जब अग्नि भी न जला सकी भक्त को – होलिका दहन की कथा | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
पूज्य महाराज जी के श्रीमुख से भक्त-चरित्र — पूरी कथा ऊपर वीडियो में सुनें।
पूरा प्रवचन
हिरण्यकश्यप इतना परेशान हो गया कि उसको लगा कि हमें लगता है कि मेरी मृत्यु इसी से होगी। बहुत चिंतित बैठे थे। इतने में उनकी बहन जी आई। बहन जी ने अग्नि को तपस्या के द्वारा प्रसन्न कर लिया था तो उनको एक शीतल पट मिला था जिन्हें होलिका कहते हैं। उन्होंने कहा भैया तुम चिंतित मत हो। अब की ये मारा जाएगा। तो उन्होंने कहा कैसे मारा जाएगा? बोले हमको तो प्राप्त है अग्नि का शीतल पट। तुम लकड़ियों का ढेर लगाओ। बीच में जगह बनवाओ। हम जबरदस्ती लेकर इस बालक को बैठ जाएंगे।
आग लगवा दो। मुझे अग्नि का वरदान रूपी शीतलपट मिला। मैं जलूंगी नहीं। यह लड़का भस्म हो जाए। हिरण्यकश्यप को थोड़ी तसल्ली मिली पर थोड़ा संशय था कि इतनी जगह नहीं मरा। तो पता नहीं आग जलाए कि ना जलाए इसको। अब जैसा विधान बनाया गया था। बहुत टाल कटाल लकड़ी एकत्रित कर दी गई। नीचे अंदर जगह बना दी गई। होलिका लेकर के बैठ गई। प्रहल्हाद जी को पकड़ के सामने प्रह्लाद जी ने कहा बुआ जी आप निश्चिंत रहो। पकड़ने की जरूरत नहीं। हम आपके सामने ही बैठे हैं और श्री हरि श्री हरि श्री हरि अब इशारा कर दिया लगाओ आग चारों तरफ से आग लगा दी जो ही आग लगी तो हरी पेरी तो ऐसी हवा चली शीतल वो तो पकड़े बैठी थी प्रह्लाद जी को तो शीतल पट पूरा प्रह्लाद जी के ऊपर और बुआ जी फुआ हो गई पूरी आग बुआ जी को अब वो चीख रही है तो दैत्य लोग आनंद मना रहे हैं कि अब मरा प्रहलाद क्योंकि स्त्री की आवाज और बालक की आवाज लगभग लगभग पूरी रात दैत्य लोग बड़ी मस्ती में कि हमारे स्वामी का संकट टला आज भी सुबह भगत लोग ढोलक मनीरा लेकर जो प्रह्लाद के पक्ष के हैं वो जाते हैं वहां होली का तिलक करते हैं और प्रह्लाद जी के साथ नाम कीर्तन वहां देखा जाके कि तो वहां बुआ तो कोई थी नहीं वो तो सब राख हो चुकी थी और प्रह्लाद जी बैठे श्री हरि श्री हरि श्री
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मूल वीडियो: Shri Hit Radha Kripa (YouTube)
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