सच्चे गुरु की पहचान कैसे करें?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मनोज कुमार जी महाराज जी सादर प्रणाम गुरु जी मेरा प्रश्न है कि क्या जीवन में एक गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है जिससे कि हमारा उद्धार हो सकता है यदि एक सच्चे गुरु की पहचान करनी हो तो कैसे कर सकते भगवान भगवान के सिवा हमें कोई सच्चे संत से मिला दे ऐसा असंभव क्योंकि बाहर से सच्चाई नहीं जानी जा सकती बाहर से वैभव दिखाई दे सकता है वाक पटुता दिखाई दे सकती है रूप दिखाई दे सकता है शरीर दिखाई दे सकता है। स्थिति कैसे जानोगे? गुरु की जो स्थिति है वह तो नहीं जान पाओगे ना।
वो भगवान जानते हैं। तो हमें लगता है हमें भगवान से प्रार्थना करना चाहिए कि भगवत प्राप्ति के मार्ग में हमको जो आप तक मिला दे ऐसे संत का संग करा दो। तो जब द्रव दीन दयालु राघव तो साधु संगति पाइए। जब भगवान द्रवित होते हैं तो संतों का संग प्राप्त होता है। साधुता और साधु भेष ये दोनों अलग-अलग है। साधु भेष धारण करना सहज है लेकिन साधुता लाना ये बहुत कठिन है। मतलब जो संतों के आचरण है वो होना बहुत कठिन है। साधु भेश तो कोई भी धारण साधु महात्मा बाहरी बनने में थोड़ी देर लेकिन पूरा जीवन हो गया।
पूरा जीवन बचपन से जो भगवान के लिए हमारे अंदर में प्रेम होना चाहिए वह प्रेम नहीं जो भगवान के लिए हमारा समर्पण होना चाहिए जब हम देखते हैं वो हमें कमी नजर आती है तो अब सोचो बचपन से ले अभी तक चल रहे हैं हमें कमी ही नजर आ रही अपने में कमी नजर आ रही तो कैसे साधु का जीवन केवल भगवान ही जानते हैं और साधु भगवान को जानता है भगवान साधु को जानते हैं तो हमें हमें लगता है भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि साधु से मिला दो। नहीं तो जैसे हीरों की बोरियां नहीं होती।
नहीं बोरियों में हीरा थोड़ी होता है कि भाई बोले ट्रक में क्या लदा? बोले हीरा लदा। वो तो एक दो चार ऐसे। अरे ऐसे संतो की जमात नहीं होती। कोई कोई को एक पाव भगत जी जो भगवान में तृप्त है भगवान के चिंतन में डूबा हुआ है वो पूरे लोक को पावन कर सकता है एक महात्मा पूरे मृत्यु लोक का उद्धार कर सकता है मम भक्ति युक्त भवनम पुन मेरी भक्ति से युक्त महापुरुष पूरे लोक को पावन कर सकता है सर सात तरह सात लोका तारति ऐसी सामर्थ उसमें आ जाती है राम राम राम राम राधा राधा राधा राधा कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण तो धीरे-धीरे विषयों का त्याग और भगवान के चरणों में प्रेम बस ये सीधा साधा मार्ग है।
नौटंकी नाटक से भगवान ना मिलते मोह कपट चल छिद्र न भावा निर्मल जन मन सो मोहि पावा। बस ये बात है महाराज जी जैसे हम पूजा तो सभी की करते हैं सभी देवताओं की। मेरे प्रिय हनुमान जी हैं तो मैं उनको ज्यादा करता हूं। क्या उनको छोड़ के मैं किसी और को भी अपना सकता हूं क्या? सही बात पूछूं तो एक ही तत्व है। तत्व एक ही जो हनुमान जी वही सब तत्व हैं। जहां हमारी भावना ज्यादा जुड़े हमको वही प्रेम करना चाहिए। जैसे आप कह रहे हो हनुमान जी से तो अब हनुमान जी को जो प्रसन्न करने के लिए वो राम जी के चरित्र हैं।
राम जी का नाम है। जय हनुमान जय हनुमान बोलो हनुमान जी उतना प्रसन्न नहीं होंगे और जय सियाराम जय सियाराम बोलो हनुमान जी प्रसन्न होंगे। क्योंकि हनुमान जी की प्रसन्नता है। हम जिसको प्यार करते हैं वो खुश किस में होगा? हम ये देखते हैं तो हनुमान जी किस में खुश होंगे? राम चरित्र सुनवे को रसिया। भगवान के पावन चरित्र सुनाओ तो वो रसिया है। वो आप पर प्रसन्न हो जाएंगे। जब भगवान सियाराम जी के चरित्र सुनाओगे राम नाम का कीर्तन सियाराम नाम का कीर्तन तो हनुमान जी यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनम तत्र तत्र कृतमस्त कांजिलम वाष्प व परिपूर्ण लोचनम भगवान के पावन नाम कीर्तन को सुनकर हनुमान जी के आंसू आने लगते हैं और वहीं वही यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनम तत्र तत्र कृतमस्त कांजिलम वाष्पवारी परिपूर्ण लोचनम हनुमान जी महाराज जहांजहां सियाराम नाम का कीर्तन होता वहां सुप्रवाह करते हुए गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं।
तुम अपने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए रामचरितमानस सुनाओ, सियाराम नाम कीर्तन सुनाओ, भगवान की महिमा हनुमान जी प्रसन्न हो गए।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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