जब कोई अपमान करे तो कैसे जाने कि कब सहना है और कब जवाब देना है ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मनीषा साजवानी जी राधेधे श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी जब कोई अपमान करे तो कैसे समझे कि कब चुप रहना है सुनना है और कब जवाब देना है अगर हमेशा चुप रहे तो लगता है सामने वाला और भी ऐसा करेगा तो महाराज जी ऐसी में मर्यादा नहीं भगवान शंकर कह रहे हैं अपने कर्म जाए अपकारी उमा क्षमा सापहुते भारी अगर हम किसी को क्षमा कर देते हैं तो हमारी क्षमा क्षमा उसके ऊपर सांप से भी ज्यादा दंड देने वाली बन जाएगी। अगर हम चुप हो जाते हैं तो मालिक हिसाब करता है। और जब हम हिसाब करते हैं तो फंस जाते हैं।
वैसे कोशिश करें जब हमारा कोई अपमान करे तो हमें सहकर वहां से चल देना चाहिए। हिसाब भगवान के ऊपर छोड़ देना चाहिए। लड़ाई झगड़ा करना, मारपीट करना, हिंसा करना, अपने को बंधन में डाल लेना है। हमें लगता है अपने को बचाए। एक लंबे दुख भोगने से अच्छा है थोड़ा कष्ट सह ले। जैसे कोई हमें गाली दे रहा है, हमें अपमानित कर रहा है। यदि हम उससे लड़ गए तो हमारे अंदर क्रोध आ सकता है, मारपिटाई हो सकती है, रिपोर्ट हो सकती है। फिर हम आगे बंधनों में फंसते चले जाएंगे। और अगर हम वो गाली दिया और हम चुप हुए सुन के चल दिए तो उसको गाली देने वाले को ऐसा दंड मिलेगा समय पर कि दोबारा किसी को गाली नहीं देगा।
मालिक बहुत हम यही कई बार चर्चा किए हैं। देखो हमारे यहां भी मुकदमा कई कई वर्ष चलता रहता है। तब हिसाब हो पाता है। जैसे कोई केस हुआ तो तुरंत थोड़ी होता है। बहुत कहो चार वर्ष लग जाए उस केस के सुलझने में। कहो 10 वर्ष लग जाए। तो यह तो एक देश की बात है। अनंत ब्रह्मांडों का हिसाब है। तो हमारे प्रभु के यहां कहते हैं कि देर है पर अंधेर नहीं। कहते हैं ना थोड़ा देर तो लगेगी कि आपको वो गाली दिया तुरंत उसको चोट नहीं लगेगी पर समय आने पर ऐसी चोट लगेगी कि जिंदगी में गाली देना भूल जाएगा।
अपने को सहना चाहिए। ज्यादा विरोध और लड़ाई झगड़ा और हिंसा आदि करने से हम खुद बंधन में पड़ सकते हैं। तो हमारी सलाह तो यही है कि अगर कोई गाली दे तो चुप हो जाए। कोई अपमान करे तो सह ले अपना कर्म मान के कि कोई हमारा बिगड़ा हुआ कर्म होगा। अब हम तो साधु भष में है तो यही समझाएंगे। हम तो यह कहेंगे कि अगर वो गाली दे रहा है तो हम सह जाते हैं और वह हमको अपमानित कर रहा है तो चुपचाप चले जाते हैं। हिसाब भगवान के ऊपर छोड़ दें। क्योंकि जितनी जेलें भरी हिसाब करने में ही तो भरी है।
कहीं हम गलत कर बैठे कहीं हम हिंसा कर बैठे तो कानून का अपराध हमारा बन जाएगा। कानून के विरुद्ध हमारे आचरण बन जाएंगे। तो हम भी अपराधी माने जाएंगे। तो इसलिए हम मारे पीटे नहीं हिंसा ना करें क्रोध ना करें सह जाए भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवान उसकी भी बुद्धि शुद्ध कर दो उचित तो यह है कि हम उसके लिए भी अच्छा सोचे कि भगवान अगर आप इसकी बुद्धि शुद्ध कर दो तो गाली देना बंद कर दे। यह भी एक अच्छा आदमी बन जाए तो आप इसकी बुद्धि शुद्ध कर दो। हम तो यही प्रार्थना करेंगे कि भगवान सबकी बुद्धि शुद्ध करें।
लड़ाई झगड़ा ना हो। एक दूसरे का अपमान ना हो। एक दूसरे को दुख देने वाले वचन ना बोले जाए। पर आज नाक में गुस्सा रखा है सबके। नाक में गुस्सा जरा सा धक्का लग जाए तो आदमी आदमी के ऊपर एकदम टूट पड़ता है। हो सकता है वो बैलेंस बिगड़ गया। उसका धक्का लग गया तो अपने को बोलना है कोई बात नहीं। कोई बात नहीं। आप संभलिए और आगे बढ़िए। लेकिन जरा जरा सी बात में क्योंकि खानपान सही नहीं है। तमोगुणी भोजन है। तमोगुणी विचार है तो जरा में गुस्सा आ जाता है। हमें सहन करना चाहिए।
सहन में बहुत आनंद है। जब हमें सहन ना हो तो रो देना चाहिए भगवान के सामने। प्रभु हम तो असमर्थ हैं। आप समर्थ हो आप देख लो। वो जब देख लेंगे ना तो बहुत अच्छी तरह देख लेंगे। तो यदि हम कर्म बुरा करते हैं तो चार दिन भले हम चमक ले। इसके बाद हमको गिरना पड़ेगा। तो बुरा कर्म का बुरा फल भोगना पड़ेगा। अच्छे कर्म का अच्छा फल तो वह तुम्हारे साथ बुरा कर रहा है। तुम उसके साथ अच्छा करो तो तुम्हें अच्छा सुख मिलेगा और वह परिणाम में दुख भोगेगा। यह सिद्धांत है और लड़ाई झगड़ा करोगे तो जैसे वो अपराधी वैसे आप अपराध कर रहे हो तो फिर उसको दंड भगवान क्यों देंगे?
फिर तो आप भी अपराधी कर उसने गाली दिया। आपने गाली दे दिया। उसने विरोध किया। आपने विरोध किया। उचित बात है हम विरोध ना करें। हम गाली ना दे हम सह
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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