथ देख लो प्रभु हमारी दुर्दशा देख लो अगर राजी हो तो राजी रहो महाराज अगर नहीं राजी हो तो ठीक कर दो प्रभु पक्का हम उसे पक्की बात कहते हैं वो प्रार्थना जरूर सुनते हैं और एक दिन हमको निहाल कर देते हैं और कुछ ना हो तो फाइनल में तुम्हारी कॉपी में बढ़िया नंबर आएंगे क्योंकि तुम भगवान के शरणागत हो तुम नाम जापक हो तुम्हारा पतन नहीं हो सकता अगर जन्म भी होगा तो श्रीवान कुलवा दोनों के यहां जन्म होगा और ऐसा भक्ति का माहौल मिलेगा कि इस जन्म में जो त्रुटि हुई आगे जन्म में त्रुटि नहीं होगी और आप भगवत प्राप्त हो जाए घाटा तो अब है ही नहीं हमारे जीवन में आप सभी प्रणाम कर

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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