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पूज्य बिहारीदास जी महाराज और पूज्य महाराज जी का मिलन और सुंदर निकुंज लीला का वर्णन

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पूज्य महाराज जी के श्रीमुख से युगल लीला का रस — ऊपर वीडियो में सुनें।

पूरा प्रवचन

बिला प्रभु प्रभु जी ये पूज्य अपने गिरिराज जी वाले पंडित जी पंडित श्री गया प्रसाद जी के लाडले ठाकुर है। अच्छा और अभी वर्तमान में जहां राम में सत्संग भवन में कथा होती थी वहां जी तीन साल से आपने जो निर्मित किया हाल बहुत बड़ा अच्छा भक्तमान की कथा अच्छा नित 4 से 5 बजे तक अच्छा श्री ब्रज देवी करके वहां जी बहुत बड़ी रसिक संत हुई है उनहीं की कृपा पात्र है आपकी आपकी इच्छा थी दर्शनों की मैंने कहा चलो आज भी कथा होती है भक्त भक्त म निमता 365 दिन अच्छा भक्त श्री मथुरा ने जो प्रवाह चालू किया था जी 25 साल हो गए महाराज कई बजे होते चार से पांच शाम चार से पांच

नितना जी उसमें संत ही आता अच्छा खूब आनंद है जी कहां है महाराज जी राधा कृपा है ये कहां है उनको पांच मिनट आएंगे उसी के बिल्कुल बिहारी जी बिहारी जी ने और नजदीक में बुला लिया अच्छा और इतनी सुंदर व्यवस्था और कोई दूसरा कार्यक्रम होता नहीं कल भक्त की कथा होती हां आज तो सुख भक्तों के चरित्र महाराज जी महाराज जी की ही ऐसी आशीर्वाद है कि निर्विघ्नता पूर्वक चल रही है महाराज और बिहारी जी ऑटोमेटिक व्यवस्था बना रहे हैं हम लोग को कुछ नहीं करना पड़ रहा है इतनी सुंदर व्यवस्था बहुत अच्छी होगी राम जी से बहुत अच्छी हमारा मन खिन्न था कि शायद राम जी में नहीं होती महाराज जी मेरे को सरकार ने कहा था जी कि भक्त महाराज संतों का प्राण है तो उन्होंने मेरे को हमारी अंतिम समय आज्ञा दी थी जी कि हमारी इच्छा है कि भक्तों को सुख मिले संतों को सुख मिले ये कथा बंद तो आज नहीं बंद आपके चरणों की कृपा से पूज्य मैया विराज रहे अभी तो पधारे हुए हैं यहां पूज्य मैया श्री संत माता ब्रज देवी जी वही विराज रहे अभी तो और 50 वर्ष रह गए

आश्रम को वहां और पूज्य श्री डंगरे जी महाराज तो पूज्य मैया के पास कई बार पधार थे श्री श्री जी महाराज श्रीबाद महाराज श्री श्री जी महाराज भी आश्रम के पधार बड़े सबको महाराज सब उनहीं के मन में प्रेरणा हुई दो साल हो गए जी हां तीन साल तीन साल के पहले कि इनसे कहा ठाकुर जी से कहा ठाकुर जी हमारी बड़ी इच्छा है कि इस नए सत्संग हाल में भक्त माल प्रारंभ हो जाए तो जी आप जी सहयोग दीजिएगा वहां राम जी वालों ने कहा कि जी यहां रिपेयरिंग का काम करना है तो एक महीने तक

हम अवकाश चाहते मैंने कहा अच्छी खुशी की बात है हम अपने ठाकुर जी का काम कर लेंगे एक महीने तक और रात में आ गए उसी दिन उसी दिन मां जी बोले मां जी मैया जी की ऐसीसी इच्छा मैंने जोर से हंसा तो बोले क्यों हंस रहे हो? मैंने कहा मुझे नहीं पता था ऊपर भी फाइल चलती है। तो फाइल नीचे चलती है। सब संतों को सुख मिलता है। मैं तो आपको क्या बताऊं अगर दो दिन कथा बंद हो जाए तो संत कहते बुलडोजर चला दो हमारे ऊपर। हां इतना उनको रस ऐसा ही महाराज जी लगता था अब तो ऐसा है पूज्य श्री मथुरा दास जी कथा में ऐसा ही लगता था कि मतलब जिस दिन कभी ऐसा संयोग होता की यहां भागवत होने वाली है बहुत बहुत कितना सुख मिल रहा है जय हो भक्त और भगवान की जय हो और आपकी जय हो तो मैया जी की जब प्रेरणा हुई और इन्होंने इनको भेजा और उस दिन से मां जी सब श्रोताओं ने कहा महाराज जी इस स्थान से कहीं नहीं जाना हां हां बिलकुल तो वैसा सरकार बहुत जी महाराज हां श्री जी का अरे भाई हमारी किशोरी जी

की को माला लाओ महाराज जी ये श्री किशोरी जी ने माला भेजी है इनके वो प्रसादी माला है हमारी जो धारण की इन्हने लेकिन इसके साथ एक संदेश है महाराज जी पहले संदेश सुनेंगे तब पहनाऊंगा श्री जी ने कहा 5 साल हो गए महाराज जी को आए हुए ठीक है ना मेरी बात का सपोर्ट करना वजन तभी पड़ेगा वो श्री जी ने कहा है पांच साल हो गए आपने पांच साल पहले महाराज जी वहां ईंट रखी थी जिस मंदिर की आपके द्वारा एक ईंट रखी गई थी हम लोगों ने मजी पांचप लाख नाम की ईंट बनवाई थी उसमें पांच

संतों के द्वारा उसमें पहली ईंट आपने रखी थी तो अब मंदिर तैयार हो गया है। श्री जी कुंज में विराजमान हो गई। तो श्री जी ने संदेशा दिया है मेरी पूरी बात श्री जी ने संदेशा दिया है कि जैसे राम जी शबरी के पास गए थे और प्रियादासी जी ने लिखा पूछ पूछ आए शबरी स्थान कहां ये प्रियादासी जी के शब्दों में पूछ पूछ आए शबरी स्थान कहां कहां वे भागवती मेरे द्रग प्यासे दर्शन देने नहीं जा रहा मेरे प्यासे तो किशोरी जी कह रहे मेरे द प्यासे तो ये महाराज जी आपके निमंत्रण की माला है।

तो अब महाराज जी आपको अब ज्यादा समय नहीं लेंगे। हम लोग को पता है आपके स्वास्थ्य की जब अनुकूल हो तो 10 मिनट उस मंदिर में आप चल के हमारी किशोरी जी को देख लेना बस ये आपसे प्रार्थना है। आप मान स्वामी श्री फते कृष्ण जी के अच्छा जो स्वामी हमारे तो दिमाग में वो बात अभी जो आपने कहा ना कि राम जी कह रहे कि मेरे प्यार से अपने भक्त से कितना प्यार करते प्यार बहुत बहुत प्यार करते यह पंक्ति ने हिला दिया हमारे अंदर से इस पंक्ति ने अंदर से हिला दिया इसलिए ठाकुर कितना अद्भुत लगाओ अपने भक्तों से और इसीलिए लिखा तुम श्रोता या माल के जब भक्तों की कथा होती ठाकुर सबसे पहले आगे बातें आगे बिहारी जी में कथा होती रात में जब भोग आता था दो जगह कथा होती शाम को तो संतो की यहां होती और रात में बिहारी जी में होती तो एक संत बड़े भजन संत भी सुनने के लिए आते थे।

उनका जब अंतिम समय आया तो उन्होंने मेरे को बुलाया और कहां मुझे एक बात कहनी है कि जब आप भक्त कुमार की कथा वहां बिहारी जी में करते हैं जी मंदिर छोड़ के सामने आकर बैठती है तो मेरी प्रार्थना है कथा कभी बंद मत करना इतना लगाव है ठाकुर जी का भक्तों के पाव बहुत उसका कारण है महाराज जी कि भक्तों ने कभी अपने बारे में कुछ नहीं लिखा उनको समय कहा था ठाकुर से लाड लड़ाने का जैसे लोग अपने बारे में कुछ लिखते हैं श्री ठाकुर जी ने कुछ नहीं लिखा। कुछ नहीं लिखा। और जिन भक्तों की महिमा श्री ठाकुर जी ने बैकुंठ में दुर्वासा से व्यक्त की।

अपने श्री मुख से कितना लाड करते हैं भक्तों को सीमा। पर आज तो संतों की कृपा से कान पकड़ के संतों ने ऐसा लगा दिया। बहुत बहुत हम तो मतलब बहुत वर्षों से कृपा देखते चले आ रहे हैं। आपके ऊपर बहुत कृपा है। श्री जी की बहुत कृपा है। महापुरुषों की बहुत कृपा है। उनकी कृपा के बिना संभव नहीं। हां बिल्कुल। उसी समय जब पूज्य श्री मथुरा दास जी कथा का पान कराते थे। उसी समय आपको सेवा मिल गई एकादशी के दिन सुना बहुत याद जब ये होता कि आज एक महाराज जी निर्जला रहते थे निर्जला रहते थे तो फिर आपको जी मैंने सरकार से कहा जब उनका जब अंतिम समय आया तो मेरे को बुलाया और उन्होंने कहा कि हमारी बड़ी इच्छा है कि आप कथा करो मैं मेरे को इधर कोई रुचि नहीं थी ठाकुर जी में रुचि थी ठाकुर जी को लाना बस जी तो मैंने महाराज से कहा महाराज जी आप इतने वर्षों से कथा सुना रहे हैं इतने बड़े-बड़े लोग कथा बड़े-बड़े वक्त कथा सुनने के लिए आता जी जी सब परमहंस आते और वहां मैं कैसे मेरा तो कोई अनुभव ही नहीं है।

मैंने कुछ नहीं किया मैं कैसे कथा सुनाऊं जी तो आज पांच मिनट के लिए बिल्कुल ध्यानस्थ हो गए जी और कहा बिहारी जी आपको कथा नहीं सुनानी आप जाके बैठ जाना जो भक्त है अपने आप कथा कह के चला जी जी मैंने कहा फिर तुम्हारी आशी उसको कह ऐसी शुरुआत बोला उन्होंने आशीर्वाद दिया हां बहुत बहुत जन्म मंगल इसी से और उस समय महाराज जी पता नहीं क्या ऐसा था कि मतलब जब ये हो जाता कि आज राम जी में से कथा और वैसा तो मतलब व्यादाता पैदा होते थे कभी ऐसा होता है किसी समय कभी अयोध्या चला गया जी जी कोई संतों की आग में जाने की जी तो इनके पास लोग कहते हैं के ठाकुर जी से जी कहना हमारे ऊपर बुलडोजर चलवा हम कैसे रहेंगे मुझे बहुत खुशी होती है संतों को ऐसा लगाव देख के जी बहुत प्रसन्न होता जी बड़े ऐसे श्रोता कहीं मिलते नहीं जी जी वृंदावन धाम है ना यहां सब भगवत प्रेमी जन है यमुना किनारे से दौड़ दौड़ के आते संत और दो ही काम उनका कथा सुनना भजन करना तीसरा कुछ जानती नहीं हो जी जी जी बहुत कृपा कर ठाकुर जी आपने सुनकर तो बचपन से जो है

संत गोदी में ही खेल के बड़े हुए हैं पूज्य पंडित जी महाराज श्री गया प्रसाद जी महाराज ने तीन वर्ष की अवस्था में ठाकुर जी बनाए दिए। तीन वर्ष में महाराज जी ठाकुर जी की सेवा अपने रास बिहारी की सेवा में लगे हैं। तो उन्हीं की कृपा थे पूज्य राधा बाबा महाराज ने गीता वाटिका में वे जो है जब भी वहां राधाष्टमी 12 वर्ष 13 वर्ष तक श्री राधाष्टमी महोत्सव पे वहां जानो हो तो बड़े-बड़े महापुरुषों की कृपा प्राप्त है। आपको अरे दूध दूध पिवा के पालन करो। हमारा सा बात ये है क्योंकि कुछ पंडित जी महाराज की आज्ञा हमको ये थी कि जब आप वृंदावन में रहे तो प्रत्येक गुरुवार हमारे पास आना जैसे और काऊ जितने ठाकुर जी वहां आते बाबा के पास महाराज ने क ऐसी आज्ञा काऊ को नहीं मिली हमको बचपन से ही महाराज जी की आज्ञा आई तो पिताजी हमें हमारे स्वामी श्री पर कृष्ण जी महाराज पिताजी जो है वो हमें रोज हर गुरुवार को बाबा के पास ले जाते और बाबा अपने आनंद में बैठे हुए उनकी भिक्षा से पहले हमें पहुंचना हो तो क्योंकि वे भिक्षा

ज कर जाते जब हमें आधा किलो को कुल्ल दूध को पहले पिवा देते फिर जो है भिक्षा कर जाते ऐसा नियम पूज्य बाबा महाराज द्वारा उनकी कृपा थी राधा बाबा महाराज ने खूब उनके जब परिक्रमा होती गिरराज जी की जब पूज्य बाबा महाराज परिक्रमा करते तो कब कब पद गायन जैसेो कोई गु रस को पद हो तो ठाकुर जी एक प्रश्न सुनो ये पूज्य अपने ब्रज देवी जी ने पदों की रचना की इनका गला बहुत अच्छा नहीं नहीं जी कुछ पंक्तियां आपकी आज्ञा एक पद है एक भाव एसो ह पूज्य मैया ने अपने यहां अष्ट्याम लीला का आयोजन कियो तो उनको भाव हत कि लीला में एसो कछु झांकी को दर्शन होवे कि सबको पताो चले कि हमारी किशोरी जो कितनी कोमल है तो कोमलता की अतिरेक पर बात पहुंचनी चाहिए।

एसो कछु पूज्य मैया को मनोरथ हत तो हमारे पिताजी बोले कि हमें कछु पद हो तो हम कछु गायन कर सके तब तो लीला को आनंद मिले अब मैया बोले ठीक है जैसी ठाकुर जी की इच्छा तो मैया ने एक पद की रचना करी और वह पद की रचना में अपने आनंद में बैठ के और उन्होंने वो जब रचना करी तो वहां में किशोरी जो की जो कोमलता की अतिरेक अवस्था है वहां को दर्शन होए तो वहां में पूज्य मैया ने लिख है सखी संग बैठी भान दुलारी तो श्यामा जो सखिन के संग बैठी हैं और श्याम सुंदर आए वारे हैं बस या प्रतीक्षा में वे जल्दी पुष्प चयन करवे गए अब तक क्यों ना आए या में विचार में मग्न है तो जब किशोरी जो ऐसे अनमनी सी है रही है तो वही समयित्रा सखी ने ललिता जी ने श्यामा तू कही कि आप थोड़ी देर विश्राम कर ले आ ही रहे होंगे तो श्यामा जीू हमारी किशोरी जो पेट के बल लेट गई ऐसे और विचार मग्न हैवी लगी औरित्रा सखी से गईित्रा एक चित्र बना के ला तोित्रा सखी चित्र बना के लाई और वह चित्र की शोभा ऐसी है कि जा में श्याम सुंदर राधा रानी के हाहा खाए रहे पहिया

पड़ रहे तो वह चित्र को देख के श्यामाजू और विचार में डूब गई कहा तो हाहा खा में और कहा अब आए ना रहे तो वही समय ललिता जी को लग कहूं प्रेम वैचित्र की अवस्था में श्यामा जी ना पहुंच जाए तो वासो बचावे के लिए तो उन्होंने वार्तालाप प्रारंभ कर दियो और ललिता सखी ने श्यामा जी से कही किशोरी जी मेरो मनोरथ है बोले तेरो का मनोरथ है बोले आपके युगल चरण में महावल लगाऊं अलता तो श्यामा जी ने कही कोई बात ना है तेरो मनोरथ पूरा कर ले तो ललिता जी ले आई महावर और जैसे ही बाम चरण में उठा के लगाए लगी तो वही समय हमारे श्याम सुंदर पहुंच गए अब श्याम सुंदर पहुंच गए श्यामा जीू तो लेटी है ऐसे और चित्र उनके हाथ में है और आंख थोड़ी डूबी हुई है प्रेम केवा में अतिरेक में और यहां श्याम सुंदर और ललिता सखी की नैना ना नैन वेन चलवे लगे श्याम सुंदर कह रहे हैं या सेवाएं मो दे दो लता जी कह नाना है क्योंकि यही तो मोको लगे उन करवे को तो महाराज यहां श्याम सुंदर कह रहे दे दो और ललिता जी कह नाना है क्यों आए देरते मैं ना दूंगी ऐसे इशारो

कर रही हैं तो श्याम सुंदर कह रहे कोई बात नहीं है तेरी हाहा खाऊं तू सेवा दे दे तो वास्त समय ललिता जी ने चरण नीचे पधरा दियो और हाथते सारो लगी ना तुम्हारो हमारो झगड़ो है चले जाओ तो श्याम सुंदर हाहा खा रहे विनती कर रहे हैं तो ललिता जी दया आ गई कोई बात ना है चलो अब वही सो वही आ जाओ अब उन्होंने बुलाई श्याम सुंदर वहां सेना बेनी में वार्तालाप में जब श्याम सुंदर बैठ गए तो बैठ के विचार करने लगे कि कौन से चरण में महावर लगो है कौन से में ना लगो या भूल गए क्योंकि इतनी लालिमा है इतनी लालिमा है दोनों एक जैसे लग रहे हैं।

तो श्यामा जीू ने तो जब आपस में वो फिर सेनानी शुरू हो गई। कौन से में लगो कौन से में ना लगे हो बताओ ललता जी बोली मोना खबर पड़ रही अब का करूं तो श्यामा जी को ध्यान गयो ये अलता लगाया अरे गई कहां ललता तो अरे ललता तू कहां है का भयो बोले किशोरी जो और तो कछु ना एक थोड़ा सो भ्रम है गयो बोले का है गयो बोले तुम्हारे जो चरण है दोनों अरुण अरुण है इतनी लालिमा भरी हुई है यही ना पतो चलो कौन से में मैंने महावल लगा है तो श्यामा जीू बोली अच्छा इतनी सी बात है ले अभी बताऊं तो और लेटे श्यामा जी ने बाम चरण ऊपर करो फिर नीचे

पयो फिर दा ऊपर करो नीचे अब श्यामा तो बोली बाम चरण कछु बोझिल लागत अति मुकाय कहो ते प्यारी कि वाम चरण बोझिल सो लग है सोई जैसे ही उन्होंने सुनी तो ललता जी बोली आपको तो ध्यान ही ना हो आपने मुड़ के देख ना है कि कौन से में लगा रही है कौन आपको कैसे पता चली ये भारी लग रहे हो बोझिल सो लग रहे हो है तो इतनी कोमल है किशोरी जो कि जहां महावर के लगवे सो जो चरण है बोझिल सो प्रतीत हैवे लग जाए तो ये जैसे ही श्याम सुंदर ने सुनो तो श्याम जय हो जय हो कह के बोल उठे जब बोल उठे तो संभ्रम है कि श्यामाजू और खड़ी अरे श्याम सुंदर को बोले देख तो श्याम सुंदर को हृदय से लगा लियो।

तो पूज्य मैया की पंक्ति है सखी संग बैठी भान दुलारी और अंतिम पंक्ति है ब्रज देवी या छवि को लख के जयत जयत जय वचन उचारी ये पूर्व पद है महाराज जी गा के सुनाओ कंजूसी मत करो महाराज गा के सुनाओ बैठी बांधो दुलारी सखी संग करति विचार मन ही मन माही क्यों आए नहीं कुंज बिहारी बैठी भानु दुलारी काको सखी बिर मा लिए पिय जो मोरी सुधि द बिारी बोली सखीित्रा सो प्यारीित्रा लिख को चित्र बिचारीित्रा लाई चित्र बनाई की जा में प्रिय प्रियतम करे मनुहारी प्रियतम प्रिया को रूप निहारत परसत चवुक जात बलिहारी लखवा चित्र विचारतति राधे अब क्यों निठुर भए बनवारी अधमुख है के पौढ़ी पल का मुद नयन कछु करत विचारीित्रा ललिता करत बत कही जासो वाह्य सुध होवे प्यारी ललिता कहे हे स्वामिनी राधे उपजी उमंग मोह हृदय मझारी अरुण चरण मह जावक लाऊं अनुमति होए जो सखी तहारी हे ललिते तू कर मन भाई तू तो है मम सखी प्यारी प्रमोदित ललिता अनुमति पाई के लाई सेवा सोज सवारी जावक जब लगावन लागी आए तब ही छैल बिहारी ललित तह जावक लावत लख के उठ्यो लाल उ लालच

महारी सेनन सो याचन लागे सेवा ललिता सोपिय रसिक बिहारी तब उदार है ललिता पियक निकट आपने लिए बैठारी जब प्रियतम जावक लावन हित लागे के दो चरण निहारी जावक सोझ लिए पिए कर में मन मह भयो असमंजस भारी जान ना पाए कौन चरण मह ललिता दीने जावक प्यारी दो चरण अरुण सम लागे दो उन मह कोमलता भारी ललिता हो यह जान ना पाई कौन चरण निज हाथ सवारी धीमे धीमे पूछत दो तुमह कहो कछु सोच बिचारी प्यारी पूछत हे सखी ललिते का असमंजस मन भयो भारी ललिता कह सखी जान ना पावत दक्षिण चरण के बाम सवारी चरण दो तोर अरुण अरुण है दो है अति सुंदर प्यारी प्यारी कहे थम जा तू ललते तोरी उलझन देऊ निकारी तब श्यामा निज दक्षिण पग को ऊंचो कर पुन नीचे धारी पुन पग बाम उचाए नीचे कर धीमे ते कहो कीर्ति कुमारी ललते बाम चरण जावक सो तू ही सजायो सखी मम प्यारी ललिता कहे तुम आंख ना खोली नैन मूद कस जानो प्यारी बाम चरण निक बोझ लागत मृद मुस क्या कहो सुकुमारी सुनत बोल उठे गिरधारी बलिहारी बलिहारी प्यारी संभ्रम सकुच उठी सुकुमारी कंठ लगाए रसिक बिहारी ब्रज देवी वी

सखियन संग मिलके जयति जयति जय वचन उचारी सखी संग बैठी भानु दुलारी ऐसा सुंदर महाराज जी आनंद आयो अष्ट्याम में 13 घंटा ब्यावो चले मात्र 13 घंटा हमारे पिताजी को पहली बार 13 घंटा गायन अष्ट्याम लीला में इतना आश्चर्य रहो कि 13 घंटा तक पूज्य पिताजी सब महाराज जी श्रोता ऐसे बैठे बैठे रहे कि स्थान की पहले अपने आश्रम में जो व्यवस्था थी छोट से तो हमें 700 लोग जो बैठे वो एक दूसरे के ऊपर ऐसे करके बैठे पग रख के महाराज जी रात भर 13 घंटा बैठे ही रहे कोई ना पानी की सुध ना का को कछु बड़ा आनंद बो आनंद भयो वास के दूसरे साल फिर नंदन वध में श्री राधा वल्लभी अष्ट्याम जो भयो जो पूज्य महाराज जी ने दर्शन किया में अद्भुत आनंद महाराज पूज बाल दास जी महाराज तो कई बार एक बार गोप देव लीला को दर्शन कियो दो दिन तक महाराज जी भाव समाधि में पहुंच गए ना खावे ना पीवे बड़े में अपने अपने भीतर कमरा नीचे वाले में जाके बंद है ठाकुर जी आए घनश्याम जी महाराज घर पे आए हमारे पास में ही घर है बाबूजी को मनखंडी पे तो वही से पकड़ के ले गए

संध्या को 8:00 बजे चलो जल्दी अब हमें सिखाते ले जा रहे रास्ता भर कि जाके तुम्हें कि खुलवानी और यह कहो भूख लग रही है और महाराज जी यह कहवे के पकड़ के सिखाते रह ले गए रास्ता भर हटियो मत बिल्कुल वही खाड़ी तो महाराज जी जा के ही सेवा करनी पड़ रही महाराज जी के खोलो बोले कौन जब तक राधेश्याम की आवाज नहीं आवे तब तक हम हमें बोलते रहना है तो तीन चार बार हमने कि खुलवाई तो पूज्य बादास जी महाराज ने भीतर से आवाज लगाई राधे श्याम तो हमने कही महाराज जी ठाकुर जी तो पांच मिनट बाद में महाराज जी ने केवार खोली स्वस्थ होंगे तो कि खोली तो हमें सिखाए पढ़ा के ले गए जाते ही सबसे पहले कह दी भूख लग रही है भोजन करा दे जब उन्हें उन्हें लगी भूख लग रही है तो घनश्याम जी को बुलाया ठाकुर जी को इनको भूख लग रही है ना ना आपके संग ही खानों में बैठ के यहां तो कई बार उनकी भाव समाधि को दर्शन इतनी आनंद भय जीवन भर जैसे के स्वामी श्री राम सुदास जी महाराज ने छोटेपन से ही हमें गोदी में खिला के बहुत आशीर्वाद दिए और पटिया वाले महाराज जी

हथे बड़े सिद्ध संत भए मुरदा के पास 114 वर्ष की अवस्था में उन्होंने ठाकुर जी के धाम की प्राप्ति बड़ी महाराज जी खूब होली खिलाई है उन्होंने मन भर के होली खिलाई तो बस कृपा आज आपको दर्शन होगा महाराज जी आज आपको दर्शन बड़ा आनंद है बिलकुल हमारी वस्तु तो ये है कि जो मिलन है वो हमारी वस्तु है और कुछ महाराज जी आपकी आंखों का जो स्नेह है प्रेम है ना इससे बड़ा कुछ है ही नहीं हां वशिष्ठ से आप दुलार करते रहे और अपनी ऊर्जा से हम लोगों को प्रल करते रहे बाकी कुछ ऊर्जा देके आप जाते खर्चा हम कर रहे हैं इतने इतने जन्म को आप जो है आज के जमाने में महाराज जी सबसे कठिन काम है भजन कराना।

हां पाप परायण सब नर नारी कहा गोस्वामी जी। जी जी और ऐसे कठिन का महाराज करोड़ों लोगों से भजन करा रहे हैं। इससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं है। कोई उपलब्धि महाराज जी से जुड़ने से पहले हमें पता भी नहीं था भजन होता क्या है? मतलब महाराज जी ये अंतर संतों के हृदय में इतना महाराज जी ने स्थान बना लिया। कोई मिलने भले ना आए। लेकिन आज हर संत महाराज जी के चरणों में बिका हुआ है। इसके इस कारण से कि करोड़ों लोग भजन कर कौन कराता आज के दिन? ना खुद करते हैं ना कराते हैं। ये तो महाराज जी का पता नहीं श्री जी ने कैसे रच के भेजा एक शब्द कान में चला जाए तो व्यक्ति सब छोड़ के भजन ऐसे चरण में कोटि हम लोग मां जी कष्ट देने के लिए आ जाते हैं लेकिन मन नहीं मानता अरे महाराज जी ये सुख सही पूछो तो हमारी बैटरी इसी से चार्ज होती है।

है।

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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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