महाराष्ट्र से आये वारकरी संप्रदाय के वैष्णवों से महाराज जी की क्या वार्ता हुई ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
ह विठ्ठल श्री ज्ञानदेव तुकाराम पंढरीनाथ भगवान की जय जनेश्वर महाराज की जय बैठो बैठो बैठो एक मिनट बैठो बहुत सुख लाओ सबको सफेद व धारण कर सब खूब नाम निरंतर नाम कभी कीर्तन नाम कभी सुमिरन नाम कभी ध्यान का नाम नाम बल से ही श्री तुकाराम जी महाराज सदैव परमधाम गए नाम का प्रताप देखो इस देह से इस लोक को त्याग करके भगवत धाम देह सहित जाना यह बहुत कुछ ही महापुरुष हुए ऐसे जो सदे भगवत धाम गए नहीं तो सबको देह यहां त्यागना पड़ नाम का मोह जहां चरण रख देते तुकाराम जी
महाराज वहां भूमि विट्ठल विट्ठल बोलते थे नहीं जराई के कंडे से निकलता था विट्ठल विट्ठल विट्ठल नाम ही सब कुछ है महाराष्ट्र तो नाम जापक सूर वीरों की भूमि कह सकते हो आप जैसे युद्ध में सूर्यवीर होते हैं ना ऐसे नाम जापक शूरवीर हर परिस्थिति में निरंतर नाम जब किसी के हड्डी हड्डी से निकल रहा है विट्ठल विट्ठल राम कृष्ण हरि किसी के स्पर्श कर दे तो निकल रहा जड़ पदार्थों से जड़ वस्तुओं से भगवन नाम स्मित होला आप देखो नाम का प्रभाव यहां व्याप नहीं चल रहा और वह महापुरुष जड़ वस्तुओं को छू दिए तो उससे नाम चल रहा है नाम धन्य है उनका जीवन जो नाम में अपने जीवन को समर्पित कर दिए उठते बैठते चलते फिरते जिव्या से हृदय से नाम चल रहा है जीवन धन्य हो गया आपसे महाराज जी श्री विठ्ठल भगवान का माला लाया बहुत बहुत बहुत बहुत कृपा ब हा बहुत कृपा बहुत कृपा पहला पुंडलिक विठठल श्री जदेव राधे राधे सब भक्तो
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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