॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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सब कुछ पहले से तय है तो क्या हम जो पाप और पुण्य करेंगे वो भी तय है ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

पियूष उपाध्याय जी उज्जैन से राधे राधे राधे राधे महाराज जी राधा वल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी एक चौपाई है प्रारब्ध पहले रचा पीछे रचा शरीर तुलसी चिंता क्यों करे भज ले श्री रघुवीर महाराज जी इस चौपाई के अनुसार सब कुछ पहले से ही निश्चित है तो महाराज जी केवल प्रारब्ध सब कुछ क्या निश्चित है हमारी भगवत प्राप्ति निश्चित है क्या हमारे पाप कर्म निश्चित है क्या प्रारब्ध दो कर्मों से बनता है पूर्व संचित कर्म से निकालकर शुभ और जो हमको सुख और दुख केवल दे सकते हैं बस इसके बाद हमारी बुद्धि रची गई है अब हम बुद्धि से सुमति के मार्ग में चलते हैं या कुमति के मार्ग में चलते हैं यह हमारा निर्णय होगा य नई खेती होगी हमारी मनुष्य है हम कोई गधा पशु नहीं है कि केवल प्रारब्ध भोगने आए हम नवीन कर्म करके प्रारब्ध को विध्वंस करके भगवत प्राप्ति करेंगे समझ पा रहे हो प्रारब्ध कोई देवता नहीं है भगवान के दा अविनाशी अंश है य शरीर पर प्रारब्ध आता है हमारे पर नहीं आता बताओ ना तो क्या

परेशानी है गुरुजी बस य कि प्रारब्ध के कारण आज का भविष्य निश्चित होगा या फिर जो लिखा हुआ है प्रारब्ध के कारण भविष्य निश्चित नहीं होता कमान से अब भविष्य बनाएंगे कमा माने नया कर्म हा प्रार अब जैसे हम भजन मार्ग में चल रहे अब हमारे प्रारब्ध ने लात मारी गिराया 3 वर्ष की अवस्था से किडनी फेर लेकिन हमारा पुरुषार्थ भगवान की कृपा के 18 वर्ष में 18 मिनट भी अपने को रोगी नहीं माना है और रोगी शरीर है और कष्ट भोग रहा है सब हो रहे लेकिन दिनचर्या भी हो रही मान लो कल दिनचर्या ना हो तो हमारा चिंतन थोड़ी रुक लेगा प्रारब्ध प्रारब्ध केवल सुख और दुख देगा शरीर को कर्म से इसका कोई संबंध कर्म से क्या संबंध है हम प्रारब्ध लात मारेगा आके जैसे आपने बहुत बढ़िया पढ़ाई पढ़ी डिग्री आपके पास है लेकिन प्रारब्ध में आपको दुख भोगना तो कई नौकरी आपको नहीं मिलेगी समझ रहे लौकिक लेकिन आप नाम जपना शुरू कर दें तो लौकिक और पारलौकिक दोनों सुखों की भीड़ लग जाएगी यह है प्रारब्ध को विध्वंस करने का एक बाण ताप न सावन एक बाण भोग नासन एक बाण

लोक परलोक में समस्त सुखों की प्राप्ति एक बार जा सु नाम भव भे सज हरण घोर त्रय शूल भगवान का नाम तीनों सलो का नाश करने वाला और इस भग का नाश करने वाला प्रारब्ध को भोगने की सामर्थ्य देने वाला संचित कर्म को विध्वंस करने वाला और क्र माण को महान बना देने वाला मनुष्य जन्म है प्रारब्ध के अधीन नहीं प्रारब्ध केवल आप व्यापार कर रहे हैं आपका बहुत बुरा प्रारब्ध है तो घाटा लगेगा आपका बस इतना कर सकता है लेकिन आप प्रारब्ध को विध्वंस करने वाला सूत्र अगर जान गए राम कृष्ण हरि राधा जो भी नाम अब आपका मंगल हो जाएगा कोई हां नाम ही है दूसरा कोई उपाय नहीं आप समझ कलिकाल मला यतन मन कर देख विचार श्री रघुनाथ नाम बिन ना नान आधार भगवान का भजन यह सब विध्वंस कर देता है सब विध्वंस कर देता पक्का मानो प्रारब्ध कुछ नहीं इससे बुरा प्रारब्ध क्या हो सकता है जो हमारा है क्या है प्रारब्ध हो सकता है कितनी परेशानिया आओ तुम हमारा क्या कर लोगे अविनाशी के बच्चा है अविनाशी के बच्चा है तू विनाश शरीर का कर सकता है मेरा रहे और राधा राधा

राधा अभ्यास किया राधा राधा राधा क्या कर लेगा जब सही नाम जपत आई सब सोई देव सुबुद्धि कृपा करि मोई कोई सुगुन माला नित्य सु कंठ जो पहिर तास नाम जपते ही सब ज्ञान विज्ञान जागृत हो जाएगा जो नाम जप नहीं करता व ज्ञान विज्ञान होते हुए भी वैसी माया में फगा काल प्रवाह को नहीं तोड़ सकता जड़ चेतन की ग्रंथि का भेदन करने वाला ज्ञान नाम से होता है राम नहीं कह पाते थे मरा मरा कहे तो ब्रह्म ऋषि हो गए समझ रहे नाम नहीं तो हम कुछ नहीं मानते नाम अंक है और हर साधन शून्य

है गोस्वामी जी ने कहा तुलसीदास जी ने शून्य शून्य शून्य कुछ नहीं बराबर शून्य और एक शून्य 10 एक शून्य 100 एक अंक लग गया ना अब शून्य 10 गुना फायदा देता चला जाएगा हजार द हजार लाख ऐसे बढ़ता चला जाएगा तो यदि नाम जप करते हुए हम किसानी कर रहे हैं व्यापार कर रहे हैं सब कर बड़ा मंगलमय जीवन नाम के बिना सब जीवन अधूरी गोस्वामी जी का चैलेंज है विनिश्चय बदाम नान्य थाव चांस में हरिम भजन ति नरा भवसागर बार मथे ग्रत होए सताते ब तेल और बिन हरी भजन भतर या सिद्धांत अ हमारी कुंडली में नहीं लिखा है इसको भगवान की प्राप्ति होगी य हमें नया निर्माण करना होगा भाग्य हम मनुष्य बने हैं नए भाग्य का निर्माण करने के लिए प्रारब्ध के अधीन नहीं ग्रह नक्षत्रों के अधीन नहीं यह तभी होगा जब भगवान के अधीनता स्वीकार करोगे भगवान के अधीनता नहीं तो तंबाकू अधीन कर लेगी एक तंबाकू अधीन कर लेगी उसके बिना नहीं जी सक चाय अधीन कर लेगी और तो माया की पूरी बात जाने हम प्रभु के बिना नहीं रह सकते ऐसा कौन बोलेगा कोई बरले बोलेगा ना हम राम जी के

बिना नहीं रह सकते हम श्री जी के बिना नहीं रह सकते य बात समझ प्रारब्ध कोई हवा नहीं है से सब कुछ क सब सब हमने कहा शब्दों पर ध्यान दीजिए नाम जब प्रारब्ध भोगने की सामर्थ्य देगा नाम जब संचित कर्मों को भस्म करेगा नाम जब क्र माण को महान बना देगा भूत भविष्य वर्तमान तीनों तुम्हारे पावन हो जाएंगे नाम जप करो सब मंगल हो जाएगा सब मंगल हो जाएगा नाम जप नहीं तो हमारी आस्था नहीं है यह ना समझो कि हम मतलब और मार्गों को जानते नहीं चल के आए हैं और मार्ग काशी से आए हैं तो सन्यासी थे तो योग और सन्यास दोनों से मिला हुआ होता है तो कर्मकांड को भी जानते क्योंकि ब्राह्मण के घर जन्म हुआ था और काशी में रहे तो सांख्य योग ज्ञान योग वेदांत को भी जानते हैं और सन्यास में योग प्रधान होता है इसलिए योग मार्ग को भी जानते हैं और भक्ति मार्ग की तो चरम सीमा वृंदावन है ही है इसलिए सबका सार निकाल के राधा ये दो अक्षर तभी हम जोर-जोर से दाड़े रहते राधा राधा राधा जप के देखो जप के देखो अरे भाई खा के देखो कोई पैसा थोड़ी लग रहा है फ्री

है राधा नाम कोई पैसा ो राधा राधा राधा अब आपको राधा नाम पे सोदान तो हमारे प्रिया प्रीतम के बहुत से नाम राम नाम है सिया नाम है कृष्ण नाम हरि नाम उन्हीं के सब तत्व तो एकही है ना 100 200 थोड़ी है उन्हीं के नाम अनंत है हरि अनंत हरि कथा अनंता नाम जप करके देखो परम मंगल हो जाएगा प्रारब्ध मिटिया मेट कर देगा नाम जप कर जपोगे तो प्रारब्ध का मिटिया मेट हो जाएगा 18 19 साल हो गए भोगते हुए शरीर को जब जिस दिन जाना है तो जाना ही है पक्का होगा वो तो है ही है कब कब जाना है सुबह की शाम हो तो भगवान जाने पर जाने की की बात से हम ऐसे तैयार है जैसे किसी को अपने प्रियजन के पास जाना हो ना परदेश से अपने घर जाना हो तो कैसा उत्साह होता है ऐसा हमें उत्साह है मरने का उत्साह है क्योंकि अपने प्रिया प्रीतम से मिलेंगे अनंत जन्मों से भटकते रहे इस जन्म में अवसर दिया प्रभु ने अपने स्वामी से मिलेंगे हम उनके अंश है वो हमारे अंश है वही हमारे सब कुछ है और हम भूल गए थे जब आज गुरु जी ने बताया पता चला तब उत्साह हुआ कि इस शरीर को

छोड़कर अपने प्रीतम से मिलेंगे आए मिले परिवार आपने हरि हस कंठ लगायो बड़ो भाग वृंदावन पायो तो प्रिया प्रीतम से मिलना क्या करेगा प्रारब्ध क्या कर लेगा कुछ प्रारब्ध नहीं प्रारब्ध हमारे ऊपर नहीं शरीर के ऊपर है और शरीर हम नहीं है हम भगवान के अंश अविनाशी चेतन अमल सहज अविनाशी जो स्वरूप हमारा है वो आनंद ही आनंद दुख किस बात का है दुख का तो लेश नहीं कहां दुख है किस बात का दुख है प्रारब्ध दुख देता है या सुख देता है और वो दो सुख दुख सुख दोनों हमारे लिए दुखाई है वह दुख सुख दोनों हमारे लिए दुख जो सुख है वो इनम है प्रभु में है जब नाम जप करते हैं उनकी रूप माधुरी लीला माधुरी गुण माधुरी और ठसक है हमारे माई श्यामा द को राज मेरी महारानी श्री राधा क्या भय क्या प्रारब्ध अब बताओ इस समय क्या आपको दुख है केवल सुन रहे हो चर्चा व अगर चिंतन चल रहा है उनका तो फिर कैसी छाती होगी चौड़ी हां पक्का समझ हर परिस्थिति में एक अजीब आनंद एक अलौकिक सुख भगवान देते हैं हम कई बार बताया कि हम बचपन से बाबा जी हैं अगर हमको भगवान सुख

ना देते तो हम माइक से कह देते पर पक्का कहते हैं हम हर समय ऐसे आनंदित रहते हैं कई बार बताया कि कैसे बताऊ तुम्हें नंदित रहते हैं हम भगवान को कि मेरे प्रभु है मेरे स्वामी है मेरे इष्ट है मेरे आराध्य देव मेरे प्रीतम है और जाना है तुमको भी हमको भी सबको भी इसका नाम मृत्युलोक है और कुछ साथ नहीं जाना तो तुम्हारा घाटा हो गया हमारा मुनाफा हो गया अगर भजन नहीं किया तो तुम्हारा घाटा कुछ नहीं लेकर जाओगे और अगर भजन कर लिया तो साथ लेकर जाओगे तो आनंद रहेगा आपको जैसे अमेरिका जाना हो पास आपके पास हो और वहां रिश्ता आपका समझ में कि हमारे संबंधी र वास की व्यवस्था हो और जेब में खूब रुपया हो आपको कोई परेशानी होगी क्या और एकदम अमेरिका जाना पड़े ना पास है ना रुपया है ना परिचय तो घबराहट पैदा हो जाएगी ऐसे ही है एकदम मृत्यु जब आएगी तो जो परिचय वो तो सब खत्म कर देगी और जहां जाना है वहा परिचय नहीं और जो खर्चा करना है वह राम नाम कृष्ण नाम हरि नाम रूपी धन नहीं अब उसकी हालत देखो तो इसलिए प्रारब्ध कुछ नहीं प्रारब्ध कुछ

कुछ नहीं वो केवल शरीर के ऊपर अपना प्रहार करता है नाम जप करो सब सही हो जाएगा नाम जप से सब ठीक हो अनंत जन्मों के संस्कार नष्ट करके भगवान का प्रेम प्रकट कर देता है नाम सुमिर पवन सुत पावन नाम अपने बस करि राखे राम भगवान को बस में कर लिया अजीत को जीत लिया नाम के बल से सुमिर पवन सुत पावन नाम अपने बस कर नाम का अमुक प्रभाव है बस हमारी बात मान लो जैसे बने तुम्हें जो नाम प्रिय लगे वो नाम जप करने लगो तुम्हारा मंगल हो जाएगा पहले जलन होगी फिर शीतलता होगी यत तज

विषम परिणाम अमृतो उपम जिसकी शुरुआत विष जैसी हो उसका परिणाम अमृत होगा तो जब भजन शुरू करते हैं तो बहुत से विषय विकार नाना प्रकार की जलन अगर सह गए और भजन बढ़ाते गए तो भगवान की प्राप्ति निश्चित है ये हमारे प्रारब्ध में दम नहीं है यह हमारे भजन में दम है ये इस समय के वर्तमान के भजन में दम है जो प्रारब्ध को भी विध्वंस कर सकता है

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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