सत्संग सुन कर मांस, मदिरा, व्यभिचार छोड़ दिया पर कभी-कभी मन उसी में जाता है
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
महाराज जी इसमें एक वो था बहुत असंख्य कोटि महाराज जी आपकी वार्ता सुनके आपके वचनों को सुनके उन्होंने गलत आचरण छोड़ दिए मांस मदिरा व्यभिचार और असंख्य कोटि अपराध जो अधर्म आचरण करते थे महाराज जी निरंतर संग ना रहने के कारण हां वही हम कहा निर जैसे आप आप सुब किसी को कह रहे थे कि माया पटक देगी और अभी गिरे मतलब आने के बाद फिर गिरे फिर उठना बड़ा कठिन हो जाएगा तो महाराज जी उस समय मतलब निरंतर क्या नाम जप और सत्संग का संग रहेगा तब लंबे समय तक इसको खींच जाएंगे और एक बार निकल गए तो फिर तो निकल ही जाएंगे नहीं बहुत कठिन है मान जैसे 70 वर्ष की आयु है और 20 वर्ष से शुरू किया और हम 40 वर्ष चलने भगवत प्राप्ति नहीं हुई तो गुंजा है माया तुम्हें परास्त कर सकती है तो हर समय नाम जप सत्संग और लक्ष्य बराबर लक्ष्य बना रहना बहुत समय तक यही तभी कहते हैं कोई लाखों में एक चलता है ने वाले हजारों में कोई एक ठीक से चलता है और ठीक से चलने वालों में कोई एक बिरला पहुंचता है बिरला पहुंचता नहीं इतने मनोरंजन टिकाए हैं कंचन कामिनी
कीर्ति की कि उसी में जीव गिर जाता है जैसे उसने कभी भावना की कि अगर हमें सुख मिलता तो जी भर के भोगते और भजन कर रहा है तो पहले भगवान नहीं मिलेंगे पहले उसके सामने वह सुख आएगा जो उसने चाहा है यह पक्का है पक्का हज पर जो इच्छा करि हो मन माही प्रभु प्रसाद कछ दुर्लभ नाही जब रावण ने लात मारा था तो कहा नहीं था विभीषण जी ने लेकिन सोचा था कि मैं जा रहा हूं राम जी के शरण में तेरा नाश करवा के इसी सिंहासन पर बैठूंगा तो भगवान ने जाते पहला काम किया था समुद्र का जल मंगा कर के लंकाधिपति कहा था आओ लंकेश तो घबरा गए कि प्रभु मैं तो आपकी शरण में आया हूं लंकेश बनने नहीं आया तो प्रभु ने कहा नहीं इस बात को स्वीकार करो तो उन्होंने कहा हा उर कछु प्रथम वासना रही पर प्रभु पद प्रीति सरित सो बही प्रभु थी मन में बात पर अब आपके चरणों को देखकर प्रेम सरिता में बह गए अब मुझे लंकेश नहीं आप अपने चरणों का नहीं बोले लंकेश भी बनो चरणों की दासत भी प्राप्त करो तो हमें लगता है कि अगर हमारी वासना कोई है अंदर फिर आगे भजन के बल से
पहले व वासना पूरी होगी नष्ट तो नहीं होगा साधक भ्रष्ट तो नहीं होगा बादलों की तरह छिन्न भिन्न तो नहीं होगा क्योंकि भगवान का जन है पर निर्वासन बिना हुए वो आगे उन्नति को प्राप्त नहीं होता इसलिए वासना कोई न कोई बनी रहती है और जहां भजन हुआ तो कंचन कामिनी कीर्ति इनका संयोग होने लगता है तो साधक मनोरंजन में लग जाता है फिर वो मार्ग रुक जाता है इसीलिए जन्म जन्म मुनि यतन करा व अंत राम कही आवत नाही तो प्रयास करते रहो कभी चूक मत करना य महाराज जी आपने कहा य स्थिति मेरे साथ है इससे कैसे बचे नाम जप खूब और नाम जप बढ़ाओ पावर बढ़ाओ राधा राधा राधा राधा राधा राधा और गलत संग ना करना राधा राधा कहते हुए भी यदि गलत संग करोगे नारद जी से प्रश्न हुआ कस तर कस्तर कस्तर मायाम कौन तर जाता है कौन तर जाता है माया से कौन तर जाता है तो बोले यो महानुभाव सेवत यो संगा त जति यो ममता स्त जति जो महापुरुषों का संग करता है और कुसंग का त्याग करता है और किसी से ममता नहीं रखता व निकल जाएगा य महानुभाव सेव महापुरुषों का संग उनके वचन
बाबा ने कहा कि ऐसे नहीं देखना नहीं देखना बाबा ने कहा ये चीज नहीं खा नहीं खाना ऐसे नहीं बोलना ऐसे नहीं देखना रोज सत्संग सुनो हर एक दिन नया आपको मिलेगा उपदेश उसी से आपका जीवन पार हो जाएगा पर पूरे जीवन अगर निष्कलंक निकल जाए तो परम पद मिल जाएगा परम पद भगवान का भगवान का सानिध्य और जो चाहोगे भजन कर रहे हो भगवान मिलने की तो बा ऐसे जो चाहोगे वो मिल जाएगा और कुछ नहीं चाह रहेगी तो भगवान मिल जाएंगे निश्चिंत होकर भजन कर इसमें घाटा तो है नहीं गिर भी पढ़ोगे तो
भी घाटा नहीं 100 बार राधा राधा कहा तो तुम्हारा बैंक लौकर में जमा हो गया अब तुमने पाप किया तो इसका तुम्हें दंड मिलेगा लेकिन तुम्हारे पास 100 नाम जमा है वह तुम्हारी उन्नति करेंगे वह कभी नष्ट होने वाले नहीं समझ रहे ना हा खूब इसी लोभ से नाम जप करो नाम बढ़ाओ मराज जी यहां तो हम सब साधक जन आपके सानिध्य में है तो आपका शासन है बाहर जिन जो शराब छूटी वही दोस्तों के बीच में रहना पर काम करेगा देखो कल एक नहीं कह रहे थे अरे बोले अब जहा शराब पी ले या कुछ कर ले सोचो तुम छा जाते हो हमारे दिमाग में डर पैदा हो जाता है हमारे हृदय में की या तो बोले जहां हम गलत सोचते हैं करने की सोही तुम छा जाते हो दिमाग में लगता है यार बाबा जान जाएंगे तो बोले इसलिए फिर अब गलत हमसे हो ही नहीं नहीं रहा है क्योंकि हर समय आप हमारे दिमाग में छा जाते हो तो यह बात बहुत पॉइंट की है कि यदि हम संत सदगुरुदेव या उपदेश को अपने दिमाग में रखें य बाबा ने कहा था ऐसा नहीं तो दिमाग में वो छाए हुए हैं तो हमसे गलत हो ही नहीं सकता और भगवान की ऐसी
कृपा है कि लाखों लोग इस बात को समझ रहे हैं कि भगवान की कृपा से वह सत मार्ग में चलने की तैयारी कर रहे हैं कोई चल रहे हैं कोई चल चुके हैं तो इसमें घाटा नहीं होगा क्योंकि भगवान ही चलाते हैं अगर वोह ना चलावे तो अपने लोगों की ताकत ही नहीं कि चल पावे
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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