एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #949 · 23 जून 2025
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा श्री राधा वल्लभ लाल की जय समस्त संत हरि भक्तन की वृंदावन धाम की जय श्री सदगुरुदेव भगवान की जय अखिल गुप्ता जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मिथ्या आरोपों के बाद किस तरह से मन को शांत किया जाए अगर आप पर मिथ्या आरोप लग भगवान के नाम जप के द्वारा जो हमारे हृदय में नाम जप करता है चलता है जैसे हमें किसी ने कहा तो हमें तुरंत जांच करनी है।
अगर है तो भगवान सामने से संबोधन कर रहे हैं। मुझे सुधार करना चाहिए। और जब मुझे पता चला जांच करने पर कि जो सामने कहा जा रहा है वो मेरे में नहीं है। बस अब वो उसकी बुद्धि है। हम उसकी बुद्धि को नहीं बदल सकते। वो जो बोल रहा है वो बोलने दो। मुझे प्रसन्न रहना है। मुझे उसके बोलने से दुखी नहीं होना। ऐसे अगर हम दुखी होने लगेंगे तो हम कभी सुखी नहीं होंगे। यहां कोई किसी को सपोर्ट देने वाला नहीं। आप अच्छे मार्ग में चलना चाहो तो आपको गिराने के लिए ही लेकिन ऊपर चढ़ाने के लिए नहीं।
सपोर्ट में कोई नहीं मिलेगा। आप धर्म से चलो दूसरों का उपकार करो तो जिसका उपकार करोगे वही आपको गिराने की कोशिश करेगा। यह संसार है। यहां बहुत छल, कपट दम, नाटक यह सब बहुत चलता है। पाए जान जगत में सबजन कपटी कुटिल कलयुगी टंच आप हृदय से किसी को प्यार करो। वो आपके हृदय को ही काट देगा। आप अपनी जान पर खेलकर दूसरों को बचाओ। वही समय आने पर तुम्हारी जान लेने पर उतारू हो जाएगा। यह संसार है। इसलिए नेकी कर दरिया में डाल। अच्छा कर और भूल जा। और बुरा जब तुम्हें कोई कह रहा है तो तुम उसे स्वीकार मत करो।
यह उसकी बुद्धि है। वह तुम पर मिथ्या आरोप लगा रहा है। यह उसकी बुद्धि है। आप उसकी बुद्धि को देखकर दुखी क्यों हो रहे हैं? आप बिल्कुल फस रहिए। यह बिल्कुल अगर हमको कोई कह रहा है कि यह चोर है। तो मुझे पहले देखना चाहिए कि मेरे में चोरी के कोई बात तो नहीं है। अगर है तो भगवान सामने से हमें संबोधन कर सुधरना चाहिए। बुरा नहीं मानना चाहिए। अगर मेरे में चोरी नहीं तो फिर मैं बुरा क्यों मानू? फिर तो मुझे प्रसन्न होना चाहिए। तो इसलिए मिथ्याार रूप तो करेंगे ही। जगत है।
बड़े-बड़े संतों को नहीं छोड़ा। भगवान को नहीं छोड़ा तो आपको और आपको कैसे छोड़ देगा संसार? बड़े-बड़े संतों को नहीं छोड़ा। भगवान को नहीं छोड़ा। इसलिए अपने को प्रसन्न रखना है। अपने को रखना है। अपने को इनकी बातों में आकर के दुखी नहीं होना है। महाराज जी अगर हम किसी विभाग में हैं जहां हमें सफाई देने की आवश्यकता है वहां तो दे सकते। पूरी देनी चाहिए। और जब सफाई देने पर भी बात ना माने तो अपनी कट्टरता पर लगे रहे। जो होना होगा वही होगा। इसके अलावा नहीं होगा। हम ऐसे मिथ्या आरोपों पे या ऐसे छल कपट वालों के नीचे दबने वाले नहीं।
बहुत मतलब मजबूत रहना चाहिए। इसीलिए कह रहे हैं नाम जप करो। जब भगवान का भरोसा होगा तो छाती चौड़ी करके बात करोगे। और इंसान का भरोसा होगा कि साहब अगर हमको हटा दिए तो नौकरी चली जाएगी। अगर यह साहब थोड़ी साहब का साहब है वो। अगर वो चाहेगा तो सब मंगल ही बन जाएगा। इसकी क्या बात है? इसलिए मस्त रहो नाम जप करो आकर्ष राधे-राधे मेरी लाडली जो महाराज जी मैं एक विद्यार्थी हूं लाडली जो की कृपा से मैंने आपकी YouTube के माध्यम से सत्संग और एकांतिक वार्तालाप सुने हैं।
गुरुदेव भगवान मैं आपके लिए वो हर एक चीज करना चाहता हूं जिससे आप हमेशा खुश रहें और मेरी ये दिली इच्छा कि मैं आपसे मित्रता कर ताकि मैं सारी वो बातें करूं। क्या बातों को ध्यान रखूं जिससे आप प्रसन्न रहें। हां सबसे पहली बात है कि आप गर्लफ्रेंड आदि के चक्कर में मत पड़िएगा। ब्रह्मचर्य धारण कीजिएगा, राधा नाम जपिएगा, माता-पिता का आदर कीजिएगा। बस इसी से हम प्रसन्न हो जाएंगे और इसी से तुम्हारी जीवन की उन्नति हो जाएगी। ठीक है? अब अपनी श्री मुख से मुझे राधा नाम जप राधा राधा राधा राधे राधे पंडित गौरव शर्मा जी दाऊ जी से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मैं किसी विशेष संप्रदाय के गुरु जी से दीक्षित नहीं लिया हूं।
मतलब कहीं से लिया हूं। बट ऐसे में क्या हमको संप्रदाय से ही दीक्षा लेनी चाहिए? यहां गुरुदेव ने जो संप्रदाय का तात्पर्य होता है मार्ग। किसका प्रश्न है? जीटी रोड। अगर हमें गाड़ी दौड़ानी है तो हमें जीटी रोड की आवश्यकता होगी। संप्रदाय का मतलब मार्ग। हम आचार्य की शरण होते हैं और उनके बताए हुए मार्ग पर आंख मूंद के दौड़ते हैं तो हम भगवान के पास पहुंच जाते हैं। संप्रदाय का मतलब कोई भयावाह या कोई फंसावट या कोई ऐसा नहीं। संप्रदाय का मतलब जीटी रोड सुदृढ़ मार्ग संप्रदाय अब जैसे हमें प्रिया प्रीतम के निकुंज में जाना है प्रिया प्रीतम की सेवा करनी है तो हमको वही मार्ग लेना पड़ेगा ना तो हमको स्वामी हरिदास जी की शरण में होना पड़ेगा हरिवंश जी की शरण में होना पड़ेगा तो उनके बताए हुए मार्ग से चलेंगे अब हमको सखा भाव की उपासना करनी ठाकुर मेरा दोस्त है मेरा यार है तो हमको वल्लभाचार्य जी के मार्ग में चलना पड़ेगा भाई हमको जहां जा जैसे हमको बिहारी जी जाना है तो बिहारी जी वाले मार्ग में राधा रमण जी जाना तो यह मार्ग है भक्ति में उसे संप्रदाय कहते हैं।
संप्रदाय का मतलब होता है मार्ग। तो अगर हमें प्रभु के इन भावों में चलना है। दास्य भाव, सख्य भाव, वात्सल्य भाव, कांता भाव, गोपी भाव, सहचरी भाव तो हमें उसी मार्ग वाले महापुरुष से जुड़ना पड़ेगा। तभी तो हम वहां पहुंच जाएंगे। ऐसे हम कैसे पहुंच जाएंगे? हमें जाना बिहारी है। हम चलने लगे छठी कला की तरफ। तो मार्ग तो है लेकिन हम कभी बिहारी जू नहीं पहुंचेंगे। तो बिहारी जू पहुंचने के लिए बिहारी जू वाले ही मार्ग में जाना पड़ेगा। तो उसी मार्ग का नाम संप्रदाय है।
बोले मुझे बिहारी जी से प्यार करना है तो स्वामी हरिदास जी से प्यार करो तो बिहारी जी से प्यार हो जाएगा। राधा वल्लभ जी से हमें प्यार करना है तो श्री हरिवंत महाप्रभु से प्यार करो। राधा वल्लभ जी से प्यार हो जाएगा। क्योंकि वो जानते हैं कैसे तुम्हें प्यार करना है। वो कृपा करेंगे। वो अपने ठाकुर का प्यार देंगे। वो अपना मार्ग बताएंगे। वो मंत्र बताएंगे, उपासना बताएंगे, पाठ बताएंगे, सेवा बताएंगे। तभी तो हम पहुंच पाएंगे। समझ पा रहे हो? किसका प्रश्न था? तो संप्रदाय का मतलब मार्ग।
हम किसी भी मार्ग को अगर हम तय करना चाहते हैं तो हमें वहां का गाइड चाहिए और गाइड चाहने का मतलब है गुरु बनाना, आचार्य बनाना। जब तक आचार्य और गुरु की शरण में नहीं होंगे तब तक हम मार्ग को तय नहीं कर सकते। गौरव सिंह जी बरेली से। महाराज जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी यह कह रहे हैं कि आप मतलब अह सेवाएं करते हैं मदद भी करते हैं बट जैसे किसी एक भिक्षुक को इन्होंने भिक्षा दान दे दी बट किसी ऐसे को देखा जिसमें इनको दोष दर्शन हुआ तो फिर इन्होंने छोड़ दिया तो फिर वैसे हम प्राय प्रार्थना करते रहते हैं कि किसी बीमार आदमी को औषधि देने के लिए विचार करने की आवश्यकता नहीं।
किसी भूखे को भोजन देने के लिए विचार करने की आवश्यकता नहीं कि कैसा आदमी है। कोई एक्सीडेंट हो गया, कोई ऐसी परिस्थिति उस समय धन खर्चा करने के लिए विचार करने की आवश्यकता नहीं। लेकिन ऐसे मांगने वालों को धन देने में विचार करने की आवश्यकता है। वो तुमसे ₹1 ₹1 करके शाम के शराब पिएगा, मांस खाएगा, व्यभचार करेगा, गंदे आचरण करेगा तो आपको भी नरक जाना पड़ेगा। धन देने के लिए हमको बहुत विचारवान होना चाहिए। हमारे धन का प्रयोग कैसा होगा? इसलिए पात्र देखकर धन का दान किया जाता है।
धन ऐसे नहीं कि बैठे हुए हैं बांट रहे हैं। वह शाम के शराब पिएंगे, गंदे आचरण करेंगे तो फिर वो हमारी दुर्गति हो जाएगी। भोजन हम किसी को भी दे सकते हैं। भोजन के लिए औषधि किसी को दे सकते हैं। सहयोग परिस्थिति के अनुसार हम कर सकते हैं। सर्दी में कोई कांप रहा है हम अपनी शर्ट उतार कर उसे दे सकते हैं। हम अपना कंबल उसे दे सकते हैं। लेकिन पैसा देने का जब समय आवे तो विचार कर ले कि हम जहां पैसा दे रहे हैं इस पैसे का हमारे सदुपयोग होगा कि नहीं होगा। अगर दुरुपयोग होगा तो फिर आप भी उसके साक्षी बने और आपको भी उसे भोगना पड़ेगा।
जी इसलिए बहुत समझ के बहुत संभल करके धन धन दान करें तो बहुत संभल करके शिल्पा जी राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी कह रहे हैं कि जब भी कुछ अच्छा होता है तो मन में विचार आता है कि चलो अच्छा काम किया मेरा मेरे पाप धुल गए इन्होंने जैसे तो ये ऐसा विचार करना ठीक हां ठीक है भगवान की बड़ी कृपा उसमें भगवान को जोड़ लो भगवान की बड़ी कृपा हुई तो हमसे अच्छा कार्य करवाया हमारे अमंगल नष्ट हो रहे हैं हमारे सारे पाप नष्ट हो रहे हैं। बड़ी कृपा है भगवान की। भगवान को जोड़ लो।
अपने अहंकार को मत पुष्ट करो। भगवान की कृपा से वो कार्य हुआ। ऐसा भाव करें। महाराज जी कह रहे हैं कि जब सही काम करते हैं बट उसमें बहुत अड़चनें आती हैं। मतलब फिर लास्ट में थक जाते हैं कि इतने सारी परिस्थितियां आ नहीं ऐसे हमें तो नहीं लगता अब तक कि सही काम में कोई अड़चनें आती हैं। अगर हमने लक्ष्य बना लिया तो अड़चनें क्या करेंगी? अर्चने अर्चने होती ही नहीं। अर्चने उसकी होती हैं जो लक्ष्य नहीं बनाया। लक्ष्य बना लिया तो अड़चन क्या चीज होती है? रौंदते हुए हर अड़चन को अपने लक्ष्य पर पहुंचना है।
लक्ष्य बना लो। सही काम का लक्ष्य बना लो। फिर अड़चन क्या करेगी? अड़चन होती क्या है? हमारे मन की समाज के द्वारा दी हुई प्रतिकूलता। हम उसको रौंद करके आगे बढ़ेंगे। यही तो हमारी परीक्षा है। सत्य मार्ग पर चलने वालों के जब अड़चनें आती हैं तो उनको और जोश आता है और अपने सत्य को प्रकाशित करते हुए चलते हैं। जैसे वीर होता है जब उसको बाधा पहुंचाई जाती है तो उसमें और जोश आता है। कायर पुरुष होता है तो पीठ दिखा के भाग जाता है। तो अड़चनों से हमें हारना थोड़ी है। अड़चनों से हमें भिड़ना है।
हमें संघर्ष करना है। हमें संघर्ष करने के लिए मानव जीवन मिला है। और कोई भी ऐसा नहीं जिसको संघर्ष ना करना पड़े। संघर्ष करके हम विपत्ति दुख अड़चनों को परास्त करें और भगवान तक पहुंचे। यही हमारे मानव जीवन का लक्ष्य है। कुमार अंशुमान जी प्रयागराज से। राधेधे राधे-धे महाराज जी महाराज श्री हम गस्त और नौकरी पेशे वाले हैं। आपके आशीर्वाद से हमारे जीवन में बहुत बदलाव आया और हम भगवत मार्ग पर चलने का साहस जुटा पाए हैं। इतना तो समझ आ गया है कि महाराज श्री कि इस मार्ग पर चलना बहुत कठिन है।
लेकिन नाम का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कठिन तब लगता है कठिन तब लगता है जब हमको संसार प्रिय लगता है। प्रियता के कारण कठिन लगता है। नहीं तो भगवत मार्ग कठिन नहीं है। बहुत सरल है। सत्य है, आनंदमय है, सुखमय है। जहां दुख का लेश नहीं, ऐसा भगवत मार्ग है। तो इसमें कठिन क्या है? कठिन तो संसार का मार्ग है। छल है, कपट है, चिंता है, शोक है, भय है, दुख है, मृत्यु है। यह कठिन मार्ग है। लेकिन इसको हम सरल समझ रहे हैं। विचार करके देखिए। सुखद मार्ग कठिन कैसे हो सकता है?
दुखद मार्ग सरल कैसे हो सकता है? हम आपसे मित्रता करें। आप हमारे साथ कपट कर दें, छल कर दें, अविश्वास कर दें। लेकिन भगवान भगवान नहीं। भगवान अमंगल नहीं कर सकते। मंगल भवन है। विश्वास करो। हर क्षण है। सर्वत्र है तो यहां भी है। सब समय है तो इस समय भी है। सब में है तो मेरे में भी है। सबके हैं तो मेरे भी है। इसलिए भगवान का मार्ग कठिन लगता है पर कठिन है नहीं। संसार का मार्ग सुखद लगता है पर बहुत कठिन है। आज तक संसार किसी के हाथ में नहीं आया। बड़े-बड़े हो गए, सम्राट हो गए, राजा हो गए।
किसी के हाथ नहीं आया। सब खाली हाथ गए कि नहीं गए? और जो सतमार्ग में चला सतमार्ग उसके हाथ में आया भजन साधन तपस्या लोक में जहां भी जाएगा उसका सम्मान होगा वो सुख प्राप्त करेगा लेकिन जिसने अध्यात्म को स्वीकार नहीं किया केवल लौकिक मार्ग को स्वीकार किया मरने के बाद उसके हाथ क्या है एक बार सिकंदर विजय करके जा रहा था तो एक संत नाचने लगे सामने उसने कहा क्यों नाच रहे हो बोले आज मुझे वीर बहादुर मिला है वो वो तुम काम कर सकते हो जो आज तक किसी ने नहीं किया। बोले हां बोलिए।
तो एक सुई निकाली। कहा मेरे कपड़े फट जाते हैं। तो मैं एक सुई रखता हूं। क्या परलोक में मुझे ये सुई आप ले जाकर दे सकते हैं? तो उन्होंने कहा मूर्ख हो क्या? परलोक में कोई कुछ ले जाता है क्या? तो बोले फिर लाखों की हिंसा करते हो तो जब तुम परलोक में एक सुई भी नहीं जा सकती तो तुम लाखों की हिंसा क्यों करते हो? उसी दिन से दिमाग आ गया और उसने कहा जब सिकंदर मरे तो दोनों हाथ अर्थी के बाहर कर देना कि सब लोग देख ले इतना पराक्रमी वीर भी यहां से कुछ नहीं ले जा रहा है तो हाथ लगने वाली चीज तो आध्यात्म है सुख देने वाली वस्तु तो भगवान के मार्ग की नाम लीला गुण धाम ये सब सुख देने वाली है महाराज जी मेरा एक प्रश्न था मैं जानना चाहता हूं कि हमें करता नहीं है हम दृष्टा बनके जीवन जीना चाहिए किंतु नहीं जी पाओगे।
अभी जब तक भजन नहीं होगा तब तक दृष्टा कैसे बन सकते हो? शरीर में पीड़ा है तो भोगता बनकर के भोगना पड़ेगा। जब तक भजन के द्वारा वो स्थिति नहीं प्राप्त हुई है। जब भजन होता है और वो स्थिति प्राप्त होती है। तो ऐसे पीड़ा महसूस होती जैसे दूसरे शरीर में उनके शरीर में पीड़ा है तो मुझे लग रहा है इनके शरीर में पीड़ा है। लेकिन वो व्यथित नहीं होता। काम आ रहा है तो हमारे अंदर नहीं आ रहा। वो मन के अंदर आ रहा है। हम उसके दृष्टा है। उसको कंट्रोल कर सकते हैं। अभी हमारे अंदर आता है ना कि हम यह भावना कर पाते हैं कि मन में काम आ रहा है।
अगर हम कुछ देखना चाहते हैं तो यह भाव नहीं आता कि मेरी नेत्र इंद्रिय देखना चाहती है। भावता मैं देखना चाहता हूं। बस ये जब तक मैं मन और इंद्रियों से जुड़ा है तब तक दृष्टा भाव नहीं सिद्ध हो सकता। उसके लिए भजन करके निर्मल होना। जैसे-जैसे मन निर्मल होगा, वैसे-वैसे आप दृष्टा भाव में आते चले जाएंगे। और जैसे-जैसे मन मलन होगा, वैसे अहम मन में लीन होता चला जाएगा। मैंने किया, मैं करूंगा, मैं ऐसा कर सकता हूं। समझ पा रहे हैं आप? अनुज सिंघल जी आगरा से। राधे-राधे।
राधे-राधे महाराज जी। महाराज जी आपके प्रवचन सुनने के बाद अतीत के गलत कार्यों के डर से नाम जप शुरू किया। करीब 2 साल हो चुके हैं नाम जप करते-करते। अब केवल यह जानने की इच्छा रह गई है कि भगवत मार्ग पर अभी भी नाम जप डर की वजह से हो रहा है या राधा रानी से प्रेम हो गया। हां अभी अभी तो प्रेम तो अलग बात है। प्रेम जब हो जाएगा तो एक अलग स्थिति हो जाएगी। फिर कोई डर नहीं रह जाता। निर्भय हो जाता है। निश्चिंत हो जाता है। निशुक हो जाता है। और प्रभु से भी नहीं डरता।
और प्रभु से कहता है यत्र यत्र मम जन्म कर्मवीर नारके परमे पदे अथवा राधिका रति निकुंज मंडली तत्र तत्र हृद में विराजता हे प्रभु मैं आपसे यह नहीं मांगता कि मुझे नरक मत भेजना मुझे चाहे नरक भेजना चाहे परम पद भेजना मुझे इसकी परवाह नहीं पर आप अपने परिकर सहित मेरे हृदय में रहे जहां भी रहूं मैं आपकी याद करता रहूं आपकी याद में रोता रहूं कहीं भी भेज दो आप उसका डर खत्म हो जाता है जब प्रेम आता है तो नर्क से भी नहीं डरता। बस एक बात मांगता है कि मैं कभी आपको भूलूं नहीं।
बिसरियो ना बिसारियो यही दान मोहे देव श्री हरिवंश के लाडले मोहे अपनी कर ले। हे लाडले ठाकुर राधा वल्लभ लाल मुझे अपना बना लो। मैं आपको भूलूं नहीं और आप भी हमें ना भूले और जहां मनावे वहां भेज दो। मुझे कोई डर नहीं है। तो अभी प्रेम तो हम नहीं कह सकते क्योंकि जिस समय प्रेम प्रकट होगा तो कुटुंब देह ते जाए छूट सब ही विधि तो ना शरीर की परवाह ना परिवार की परवाह ना नर्क स्वर्ग की कोई परवाह नर्क स्वर्ग अपवर्ग आस नहीं त्रास है जहां राखो ता रहो मान सुख रास है ना स्वर्ग की अपवर्ग मोक्ष की चाह नहीं है और नर्क से कोई भय नहीं है निरंतर भगवान का भजन तो अभी चलता है।
अगर यह निरंतर चलाते रहोगे तो प्रेम आ जाएगा। फिर आसक्ति हो जाएगी। फिर भजन के बिना जिया नहीं जाएगा। कोई चाह नहीं है पर भजन हम नहीं छोड़ सकते। भजन के बिना हम जी नहीं सकते। ऐसी स्थिति आ जाएगी। बहुत मंगलमय भगवान की बड़ी कृपा है कि आप भगवान के नाम में लग गए। देख लेना बहुत आनंद हो जाएगा। लोक और परलोक सब सुखी हो जाओगे। इस लोक में भी सुख और परलोक में भी सुख। जी टीना कटारिया जी जयपुर से। राधे राधे राधे-धे महाराज जी महाराज जी क्या मेरे नाम जब से घर के बाकी लोगों को भी लाभ होता है?
पूरा पूरा होता है। परिवार के सब जनों का मंगल शुरू हो जाता है। अगर एक भजन करने वाला हो तो पूरे परिवार का मंगल हो जाता है। पूरे परिवार का मंगल हो जाता है। यहां तक कि 21 पीढ़ियां तर जाती हैं। शास्त्रों में वर्णन आया है। तो इससे ज्यादा क्या मंगल हो सकता है? अभी वर्तमान परिवार की तो बात जाने दो। पीछे की हमारी 14 आगे की सात ये 21 पीढ़ियां तर जाती है। हां तो फिर वर्तमान में हमारे परिवार का मंगल हो। वैसे भी समझ लो। एक आदमी क्राइम करता है। पूरा परिवार झकझोर जाता है।
पूरे परिवार का अपमान होता है कि नहीं होता है? कहां गया बताओ? वो आदमी कहां गया? तुम उसके चाचा लगते हो। तुम्हें तो पता होगा ना? तुम उसके जीजा लगते हो। तो उसके अब मतलब हर संबंधी हर जगह वहां पुलिस जाएगी और वहां जाकर के जांच करेगी परेशानी पैदा करेगी। एक आदमी ने क्राइम किया पूरा परिवार दुखी होता है। पूरा मोहल्ला दुखी होता है। पूरे रिश्ते नातेदार दुखी होते हैं। ऐसे ही अगर अगर हम सही चलते हैं तो हमारे गांव वाले भी सुखी होते हैं। तो अगर हम एक धर्म से चलें तो हमारा गांव सुखी, हमारा मोहल्ला सुखी, हमारा परिवार सुखी उसके ऊपर प्रभाव पड़ता है।
और एक आदमी अगर गलत चले तो पूरा गांव दुखी हो जाता है। पूरा मोहल्ला दुखी हो जाता है। पूरा परिवार दुखी हो जाता है। रिश्ते नातेदार दुखी हो जाते हैं। ऐसे हमारे भजन का प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जी अमन शर्मा जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपके पास जैसा मरीज आता है आप उसको वैसी दवा देते हो महाराज जी आपसे ब्रह्म ज्ञान की बात करता है कोई तो उसे वैसा बताते हैं भक्ति की बात करता है तो भक्ति बताते हैं कोई भगवत प्राप्ति के लिए आता है तो भगवत प्राप्ति महाराज जी मैं चाहता हूं कि श्री जी का प्रेम और शरीर छूटने के बाद जैसे आप श्री जी के पास जाएंगे महाराज जी मुझे भी वैसे ही जाना है महाराज जी मुझे वैसा वैसे चलना पड़ेगा ना वैसे चल चलना पड़ेगा।
अगर हमको श्री जी के पास जाना है तो श्री जी के बनना पड़ेगा ना। श्री जी के पहले किसी संत महापुरुष की शरण में हो। उनसे दीक्षा लो। उनके अनुसार साधना करो। भले गृहस्थ में रहो लेकिन साधना करनी पड़ेगी। अब ऐसे तो नहीं कि हम आर्मी में जाना चाहते हैं। लेकिन ना हम दौड़ लगा रहे हैं ना हम व्यायाम कर रहे हैं। ना हम कुछ कर तो ऐसे आदमी कायर आदमी थोड़ी आर्मी में जाएगा। उसको तो वो करना पड़ेगा ना। उतनी दौड़, उतनी लंबाई, उतनी चौड़ाई वो सब निशानेबाजी सब करना पड़ेगा। ऐसे जब श्री जी के पास जाते हैं तो इंद्रियों को अपने अधीन करना, मन को अधीन करना, गंदे आचरण ना करना, ब्रह्मचर्य से रहना, पवित्र आहार पाना, हर समय नाम जप करना, दूसरे से मृदु व्यवहार करना यही लक्षण है।
धीरे-धीरे हम श्री जी की तरफ बढ़ जाएंगे। सुमित गुप्ता जी पलवल से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। महाराज जी जब हम कोई साधना करने का संकल्प लेते हैं और निभा नहीं पाते तो क्या भगवान नाराज होते हैं? नहीं भगवान बहुत करुणाम में है। कभी ऐसा नहीं असफलता को हम सफलता में बदलने के लिए ही मानव जीवन प्राप्त किए हैं। यदि हम असफल होने पर निराश हो जाएंगे तो हम हार गए। फिर ठीक नहीं है। 100 बार असफलता हो फिर भी हम 101 बार प्रयास करेंगे सफल होने का।
तो हमने जैसे संकल्प लिया कि हम अमुक कार्य करेंगे नहीं कर पाए तो फिर हम अगला फिर अगला फिर अगला हम कदम बढ़ाते चले जाए एक दिन हम कर लेंगे निराश नहीं होना भगवान बहुत उदार पिता है भगवान बहुत उदार पिता है वैसे विमुख भय निमश ना अकपा जब चित वैसे जैसे बहुत धनी उदार पिता हो तो छोटी मोटी गलती हो जाए ध्यान नहीं देता है। अगर बड़ी गलती हो गई तो अपने पुत्र का ही पक्ष लेता है। ऐसे भगवान अपने भक्त का ही पक्ष लेते हैं। तो अगर हमसे ऐसी त्रुटि हो जाती है कि हमने हम यह करेंगे हम नहीं कर पाते हैं तो हमें निराश नहीं होना हमें।
फिर प्रयास करना है। फिर प्रयास करना है। तो एक दिन भगवान की कृपा से हम वो कर लेंगे। क्योंकि हम बहुत बार अपने इंद्रिय और मन के कहने से गलत आचरण कर चुके हैं। तो हम जब अच्छा आचरण करने का संकल्प करते हैं तो उनकी जो गंदी आदतें हैं मन और इंद्रियों की वो हमको जबरदस्ती गंदे मार्ग में ले जाती हैं। और जब हम गंदा कार्य कर लेते हैं तो हम उत्साहहीन हो जाते हैं कि यार अब मेरे से नहीं हो पाएगा। क्योंकि वो सत कार्य है ना भगवान का कार्य है ना तो पाप होने पर मन उससे हट जाता है तो हम फिर पवित्र करें नाम जप के द्वारा भगवान की कथा सुने सत्संग सुने फिर हम उत्साह संपन्न बने और आगे फिर अपने कार्य को करें भगवान नाराज नहीं होते गर्वित शर्मा जी शाम सदाशिव महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी हमारे जीवन की बात कब बनेगी श्री जी सर्व समर्थ हैं जब वो अभी बनी हुई है बिगड़ी क्या है बिगड़ी हमसे है भगवान ने तो बिल्कुल सुंदर बनाकर भेजा।
हमें मानव जीवन दिया। अब हम बिगाड़ ले तो इसमें हमारी गलती है। भगवान की गलती नहीं है। श्री जी की बड़ी कृपा है। जबान दिया है मृदु बोलो। सत्य बोलो। आंख दिया है अच्छा देखो। सब में भगवान को देखो। हाथ दिया है दूसरों को परोपकार करो। माता-पिता की सेवा करो। खूब धर्म पूर्वक धन कमाओ। पढ़ो लिखो। उन्नति करो। भगवान ने क्या कमी रखी है? हमको परेशानी क्या है? शिकायत क्या है भगवान से? महाराज जी श्री जी हमें देख रही है जब हमारी बात बनेगी या हम श्री जी को देख लेंगे जब हमारी बात बनेगी बात तब बनेगी जब आप श्री जी का नाम जप करोगे देखने सुनने से दुर्योधन भी तो देख रहा है भगवान को क्या बात बनी क्या भगवान श्री कृष्ण को दुर्योधन ने देखा ना तो बात बनी क्या मारा गया बात बनेगी भगवान का नाम जप करने से डट के नाम जप करें और श्री जी न्याय लेने तो आपको श्री जी की प्राप्ति हो जाएगी आप ले चलोगे पक्का का गारंटी प्रॉमिस खूब तुम राधा राधा नाम जप करो ठीक है हां जब नाम जप करते हैं तो नाम हमारा नौका बन जाता है और वही हमको भो समुद्र से पार कर देता है हमें चिंता नहीं करनी कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरारा आप बिल्कुल चिंता मत करो महाराज जी आई लव यू अब हम अंग्रेजी तो बोलेंगे नहीं हम यही कहते हैं कि हम सबको प्यार करते हैं लेकिन लेकिन हमारा हमारा जो प्यार है वह आपके प्यार से अलग प्यार है।
हम आपके शरीर से प्यार नहीं करते। हम आपसे कुछ चाह करके प्यार नहीं करते हैं। हम आपको देने के लिए प्यार करते हैं। आपको सुख मिले। आपको भगवत प्राप्ति हो। आप स्वस्थ रहे। आप निरंतर भगवान का भजन करें। अच्छे आचरण वाले बने तो हम आपसे प्यार करते हैं। ठीक है ना? नितेश पाल जी बरेली से। राधे-राधे महाराज जी। राधे-राधे महाराज जी महाराज जी अपने जीवन में आध्यात्मिक और सांसारिक लक्ष्य को एक साथ कैसे प्राप्त किया जा सकता है? किया जा सकता है। जैसे हम हर फावड़े पे राम राम राधा राधा जपे क्या हमें फर्क पड़ेगा?
हम व्यापार कर रहे हैं। ग्राहक आया उसमें भगवान का भाव किया और व्यापार का कार्य करने फिर राधा राधा राधा कोई परेशानी नहीं। अगर हम पराई स्त्री की तरफ गंदी दृष्टि से देखेंगे। पराए धन की बेईमानी करेंगे और हम गंदे भोजन पाएंगे तो हमारी दुर्गति हो जाएगी। शराब पीना, मांस खाना, गंदे आचरण ये फिर हमारी दुर्गति हो जाएगी। यदि हम पवित्र भोजन पाते हैं, धर्म पूर्वक धन कमाते हैं। भगवान का नाम जप करते हैं। दूसरों का उपकार करते हैं तो गृहस्ती में रहते हुए भी अध्यात्म की पूर्ति हो जाएगी।
कोई परेशानी नहीं। है नहीं? हां। कोई नशा मत करो। गंदा भोजन मत करो। हां बिल्कुल। और नाम जप करो। नाम जप करते हो महाराज यार काउंटर रखा करो महाराज जी ऐसे राधा राधा राधा राधा जप करते वैसे उससे ज्यादा बनता है महाराज प्रारंभ में उसे कि आज हमने 500 किए तो कल हम 600 करें हम 65000 उसमें एक मतलब लगन लगती है तो हमें लगता है नए साधक को ये काउंटर है माला है इनका प्रयोग करना चाहिए जी महाराज निशा यादव जी राधेधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी कृपया समझाएं जब किसी की मृत्यु कम आयु में होती है तो उसकी स्वासे उतनी ही थी।
ऐसा माने हां बिल्कुल उतनी ही जो गर्भ में ही मर जाते हैं उन्होंने क्या अपराध किया था? जो गर्भ के बाहर आकर भी बालक अवस्था में मर जाते हैं उसने क्या अपराध किया था? तो पूर्व से यह निर्धारित है कि वो गर्भ में ही मरेगा। महिलाएं महाराज जी ये करवा चौथ का व्रत फिर किस उद्देश्य से रखती हैं? ये तो बहुत छोटी मोटे बातें हैं। ये गांव गली वाले होते हैं। ये अनुष्ठान किसी की मृत्यु को थोड़ी बचा सकते हैं। करवा चौथ किसी की मृत्यु को बचा लेगी। आयु जब पूर्ण होती है तो देखो गंगा जी अपने हाथ से अपने पुत्र को लेकर के गंगा में फेंक देती थी जिंदा।
लोग तो मरा फेंकते हैं गंगा जी में। वो जिंदा फेंक देती थी गंगा जी। सात पुत्र पैदा होते ही गंगा जी में फेंक देते। क्यों? क्योंकि उनकी आयु इतनी नहीं थी। उनको पता था वो अष्ट वशु में सात जो थे उनको जन्म लेते ही मुक्त करना था। तो उन्होंने कह दिया था शांतनु से कि आप प्रश्न नहीं करोगे हमसे। उठाया और जिंदा गंगा जी में फेंक दिया। वो मरे और वसु रूप को प्राप्त हो गए। लेकिन आठवें में रोक दिया तो वही भीष्म पितामह जी के रूप में तो हमारे मृत्यु लोक में अगर हमारा है कि गर्भ से 10 दिन निकलने के बाद मरना है तो 11वा दिन हम नहीं देखेंगे 10वें दिन ही मर जाएंगे इसमें हमें शोक नहीं करना चाहिए ये तो बिल्कुल पक्का समझो जो विधना ने लिख दिया छठे राव के अंक राई घटे न तिल बढ़े रह जीव निशंक जितना लिखा है उतना ही जिएंगे इसके आगे नहीं महाराज जी जैसे हम महिलाएं जो व्रत रखती हैं पुत्रों के लिए या पति के लिए उसके बाद भी यह बहुत छोटा सा सपोर्ट है।
जैसे हमारी आयु 10 वर्ष है। अब हमको कोई विघ्न छोटा-मोटा आने वाला है। मां व्रत कर रही तो उसका जुकाम ठीक हो जाएगा। उसको बुखार नहीं उसको चबेटा नहीं लगेगा। उसको चोट नहीं लगेगी। मृत्यु का निश्चित टाइम होता है। उसे रोका नहीं जा सकता। हां। अब जैसे मृत्यु योग लग रहा है। अभी मृत्यु नहीं है तो मृत्युंजय जप करो कट जाएगा। मृत्यु योग लग रहा है लेकिन मृत्यु नहीं है तो वह बच जाएगा। अगर मृत्यु है तो मृत्युंजय जप भी उसे नहीं काट सकता। नहीं कोई बचा के देख ले। योग लग रहा है।
पाप कर्म इतना उसका प्रभावशाली हो रहा है कि वो मृत्यु योग जैसा दंड देगा। तो मृत्युंजय जप किया। योग कट गया। आयु नहीं आयु अगर समाप्त हो गई है तो फिर समाप्त ही हो गई है। फिर उसे नहीं बढ़ाया जा सकता। नहीं भगवान राम जी अपने पिता दशरथ जी को जीवित कर लेते और माता कौशल्या वैधव्य ना होती। विचार करो यहां जो जन्मा राइट टाइम जब आया उसको यहां से जाना पड़ेगा। बिल्कुल कोई भी व्रत नियम संयम उसे नहीं रोक सकता। यह बाहरी सपोर्ट होता है। ये बाहरी सपोर्ट होता है। मृत्यु को नहीं रोका जा सकता।
नहीं तो साधु महात्मा मान लो आप एक करवा चौथ साल में एक बार ही तो होती है करवा चौथ यहां रोज करवा चौथ जैसा है रोज उपासना रोज व्रत है रोज लिया लेकिन मरते हैं ना संत महात्मा भी जो रात दिन भजन करते हैं वो राइट टाइम मरते हैं कि नहीं कोई जवानी में मर गया कोई बुढ़ापा में मर गया पर अब इस जन्म में भगवान के पास जाना है इसलिए हमें कोई शोक नहीं समझ पा रहे हैं आप वैभव ठाकुर जी श्री राधे राधे राधे राधे महाराज जी महाराज जी कई प्रियजनों और कई बुजुर्गों को भी यह कहते हुए सुना है कि जिंदगी बड़ी मुश्किल से मिलती है यारों जो भोग सकते हो भोगो एंजॉय करो नहीं ये नहीं हम ये जरूर इस बात पे हां कहते हैं कि जिंदगी बड़ी कीमती है जिंदगी बड़ी मुश्किल से मिलती है दुर्लभ मानुषो देवो देह नाम क्षणभंगुरा तत्राप दुर्लभ मनने वैुंठ प्रियदर्शनम बात अब समझो जिंदगी बहुत कीमती है यार इसे गंदे कामों में नहीं इसे इसे अच्छे कामों में लगाओ।
इससे भगवान की प्राप्ति कराओ। भगवान के प्रिय प्रेम को प्राप्त करो। यह जिंदगी का लाभ है। बुजुर्ग कहते हैं भोग भोगो आनंद लो। बुजुर्ग भक्ति भी कर लो बट एंजॉय भी करो। हमें तो आज तक नहीं समझ में आता कि एंजॉय है कहां? हमें हम तो खोल के ऑपरेशन करके बात बताते हैं। एंजॉय है कहां? कहां एंजॉय हमें बताओ। जो चीज खाओ छ घंटा में सोच बन जाती है। बन जाती है ना? मनुष्य को सबसे ज्यादा प्रिय वस्तु क्या लगती है? रुपया इसलिए प्रिय लगता है कि हमें सामग्री मिलती है। सामग्रियों में खानपान सबसे प्रिय पहनने उड़ने को मिले और भोगों में स्त्री भोग या पुरुष भोग खुली बात है।
इसके अलावा हमें बताओ और क्या चाहिए? इसके अलावा क्या चाहिए? मान, प्रतिष्ठा, रुपया, पैसा यह सब इसी के लिए है। अंदर दो बातें चल अच्छा खाने को मिले और मनमानी भोगने को मिले। बस यही चाहिए ना मरने के बाद इनमें से क्या बचा? फाइनल में हमें बताओ जो गृहस्थ में आप लोग तो गृहस्थ हैं। आपने भोगा आपके पास क्या है अनुभूति? फिर वही भोगने की इच्छा है ना। कोई यह कह सकता है कि मैं भोग करके तृप्त हो गया हूं और मेरी कोई इच्छा नहीं। यह बात वही कह सकता है जो भजन कर रहा है।
अच्छा भोग स्थान कहां है? मलमूत्र के द्वार है जिनको छ लो तो रज लगा के साबुन लगा के हाथ धोना पड़े। वहां कहां हम क्या एंजॉय करोगे? कहां एंजॉय करोगे? शराब पिए नालियों में पड़े रहते हैं। एंजॉय है। हैं? एक दूसरे की हत्या कर रहे हैं। एंजॉय है। क्या एंजॉय? हमें बताओ ना एंजॉय कहां कर सकते हो? क्या एंजॉय है? क्या आनंद प्राप्त हुआ? आप लोग तो संसार में हैं। भोग भोग रहे हैं। क्या आनंद प्राप्त हुआ? और आनंद पूछो तो हर समय हम कई बार बताया कि हमारे हृदय में इतना आनंद रहता है जैसे किसी नए लड़के का नई लड़की से ब्याह तय हो जाए तो उसको कितनी खुशी होती है।
ऐसे हजारों गुना लाखों गुना आनंद हमें हर समय बना रहता है। अरे भगवान की शरण में इंंजॉय है कि ऐसे इंजॉय है। सही बताओ। तुम्हें चिंता है कि नहीं चिंता है? हमें पाई भर की चिंता नहीं है। पाई भर के आज सब विलास हो जाए तो हमें कोई फर्क नहीं और आज लाखों करोड़ों आ जाए तो हमें कोई फर्क नहीं। भगवान और इसके बाद मृत्यु सबका भय है और मृत्यु मेरा आनंद है। मरने से सब जग डरा मेरो मन आनंद। कब मर कब भेट हो पूरन परमानंद। कब शरीर पूरा हो और मैं अपने प्रभु के पास जाऊं। एंजॉय करने सच्चा एंजॉय होगा।
अनंत ब्रह्मांडों का स्वामी श्री कृष्ण है। वो हमारा दोस्त है। हमारा यार है। जब हमारा शरीर छूटेगा हम उसके पास जाएंगे। उसके साथ खेलेंगे, हंसेंगे, खाएंगे, कूदेंगे और मरना है नहीं। वहां डायबिटीज नहीं होनी। हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर नहीं बोला। वहां किडनी नहीं फेल है। वहां सब आनंद है। यार एंजॉय करना है तो भगवान का भजन करो। कहां एंजॉय है? यहां कोई एंजॉय है। आप बताओ हमें कहां एंजॉय है? क्या एंजॉय है? यहां कोई आनंद है यार। सब चिंतित है। सब शोकित है। जिनको तुम बड़ा आदमी समझते हो, जिनको बड़ा पदाधिकारी समझते हो, वह भी परेशान है।
घर, परिवार, नाना प्रकार की वासनाएं, इच्छाएं सब परेशान है। बच्चा अगर कभी किसी को शांति, विश्राम, आनंद और सुख मिला है तो भगवान की शरण में मिला है। इस संसार में एंजॉय करने से क्या? देखो छोटी सी वस्तु के लिए भाई भाई की हत्या कर रहा है। पति पत्नी में विश्वास खत्म हो रहा है। हम बड़े चिंतित हैं। बड़ा समस्या समाज में हमारे आती है। ये एंजॉय कैसे कर पाएंगे? बहुत समस्या है। इसलिए एंजॉय के चक्कर में मत पड़ो। धर्म से चलो। नाम जप करो। धर्म से चलो। भगवान से प्रार्थना करो कि जीवन साथी ऐसा मिले कि हम प्यार भरा जीवन व्यतीत कर सके।
पवित्र जीवन व्यतीत कर सके। कपिल परमार जी जय महाराज जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आप कह रहे हैं कि आपने भारत को पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता हुए आप तो महाराज जी ये कह रहे हैं कि जब ये ओलंपिक में सेमीफाइनल में फाइट हार गए तो महाराज जी आज तक महाराज जी वो रात को सोता हूं कि क्यों हार गया क्यों हार गया और अंदर ही अंदर तकलीफ निकाल नहीं पा रहे सुखदखे समय कृत्वा लाभा लाभो जया जय सुखदख में लाभान में और जय विजय पराजय में समान भाव रखो। प्रारब्ध नहीं था विजय प्राप्त करने का।
इसलिए हार आ गई। कोई बात नहीं। हम फिर प्रयास करते हैं। अगर प्रयास नहीं सफल होता तो सबसे बड़ी जीत हमें करनी है। नाम जप करके मृत्यु पर विजय प्राप्त करनी है। देखो हम आपसे ये कहते हैं कि आप बहुत जीत गए। बहुत चीजें आपने प्राप्त कर ली। लेकिन मरेंगे तो आपके साथ कुछ जाएगा क्या? कोई ट्रॉफी कोई आपके पास कुछ भी जाएगा क्या नहीं जाएगा ना तो आखिरी विजय तो आप हार गए जो आखिरी फाइनल था वो तो आप हार ही गए ना आपके पास कुछ नहीं जाएगा और देखो खास बात है मान लो ये हम कह निराश नहीं कर रहे हैं इनसे लेकिन आपको इस स्थिति से उठाना चाहते हैं कि आप जो निराशा लिए बैठे हो आपको जो अंदर अंदर खोखला कर रही ये कोई खास बात नहीं नींद नहीं आती महाराज जी 6 महीने हो गए जब से मैं मतलब रात को वो हारा सेमीफाइनल वो बाहर सुबह उठूं नहीं नहीं नहीं ऐसे नहीं ऐसे फिर आप डिप्रेशन में चले जाओगे नहीं बिल्कुल नहीं अब इससे ऊपर उठो ये कोई खास बात नहीं है हारजीत इसमें खास बात है आखिरी फाइनल फाइनल भगवान की प्राप्ति वो है परम पद अगर ये जीत गए तो हमारी अनंत जन्मों से जो यात्रा होती चली आ रही है वो हमारी फाइनल में अच्छी हो जाएगी अगर मरे फिर सूअर कुत्ता बने और इधर ही इस जन्म के बड़े-बड़े पद रखे हैं।
वो किस काम में आएंगे? मान लो आप ठीक है हार गए। कोई बात नहीं। नाम जप करो। आखिरी जीत मानो। हम जब मरे तो हम पवित्र आचरण करके भगवान का चिंतन करते हुए मरे तो हमारा जीवन धन्य हो जाएगा। आप निराश मत होइए। आप राधा राधा इच्छा होती है कि अब बहुत हो गया। 15 साल से मैं प्रयास कर रहा था एक ओलंपिक मेडल के लिए जो मैं सेमीफाइनल लूज़ कर गया। मतलब पर अब आप नाम जप करो और प्रयास करो। अगर आपको इसी में विजय प्राप्त करना है तो नाम जप करो। आध्यात्मिक बल से परिपक्व होकर आप आगे बढ़ो।
ठीक है ना? निराश मत होइए। चैन से सोइए। जीत जाते तो क्या मिल जाता? वाहवाही ही तो मिलती यार। वाहवाही तो है। अब मरने के बाद वाहवाही जाएगी क्या? इसलिए बहुत कैसे-कैसे विजेता हो गए। कैसे-कैसे हम कह रहे हैं एक से एक गायक एक से एक युद्ध करने वाले एक से एक पराक्रमी कौन जानता है यार उनको गए सब काल के गाल में सब चले गए इसलिए ज्यादा चिंता मत कीजिए हार गए तो कोई बात नहीं नाम जप कीजिए आगे प्रयास कीजिए ठीक है आज ऐसा लग रहे हो बाबा नाम रूप लीला धाम चारों के दर्शन आपके भीतर स्वयं साक्षात और मुके ऐसे सुंदर दर्शन पा के एसो ही भाव आ धरी धरे अति शोभित श्याम जो तैसी बनी प्रिय सुंदर चोटी खेलत खात फिरत अंगना पग पेज वाजत पेर कछोटी या छवि को
रस खान विलोकत वारत काम कलानिधि कोटि काग के भाग को का सखी हरि हाथ सुले गयो नंद के लाला की ये तो बड़ा सुंदर भाव है और एसो हमारा सद्भाग्य है सौभाग्य है कि बाबा आप सब हम सबन को दर्शन दे रहे हो और मैं सांची बता रहा हूं कथा करते करते भी हम सब सब ब्रजवासी खूब नाम की महिमा को प्रचार प्रचार कर रहे हैं लेकिन बाबा आप यही बैठकर के आपने तूफान मचा रहा है ये आपकी कृपा है आप ब्रजवासियों की नंद के लाला की क्या द्वादश अक्षर द्वादशाक्षर मंत्र और पंचाक्षर मंत्र का माइक पे जाप कर सकते हैं।
नहीं नहीं विद्वान आजकल नहीं ये ये इससे अमंगल होगा। हां ये वैदिक मंत्र हैं। ये उपांश या मानसिक जपे जा सकते हैं। ये वाचिक या इनका कीर्तन नहीं हो सकता। जो करते हैं वो शास्त्र विरुद्धचरण करते हैं। शास्त्र में ऐसे बाबा माइक पे करते हैं जोरजोर से सुबह चला देते हैं। नहीं नहीं ये गलत है। ये गलत है। ये कलयुग का प्रभाव है जो गुप्त मंत्रों को ऐसे गायन परसों मैंने राजेंद्र दास जी के प्रवचन सुन रहा था तो उसमें सुना था कि ये बहुत बड़ी भूल है आचार्यों की कि ये कलयुग का बिल्कुल हां प्रभाव आ रहा है।
बिल्कुल बिल्कुल ऐसा है। बाबा आज का जन्मदिन है। बाबा आज की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए? नाम कीर्तन करो गौ को चारा डाल दो एक आध संत को पवा दो ठीक है किसी संत को भोजन पवा दो गौ को चारा डाल दो घंटा दो घंटा नाम कीर्तन करो ठीक है राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा इतना तो कबहु हसीने हो इतना कबहु हस दे सुनहु कृपालु किशोरी राधे सुनहु कृपा किशोरी राधे राधे राधे राधे राधे सुनहु कृपा गोपाल किशोरी राधे अवसी कृपा की कोल चित हो
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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