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दो महान भक्तों की कथा।

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पूज्य महाराज जी के श्रीमुख से भक्त-चरित्र — पूरी कथा ऊपर वीडियो में सुनें।

पूरा प्रवचन

महाराज जी भगवान पर पूरा विश्वास इसका क्या तात्पर्य है? पूरा विश्वास हो जाना। हां इसका तात्पर्य यह है कि हमें भारी दुख की समय विपत्ति ने घेर लिया। भारी दुख का समय आ गया। हमें दृढ़ विश्वास है कि मेरे भगवान मेरा परम मंगल करेंगे। मेरा परम हित करेंगे। ये दुख नहीं है। ये विपत्ति नहीं। भगवान का किया हुआ विधान। इसमें परम मंगल होगा। जैसे एक श्री राम नाम के भगत थे। श्री राम नाम था उनका। वह भगवान के परम भक्त थे और निष्काम भक्त थे। तो उनको पहले एक राज कर्मचारी के यहां नौकरी मिली।

उनकी निष्कामता देखकर मंत्री जी ने अपने पास रख लिया। और निष्कामता और प्रवीणता देखी तो बादशाह के सामने पेश कर दिया। तो बादशाह ने उनको निष्कामता के कारण ही खजानची बना दिया। अब वह इतने दयालु हृदय के थे। विश्वास की बात कहता हूं। इतने दयालु हृदय के थे कि जैसे कोई आया और कहा श्री राम जी हमारी बेटी का ब्याह है तो खजाने से चुपचाप रुपया ले दे देते। कोई बीमार है, कोई गरीब है, कोई भूखा है। ऐसे परेशान लोगों की वो सेवा करने लगे। खजानती थे और यह बात काजी को पता चली।

तो वैसे ही वह जलता था कि इतने उच्च कोटि के पद पर बैठ गया। उसने तुरंत बादशाह से शिकायत की कि श्री राम आपके खजाने को आपकी बिना अनुमति के लोगों को बांट रहा है। उनको बुलाया गया तो अब झूठ तो बोलेंगे नहीं। तो उन्होंने कहा हुजूर हम किसी को दुख ही नहीं देख सकते इसलिए तो उनका अनुमति लेनी चाहिए। बात तो सही है। अनुमति लेनी चाहिए। तो आप अपराधी हो ना? अनुमति तो नहीं ली कहा तो काजी से कहा तुम इसकी दंड विधान करो तो उनका फांसी की सजा वो तो जल ही रहा था तुरंत फांसी की सजा उनको विश्वास था कि भगवान परम मंगल भवन है अमंगल होने ही नहीं दे सकते अब बादशाह की तरफ से फांसी की सजा पास हो गई और उनको हथकड़ी बिल्लियों से जकड़ लिया गया और व के स्थान के लिए ले जाने के लिए पहले उनको घुमाया गया बाजार से होते हुए कि अपराधी इन्होंने यह अपराध किया इसलिए इनको फांसी की सजा इधर उनको ले गए इधर जो है एक झोली टांगे हुए श्याम वर्ण का 14 वर्ष का बालक आकर खड़ा हुआ और कहा सलाम हुजूर देखा तो देखते ही आश्चर्यचकित हो गए इतना सुंदर रूप बोले कौन हो तो बोले मैं श्री राम का नौकर हूं कैसे आए हो बोले हिसाब चुकाने आया हूं खजाने कहा तुम्हारा जो भी चला गया है ऐसे झोली पलटाई तो वह दिव्य हीरे कि एक हीरे की कीमत उसकी खजाना पूरा नहीं कहा ये सब रख लो और तुरंत मेरे मालिक को छोड़ दो उसके होश खराब हो गए कि नौकर में इतनी सामर्थ और वो तुम्हारा नाम क्या है?

उन्होंने कहा बिटू और इधर उनसे पूछा गया कि अब आखिरी तुम्हारी इच्छा क्या है? तो महाराष्ट्र में विट्ठल भगवान है। उनके वह सेवक थे। तो उनका एक बार केवल झांकी करवा दो। इधर हिसाब किताब उधर कह रहे एक बार झांकी करा दो। तो विट्ठल भगवान के पास गए और कहा राजी हो? इतने में घोड़े से दौड़ते हुए वो आदमी आए राजकीय और कहा श्री धाम को मुक्त कर दिया जाए। और बादशाह ने तुरंत बुलाया है। तो बादशाह ने बुलाया और कहा कि वह तुम्हारा नौकर वह हीरे डालकर पता नहीं कहां चला गया।

मैं दोबारा देखना चाहता हूं। एक बार उसका दीदार करना चाहता हूं। तुम इतने धनी थे। हमें क्या पता कि हम तुम्हारे गुलाम बन सकते हैं। ऐसे हीरे तुम्हारे पास हैं। तुम्हारा नौकर लेकर के आया। तुम पहले क्यों नहीं बताया? तो उन्होंने कहा हुजूर हम आपके ही नौकर हैं। हमारा कोई नौकर नहीं है। आप विश्वास मान बोले कैसे विश्वास मान वो कह के गया बोले क्या नाम बताया? बोले मिट्ठू अरे बोले महाराज वो हमारे विट्ठल भगवान है। वो हमारे इष्ट हैं। वो इसलिए तो वो रो पड़ा। उसने कहा एक बार दीदार करा दो।

बोले हमारी सामर्थ नहीं। वो स्वतंत्र है। अगर वह चाहे तो दर्शन दे सकते मैं तो विश्वास कि जो मैं धर्म का कार्य कर रहा हूं भले फांसी मिली है लेकिन भगवान मेरी रक्षा करेगा तो भगवान ने रक्षा की कि नहीं हमारी अंतिम स्थिति तक विश्वास नहीं टूटना चाहिए। एक सांसारिक गाने में भी है ऐसी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास मन का विश्वास हे भगवान मुझे ऐसी सामर्थ्य प्रदान कीजिए कि किसी भी परिस्थिति में मेरा विश्वास ना टूटे मेरा विश्वास पूरा जैसे एक जमींदारी पहले चलती थी तो बड़ा अत्याचार करते थे गरीबों के ऊपर जमींदार लोग तो एक गरीब केवट था तो उसने कुछ रुपए अपनी बेटी के ब्याह के ले लिए थे।

तो साल दो साल में मेहनत करके पैसा एकत्रित किया और जमींदार को दे दिया जाके अपनी खेती से कमा के जमींदार ने वो रुपया लिया और फाइल से नाम नहीं काटा। कर्जा का जो हिसाब था वो काटा नहीं। दो चार महीने बाद उसके आदमी गए और कहा जमींदार साहब ने बुलाया है। तो जमींदार ने कहा कर्जा दीजिए। तो कहा साहब हम तो दे गए थे आपको। अरे बोले व्यर्थ की बात करते हो हमारी कॉपी में वैसे लिखा अभी कटा नहीं बोले आप अब ना काटो तो आपकी बात वैसे तो हम दे गए थे अब वो जमींदार अपने हठ में अपने हठ में तो जमींदार ने रिपोर्ट कर दी और वो मुकदमा पहुंचा जमींदार ने रजिस्टर पेश किया पूरा दिन खत्म अब वह गरीब आदमी उसने कहा साहब हमने दे दिया है तो बोले गवाही तो उनका रघुनाथ जी रघुनाथ जी अर्थात भगवान राम तो उनका रघुनाथ जी तो बोले अगली पेशी में रघुनाथ को लिवा के लाना उसने कहा हां ठीक है एकांत में गया और रोया कि हम गरीब आदमी हैं और हमारे परिवार का पोषण उसी खेती से होता है प्रभु यदि आपने गवाही ना दी तो हमारा तो सब बर्बाद हो जाएगा हमारी बात झूठी हो जाएगी आप कहां नहीं हो जिस समय वह पैसा दिया था उस समय आप थे क्योंकि आप सर्वत्र हैं तो आप उस जगह भी थे इसलिए आपको गवाही देनी पड़ेगी।

पहुंचा उनका अपनी गवाही पेश करो। तो उन्होंने कहा बुलाओ उसका नाम रघुनाथ है। रघुनाथ हाजिर हो। लाठी टेकते हुए आए और जमींदार से कहा 100 का नोट वो 200 का नोट वो इतने सोने के सिक्का उस जगह तुम्हारे रखे वो इसी के तो दिए हुए हैं हमने देखा उसके होश उड़ गए उसके होश उड़ गए कि ये तो बिल्कुल और अब जमींदार की भगवान के सामने हिम्मत नहीं जब आंख में आंख डाल के बात की ना तो उसकी हिम्मत नहीं बोले हां हां हां हां तो 400 बीसी में जमीदार दार के ऊपर दंड जुर्माला लगा और वो छोड़ विश्वास कि भगवान है मेरी रक्षा करेंगे भगवान है मेरा सहयोग करेंगे दृढ़ विश्वास किसी भी स्थिति में विश्वास ना टलने पावे ऐसी शक्ति हमें दे न दाता मन का विश्वास कमजोर होना हर स्थिति में भगवत विश्वास बना है।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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