कोई आपको भजन सुनाकर प्रसन्न करता है तो कोई हँसाकर, मैं आपको कैसे प्रसन्न करूँ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मनीष राणा जी बिहार से श्री हरिवंश श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी मैं देखता हूं कि कोई आपको श्री जी का भजन सुनाकर कोई चित्रका करके कोई किसी कला से आपको प्रसन्न करता है महाराज जी क्या आपको ऐसा लगता है मैं प्रसन्न हो जाता हूं कोई हमको अपनी कला से प्रसन्न कर सकता है तो वह कला उसकी हमारी प्रसन्नता तक पहुंच सकती है आप बताओ जब वो कला का नाटक कर रहा है तो हम प्रसन्नता का नाटक कर हम भी तो नाटक मंच पर बैठे हैं नहीं वह अगर कला का प्रदर्शन कर रहा तो मैं प्रसन्नता का प्रदर्शन करर हूं प्रसन्न नहीं हूं प्रसन्नता तो जान पाओ तो बहुत कठिन विषय है ब्रह्म भूता प्रसन्न आत्मा प्रसन्नता तो ब्रह्म से है प्रसन्नता तो भगवान से बाहरी नाटकों से चुटकुला से हम प्रसन्न होने वाले हैं क्या पर जब तुम हमारे सामने नाटक मंच पर प्रसन्नता दिलाने का नाटक कर रहे हो तो हम प्रसन्न है ऐसा हम भी नाटक कर रहे हैं नहीं हमको य कोई कॉमेडी की बात कहके कोई लाग धवनी सुना के हमें प्रसन्न कर सकते हमारी
प्रसन्नता को विषय प्रिया प्रीतम है यह थोड़ी है सब पर अब नाटक अभी आपको महाराज जी मुझे एक कला आती है मैं ऐसा कर सकता हूं हा अच्छा तुमने ऐसा किया तो क्योंकि तुम नाटक कर रहे हो तो हम भी नाटक कर रहे हैं अगर तुम सच्चाई से समझ चाहो तो हमारी प्रसन्नता के विषय कुछ नहीं केवल प्रभु है हमारी प्रसन्नता हसी मजाक नाटक गाना बजाना इससे होगी क्या म जी आप आपको प्रसन्न कैसे कर सकते हैं बता हम तुम्ह रा से बता रहे राधा राधा राधा इससे प्रसन्न करो अच्छे आचरण करो खूब नाम
जप करो और जो दुख सुख आवे उसे सह लो भगवान की शरण में रहो यह देखकर हम प्रसन्न हो जाएंगे महाराज जी कभी कभी ऐसा लगता है कि अगर मेरे अंदर भी कुछ होती तो शायद मैं एक बन पाता आपको वो अहंकार की पुष्ट का वजह बनता हमारी प्रसन्नता का कभी कभी लगता है भगवान ने मुझे पूरा खाली छोड़ दिया ये बहुत बढ़िया किया तभी तो भरेंगे प्रेम भरेंगे महाराज अरे भरना ना होता तो भेजते का को साधु संग काहे को कराते भगवान को भरना है इसीलिए साधु संग करा रहे हैं नहीं तो संसार के संग में भर के मलिन हृदय हो जाता अब साधु संग करा रहे इसका मतलब कुछ अच्छा करना है उनको मुझे बस लगता है कि मैं तो योग्य नहीं हूं इसी से हमारी प्रसन्नता होती है जो आर्त भाव से कह देता मैं किसी योग्य नहीं हूं यह हमारी वास्तविक प्रसन्नता का विषय होता है हमारे प्रभु को यही दरबार दन को आदर रीत सदा चले आई भ हसना खेलना है कोई प्रसन्नता नहीं प्रसन्नता हृदय का विषय होती है जब कोई आर्थ भाव से कहता हे प्रभु हे प्रियाज मैं किसी योग्य नहीं मुझे स्वीकार कर लो तब हृदय
एकदम गुदगुदा होती हां ठीक है सही मार्ग है भगवान तुम पर कृपा करें यही प्रसन्नता का रास हां श्री जी का नाम जप करो अच्छे आचरण करो निश्चित श्री अगर मिलना ना होता तो हमें क्यों बुलाती क्यों सत्संग सुनाती क्यों वृंदावन का दर्शन कराती यह सब संयोग का मतलब वो मिलना चाहती हैं वो हम पर कृपा करना चाहते हैं म जी ऐसे ऐसे जो आपके शरणागत है उन परे आप प्रकट में आप कुछ भी रिएक्शन नहीं करेंगे महाराज जी कुछ भी प्रकट में आपका वो नहीं होगा उदासीन रहेंगे वहां ताकि उसको
उस चीज का भी अभिमान हा बिल्कुल बिल्कुल अब जैसे मानो वो नाटक हसाने का कर रहा ह हस नहीं रहे नहीं वो हसाने कर रहा हम हस रहे तो इससे लाखों प्रसन्न हो गए उसका भी नाटक और मेरा भी नाटक दोनों मिलकर के कितनों को खुश कर दिया नहीं खुश कर दिया हम संसारी लोगों को महसूस होता है कि आप खुश खुश है ये होता है बकाया सच्ची मालो तो हमारे अंदर की दशा जो देखोगे तो तुम समझ इनको कोई खुश नहीं कर सकता प्रिया प्रीतम के सिवा कोई नहीं खुश कर सकता हर समय रोता रहता है हृदय हर समय हृदय कैसे तुम्हें बताए ना बात करना अच्छा लगता है ना लोगों से मिलना अच्छा लगता है फिर भी लोगों से मिलते हैं बात करते हैं हंसते हैं बोलते हैं किसी को जानने नहीं देते तुम तो जरा सा कह के रो गए अगर अभी हम शुरू हो जाए तो आंसू नहीं बंद होंगे बस हाय हाय मच जाग लगेगा बंद करो हम जा रहे हैं तो हम अपने कर्तव्य से फेल हो जाएंगे इसलिए चुप शांत बैठे जब किसी कोई अच्छा शाबाश बहुत सुंदर गया वाह और यहां का हम गाना सुनते हैं क्या हमारा जो श्रवण है श्रवण इद्र है
वह दूसरी जग लगी है गावत सुंदरी हरि सरस धमार पुलकित खग मृग बहत नवार प्रिया प्रीतम गान कर रहे खग मृग पशु पंछी मोहन परमहंसी की तरह सुन रहे अद्भुत वृंदावन अद्भुत तेजो में प्रिया वहां हमारा मन है तो जैसा भगवान अवतार लेते हैं उनको कुछ कर्म चाहिए क्या उनको कोई फल चाहिए क्या वो भी कर्म करते हैं वैसे ही लीला करते हैं भगवान तो हम लोग भगवान के दास है वैसे कोई चाहता मैं महाराज जी को प्रसन्न करू तो मैं प्रसन्न होकर दिखाऊंगा कि मैं प्रसन्न हो गया वो संसारी आदमी है और वो आया है केवल इसी बात के लिए कि मैं इनको प्रसन्न करूं तो हम अनजाने बन कर के उसके सामने ऐसा रोल करते हैं मैं बहुत प्रसन्न हुआ तुम्हारी सेवा से समझ रहे ल
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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