दान देने का सही तरीका क्या है?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
सिद्धार्थ जी राधे-राधे महाराज जी मैं ऑस्ट्रेलिया से आया हूं मुझे यह बताते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही तुम्हें आनंद मिलता है ऑस्ट्रेलिया में नाम जप का बिल्कुल मिलता है महाराज जी और कौन किसका प्रश्न था अभी उत्तर लीजिए ऑस्ट्रेलिया में भजन होता है जी महाराज जी मेरे साथ-साथ मेलबर्न के कई युवा आपके शब्दों को बड़े प्रेम और श्रद्धा से सुन रहे हैं और अपना जीवन में बदलाव ला रहे हैं। महाराज जी जब मन किसी विशेष कष्ट या मानसिक बाधा में फंसा हो तो अपने मन में राधा कृष्ण जी की कौन सी दिव्य लीला या किस प्रकार का ध्यान या स्मरण रखें जिससे साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उस समय उस समय दिव्य लीलाओं का चिंतन नहीं हो सकता है जब मन अत्यंत आनंद के अतिरेक में होता है तब लीला चिंतन होता है जब शोक में हो तो सत्संग काम करेगा कुछ सत्संग रखने चाहिए ऐसे कि मन के सत्संग बुद्धि के विषय में क्या बोला जब हम विपत्ति में हो तब हम कौन सा चिंतन करें, कौन सी बात करें?
तो इसके अलग-अलग उपाय हैं। जैसे हमारे अंदर किसी कामना को लेकर के विक्षिप्त हो रहे हैं हम तो उस समय हमारा भजन नहीं बन पाएगा। उस समय शास्त्र स्वाध्याय नहीं होगा। उस समय कीर्तन काम करेगा। कीर्तन करें। थकाएं थोड़ा बुद्धि को मन को और फिर सत्संग सुने। थके एक घंटा कीर्तन करो। आप देखो राधा राधा राधा राधा राधा हर समस्या का समाधान आंतरिक और बाह्य दोनों को ना मिले तो मुझे बताना हरि स्मृति सब विपद विमोक्षणम आप देखो तो करके तो अब जैसे अर्थ संबंधी समस्या है हम बहुत परेशान हो रहे हैं तो हमें विचार करना चाहिए कि भगवान ने कोई महान सुख की प्राप्ति के लिए मेरी अर्थ समस्या प्रकट की है।
अगर इस निम्न अर्थ समस्या से मैं ऊपर उठना चाहूं तो परम अर्थ परमार्थ भगवान ने केवल अर्थ से मुझे हीन बनाया है लेकिन मैं परम अर्थ से हीन नहीं हो सकता। मुझे परमार्थ में चलाने के लिए भगवान शायद कृपा कर रहे वो अर्थ दे देते हैं। तो दुलार कर रहे हैं। दुलार कर रहे कि जैसे लड़का बहुत विरज जाए कि नहीं हमको ये कार्य ही चाहिए। छोटे-छोटे बच्चे नहीं खिलौनों में तो माता-पिता ला के दे देते हैं। उनकी कृपा नहीं होती। वो दुलार होता है और नहीं देना कृपा होती है। चल हमारी गोद में बैठा के उन फालतू के खिलौनों में लगा मां नहीं मत दो खिलौने लाओ इधर तो ऐसे भगवान संसार के खिलौनों में लग रहा है।
आओ हमारे प्रेम रस का रस आस्वादन करो आओ दिव्य भगवत आनंद तो हम कुछ सत्संग ऐसे चयन करके रखे रोज जैसे सुनते हैं ना कि यार ये सत्संग तो समस्या के समय सुनने में ज्यादा लाभ देगा। ये मन के विषय में कहा गया है। ये विषाद के विषय में डिप्रेशन के विषय में ये काम के विषय में ये ब्रह्मचर्य के विषय में ये आहार के विषय में शयन के विषय में बहुत हर विषय पर सत्संग हुए तो कुछ चैप्टर अपने लिए रख लेने चाहिए और समय-समय पर सत्संग सुनना चाहिए जब ऐसे हो और एक बात हमारी याद रखो तुम भगवान के हो।
अब तुम्हारे जीवन में वही होगा जो तुम्हारा मंगल होगा। भारी विपत्ति या दुख जो भी भेजा जा रहा है वह तुम्हारे मंगल के लिए भेजा जा रहा है। परिणाम में देख लेना बड़ा मंगल होगा। द्रोपदी जी ने जब देखा कोई सहारा देने वाला नहीं बचा। अरे वो स्थिति आती। गजेंद्र ने जब देखा ना कि अब की झटके में वो समर्पण उसी में होता है जब [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये किडनी जो है ना वो झटका है जिसमें ऐसे नहीं तो वो साधना अभिमान बना रहता है भगवान ने कृपा की हम कहते हैं जन्मजन्म किडनी खराब हो लेकिन प्यारी जी के चरणों का प्रेम हो तो क्या बुरा है नहीं और बढ़िया शरीर स्वस्थ है भगवान से मतलब नहीं संसार में आ सकते तो क्या फायदा ऐसा जीवन तो हर समय हम भगवान की कृपा का अनुभव करें।
हर विपत्ति, हर समस्या, हर संकट से तुमको एक शब्द उबार लेगा। हमारे ऊपर भगवान की बहुत कृपा है। यह भी कोई मंगल विधान है। भगवान का कोई मंगल विधान है। हम जान नहीं पा रहे। आगे पता चल जाएगा।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1402 — महेश कुमार चौबे जी राधे-राधे प्रभु राधे-धे महाराज जी महाराज जी आपकी आज्ञा से मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा भगवान की शरणागति और आश्रित होने के लिए हमने लगभग सारे भोग भोग लिए हैं और…
- किसी को कोई बात समझाने पर वो न समझे तो क्रोध आ जाता है — शशांक वर्मा जी मुजफ्फरनगर से राधे-राधे श्री राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी ऐसा कई बार होता है कि किसी को अपनी बात समझाते हुए…
- स्वर्ग में वो कौन-सा सुख है, जो धरती पर भी नहीं है? — पारस कोहली जी नई दिल्ली से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी सुख और दुख एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। मेरा प्रश्न यह है कि वह कौन सा सुख स्वर्ग में है…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1401 — विक्रम पांडे जी मिर्जापुर से श्री हरिवंश महाराज जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपका सत्संग सुनता हूं और कृपा का अनुभव है महाराज जी…
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…